नवरात्रि पूजा सामग्री

नवरात्रि दुर्गा पूजन में आवश्यक सभी सामग्री

  • दुर्गा सप्तशती किताब
  • देवी दुर्गा की मूर्ति
  • मिट्टी का पात्र और जौ
  • जल से भरा हुआ चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश
  • लाल सूत्र, मौली, इलाइची, लौंग, कपूर, रोली
  • साबुत सुपारी, साबुत चावल और सिक्के
  • अशोक या आम के पांच पत्ते
  • पानी वाला नारियल
  • लाल कपड़ा या चुनरी, सिंदूर
  • फूल और फूल माला
  • पंचमेवा,
  • मिष्ठान,
  • फल,
  • सुहाग का सामान
  • पीतल या मिट्टी का दीया साफ कर ले.
  • जोत के लिए रूई की बत्ती,
  • रोली या सिंदूर,
  • चावल
  • हवन कुंड, लौंग का जोड़ा, कपूर, सुपारी, गुग्ल, लोबान, घी, पांच मेवा, चावल

नवरात्रि /दुर्गा पूजा / पूजन सामग्री किसी भी पूजा सामग्री या किराने की दूकान या ऑनलाइन वेबसाइट से ली जा सकती है.

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अमावस्या के दिन करने वाले उपाय

हिन्दू शाश्त्रो मैं तंत्र मंत्र सिद्ध करने के लिए अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए  उपाय विशेष फल प्रदान करते हैं। आपका भाग्य बदल देंगे अमावस्या के दिन करने वाले उपाय।

अमावस्या के दिन करने वाले उपाय

  • अमावस्या के दिन एक नीम्बू को सुबह से घर के मंदिर में साफ करके रख दें. इसके बाद इसे अपने सर से सात बार उतारकर, चार बराबर भागों में काट लें और रात के समय चौराहे पर जाकर, चारों दिशाओं में इसको फ़ेंक दें.
  • अमावस्या के दिन आप मछलियों को आटे की गोलियां जरूर खिलायें.
  • अमावस्या के दिन काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं।
  • अमावस्या के दिन किसी अच्छे पंडित से अपने घर में शिवपूजन एवं हवन करवाना चाहिए।
  • अमावस्या वाली रात्रि को 5 लाल फूल और 5 जलते हुए दीये बहती नदी के पानी में छोड़ें।
  • अमावस्या को पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा पेड़ को जनेऊ व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें उसकी सात परिक्रमा करें।
  • अमावस्या के दिन  स्टील के लोटे में  दूध, पानी, काले और सफ़ेद तिल एवं जौ मिला ले, पीपल की जड़ में अर्पित कर दे।
  • अमावस्या के दिनअपने पूर्वजों के नाम पर किसी गाय, ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद भिखारी को भोजन दान करें।
  • हर अमावस्या को किसी कुएं में अगर आप एक चम्मच दूध डालते रहते हैं तो इससे आपके जीवन में सभी दुःख खत्म होने लगते हैं.
  • अमावस्या की रात को आप अगर आप काले कुत्ते को तेल की रोटी खिलाते हैं और वह कुत्ता उसी समय यह रोटी खा लेता है तो इससे आपके सभी दुश्मन उसी समय से शांत होना शुरू हो जाते हैं.
  • भगवान विष्णु के मंदिर में पीला ध्वज लगवाएं। इस उपाय से विष्णुजी के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होगी।
  • अमावस्या के दिन सुबह शाम घर के मंदिर और तुलसी पर दिया अवश्य ही जलाएं इससे घर से कलह और दरिद्रता दूर रहती है ।
  • अमावस्या के दिन शनि देव पर कड़वा तेल, काले उड़द, काले तिल, लोहा, काला कपड़ा और नीला पुष्प चढ़ाकर शनि का पौराणिक मंत्र “ऊँ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तण्डसंभुतं नमामि शनैश्चरम।” की एक माला का जाप करने से शनि का प्रकोप शांत होता है
  • अमावस्या को गाय को पांच फल भी नियमपूर्वक खिलाने चाहिए
  • अमावस्या के दिन भूल कर भी तुलसी के पत्ते या बिलव पत्र नहीं तोड़ने चाहिए।

