Vindheshwari Chalisa in Hindi Lyrics PDF | विन्ध्येश्वरी चालीसा

विन्ध्येश्वरी चालीसा | माँ विन्ध्यवासिनी की कृपा पाने का शक्तिशाली पाठ

विन्ध्येश्वरी चालीसा क्या है?

विन्ध्येश्वरी चालीसा माता माँ विन्ध्यवासिनी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तुति है। माँ विन्ध्यवासिनी को देवी दुर्गा का स्वरूप माना जाता है और उनका प्रसिद्ध धाम विन्ध्याचल धाम में स्थित है।

भक्तजन माँ की कृपा, सुरक्षा, मानसिक शांति और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ करते हैं।

Vindheshwari Chalisa in Hindi Lyrics

नमो नमो विध्येश्वरी ,नमो जगदम्बा

सन्तजनों के काज में करती नहीं विलम्ब

 जय जय जय विन्ध्याचल रानी। आदि शक्ति जगबिदित भवानी॥

सिंह वाहिनी जय जगमाता। जय जय जय त्रिभुवन सुखदाता॥

कष्ट निवारिनि जय जग देवी। जय जय संत असुर सुरसेवी॥

महिमा अमित अपार तुम्हारी। सेष सहस मुख बरनत हारी॥

दीनन के दु:हरत भवानी। नहिं देख्यो तुम सम कोउ दानी॥

सब कर मनसा पुरवत माता। महिमा अमित जगत विख्याता॥

जो जन ध्यान तुम्हारो लावे। सो तुरतहिं वांछित फल पावे॥

तू ही वैस्नवी तू ही रुद्रानी। तू ही शारदा अरु ब्रह्मानी॥

रमा राधिका स्यामा काली। तू ही मात संतन प्रतिपाली॥

उमा माधवी चंडी ज्वाला। बेगि मोहि पर होहु दयाला॥

तुम ही हिंगलाज महरानी। तुम ही शीतला अरु बिज्ञानी॥

तुम्हीं लक्ष्मी जग सुख दाता। दुर्गा दुर्ग बिनासिनि माता॥

तुम ही जाह्नवी अरु उन्नानी। हेमावती अंबे निरबानी॥

अष्टभुजी बाराहिनि देवा। करत विष्णु शिव जाकर सेवा॥

चौसट्टी देवी कल्याणी। गौरि मंगला सब गुन खानी॥

पाटन मुंबा दंत कुमारी। भद्रकाली सुन विनय हमारी॥

बज्रधारिनी सोक नासिनी। आयु रच्छिनी विन्ध्यवासिनी॥

जया और विजया बैताली। मातु संकटी अरु बिकराली॥

नाम अनंत तुम्हार भवानी। बरनै किमि मानुष अज्ञानी॥

जापर कृपा मातु तव होई। तो वह करै चहै मन जोई॥

कृपा करहु मोपर महारानी। सिध करिये अब यह मम बानी॥

जो नर धरै मातु कर ध्याना। ताकर सदा होय कल्याणा॥

बिपत्ति ताहि सपनेहु नहि आवै। जो देवी का जाप करावै॥

जो नर कहे रिन होय अपारा। सो नर पाठ करे सतबारा॥

नि:चय रिनमोचन होई जाई। जो नर पाठ करे मन लाई॥

अस्तुति जो नर पढै पढावै। या जग में सो बहु सुख पावै॥

जाको ब्याधि सतावै भाई। जाप करत सब दूर पराई॥

जो नर अति बंदी महँ होई। बार हजार पाठ कर सोई॥

नि:चय बंदी ते छुटि जाई। सत्य वचन मम मानहु भाई॥

जापर जो कुछ संकट होई। नि:चय देबिहि सुमिरै सोई॥

जा कहँ पुत्र होय नहि भाई। सो नर या विधि करै उपाई॥

पाँच बरस सो पाठ करावै। नौरातर महँ बिप्र जिमावै॥

नि:चय होहि प्रसन्न भवानी। पुत्र देहि ताकहँ गुन खानी॥

ध्वजा नारियल आन चढावै। विधि समेत पूजन करवावै॥

नित प्रति पाठ करै मन लाई। प्रेम सहित नहि आन उपाई॥

यह श्री विन्ध्याचल चालीसा। रंक पढत होवै अवनीसा॥

यह जनि अचरज मानहु भाई। कृपा दृष्टि जापर ह्वै जाई॥

जय जय जय जग मातु भवानी। कृपा करहु मोहि पर जन जानी॥

माँ विन्ध्यवासिनी का महत्व

हिंदू धर्म में माँ विन्ध्यवासिनी को शक्ति, साहस और रक्षा की देवी माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता का स्मरण करते हैं, उनकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

विशेष रूप से नवरात्रि, शुक्रवार और अष्टमी के दिन विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।

विन्ध्येश्वरी चालीसा पाठ के लाभ

1. मानसिक शांति प्राप्त होती है

नियमित पाठ मन को स्थिर और सकारात्मक बनाता है।

2. भय और नकारात्मकता दूर होती है

भक्तों का विश्वास है कि माता की कृपा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

3. आत्मविश्वास बढ़ता है

माँ शक्ति का स्वरूप हैं, इसलिए उनका पाठ साहस और आत्मबल प्रदान करता है।

4. परिवार में सुख-समृद्धि आती है

विन्ध्येश्वरी चालीसा को घर में सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है।

5. नवरात्रि में विशेष फल मिलता है

नवरात्रि के दौरान इस चालीसा का पाठ अत्यधिक पुण्यदायी माना जाता है।

विन्ध्येश्वरी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

सबसे शुभ समय:

सुबह स्नान के बाद
शाम की आरती के समय
शुक्रवार
नवरात्रि के 9 दिन
अष्टमी और नवमी

विन्ध्येश्वरी चालीसा क्यों लोकप्रिय है?

माँ विन्ध्यवासिनी का आध्यात्मिक महत्व

विन्ध्याचल धाम भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। यहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

माँ विन्ध्यवासिनी को आदिशक्ति का रूप माना जाता है और भक्त उनकी आराधना से जीवन में शक्ति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की कामना करते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQ)
1. विन्ध्येश्वरी चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है?

विन्ध्येश्वरी चालीसा का पाठ मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

2. विन्ध्येश्वरी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

सुबह या शाम के समय, विशेषकर शुक्रवार और नवरात्रि में पाठ करना शुभ माना जाता है।

3. क्या नवरात्रि में विन्ध्येश्वरी चालीसा पढ़ना चाहिए?

हाँ, नवरात्रि में इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।

4. माँ विन्ध्यवासिनी का मंदिर कहाँ स्थित है?

माँ विन्ध्यवासिनी का प्रसिद्ध मंदिर विन्ध्याचल धाम में स्थित है।

5. क्या विन्ध्येश्वरी चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, भक्त प्रतिदिन श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।

6. क्या महिलाएँ विन्ध्येश्वरी चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों इस चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

7. विन्ध्येश्वरी चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

यह पूरी तरह श्रद्धा और समय पर निर्भर करता है। कई भक्त 1, 3 या 11 बार पाठ करते हैं।

8. क्या विन्ध्येश्वरी चालीसा से भय दूर होता है?

भक्तों के अनुसार माता की कृपा से भय और नकारात्मकता कम होती है।

9. क्या विन्ध्येश्वरी चालीसा PDF उपलब्ध है?

हाँ, कई धार्मिक वेबसाइटों पर PDF उपलब्ध होती है।

10. क्या शुक्रवार को विन्ध्येश्वरी चालीसा पढ़ना शुभ होता है?

हाँ, शुक्रवार देवी पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

11. विन्ध्येश्वरी चालीसा कितने मिनट में पढ़ी जा सकती है?

सामान्यतः 8 से 12 मिनट का समय लगता है।

12. क्या विन्ध्येश्वरी चालीसा मनोकामना पूर्ण करती है?

