Shattila Ekadashi 2017

Shattila Ekadashi | Sattila | Tilda Ekadashi

What is Shattila/ Sattila/ Tilda Ekadashi | Meaning

According to the Hindu mythology Shattila Ekadashi is celebrated is to please Lord Vishnu. Shattila Ekadashi is celebrated all across the India. Shattila Ekadashi is also known as Sattila Ekadashi or Tilda Ekadashi.

Shattila Ekadashi Date 2017

23rd January 2017 (Monday)

Shattila Ekadashi Punya Kaal Muhurta ( मुहूर्त )2017

From Morning 07:17 to 09:30 AM

Shattila Ekadashi Pujan Samagri

अगरबत्ती
Incense stick
पान
Betel Leave
नारियल
Coconut
सिक्के
Coins
धूप
Dhoop Batti
फूल , चावल , रोली
Flowers , rice , Roli
गंगा जल ( पवित्र जल )
Ganga water ( pure water )
माला
Garland
कपूर
Kapoor
इत्र
Perfume
भगवान विष्णु की फोटो
Photo or image of God Vishnu
मिठाई
Sweet
बाती, तेल / घी और माचिस
Wick , oil / ghee and Matchbox

How to do the Shattila Ekadashi Puja | Pooja Vidhi

·         To start Shattila Ekadashi Puja first break a coconut at worship place.

·         Sprinkle some Ganga jal on the palce and on pujan samgri .

·         Lit a diya with two wicks or two lamps.

·         First worship Lord Ganesha

·         Next worship to Lord Vishnu

·         Put roly tilak on Lord Vishnu photo followed by akshat, flowers, garland, perfume and dakshina(coins).

·         Place sweets infornt of Lord Vishnu

·         Chant Vishnu Mantra,  and Shattila Ekadashi  Vrat Katha

·         Now do Vishnu Aarti

·         Distribute the prasad.

षटतिला एकादशी व्रत कथा | Shattila Ekadashi Vrat katha

प्राचीनकाल में मृत्युलोक में एक ब्राह्मणी रहती थी। वह सदैव व्रत किया करती थी। एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही। इससे उसका शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया। यद्यपि वह अत्यंत बुद्धिमान थी तथापि उसने कभी देवताअओं या ब्राह्मणों के निमित्त अन्न या धन का दान नहीं किया था। इससे मैंने सोचा कि ब्राह्मणी ने व्रत आदि से अपना शरीर शुद्ध कर लिया है, अब इसे विष्णुलोक तो मिल ही जाएगा परंतु इसने कभी अन्न का दान नहीं किया, इससे इसकी तृप्ति होना कठिन है।

भगवान ने आगे कहा- ऐसा सोचकर मैं भिखारी के वेश में मृत्युलोक में उस ब्राह्मणी के पास गया और उससे भिक्षा माँगी। वह ब्राह्मणी बोली- महाराज किसलिए आए हो? मैंने कहा- मुझे भिक्षा चाहिए। इस पर उसने एक मिट्टी का ढेला मेरे भिक्षापात्र में डाल दिया। मैं उसे लेकर स्वर्ग में लौट आया। कुछ समय बाद ब्राह्मणी भी शरीर त्याग कर स्वर्ग में आ गई। उस ब्राह्मणी को मिट्टी का दान करने से स्वर्ग में सुंदर महल मिला, परंतु उसने अपने घर को अन्नादि सब सामग्रियों से शून्य पाया।

घबराकर वह मेरे पास आई और कहने लगी कि भगवन् मैंने अनेक व्रत आदि से आपकी पूजा की परंतु फिर भी मेरा घर अन्नादि सब वस्तुओं से शून्य है। इसका क्या कारण है? इस पर मैंने कहा- पहले तुम अपने घर जाओ। देवस्त्रियाँ आएँगी तुम्हें देखने के लिए। पहले उनसे षटतिला एकादशी का पुण्य और विधि सुन लो, तब द्वार खोलना। मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई। जब देवस्त्रियाँ आईं और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली- आप मुझे देखने आई हैं तो षटतिला एकादशी का माहात्म्य मुझसे कहो।

उनमें से एक देवस्त्री कहने लगी कि मैं कहती हूँ। जब ब्राह्मणी ने षटतिला एकादशी का माहात्म्य सुना तब द्वार खोल दिया। देवांगनाओं ने उसको देखा कि न तो वह गांधर्वी है और न आसुरी है वरन पहले जैसी मानुषी है। उस ब्राह्मणी ने उनके कथनानुसार षटतिला एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका घर अन्नादि समस्त सामग्रियों से युक्त हो गया।

अत: मनुष्यों को मूर्खता त्यागकर षटतिला एकादशी का व्रत और लोभ न करके तिलादि का दान करना चाहिए। इससे दुर्भाग्य, दरिद्रता तथा अनेक प्रकार के कष्ट दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Voidcan.org wish you a very happy and prosperous Shattila Ekadashi 2017.

 

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