अमावस्या के दिन करने वाले उपाय  सच्ची श्रद्धा और भक्ति से करे और अपना जीवन बदल लेवे

सोमवती अमावस्या के टोटके

सोमवती अमावस्या व्रत कथा

अमावस्या कब है




Navgrah Strotam

Navagraha Strotam in Hindi

|| नवग्रह स्तोत्र ||

अथ नवग्रह स्तोत्र

श्री गणेशाय नमः

जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महदद्युतिम् |

तमोरिंसर्वपापघ्नं प्रणतोSस्मि दिवाकरम् || १ ||

दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव संभवम् |

नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणम् || २ ||

धरणीगर्भ संभूतं विद्युत्कांति समप्रभम् |

कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणाम्यहम् || ३ ||

प्रियंगुकलिकाश्यामं रुपेणाप्रतिमं बुधम् |

सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् || ४ ||

देवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम् |

बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् || ५ ||

हिमकुंद मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् |

सर्वशास्त्र प्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् || ६ ||

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् |

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम् || ७ ||

अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम् |

सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् || ८ ||

पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रह मस्तकम् |

रौद्रंरौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् || ९ ||

इति श्रीव्यासमुखोग्दीतम् यः पठेत् सुसमाहितः |

दिवा वा यदि वा रात्रौ विघ्न शांतिर्भविष्यति || १० ||

नरनारी नृपाणांच भवेत् दुःस्वप्ननाशनम् |

ऐश्वर्यमतुलं तेषां आरोग्यं पुष्टिवर्धनम् || ११ ||

ग्रहनक्षत्रजाः पीडास्तस्कराग्निसमुभ्दवाः |

ता सर्वाःप्रशमं यान्ति व्यासोब्रुते न संशयः || १२ ||

|| इति श्री वेद व्यास विरचितम् आदित्यादी नवग्रह स्तोत्रं संपूर्णं ||

According to Hindu Mythology chanting of Navagrah Strotam regularly is the most powerful way to please God Navagrah and get his blessing.

How to chant Navagrah Strotam

To get the best result you should do recitation of Navagrah Strotam early morning after taking bath and in front of God Navagrah Idol or picture. You should first understand the Navagrah Strotam meaning in hindi to maximize its effect.

Benefits of Navagrah Strotam

Regular recitation of Navagrah Strotam gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

Navagrah Strotam in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Shri Rani Sati Dadi Aarti | श्री राणी सतीजी की आरती

श्री राणी सतीजी की आरती

ॐ जय श्री राणी सती माता, मैया जय राणी सती माता,
अपने भक्त जनन की दूर करन विपत्ती॥

अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत, मंडितचहुँक कुंभा
दुर्जन दलन खडग की विद्युतसम प्रतिभा॥

मरकत मणि मंदिर अतिमंजुल, शोभा लखि न पडे,
ललित ध्वजा चहुँ ओरे , कंचन कलश धरे॥

घंटा घनन घडावल बाजे, शंख मृदुग घूरे,
किन्नर गायन करते वेद ध्वनि उचरे॥

सप्त मात्रिका करे आरती, सुरगण ध्यान धरे,
विविध प्रकार के व्यजंन, श्रीफल भेट धरे॥

संकट विकट विदारनि, नाशनि हो कुमति,
सेवक जन ह्रदय पटले, मृदूल करन सुमति,

अमल कमल दल लोचनी, मोचनी त्रय तापा॥
त्रिलोक चंद्र मैया तेरी,शरण गहुँ माता॥

या मैया जी की आरती, प्रतिदिन जो कोई गाता,
सदन सिद्ध नव निध फल, मनवांछित पावे ||

How to do Shri Rani Sati Dadi Aarti

श्री राणी सतीजी की आरती का पाठ

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Benefits of Shri Rani Sati Dadi Aarti