भक्तों की मान्यता है कि सच्चे मन से पाठ करने पर माता कृपा करती हैं।

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Aarti Collection

Ganpati Aarti
Ganga Aarti
Gayatri Aarti
Govardhan Aarti
Hanuman Aarti
Durga Aarti
Kakad Aarti
Kali Maa Aarti
Krishna Aarti
lakshmi Aarti
Maharaja Agrasen Ji Aarti
Sai Baba Aarti
Santoshi Aarti
Saraswati Aarti
Satyanarayan Aarti
Shani Dev Aarti
Shiv Aarti
Surya Aarti
Tulsi Aarti
Vishnu Aarti
Vishwakarma Aarti

Chalisa Collection

Bhairav Chalisa
Durga Chalisa
Ganesh Chalisa
Gayatri Chalisa
Hanuman Chalisa
Kaila Devi Chalisa
Kali Chalisa
Laxmi Chalisa
Navagraha Chalisa
Sai Chalisa
Saraswati Chalisa
Shani Chalisa
Shiva Chalisa
Surya Chalisa

Mantras Collection

Brihaspati Mantra
Budh Mantra
Chamunda Mantra
Chandra Mantra
Chandraghanta Mantra
Dattatreya Mantra
Devi mantra
Dhanvantri Mantra
Ganesh Mantra
Gayatri Mantra
Gorakhnath Mantra
Govardhan Puja Mantra
Hare Krishna Mantra
Kalbhairav Mantra
Kalratri Mantra
Kamakhya Mantra
Kamdev Mantra
Kanakdhara Mantra
Katyayani Mantra
Ketu Mantra
Krishna Mantra
Kuber Mantra
Laxmi Mantra
MahaMrityunjaya Mantra
Sudarshana Mantra
Surya Mantra
Surya Namaskar Mantra
Navagraha Mantra
Rahu Mantra
Ram Mantra
Sai Baba Mantra
Santhana Gopala Mantra
Saraswati Mantra
Shabar Mantra
Shailputri Mantra
Shani Mantra
Tulsi Mantra
Vishnu Mantra

Stotra Collection

Aditya Hridaya Stotra
Argala Stotra
Ashtalakshmi Stotra
Bajrang Baan
Bhaktamar Stotra
Dasavatara Strotra
Durga Stotra
Durga Stuti
Dwadasha Stotra
Gajendra Moksha Stotra
Ganpati Atharvashirsha
Ganpati Stotra
Hanuman Stotra
Kalabhairava Stotra
Kamakshi Stotram
Mahalakshmi Ashtakam
Mahishasura Mardini Strotra
Maruti Stotra
Navagraha Stotra
Nirvana Shatakam Stotra
Rahu Stotram
Ramraksha Stotra
Sankat Mochan Hanuman Ashtak
Shiv Tandav Stotra
Shiva Rudrashtakam Stotra
Siddha Kunjika Stotra
Sundar Kand

Kavach Sangrah

Durga Kavach
Hanuman Kavach
Kali Kavach
Ketu Kavach
Narayan Kavach
Rahu Kavach
Shani Kavach
Surya Kavach




Durga Aarti In English Lyrics PDF

Durga Aarti In English

Durga Aarti English Lyrics

Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri,

Tumko Nishdin Dhyavat Hari Bhrama Shivji.

Mang Sindoor Virajat Tiko Mrag Mad Ko,

Ujjwal Se Dau Naina Chandra Badan Niko.

Kanak Saman Klewar Raktamber Raje,

Rakt Pushp Gal Mala Kanthan Par Saje.

Kehri Vahan Raje Khadhk Khapper Dhari,

Sur Nar Muni Jan Sewat Tinke Dhukh Hari.

Kanan Kundal Shobhit Nasa Gaj Moti,

Katik Chander Divaker Sam Rajat Jyoti.

Shumbh Nishumbh Bidhare Mahishasur Ghati,

Dhoomr Vilochan Naina Nishdin Madmati.

Chund Mund Sanhare Shonit Beej Hare,

Madhu Keytabh Dou Mare Sur Bhay Heen Kare.

Brahmani Rudrani Tum Kamla Rani,

Aagam Nigam Bakhani Tum Shiv Patrani.

Chousatha Yogini Mangal Gavat Nrittya Karat Bhaeron,

Bajat Tal Mradanga Aru Bajat Damroo.

Tum Hi Jag Ki Mata Tum Hi Ho Bharta,

Bhakatan Ki Dukh Harta Sukh Sampati Karta.

Bhuja Char Ati Shobhit Khadak Khaper Dhari,

Man Vanchhit phal Pawat Sewat Nar Nari.

Kanchan Dhar Virajat Agar Kapoor Bati,

Shree Mal Ketu Main Rajat Koti Ratan Jyoti.

Ma Ambe Ji Ki Aarti Jo Koi Nar Gave,

Kahat Shivanand Swami Shukh Sampati Pave.

Daily recitate Durga Aarti In English to please Goddess Durga.

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कामाख्या कवच | Kamakhya Kavach in Hindi Lyrics PDF

 Kamakhya Kavach in Hindi Lyrics

कामाख्या कवच

महादेव उवाचशृणुष्व परमं गुहयं महाभयनिवर्तकम्।कामाख्याया: सुरश्रेष्ठ कवचं सर्व मंगलम्।।यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी डाकिनीगणा:।राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिका:।।क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदा:।दूरादपि पलायन्ते कवचस्य प्रसादत:।।निर्भयो जायते मत्र्यस्तेजस्वी भैरवोयम:।समासक्तमनाश्चापि जपहोमादिकर्मसु।भवेच्च मन्त्रतन्त्राणां निर्वघ्नेन सुसिद्घये।

महादेव जी बोले-सुरश्रेष्ठ! भगवती कामाख्या का परम गोपनीय महाभय को दूर करने वाला तथा सर्वमंगलदायक वह कवच सुनिये, जिसकी कृपा तथा स्मरण मात्र से सभी योगिनी, डाकिनीगण, विघ्नकारी राक्षसियां तथा बाधा उत्पन्न करने वाले अन्य उपद्रव, भूख, प्यास, निद्रा तथा उत्पन्न विघ्नदायक दूर से ही पलायन कर जाते हैं। इस कवच के प्रभाव से मनुष्य भय रहित, तेजस्वी तथा भैरवतुल्य हो जाता है। जप, होम आदि कर्मों में समासक्त मन वाले भक्त की मंत्र-तंत्रों में सिद्घि निर्विघ्न हो जाती है।।

।। मां कामाख्या देवी कवच।।

ओं प्राच्यां रक्षतु मे तारा कामरूपनिवासिनी।आग्नेय्यां षोडशी पातु याम्यां धूमावती स्वयम्।।नैर्ऋत्यां भैरवी पातु वारुण्यां भुवनेश्वरी।वायव्यां सततं पातु छिन्नमस्ता महेश्वरी।। 
कौबेर्यां पातु मे देवी श्रीविद्या बगलामुखी।ऐशान्यां पातु मे नित्यं महात्रिपुरसुन्दरी।। 
ऊध्र्वरक्षतु मे विद्या मातंगी पीठवासिनी।सर्वत: पातु मे नित्यं कामाख्या कलिकास्वयम्।। 
ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्वविद्यामयी स्वयम्।शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा भालं श्री भवगेहिनी।। 
त्रिपुरा भ्रूयुगे पातु शर्वाणी पातु नासिकाम।चक्षुषी चण्डिका पातु श्रोत्रे नीलसरस्वती।। 
मुखं सौम्यमुखी पातु ग्रीवां रक्षतु पार्वती।जिव्हां रक्षतु मे देवी जिव्हाललनभीषणा।। 
वाग्देवी वदनं पातु वक्ष: पातु महेश्वरी।बाहू महाभुजा पातु कराङ्गुली: सुरेश्वरी।। 
पृष्ठत: पातु भीमास्या कट्यां देवी दिगम्बरी।उदरं पातु मे नित्यं महाविद्या महोदरी।।
उग्रतारा महादेवी जङ्घोरू परिरक्षतु।गुदं मुष्कं च मेदं च नाभिं च सुरसुंदरी।। 
पादाङ्गुली: सदा पातु भवानी त्रिदशेश्वरी।रक्तमासास्थिमज्जादीनपातु देवी शवासना।। 
।महाभयेषु घोरेषु महाभयनिवारिणी।पातु देवी महामाया कामाख्यापीठवासिनी।। 
भस्माचलगता दिव्यसिंहासनकृताश्रया।पातु श्री कालिकादेवी सर्वोत्पातेषु सर्वदा।। 
रक्षाहीनं तु यत्स्थानं कवचेनापि वर्जितम्।तत्सर्वं सर्वदा पातु सर्वरक्षण कारिणी।। 
इदं तु परमं गुह्यं कवचं मुनिसत्तम।कामाख्या भयोक्तं ते सर्वरक्षाकरं परम्।। 
अनेन कृत्वा रक्षां तु निर्भय: साधको भवेत।न तं स्पृशेदभयं घोरं मन्त्रसिद्घि विरोधकम्।।
जायते च मन: सिद्घिर्निर्विघ्नेन महामते।इदं यो धारयेत्कण्ठे बाहौ वा कवचं महत्।। 
अव्याहताज्ञ: स भवेत्सर्वविद्याविशारद:।सर्वत्र लभते सौख्यं मंगलं तु दिनेदिने।। 
य: पठेत्प्रयतो भूत्वा कवचं चेदमद्भुतम्।स देव्या: पदवीं याति सत्यं सत्यं न संशय:।। 

मां कामाख्या देवी कवच हिन्दी में अर्थ

कामरूप में निवास करने वाली भगवती तारा पूर्व दिशा में, पोडशी देवी अग्निकोण में तथा स्वयं धूमावती दक्षिण दिशा में रक्षा करें।। नैऋत्यकोण में भैरवी, पश्चिम दिशा में भुवनेश्वरी और वायव्यकोण में भगवती महेश्वरी छिन्नमस्ता निरंतर मेरी रक्षा करें।। उत्तरदिशा में श्रीविद्यादेवी बगलामुखी तथा ईशानकोण में महात्रिपुर सुंदरी सदा मेरी रक्षा करें।। भगवती कामाख्या के शक्तिपीठ में निवास करने वाली मातंगी विद्या ऊध्र्वभाग में और भगवती कालिका कामाख्या स्वयं सर्वत्र मेरी नित्य रक्षा करें।।  ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्व विद्यामयी स्वयं दुर्गा सिर की रक्षा करें और भगवती श्री भवगेहिनी मेरे ललाट की रक्षा करें।।  त्रिपुरा दोनों भौंहों की, शर्वाणी नासिका की, देवी चंडिका आँखों की तथा नीलसरस्वती दोनों कानों की रक्षा करें।।  भगवती सौम्यमुखी मुख की, देवी पार्वती ग्रीवा की और जिव्हाललन भीषणा देवी मेरी जिव्हा की रक्षा करें।।  वाग्देवी वदन की, भगवती महेश्वरी वक्ष: स्थल की, महाभुजा दोनों बाहु की तथा सुरेश्वरी हाथ की, अंगुलियों की रक्षा करें।।  भीमास्या पृष्ठ भाग की, भगवती दिगम्बरी कटि प्रदेश की और महाविद्या महोदरी सर्वदा मेरे उदर की रक्षा करें।। महादेवी उग्रतारा जंघा और ऊरुओं की एवं सुरसुन्दरी गुदा, अण्डकोश, लिंग तथा नाभि की रक्षा करें।।  भवानी त्रिदशेश्वरी सदा पैर की, अंगुलियों की रक्षा करें और देवी शवासना रक्त, मांस, अस्थि, मज्जा आदि की रक्षा करें।।  भगवती कामाख्या शक्तिपीठ में निवास करने वाली, महाभय का निवारण करने वाली देवी महामाया भयंकर महाभय से रक्षा करें। भस्माचल पर स्थित दिव्य सिंहासन विराजमान रहने वाली श्री कालिका देवी सदा सभी प्रकार के विघ्नों से रक्षा करें।।  जो स्थान कवच में नहीं कहा गया है, अतएव रक्षा से रहित है उन सबकी रक्षा सर्वदा भगवती सर्वरक्षकारिणी करे।।  मुनिश्रेष्ठ! मेरे द्वारा आप से महामाया सभी प्रकार की रक्षा करने वाला भगवती कामाख्या का जो यह उत्तम कवच है वह अत्यन्त गोपनीय एवं श्रेष्ठ है।।  इस कवच से रहित होकर साधक निर्भय हो जाता है। मन्त्र सिद्घि का विरोध करने वाले भयंकर भय उसका कभी स्पर्श तक नहीं करते हैं।।  महामते! जो व्यक्ति इस महान कवच को कंठ में अथवा बाहु में धारण करता है उसे निर्विघ्न मनोवांछित फल मिलता है।।  वह अमोघ आज्ञावाला होकर सभी विद्याओं में प्रवीण हो जाता है तथा सभी जगह दिनोंदिन मंगल और सुख प्राप्त करता है। जो जितेन्द्रिय व्यक्ति इस अद्भुत कवच का पाठ करता है वह भगवती के दिव्य धाम को जाता है। यह सत्य है, इसमें संशय नहीं है।।

Kamakhya Mantra | कामाख्या मंत्र
Kamakhya Aarti | कामाख्या आरती
Kamakhya Chalisa | कामाख्या चालीसा
कामाख्या कवच | Kamakhya Kavach
कामाख्या स्तोत्र | Kamakhya Stotra

Kamakhya Kavach in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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कामाख्या कवच हिंदी  PDF डाउनलोड

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Hanuman Chalisa In English PDF

What is Hanuman Chalisa?

Hanuman Chalisa is one of the most popular Hindu devotional hymns dedicated to Lord Hanuman, the symbol of strength, devotion, courage, and selfless service. The word “Chalisa” means “forty,” and the prayer consists of forty verses praising the greatness and divine qualities of Hanuman Ji.

Written by the saint-poet Goswami Tulsidas, Hanuman Chalisa is recited by millions of devotees worldwide for spiritual strength, peace, protection, confidence, and devotion toward Lord Rama.

Devotees commonly chant Hanuman Chalisa on Tuesdays, Saturdays, during Hanuman Jayanti, or as part of their daily spiritual practice. Many believe the recitation helps remove fear, negativity, stress, and obstacles while strengthening inner courage and faith.

Quick Information Table

Information Details
Name Hanuman Chalisa
Associated Deity Lord Hanuman
Language Awadhi / Hindi
Best Day Tuesday & Saturday
Best Time Morning or evening
Main Purpose Devotion, courage, protection, positivity
Spiritual Significance Worship of strength, devotion, and service
Suitable For All devotees and beginners
Reading Duration 7–10 minutes
Benefits Peace, confidence, focus, spiritual strength

Hanuman Chalisa In English Lyrics

Doha
Shri Guru Charan Sarooja-raj Nija manu Mukura Sudhaari
Baranau Rahubhara Bimala Yasha Jo Dayaka Phala Chari

Budhee-Heen Thanu Jannikay Sumirow Pavana Kumara
Bala-Budhee Vidya Dehoo Mohee Harahu Kalesha Vikaara