श्री राणी सतीजी की आरती के लाभ

According to Hindu Mythology doing Rani Sati Chalisa is the most powerful way to please Rani Sati and get her blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री राणी सतीजी की आरती करने से Rani Sati बहुत प्रसन्न होते है और सारे संकट दूर करके जीवन खुशियों से भर देते है ।

Shri Rani Sati Dadi Aarti in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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श्री राणी सतीजी की आरती हिंदी PDF डाउनलोड

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Rani Sati Chalisa in Hindi | श्री राणी सती दादी जी चालीसा

श्री राणी सती दादी जी चालीसा

॥ दोहा ॥
श्री गुरु पद पंकज नमन, दुषित भाव सुधार,
राणी सती सू विमल यश, बरणौ मति अनुसार,
काम क्रोध मद लोभ मै, भरम रह्यो संसार,
शरण गहि करूणामई, सुख सम्पति संसार॥

॥ चौपाई ॥
नमो नमो श्री सती भवानी, जग विख्यात सभी मन मानी।
नमो नमो संकट कू हरनी, मनवांछित पूरण सब करनी ॥2॥

नमो नमो जय जय जगदंबा, भक्तन काज न होय विलंबा।
नमो नमो जय जय जगतारिणी, सेवक जन के काज सुधारिणी ॥४॥

दिव्य रूप सिर चूनर सोहे, जगमगात कुन्डल मन मोहे।
मांग सिंदूर सुकाजर टीकी, गजमुक्ता नथ सुंदर नीकी ॥६॥

गल वैजंती माल विराजे, सोलहूं साज बदन पे साजे।
धन्य भाग गुरसामलजी को, महम डोकवा जन्म सती को ॥८॥

तनधनदास पति वर पाये, आनंद मंगल होत सवाये।
जालीराम पुत्र वधु होके, वंश पवित्र किया कुल दोके॥

पति देव रण मॉय जुझारे, सति रूप हो शत्रु संहारे।
पति संग ले सद् गती पाई , सुर मन हर्ष सुमन बरसाई॥

धन्य भाग उस राणा जी को, सुफल हुवा कर दरस सती का।
विक्रम तेरह सौ बावन कूं, मंगसिर बदी नौमी मंगल कूं॥

नगर झून्झूनू प्रगटी माता, जग विख्यात सुमंगल दाता।
दूर देश के यात्री आवै, धुप दिप नैवैध्य चढावे॥

उछाङ उछाङते है आनंद से, पूजा तन मन धन श्रीफल से।
जात जङूला रात जगावे, बांसल गोत्री सभी मनावे॥

पूजन पाठ पठन द्विज करते, वेद ध्वनि मुख से उच्चरते।
नाना भाँति भाँति पकवाना, विप्र जनो को न्यूत जिमाना॥

श्रद्धा भक्ति सहित हरसाते, सेवक मनवांछित फल पाते।
जय जय कार करे नर नारी, श्री राणी सतीजी की बलिहारी॥

द्वार कोट नित नौबत बाजे, होत सिंगार साज अति साजे।
रत्न सिंघासन झलके नीको, पलपल छिनछिन ध्यान सती को॥

भाद्र कृष्ण मावस दिन लीला, भरता मेला रंग रंगीला।
भक्त सूजन की सकल भीङ है, दरशन के हित नही छीङ है॥

अटल भुवन मे ज्योति तिहारी, तेज पूंज जग मग उजियारी।
आदि शक्ति मे मिली ज्योति है, देश देश मे भवन भौति है॥

नाना विधी से पूजा करते, निश दिन ध्यान तिहारो धरते।
कष्ट निवारिणी दुख: नासिनी, करूणामयी झुन्झुनू वासिनी॥

प्रथम सती नारायणी नामा, द्वादश और हुई इस धामा।
तिहूं लोक मे कीरति छाई, राणी सतीजी की फिरी दुहाई॥