Chopai
Jai Hanuman gyan gun sagar||
Jai Kapis tihun lok ujagar||

Ram doot atulit bal dhama|
Anjaani-putra Pavan sut nama||

Mahabir Bikram Bajrangi|
Kumati nivar sumati Ke sangi||

Kanchan varan viraj subesa|
Kanan Kundal Kunchit Kesha||

Hath Vajra Aur Dhuvaje Viraje|
Kaandhe moonj janehu sajai||

Sankar suvan kesri Nandan|
Tej prataap maha jag vandan||

Vidyavaan guni ati chatur|
Ram kaj karibe ko aatur||

Prabu charitra sunibe-ko rasiya|
Ram Lakhan Sita man Basiya||

Sukshma roop dhari Siyahi dikhava|
Vikat roop dhari lank jarava||

Bhima roop dhari asur sanghare|
Ramachandra ke kaj sanvare||

Laye Sanjivan Lakhan Jiyaye|
Shri Raghuvir Harashi ur laye||

Raghupati Kinhi bahut badai|
Tum mam priye Bharat-hi-sam bhai||

Sahas badan tumharo jash gaave|
Asa-kahi Shripati kanth lagaave||

Sankadhik Brahmaadi Muneesa|
Narad-Sarad sahit Aheesa||

Jam Kuber Digpaal Jahan te|
Kavi kovid kahi sake kahan te||

Tum upkar Sugreevahin keenha|
Ram milaye rajpad deenha||

Tumharo mantra Vibheeshan maana|
Lankeshwar Bhaye Sub jag jana||

Jug sahastra jojan par Bhanu|
Leelyo tahi madhur phal janu||

Prabhu mudrika meli mukh mahee|
Jaladhi langhi gaye achraj nahee||

Durgaam kaj jagath ke jete|
Sugam anugraha tumhre tete||

Ram dwaare tum rakhvare|
Hoat na agya binu paisare||

Sub sukh lahae tumhari sar na|
Tum rakshak kahu ko dar naa||

Aapan tej samharo aapai|
Teenhon lok hank te kanpai||

Bhoot pisaach Nikat nahin aavai|
Mahavir jab naam sunavae||

Nase rog harae sab peera|
Japat nirantar Hanumant beera||

Sankat se Hanuman chudavae|
Man Karam Vachan dyan jo lavai||

Sab par Ram tapasvee raja|
Tin ke kaj sakal Tum saja||

Aur manorath jo koi lavai|
Sohi amit jeevan phal pavai||

Charon Yug partap tumhara|
Hai persidh jagat ujiyara||

Sadhu Sant ke tum Rakhware|
Asur nikandan Ram dulhare||

Ashta-sidhi nav nidhi ke dhata|
As-var deen Janki mata||

Ram rasayan tumhare pasa|
Sada raho Raghupati ke dasa||

Tumhare bhajan Ram ko pavai|

Anth-kaal Raghuvir pur jayee|
Jahan janam Hari-Bakht Kahayee||

Aur Devta Chit na dharehi|
Hanumanth se hi sarve sukh karehi||

Sankat kate-mite sab peera|

Jai Jai Jai Hanuman Gosahin|
Kripa Karahu Gurudev ki nyahin||

Jo sat bar path kare kohi|
Chutehi bandhi maha sukh hohi||

Jo yah padhe Hanuman Chalisa|
Hoye siddhi sakhi Gaureesa||

Tulsidas sada hari chera|
Keejai Nath Hridaye mein dera||

Doha
Pavan Tanay Sankat Harana|
Mangala Murati Roop||
Ram Lakhan Sita Sahita|
Hriday Basahu Soor Bhoop||

Introduction to Hanuman Chalisa

Lord Hanuman occupies a special place in Hindu spirituality. Revered as the greatest devotee of Lord Rama, Hanuman Ji symbolizes loyalty, discipline, wisdom, humility, fearlessness, and divine strength.

Hanuman Chalisa was composed by Goswami Tulsidas in the 16th century and became one of the most widely recited devotional compositions in Hinduism. The verses beautifully describe Hanuman Ji’s qualities, his devotion to Lord Rama, and his role as the remover of difficulties.

Over generations, Hanuman Chalisa has remained deeply connected with daily Hindu worship traditions. Today, devotees across India, the US, UK, Canada, Australia, UAE, and many other countries chant it regularly in homes, temples, and spiritual gatherings.

The prayer continues to inspire people emotionally and spiritually through its simple language and powerful devotional message.

Simple Meaning of Hanuman Chalisa

Hanuman Chalisa praises Lord Hanuman’s strength, wisdom, devotion, courage, and divine powers.

The verses describe:

  • Hanuman Ji’s devotion to Lord Rama
  • His bravery and intelligence
  • His protection of devotees
  • His ability to remove fear and negativity
  • His role as Sankat Mochan (remover of difficulties)

Benefits of Hanuman Chalisa

Spiritual Benefits

Regular recitation helps strengthen devotion, discipline, and connection with Lord Hanuman and Lord Rama.

Mental & Emotional Benefits

Many devotees experience improved confidence, emotional stability, inner peace, and reduced fear through regular chanting.

Devotional Importance

Hanuman Chalisa inspires qualities like courage, humility, dedication, honesty, and selfless service.

How To Recite Hanuman Chalisa

  1. Preparation
  • Take a bath before recitation if possible
  • Wear clean clothes
  • Sit in a peaceful and clean place
  • Keep an image or idol of Hanuman Ji nearby
  1. Direction

Facing east is traditionally considered auspicious during recitation.

  1. Best Time
  • Early morning
  • Evening after sunset
  • Tuesdays and Saturdays
  • During Hanuman Jayanti
  1. Offerings

Common offerings include:

  • Sindoor
  • Jasmine oil
  • Red flowers
  • Banana
  • Incense sticks
  • Ghee lamp
  1. Number of Recitations
  • Once daily for regular worship
  • 7 or 11 times during special prayers
  • 108 recitations during spiritual observances
  1. Things To Remember
  • Chant with devotion and focus
  • Avoid rushing through verses
  • Maintain a peaceful mindset
  • Try understanding the meaning gradually

Best Time To Read Hanuman Chalisa

Tuesday Worship

Tuesday is considered the most important day for Hanuman Ji worship.

Saturday Recitation

Many devotees recite Hanuman Chalisa on Saturdays for spiritual protection and positivity.

Hanuman Jayanti

Hanuman Jayanti is one of the most auspicious occasions for chanting Hanuman Chalisa.

During Stressful Situations

Many people recite Hanuman Chalisa during emotional stress, fear, uncertainty, or difficult life phases.

Daily Spiritual Practice

Morning or evening recitation can become a calming daily habit for mental peace and devotion.

Rules & Precautions

Traditional Guidelines

  • Maintain cleanliness during worship
  • Sit peacefully without distractions
  • Recite respectfully and patiently

Common Mistakes

  • Reading too quickly
  • Treating the prayer mechanically
  • Ignoring pronunciation completely
  • Focusing only on material benefits

Practical Recommendations

  • Beginners can start with one recitation daily
  • Listening to audio may help improve pronunciation
  • Consistency matters more than quantity

Frequently Asked Questions

  1. What is Hanuman Chalisa?

Hanuman Chalisa is a forty-verse devotional hymn dedicated to Lord Hanuman written by Goswami Tulsidas.

  1. Can beginners read Hanuman Chalisa?

Yes. Hanuman Chalisa is suitable for beginners and can be recited by anyone with devotion.

  1. Which day is best for Hanuman Chalisa?

Tuesday and Saturday are considered especially auspicious for Hanuman Ji worship.

  1. Can I read Hanuman Chalisa daily?

Yes. Many devotees include Hanuman Chalisa in their daily spiritual routine.

  1. What are the benefits of Hanuman Chalisa?

Devotees believe it helps bring courage, positivity, peace, confidence, focus, and emotional strength.

  1. Can women read Hanuman Chalisa?

Yes. Women, men, children, and elderly devotees can all recite Hanuman Chalisa.

  1. Is Hanuman Chalisa connected to Lord Rama?

Yes. Hanuman Ji is known as the greatest devotee of Lord Rama, and many verses highlight this devotion.

  1. Can I listen to Hanuman Chalisa instead of reading it?

Yes. Listening with devotion is also considered spiritually beneficial.

  1. How long does it take to read Hanuman Chalisa?

One recitation usually takes around 7 to 10 minutes.

  1. Is there any special rule before chanting Hanuman Chalisa?

Cleanliness, devotion, focus, and sincerity are traditionally considered important during recitation.

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Ramayan Manka 108 in Hindi Lyrics PDF | रामायण मनका 108

Ramayan Manka 108 in Hindi Lyrics

रामायण मनका 108

मंगल भवन अमंगलहारी
द्रवहु सो दशरथ अजर बिहारी
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

हरी अनंत हरी कथा अनंता
कहाही सुनाही बहु विधि सब संता
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भीड़ पड़ी जब भक्त पुकारे
दूर करो प्रभु दुःख हमारे
दशरथ के घर जन्मे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

विश्वामित्र मुनीश्वर आये
दशरथ भूप से वचन सुनाये
संग में भेजे लक्ष्मण राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

वन में जाये ताड़का मारी
चरण छुए अहिल्या तारी
ऋषियों के दुःख हरते राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

जनकपुरी रघुनन्दन आये
नगर निवासी दर्शन पाए
सीता के मन भाये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

रघुनन्दन ने धनुष चढाया
सब रजो का मान घटाया
सीता ने वर पाए राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

परशुराम क्रोधित हो आये
दुष्ट भूप मन में हर्षाये
जनक राय ने किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

बोले लखन सुनो मुनि ज्ञानी
संत नहीं होते अभिमानी
मीठी वाणी बोले राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

लक्ष्मण वचन ध्यान मत दीजो
जो कुछ दंड दास को दीजो
धनुष तुड़इया मैं हु राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

लेकर के यह धनुष चढाओ
अपनी शक्ति मुझे दिखाओ
चुअत चाप चढ़ाये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

हुई उर्मिला लखन की नारी
श्रुतिकीर्ति रिपुसुधन पियारी
हुई मांडवी भरत के वाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अवधपुरी रघुनन्दन आये
घर घर नारी मंगल गाये
बारह वर्ष बिताये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

गुरु वशिष्ट से आज्ञा लीनी
राजतिलक तैयारी कीनी
कलको होंगे राजा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

कुटिल मंथरा ने बहकाई
कैकई ने यह बात सुनायी
दे दो मेरे दो वरदान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मेरी विनती तुम सुन लीजो
भरत पुत्र को गद्दी दीजो
होत प्रातः वन भेजो राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

धरनी गिरे भूप तत्काल
लागा दिल में शूल विशाला
तब सुमंत बुलवाए राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

राम पिता को शीश नवाए
मुख से वचन कहा नहीं जाए
कैकई वचन सुनायो राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

राजा के तुम प्राण पियारे
इनके दुःख हरोगे सारे
अब तुम वन में जाओ राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

वन में चौदह वर्ष बिताओ
रघुकुल रीती निति अपनाओ
आगे इच्छा तेरी राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सुनत वचन राघव हर्षाये
माताजी के मंदिर आये
चरण कमल में किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

माताजी मैं तो वन जाऊं
चौदह वर्ष बाद फिर आऊँ
चरण कमल देखू सुख धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सुनी शूल सम जब यह बानी
भू पर गिरी कौशल्या रानी
धीरज बंधा रहे श्री राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सीताजी जब यह सुन पाई
रंगमहल से नीचे आयी
कौशल्या को किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मेरी चूक क्षमा कर दीजो
वन जाने की आज्ञा दीजो
सीता को समझाते राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मेरी सीख सिया सुन लीजो
सास ससुर की सेवा कीजो
मुझको भी होगा विश्राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मेरा दोष बता प्रभु दीजो
संग मुझे सेवा में लीजो
अर्धांगिनी तुम्हारी राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

समाचार सुनि लक्ष्मण आये
धनुष बाण संग परम सुहाए
बोले संग चलूँगा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

राम लखन मिथिलेश कुमारी
वन जाने की करी तैयारी
रथ में बैठ गए सुखधाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अवधपुरी के सब नर नारी
समाचार सुनि व्याकुल भारी
मचा अवध में अति कोहराम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

श्रीन्घ्वेरपुर रघुवर आये
रथ को अवधपुरी लोटाये
गंगा तट पर आये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

केवट कहे चरण धुलवाओ
पीछे नौका में चढ़ जाओ
पत्थर कर दी नारी राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

लाया एक कठोरा पानी
चरण कमल धोये सुख मानी
नाव चढ़ाये लक्ष्मण राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

उतराई में मुद्रि दिनी
केवट ने यह बिनती किनी
उतराई नहीं लूँगा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

तुम आये हम घाट उतारे
हम आएंगे घाट तुम्हारे
तब तुम पार लगईयो राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भारद्वाज आश्रम पर आये
रामलखन ने शीश नवाए
एक रत कीन्हा विश्राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भाई भरत अयोध्या आये
कैकई को कटु वचन सुनाये
क्यूँ तुमने वन भेजे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

चित्रकूट रघुनन्दन आये
वन को देख सिया सुख पाए
मिले भरत से भाई राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अवधपुरी को चलिए भाई
यह सब कैकई की कुटिलाई
तनिक दोष नहीं मेरा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

चरण पादुका तुम ले जाओ
पूजा कर दर्शन फल पावो
भरत को कंठ लगाये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

आगे चले राम रघुराया
निशाचरों का वंश मिटाया
ऋषियों के हुए पूरण काम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अनसुइया की कुटिया आये
दिव्य वस्त्र सिया माँ ने पाए
था मुनि अत्री का वह धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मुनिस्थान आये रघुराई
शूर्पनखा की नाक कटाई
खरदूषण को मारे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

पंचवटी रघुनन्दन आये
कनक मृग मारीच संग धाये
लक्ष्मण तुम्हे बुलाते राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

रावण साधू वेश में आया
भूख ने मुझको बहुत सताया
भिक्षा दो यह धर्म का काम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भिक्षा लेकर सीता आई
हाथ पकड़ रथ में बैठाई
सूनी कुटिया देखि राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

धरनी गिरे राम रघुराई
सीता के बिन व्यकुलताई
हे प्रिये साईट चीखे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

लक्ष्मण सीता छोड़ नहीं आते
जनक दुलारी नहीं गवाते
बने बनाये बिगड़े काम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

कोमल बदन सुहासिनी सीते
तुम बिन व्यर्थ रहेंगे जीते
लगे चांदनी जैसे गाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सुनरी मैना सुन रे तोता
मैं भी पंखो वाला होता
वन वन लेता ढूंढ़ तमाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

श्यामा हिरणी तू ही बतादे
जनक नंदिनी मुझे मिला दे
तेरे जैसी आँखें श्याम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

वन वन ढूंढ़ रहे रघुराई
जनक दुलारी कही न पाई
गिद्धराज ने किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

चख चख कर फल शबरी लायी
प्रेम सहित खाए रघुराई
ऐसे मीठे नहीं है आम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

विप्र रूप धरी हनुमत आये
चरण कमल में शीश नवाए
कंधे पर बैठाये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सुग्रीव से करी मिलाई
अपनी सारी कथा सुनाई
बाली पहुचाया निज धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सिंघासन सुग्रीव बिठाया
मन में वह अति हर्षाया
वर्षा ऋतू आयी है राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

हे भाई लक्ष्मण तुम जाओ
वानारपति को यूँ समझाओ
सीता बिन व्याकुल है राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

देश देश वानर भिजवाये
सागर के तट पर सब आये
सहते भूख प्यास और घाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सम्पाती ने पता बताया
सीता को रावण ले आया
सागर कूद गए हनुमान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

कोने कोने पता लगाया
भगत विभीषण का घर आया
हनुमान ने किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अशोक वाटिका हनुमत आये
वृक्ष तले सीता को पाए
आंसू बरसे आठो याम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

रावण संग निशाचर लाके
सीता को बोला समझाके
मेरी ओर तो देखो भाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मंदोदरी बनादू दासी
सब सेवा में लंका वासी
करो भवन चलकर विश्राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

चाहे मस्तक कटे हमारा
मैं नहीं देखू बदन तुम्हारा
मेरे तन मनं धन है राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

ऊपर से मुद्रिका गिराई
सीताजी ने कंठ लगाई
हनुमान ने किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

मुझको भेजा है रघुराया
सागर कूद यंहा मैं आया
मैं हु रामदास हनुमान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भूख लगी फल खाना चाहू
जो माता की आज्ञा पाऊ
सब के स्वामी है श्री राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सावधान होकर फल खाना
रखवालो को भूल न जाना
निशाचरों का है यह धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

श्री हनुमत ने वृक्ष उखाड़े
देख देख माली ललकारे
मार मार पहुचाया धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अक्षयकुमार को स्वर्ग पहुचाया
इन्द्रजीत फँसी ले आया
ब्रह्म फ़ास में बंधे हनुमान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सीता को तुम लोटा दीजो
उनसे क्षमा याचना कीजो
तीन लोक के स्वामी राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भगत विभीषण ने समझाया
रावण ने उसको धमकाया
सन्मुख देख रहे हनुमान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

रुई तेल ग्रित बसन मंगाई
पूँछ बांध कर आग लगाई
पूँछ घुमाई है हनुमान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सब लंका में आग लगाई
सागर में जा पूँछ बुझाई
ह्रदय कमल में राखे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सागर कूद लौट कर आये
समाचार रघुवर ने पाए
जो माँगा सो दिया इनाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

वानर रीछ संग में लाये
लक्ष्मण सहित सिन्धु तट आये
लगे सुखाने सागर राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सेतु कपि नल नील बनावे
राम राम लिख शिला तैरावे
लंका पहुंचे राजा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अंगद चल लंका में आया
सभा बीच में पाँव जमाया
बाली पुत्र महा बलधाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

रावण पाँव हटाने आया
अंगद ने फिर पाँव उठाया
क्षमा करे तुझको श्री राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

निशाचरों की सेना आयी
गरज गरज कर हुई लड़ाई
वानर बोले जय सिया राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

इन्द्रजीत ने शक्ति चलाई
धरनी गिरे लखन मुरझाई
चिंता करके रोये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

जब मै अवधपुरी से आया
हाय पिता ने प्राण गवाया
वन में गई चुराई भाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भाई तुमने भी छित्काया
जीवन में कुछ सुख नहीं पाया
सेना में भारी कोहराम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

जो संजीवनी बूटी लाये
तो भाई जीवित हो जाए
बूटी लायेगा हनुमान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

जब बूटी का पता न पाया
पर्वत ही लेकर के आया
कालनेम पहुचाया धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भक्त भरत ने बाण चलाया
चोट लगी हनुमत लंग्ड़या
मुख से बोले जय सिया राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

बोले भरत बहुत पछताकर
पर्वत सहित बाण बैठाकर
तुम्हे मिलादु राजा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