सुबह शाम आरती उतारे, नौबत घंटा ध्वनि टंकारे।
राग छत्तीसों बाजा बाजे, तेरहु मंड सुन्दर अति साजे ॥

त्राहि त्राहि मै शरण आपकी, पुरी मन की आस दास की।
मुझको एक भरोसो तेरो, आन सुधारो मैया कारज मेरो॥

पूजा जप तप नेम न जानू, निर्मल महिमा नित्य बखानू।
भक्तन की आपत्ति हर लिनी, पुत्र पौत्र सम्पत्ति वर दीनी॥

पढे चालीसा जो शतबारा, होय सिद्ध मन माहि विचारा।
टिबरिया ली शरण तिहारी, क्षमा करो सब चूक हमारी॥

॥ दोहा ॥
दुख आपद विपदा हरण, जन जीवन आधार।
बिगङी बात सुधारियो, सब अपराध बिसार॥

॥ मात श्री राणी सतीजी की जय ॥

How to do Rani Sati Chalisa

श्री राणी सती दादी जी चालीसा का पाठ

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Benefits of Tulsi Chalisa

श्री राणी सती दादी जी चालीसा के लाभ

According to Hindu Mythology doing Rani Sati Chalisa is the most powerful way to please Rani Sati and get her blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार श्री राणी सती दादी जी चालीसा करने से Rani Sati बहुत प्रसन्न होते है और सारे संकट दूर करके जीवन खुशियों से भर देते है ।

Rani Sati Chalisa in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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श्री राणी सती दादी जी चालीसा हिंदी PDF डाउनलोड

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Dhanlakshmi Stotram | धनलक्ष्मी स्तोत्रम्

Dhanlakshmi Stotram

धनलक्ष्मी स्तोत्रम्

॥धनलक्ष्मी स्तोत्रम्॥

॥धनदा उवाच॥

देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं मम प्रियम्।

कृपया पार्वती प्राह शंकरं करुणाकरम् ॥१॥

 ॥देव्युवाच॥

ब्रूहि वल्लभ साधूनां दरिद्राणां कुटुम्बिनाम्।

दरिद्र दलनोपायमंजसैव धनप्रदम् ॥२॥

 ॥शिव उवाच॥

पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः।

उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया ॥३॥

 स सीतं सानुजं रामं सांजनेयं सहानुगम्।

प्रणम्य परमानन्दं वक्ष्येऽहं स्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥

 धनदं श्रद्धानानां सद्यः सुलभकारकम्।

योगक्षेमकरं सत्यं सत्यमेव वचो मम ॥५॥

 पठंतः पाठयंतोऽपि ब्रह्मणैरास्तिकोत्तमैः।

धनलाभो भवेदाशु नाशमेति दरिद्रता ॥६॥

 भूभवांशभवां भूत्यै भक्तिकल्पलतां शुभाम्।

प्रार्थयत्तां यथाकामं कामधेनुस्वरूपिणीम् ॥७॥

 धनदे धनदे देवि दानशीले दयाकरे।

त्वं प्रसीद महेशानि! यदर्थं प्रार्थयाम्यहम् ॥८॥

 धराऽमरप्रिये पुण्ये धन्ये धनदपूजिते।

सुधनं र्धामिके देहि यजमानाय सत्वरम् ॥९॥

 रम्ये रुद्रप्रिये रूपे रामरूपे रतिप्रिये।

शिखीसखमनोमूर्त्ते प्रसीद प्रणते मयि ॥१०॥

 आरक्त- चरणाम्भोजे सिद्धि- सर्वार्थदायिके।

दिव्याम्बरधरे दिव्ये दिव्यमाल्यानुशोभिते ॥११॥

 समस्तगुणसम्पन्ने सर्वलक्षणलक्षिते।

शरच्चन्द्रमुखे नीले नील नीरज लोचने ॥१२॥

 चंचरीक चमू चारु श्रीहार कुटिलालके।

मत्ते भगवती मातः कलकण्ठरवामृते ॥१३॥

 हासाऽवलोकनैर्दिव्यैर्भक्तचिन्तापहारिके।

रूप लावण्य तारूण्य कारूण्य गुणभाजने ॥१४॥

 क्वणत्कंकणमंजीरे लसल्लीलाकराम्बुजे।

रुद्रप्रकाशिते तत्त्वे धर्माधरे धरालये ॥१५॥

 प्रयच्छ यजमानाय धनं धर्मेकसाधनम्।

मातस्त्वं मेऽविलम्बेन दिशस्व जगदम्बिके ॥१६॥

 कृपया करुरागारे प्रार्थितं कुरु मे शुभे।

वसुधे वसुधारूपे वसु वासव वन्दिते ॥१७॥

 धनदे यजमानाय वरदे वरदा भव।

ब्रह्मण्यैर्ब्राह्मणैः पूज्ये पार्वतीशिवशंकरे ॥१८॥

 स्तोत्रं दरिद्रताव्याधिशमनं सुधनप्रदम्।

श्रीकरे शंकरे श्रीदे प्रसीद मयिकिंकरे ॥१९॥

 पार्वतीशप्रसादेन सुरेश किंकरेरितम्।

श्रद्धया ये पठिष्यन्ति पाठयिष्यन्ति भक्तितः ॥२०॥

 सहस्रमयुतं लक्षं धनलाभो भवेद् ध्रुवम्

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्माधिपाय च।

भवन्तु त्वत्प्रसादान्मे धन- धान्यादिसम्पदः ॥२१॥

 ॥इति श्री धनलक्ष्मी स्तोत्रं संपूर्णम्॥

 According to Hindu Mythology chanting of Dhanlakshmi Stotram regularly is the most powerful way to please Goddess lakshmi and get her blessing.

How to Recite Dhanlakshmi Stotram

धनलक्ष्मी स्तोत्रम को कैसे पढ़ें

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Benefits of Dhanlakshmi Stotram

धनलक्ष्मी स्तोत्रम के लाभ

Regular recitation of Dhanlakshmi Stotram gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

Dhanlakshmi Stotram in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Aarti Collection

Ganpati Aarti
Ganga Aarti
Gayatri Aarti
Govardhan Aarti
Hanuman Aarti
Durga Aarti
Kakad Aarti
Kali Maa Aarti
Krishna Aarti
lakshmi Aarti
Maharaja Agrasen Ji Aarti
Sai Baba Aarti
Santoshi Aarti
Saraswati Aarti
Satyanarayan Aarti
Shani Dev Aarti
Shiv Aarti
Surya Aarti
Tulsi Aarti
Vishnu Aarti
Vishwakarma Aarti

Chalisa Collection

Bhairav Chalisa
Durga Chalisa
Ganesh Chalisa
Gayatri Chalisa
Hanuman Chalisa
Kaila Devi Chalisa
Kali Chalisa
Laxmi Chalisa
Navagraha Chalisa
Sai Chalisa
Saraswati Chalisa
Shani Chalisa
Shiva Chalisa
Surya Chalisa

Mantras Collection

Brihaspati Mantra
Budh Mantra
Chamunda Mantra
Chandra Mantra
Chandraghanta Mantra
Dattatreya Mantra
Devi mantra
Dhanvantri Mantra
Ganesh Mantra
Gayatri Mantra
Gorakhnath Mantra
Govardhan Puja Mantra
Hare Krishna Mantra
Kalbhairav Mantra
Kalratri Mantra
Kamakhya Mantra
Kamdev Mantra
Kanakdhara Mantra
Katyayani Mantra
Ketu Mantra
Krishna Mantra
Kuber Mantra
Laxmi Mantra
MahaMrityunjaya Mantra
Sudarshana Mantra
Surya Mantra
Surya Namaskar Mantra
Navagraha Mantra
Rahu Mantra
Ram Mantra
Sai Baba Mantra
Santhana Gopala Mantra
Saraswati Mantra
Shabar Mantra
Shailputri Mantra
Shani Mantra
Tulsi Mantra
Vishnu Mantra