बूटी लेकर हनुमत आया
लखन लाल उठ शीश नवाया
हनुमत कंठ लगाये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

कुम्भकरण उठकर तब आया
एक बाण से उसे गिराया
इन्द्रजीत पहुचाया धाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

दुर्गा पूजन रावण कीन्हो
नौ दिन तक आहार न लीनो
आसन बैठ किया है ध्यान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

रावण का व्रत खंडित किना
परम धाम पंहुचा ही दीना
वानर बोले जय सिया राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सीता ने हरी दर्शन किना
चिंता शोक सभी तज दीना
हंसकर बोले राजा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

पहले अग्निपरीक्षा पाओ
पीछे निकट हमारे आओ
तुम हो पतिव्रता है भाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

करी परीक्षा कंठ लगाई
सब वानर सेना हर्षाई
राज विभीषण दीना राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

फिर पुष्पक विमान मंगाया
सीता सहित बैठे रघुराया
दंडक वन में उतरे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

ऋषिवर सुन दर्शन को आये
स्तुति कर वो मनं में हर्षाये
तब गंगा तट आये राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

नंदीग्राम पवन सुत आये
भगत भरत को वचन सुनाये
लंका से आये है राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

कहो विप्र तुम कहा से आये
ऐसे मीठे वचन सुनाये
मुझे मिला दो भैया राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अवधपुरी रघुनन्दन आये
मंदिर मंदिर मंगल छाए
माताओ को किया प्रणाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

भाई भरत को गले लगाया
सिंघासन बैठे रघुराया
जग में कहा है राजा राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सब भूमि विप्रो को दीनी
विप्रो ने वापस दे दीनी
हम तो भजन करेंगे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

धोबी ने धोबन धम्काई
रामचंद्र ने यह सुन पायी
वन में सीता भेजी राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

वाल्मीकि आश्रम में आयी
लव व् कुश हुए दो भाई
धीर वीर ज्ञानी बलवान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अश्वमेघ कीन्हा राम
सीता बिन सब सुने काम
लुव्कुश वहा लियो पहचान
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सीता राम बिना अकुलाई
भूमि से यह विनय सुने
मुझको अब दीजो विश्राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सीता भूमि माई समाई
देख के चिंता की रघुराई
बार बार पछताए राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

राम राज में सब सुख पावे
प्रेम मगन बोले हरी गुण गावे
दुःख कलेश का रहा न नाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

ग्यारह हज़ार वर्ष परियानता
राज कीन्हा श्रीलक्ष्मीकांता
फिर वैकुण्ठ पधारे राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

अवधपुरी वैकुण्ठ सिधाई
नरनारी सब ने गति पाई
शरणागत प्रतिपालक राम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

सब भक्तो ने लीला गाई
मेरी भी विनय सुनो रघुराई
भूलू नहीं तुम्हारा नाम
राम सिया राम सिया राम जय जय राम !!

जय श्री राम जय जय हनुमान !!

According to Hindu Mythology chanting of Ramayan Manka 108 regularly on Tuesday and Saturday is the most powerful way to please God Ram and get his blessing.

How to Recite Ramayan Manka 108
To get the best result you should do recitation of Ramayan Manka 108 in evening after taking bath and in front of God Rama Idol or picture. You should first understand the Ramayan Manka 108 meaning in hindi to maximize its effect.

Benefits of Ramayan Manka 108

Regular recitation of Ramayan Manka 108 gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

Ramayan Manka 108 in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Shiva Tandav Stotram in Hindi Lyrics PDF | शिव तांडव स्तोत्र

शिव तांडव स्तोत्रम क्या है?

शिव ताण्डव स्तोत्र  परम शिवभक्त लंकाधिपति रावण द्वारा रचित भगवान शिव का एक बहूत चमत्कारी स्तोत्र है।  रावण ने शिव की स्तुति कर उन्हें प्रसन्न करने के लिए इन श्लोकों का पाठ  1000 वर्षों तक किया था। रावण की इस तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उससे सारे कष्टों से मुक्ति दी थी। रावण के जाप किए वे श्लोक शिवतांडव स्तोत्र के नाम से जाने जाते हैं।

शिव तांडव स्तोत्र के लाभ

धर्म शास्त्रों के अनुसार शिव ताण्डव स्त्रोत को नित्य पढ़ने या श्रवण मात्र से इंसान के सारे पाप उतर जाते है और हर मनोकामना पूरी हो जाती है. शिव ताण्डव स्तोत्र  में इतनी शक्ति है कि कितनी भी बड़ी परेशानी हो, इससे दूर हो जाती है। इस शिव स्तुति से धन दौलत पाने के अलावा रचनात्मकता और कलात्मकता मै भी निपुण्ड हो सकते है।

शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी स्नान करके भगवन शिव की पूजा करने के बाद नित्य शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करे. सर्वप्रथम शिवलिंग का कच्चे दूध और जल से अभिषेक करे, तत्पश्चात धुप, दीप, पुष्प और नैवैद्य अर्पित करे , तत्पश्चात शिव ताण्डव स्तोत्र  का पाठ करे |

Shiva Tandava Stotram in Hindi Lyrics

शिव तांडव स्तोत्र हिंदी में अनुवाद सहित

जटाटवीग लज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।

डमड्डमड्डमड्डम न्निनादवड्डमर्वयं
चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जिन शिव जी की सघन जटारूप वन से प्रवाहित हो गंगा जी की धारायं उनके कंठ को प्रक्षालित करती हैं, जिनके गले में बडे एवं लम्बे सर्पों की मालाएं लटक रहीं हैं, तथा जो शिव जी डम-डम डमरू बजा कर प्रचण्ड ताण्डव करते हैं, वे शिवजी हमारा कल्याण करें

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।

धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

जिन शिव जी के जटाओं में अतिवेग से विलास पुर्वक भ्रमण कर रही देवी गंगा की लहरे उनके शीश पर लहरा रहीं हैं, जिनके मस्तक पर अग्नि की प्रचण्ड ज्वालायें धधक-धधक करके प्रज्वलित हो रहीं हैं, उन बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में मेरा अंनुराग प्रतिक्षण बढता रहे।

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-
स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।

कृपाकटा क्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदि
कवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जो पर्वतराजसुता(पार्वती जी) के विलासमय रमणिय कटाक्षों में परम आनन्दित चित्त रहते हैं, जिनके मस्तक में सम्पूर्ण सृष्टि एवं प्राणीगण वास करते हैं, तथा जिनके कृपादृष्टि मात्र से भक्तों की समस्त विपत्तियां दूर हो जाती हैं, ऐसे दिगम्बर (आकाश को वस्त्र सामान धारण करने वाले) शिवजी की आराधना से मेरा चित्त कब आनंदित होगा

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।

मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

मैं उन शिवजी की भक्ति में आन्दित रहूँ जो सभी प्राणियों की के आधार एवं रक्षक हैं, जिनके जाटाओं में लिपटे सर्पों के फण की मणियों के प्रकाश पीले वर्ण प्रभा-समुहरूपकेसर के कातिं से दिशाओं को प्रकाशित करते हैं और जो गजचर्म से विभुषित हैं।

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-
प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।

भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

इंद्रादि समस्त देवताओं के सिर से सुसज्जित पुष्पों की धूलिराशि से धूसरित पादपृष्ठ वाले सर्पराजों की मालाओं से विभूषित जटा वाले प्रभु हमें चिरकाल के लिए सम्पदा दें।

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-
निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।

सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरं
महा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

जिन शिव जी ने इन्द्रादि देवताओं का गर्व दहन करते हुए, कामदेव को अपने विशाल मस्तक की अग्नि ज्वाला से भस्म कर दिया, तथा जो सभी देवों द्वारा पुज्य हैं, तथा चन्द्रमा और गंगा द्वारा सुशोभित हैं, वे मुझे सिद्दी प्रदान करें।

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।

धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

जिनके मस्तक से धक-धक करती प्रचण्ड ज्वाला ने कामदेव को भस्म कर दिया तथा जो शिव पार्वती जी के स्तन के अग्र भाग पर चित्रकारी करने में अति चतुर है ( यहाँ पार्वती प्रकृति हैं, तथा चित्रकारी सृजन है), उन शिव जी में मेरी प्रीति अटल हो।

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-
त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।

निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरः
कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

जिनका कण्ठ नवीन मेंघों की घटाओं से परिपूर्ण आमवस्या की रात्रि के सामान काला है, जो कि गज-चर्म, गंगा एवं बाल-चन्द्र द्वारा शोभायमान हैं तथा जो कि जगत का बोझ धारण करने वाले हैं, वे शिव जी हमे सभी प्रकार की सम्पनता प्रदान करें।

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-
विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌

स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

जिनका कण्ठ और कन्धा पूर्ण खिले हुए नीलकमल की फैली हुई सुन्दर श्याम प्रभा से विभुषित है, जो कामदेव और त्रिपुरासुर के विनाशक, संसार के दु:खो के काटने वाले, दक्षयज्ञ विनाशक, गजासुर एवं अन्धकासुर के संहारक हैं तथा जो मृत्यू को वश में करने वाले हैं, मैं उन शिव जी को भजता हूँ

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-
रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।

स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं
गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जो कल्यानमय, अविनाशि, समस्त कलाओं के रस का अस्वादन करने वाले हैं, जो कामदेव को भस्म करने वाले हैं, त्रिपुरासुर, गजासुर, अन्धकासुर के सहांरक, दक्षयज्ञविध्वसंक तथा स्वयं यमराज के लिए भी यमस्वरूप हैं, मैं उन शिव जी को भजता हूँ।

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-
द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-

धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

अतयंत वेग से भ्रमण कर रहे सर्पों के फूफकार से क्रमश: ललाट में बढी हूई प्रचंण अग्नि के मध्य मृदंग की मंगलकारी उच्च धिम-धिम की ध्वनि के साथ ताण्डव नृत्य में लीन शिव जी सर्व प्रकार सुशोभित हो रहे हैं।

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।

तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कठोर पत्थर एवं कोमल शय्या, सर्प एवं मोतियों की मालाओं, बहुमूल्य रत्न एवं मिट्टी के टूकडों, शत्रू एवं मित्रों, राजाओं तथा प्रजाओं, तिनकों तथा कमलों पर सामान दृष्टि रखने वाले शिव को मैं भजता हूँ।

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌ ।

विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

कब मैं गंगा जी के कछारगुञ में निवास करता हुआ, निष्कपट हो, सिर पर अंजली धारण कर चंचल नेत्रों तथा ललाट वाले शिव जी का मंत्रोच्चार करते हुए अक्षय सुख को प्राप्त करूंगा।

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।

तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

देवांगनाओं के सिर में गूँथे पुष्पों की मालाओं के झड़ते हुए सुगंधमय पराग से मनोहर, परम शोभा के धाम महादेवजी के अंगों की सुंदरताएँ परमानंदयुक्त हमारेमन की प्रसन्नता को सर्वदा बढ़ाती रहें।

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।

विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

प्रचंड बड़वानल की भाँति पापों को भस्म करने में स्त्री स्वरूपिणी अणिमादिक अष्ट महासिद्धियों तथा चंचल नेत्रों वाली देवकन्याओं से शिव विवाह समय में गान की गई मंगलध्वनि सब मंत्रों में परमश्रेष्ठ शिव मंत्र से पूरित, सांसारिक दुःखों को नष्ट कर विजय पाएँ।  

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं
पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌ ।

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिं
विमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

इस परम उत्तम शिव ताण्डव स्त्रोत को नित्य पढने या श्रवण करने मात्र से प्राणि पवित्र हो, परंगुरू शिव में स्थापित हो जाता है तथा सभी प्रकार के भ्रमों से मुक्त हो जाता है।

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं
यः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।

तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां
लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

प्रदोष समय में शिवपुजन के अंत में इस रावणकृत शिवताण्डवस्तोत्र के गान से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं तथा भक्त रथ, गज, घोडा आदि सम्पदा से सर्वदा युक्त रहता है।

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Ganesh Chalisa in Hindi Lyrics PDF | श्री गणेश चालीसा

Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा) in Hindi Lyrics

।। दोहा ।।

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ।।

।। चौपाई ।।

जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ।।

जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ।।

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ।।

राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ।।

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ।।

सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ।।

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ।।

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ।।

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ।।

एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ।।

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ।।

अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ।।

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ।।

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ।।

गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ।।

अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ।।

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ।।

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ।।

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ।।

लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ।।

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ।।

गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ।।

कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ।।

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ।।

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ।।

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ।।

हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ।।

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ।।

बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ।।

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ।।

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ।।

चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ।।

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ।।

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ।।

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ।।

मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ।।

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ।।

अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ।।

।। दोहा ।।

श्री गणेशा यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ।।

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ।।

Ganesh Chalisa in English

।। Doha ।।

Jaya ganapati sadhguna sadana। kavi vara badana kripaala ।

Vighna harana mangala karana। jaya jaya girijaa laala ॥

।। Chaupai ।।

Jaya jaya ganapati gan raaju । mangala bharana karana shubha kaaju ॥

Jaya gajabadana sadana sukhadaataa । vishva vinaayaka buddhi vidhaata ॥

Vakra tunda shuchi shunda suhaavana । tilaka tripunda bhaala mana bhaavana ॥

Raajata mani muktana ura maala । svarna mukuta shira nayana vishaala ॥

Pustaka paani kuthaara trishuulam । modaka bhoga sugandhita phoolam ॥

Sundara piitaambara tana saajita । charana paaduka muni mana raajita ॥

Dhani shiva suvana shadaanana bhraata । gaurii lalana vishva-vidhaata ॥

Riddhi siddhi tava chanvara sudhaare । mushaka vaahana sohata dvaare ॥

Kahaun janma shubha kathaa tumhaari । ati shuchi paavana mangala kaari ॥

Eka samaya giriraaj kumaari । putra hetu tapa kinha bhaari ॥

Bhayo yagya jaba puurna anuupa । taba pahunchyo tuma dhari dvija ruupa ॥

Atithi jaani kai gauri sukhaari । bahuvidhi sevaa kari tumhaari ॥

Ati prasanna hvai tuma vara diinha । maatu putra hita jo tapa kiinha ॥

Milahi putra tuhi buddhi vishaala । binaa garbha dhaarana yahi kaala ॥

Gananaayaka, guna gyaana nidhaana । puujita prathama ruupa bhagavana ॥

Asa kahi antardhyaana ruupa hvai । palana para baalaka svaruupa hvai ॥

Bani shishu rudana jabahi tuma thaana । lakhi mukha sukha nahin gauri samaan ॥

Sakala magana, sukha mangala gaavahin । nabha te surana sumana varshaavahin ॥

Shambhu uma, bahu dana lutavahin । sura munijana, suta dekhana aavahin ॥

Lakhi ati aananda mangala saaja । dekhana bhi aaye shani raaja ॥

Nija avaguna guni shani mana maahin । baalaka, dekhan chaahata naahin ॥

Giraja kachhu mana bheda badhaayo । utsava mora na shani tuhi bhaayo ॥

Kahana lage shani, mana sakuchaai । kaa karihau, shishu mohi dikhaai ॥

Nahin vishvaasa, uma ur bhayau, shani so baalaka dekhana kahyau ॥

Padatahin, shani driga kona prakaasha । baalaka shira udi gayo aakaasha ॥

Giraja giriin vikala hvai dharani । so dukha dasha gayo nahin varani ॥

Haahaakaara machyo kailaasha । shani kiinhyon lakhi suta ka naasha ॥

Turata garuda chadhi Vishnu sidhaaye । kaati chakra so gaja shira laaye ॥

Baalaka ke dhada upara dhaarayo । praana, mantra padha shankara darayo ॥

Naama ‘ganesha’ shambhu taba kiinhe। prathama puujya buddhi nidhi, vara diinhe ॥

Buddhi pariiksha jaba shiva kiinha । prithvii kar pradakshina liinha ॥

Chale shadaanana, bharami bhulaIi । rachi baitha tuma buddhi upaai ॥

Charana maatu-pitu ke dhara linhen । tinake saata pradakshina kinhen ॥

Dhani ganesha, kahi shiva hiya harashe । nabha te surana sumana bahu barase॥

Tumhari mahima buddhi badaye । shesha sahasa mukha sakai na gaai ॥

Mein mati hina malina dukhaari । karahun kauna vidhi vinaya tumhaari ॥

Bhajata ‘raamasundara’ prabhudaasa । lakha prayaga, kakara, durvasa ॥

Aba prabhu daya dina para kijai । apani bhakti shakti kuchhu dijai ॥

 ।। Doha ।।

Shri Ganesh yah chalisa, path karai dhari dhyan ।

Nit nav mangal gruha bashe, lahi jagat sanman ॥

Sambandh apne sahstra dash, rushi panchami dinesh ।

Puran chalisa bhayo, mangal murti ganesha ॥

 

गणेश चालीसा के लाभ

धर्म शास्त्रों के अनुसार गणेश चालीसा का पाठ करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है.