Stotra Collection

Aditya Hridaya Stotra
Argala Stotra
Ashtalakshmi Stotra
Bajrang Baan
Bhaktamar Stotra
Dasavatara Strotra
Durga Stotra
Durga Stuti
Dwadasha Stotra
Gajendra Moksha Stotra
Ganpati Atharvashirsha
Ganpati Stotra
Hanuman Stotra
Kalabhairava Stotra
Kamakshi Stotram
Mahalakshmi Ashtakam
Mahishasura Mardini Strotra
Maruti Stotra
Navagraha Stotra
Nirvana Shatakam Stotra
Rahu Stotram
Ramraksha Stotra
Sankat Mochan Hanuman Ashtak
Shiv Tandav Stotra
Shiva Rudrashtakam Stotra
Siddha Kunjika Stotra
Sundar Kand

Kavach Sangrah

Durga Kavach
Hanuman Kavach
Kali Kavach
Ketu Kavach
Narayan Kavach
Rahu Kavach
Shani Kavach
Surya Kavach




Mata ki Aarti | माता की आरती

Mata ki Aarti in Hindi Lyrics

माता की आरती इन हिंदी

माता की आरती हिंदी लिरिक्स

 जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

         जय अम्बे गौरी

माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।

उज्जवल से दो‌नैना, चन्द्रवदन नीको॥

          जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।

रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥

           जय अम्बे गौरी

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।

सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥

             जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।

कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥

           जय अम्बे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।

धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥

           जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।

मधु-कैटभ दो‌मारे, सुर भयहीन करे॥

         जय अम्बे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।

आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥

       जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।

बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥

        जय अम्बे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।

भक्‍तन की दु:हरता, सुख सम्पत्ति करता॥

        जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।

मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥

        जय अम्बे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।

श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

        जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌नर गावै।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥

        जय अम्बे गौरी

माता की आरती के लाभ

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार माता दुर्गा की पूजा के बाद माता की आरती को नियमित आधार पर करना माता दुर्गा को खुश करने और आशीर्वाद पाने का सबसे अच्छा तरीका है। माता की आरती आरती के नियमित रूप से करने से मन को शांति मिलती है और घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा बाहर चली जाती हैं।

माता की आरती कैसे गाते हैं

सबसे अच्छा परिणाम पाने के लिए सुबह स्नान करके, माता दुर्गा का पूजन करके और माता की तस्वीर के सामने माता की आरती गाएं।

हिंदी  PDF/MP3 में माता की आरती डाउनलोड करें

नीचे क्लिक करके आप मुफ्त में माता की आरती को PDF/MP3  प्रारूप में डाउनलोड कर सकते हैं या प्रिंट भी कर सकते हैं।

Daily recitate Mata ki Aarti to please Durga Maata.

Click below to download Mata ki Aarti PDF /MP3




Navratri Mantra | नवरात्री मंत्र

Navratri Mantra in Sanskrit/Hindi Lyrics

नवरात्री मंत्र

Navratri Mantra for Nine Forms of Maa Durga

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।तृतीयं चन्द्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।

पंचमं स्क्न्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च ।सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः ।।

Navratri Day 1 Mantra | Mata Shailputri Mantra

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

Navratri Day 2 Mantra | Devi Brahmcharini Mantra

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

Navratri Day 3 Mantra | Mata Chandrghanta Mantra

पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसीदम तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।

Navratri Day 4 Mantra | Mata Kushmanda Mantra

वन्दे वांछित कामार्थे चंद्रार्घ्कृत शेखराम, सिंहरुढ़ा अष्टभुजा कुष्मांडा यशस्वनिम.