Benefits of Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा)

According to Hindu Mythology chanting of Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा) regularly is the most powerful way to please God Ganesh and get his blessing. Regular recitation of Ganesh Chalisa gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

गणेश चालीसा का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी स्नान करके भगवन गणेश की तस्वीर या मूर्ति के सामने गणेश चालीसा का पाठ करे.

How to chant Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा)

To get the best result you should do recitation of Ganesh Chalisa early morning after taking bath and in front of God Ganesh Idol or picture. You should first understand the Ganesh Chalisa meaning in hindi to maximize its effect.

 

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गणेश पूजन सामग्री

गणेश पूजन विधि

गणेश जी की आरती

गणपति अथर्वशीर्ष

गणेश मंत्र

गणेश कवचं

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र

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Durga Saptashloki in Hindi Lyrics PDF | श्री दुर्गा सप्तश्लोकी

Durga Saptashloki in Hindi/Sanskrit Lyrics

श्री दुर्गा सप्तश्लोकी

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमहामन्त्रस्य
नारायण ऋषिः । अनुष्टुपादीनि छन्दांसि ।
श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः ।
श्री जगदम्बाप्रीत्यर्थ पाठे विनियोगः ॥

ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा ।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥१॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्रयदुःखभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द चित्ता ॥२॥

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥३॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥४॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवी नमोऽस्तु ते ॥५॥

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति ॥६॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि ।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरि विनाशनम् ॥७॥

Durga Saptashloki Meaning

दुर्गा सप्तशलोकी का अर्थ

Durga Saptashloki is the part of Hindu religious text Devi Mahatmya. Durga Saptashloki is the strot of Maa durga which describes that Shri Mahakali, Shree Mahalakshmi, Shri Mahasaraswati is pleasing Maa Jagdamba.  Durga Saptasholi deals with seven devis. This text describes the victory of Maa Durga in seven different incarnations 7 their Victory over the demons.

दुर्गा सप्तशलोकी हिंदू धार्मिक पाठ देवी महात्म्य का हिस्सा है। दुर्गा सप्तशलोकी माता दुर्गा का स्तोत्र है, जो बताता है कि श्री महाकाली, श्री महालक्ष्मी, श्री महासरस्वती माता जगदम्बे को प्रसन्न कैसे करती हैं। दुर्गा सप्तशलोकी पाठ सात अलग-अलग अवतारों में 7 राक्षसों पर माँ दुर्ग की विजय का वर्णन करता है।

Durga Saptashloki Benefits

दुर्गा सप्तशलोकी पाठ के लाभ

To gain the powers of Maa Durga, devotees recite Durga Saptashloki regularly with much devotion. Devi Maa will help you to win the Battle and gives victory in all your Work. Durga Saptashloki contains various shloks which should be recited daily at the time of Worship. You can read Durga saptashloki also at your home.

माता दुर्गा की शक्तियों को प्राप्त करने के लिए पूरी भक्ति के साथ नियमित रूप से दुर्ग सप्तशलोकी का पाठ पड़ना चाहिए। देवी मां जीवन का हर युद्ध जीतने में आपकी मदद करेगी और अपने सभी कार्यों में जीत प्रदान करेगी। दुर्गा सप्तशलोकी में विभिन्न श्लोक शामिल हैं, जिन्हें पूजा के समय प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। आप अपने घर में भी दुर्गा सप्तशलोकी पढ़ सकते हैं

Durga Saptashloki Image/ Wallpaper:-

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Ganesh Mantra in Sanskrit Lyrics PDF | गणेश पूजन मंत्र

Ganesh Pujan Mantra | गणेश पूजन मंत्र

ऊँ गं गणपतये नमः

गणेश गायत्री मंत्र (Ganesh Gayatri Mantra)

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।

 

तांत्रिक गणेश मंत्र (Tantrik Ganesh Mantra)

ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति। करों दूर क्लेश।।

 

गणेश कुबेर मंत्र (Ganesh Kuber Mantra)

ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।

According to Hindu Mythology chanting 108 times of these Ganesh Mantra (गणेश पूजन मंत्र) regularly for 11 days is the most powerful way to please God Ganesh and get his/her blessing.

How to chant Ganesh Mantra (गणेश पूजन मंत्र)

To get the best result you should chant Ganesh Mantra early morning after taking bath and in front of God Ganesh Idol or picture. You should first understand the Ganesh Mantra meaning in hindi to maximize its effect.

Benefits of Ganesh Mantra (गणेश पूजन मंत्र)

Regular chanting of Ganesh Mantra gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

Ganesh Mantra Image: गणेश पूजन मंत्र

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गणेश पूजन सामग्री

गणेश पूजन विधि

गणेश जी की आरती

गणपति अथर्वशीर्ष

गणेश मंत्र

Aarti Collection

Ganpati Aarti
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Durga Aarti
Kakad Aarti
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Santoshi Aarti
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Satyanarayan Aarti
Shani Dev Aarti
Shiv Aarti
Surya Aarti
Tulsi Aarti
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Chalisa Collection

Bhairav Chalisa
Durga Chalisa
Ganesh Chalisa
Gayatri Chalisa
Hanuman Chalisa
Kaila Devi Chalisa
Kali Chalisa
Laxmi Chalisa
Navagraha Chalisa
Sai Chalisa
Saraswati Chalisa
Shani Chalisa
Shiva Chalisa
Surya Chalisa

Mantras Collection

Brihaspati Mantra
Budh Mantra
Chamunda Mantra
Chandra Mantra
Chandraghanta Mantra
Dattatreya Mantra
Devi mantra
Dhanvantri Mantra
Ganesh Mantra
Gayatri Mantra
Gorakhnath Mantra
Govardhan Puja Mantra
Hare Krishna Mantra
Kalbhairav Mantra
Kalratri Mantra
Kamakhya Mantra
Kamdev Mantra
Kanakdhara Mantra
Katyayani Mantra
Ketu Mantra
Krishna Mantra
Kuber Mantra
Laxmi Mantra
MahaMrityunjaya Mantra
Sudarshana Mantra
Surya Mantra
Surya Namaskar Mantra
Navagraha Mantra
Rahu Mantra
Ram Mantra
Sai Baba Mantra
Santhana Gopala Mantra
Saraswati Mantra
Shabar Mantra
Shailputri Mantra
Shani Mantra
Tulsi Mantra
Vishnu Mantra

Stotra Collection

Aditya Hridaya Stotra
Argala Stotra
Ashtalakshmi Stotra
Bajrang Baan
Bhaktamar Stotra
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Dwadasha Stotra
Gajendra Moksha Stotra
Ganpati Atharvashirsha
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Mahalakshmi Ashtakam
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Krishna Aarti In English PDF

Krishna Aarti In English

Krishna Aarti English Lyrics

Aarti kunj bihari ki, shri girdhar krishna murari ki

Gale mein baijanti mala, bajave murali madhur bala

Shravan mein kundal jhalakala

Nand ke anand nand lala

Gagan sam ang kanti kali, radhika chamak rahi aali

Ratan mein thadhe banamali

Bhramar si alak, kasturi tilak, chandra si jhalak

Lalit chhavi shyama pyari ki

Shri giradhar krishnamuraari ki

Aarti kunj bihari ki , Shri girdhar krishna murari ki

Kanakmay mor mukut bilse, devata darsan ko tarse

Gagan so suman raasi bares

Baje murchang, madhur mridang, gwaalin sang

Atual rati gop kumaari ki Shri giradhar krishna murari ki

Aarti kunj bihari ki, Shri girdhar krishna murari ki

Jahaan se pragat bhayi ganga, kalush kali haarini shri ganga,

Smaran se hot moh bhanga

Basi shiv shish, jataa ke beech, harei agh keech;

Charan chhavi shri banvaari ki. Shri giradhar krishnamuraari ki…

Aarti kunj bihari ki, Shri girdhar krishna murari ki

Chamakati ujjawal tat renu, baj rahi vrindavan benu

Chahu disi gopi gwaal dhenu

Hansat mridu mand, chandani chandra, katat bhav phand

Ter sun deen bhikhaari ki, Shri giradhar krishnamuraari ki

Aarti kunj bihari ki, Shri girdhar krishna murari ki||

Daily recitate Krishna Aarti In English to please Lord Krishna.

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