Navratri Day 5 Mantra | Devi Skanda Mantra

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया. शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी

Navratri Day 6 Mantra | Mata Katyayani Mantra

स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्। वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥

Navratri Day 7 Mantra | Mata Kalratri Mantra

करालवंदना धोरां मुक्तकेशी चतुर्भुजाम्। कालरात्रिं करालिंका दिव्यां विद्युतमाला विभूषिताम॥

Navratri Day 8 Mantra | Maha Gauri Mantra

पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।

वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥

Navratri Day 9 Mantra | Siddhi Datri Mantra

स्वर्णावर्णा निर्वाणचक्रस्थितां नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।शख, चक्र, गदा, पदम, धरां सिद्धीदात्री भजेम्॥

According to Hindu Mythology chanting of Navratri Mantra in Navratri is the most powerful way to please Goddess Ambe and get her blessing.

How to Recite Navratri Mantra

नवरात्री मंत्र का जाप

To get the best result you should do recitation of Navratri Mantra early morning after taking bath and in front of Goddess Durga Idol or picture.

Benefits of Navratri Mantra

नवरात्री मंत्र के लाभ

In Navratri recitation of Navratri Mantra gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

Navratri Mantra in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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दुर्गा देवी स्तुति
दुर्गा चालीसा
श्री दुर्गा सप्तश्लोकी
दुर्गा आरती
दुर्गा स्तोत्र
दुर्गा कवच

नवरात्री मंत्र
Navratri Pooja Samagri
नवरात्री व्रत कथा
9 Colours of Navratri
Navratri Pujan Vidhi
Durga Puja Dates 2020




Durga Ashtottara Sata Namavali | दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम

Durga Ashtottara Sata Namavali

दुर्गा अष्टोत्तर शतनाम

ॐ दुर्गायै नमः
ॐ शिवायै नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमः
ॐ महागौर्यै नमः
ॐ चण्डिकायै नमः
ॐ सर्वज्ञायै नमः
ॐ सर्वालोकेश्यै नमः
ॐ सर्वकर्म फलप्रदायै नमः
ॐ सर्वतीर्ध मयायै नमः
ॐ पुण्यायै नमः ॥10॥
ॐ देव योनये नमः
ॐ अयोनिजायै नमः
ॐ भूमिजायै नमः
ॐ निर्गुणायै नमः
ॐ आधारशक्त्यै नमः
ॐ अनीश्वर्यै नमः
ॐ निर्गुणायै नमः
ॐ निरहङ्कारायै नमः
ॐ सर्वगर्वविमर्दिन्यै नमः
ॐ सर्वलोकप्रियायै नमः ॥20॥
ॐ वाण्यै नमः
ॐ सर्वविध्यादि देवतायै नमः
ॐ पार्वत्यै नमः
ॐ देवमात्रे नमः
ॐ वनीश्यै नमः
ॐ विन्ध्य वासिन्यै नमः
ॐ तेजोवत्यै नमः
ॐ महामात्रे नमः
ॐ कोटिसूर्य समप्रभायै नमः
ॐ देवतायै नमः ॥30॥
ॐ वह्निरूपायै नमः
ॐ सतेजसे नमः
ॐ वर्णरूपिण्यै नमः
ॐ गुणाश्रयायै नमः
ॐ गुणमध्यायै नमः
ॐ गुणत्रयविवर्जितायै नमः
ॐ कर्मज्ञान प्रदायै नमः
ॐ कान्तायै नमः
ॐ सर्वसंहार कारिण्यै नमः
ॐ धर्मज्ञानायै नमः ॥40॥
ॐ धर्मनिष्टायै नमः
ॐ सर्वकर्मविवर्जितायै नमः
ॐ कामाक्ष्यै नमः
ॐ कामासंहन्त्र्यै नमः
ॐ कामक्रोध विवर्जितायै नमः
ॐ शाङ्कर्यै नमः
ॐ शाम्भव्यै नमः
ॐ शान्तायै नमः
ॐ चन्द्रसुर्याग्निलोचनायै नमः
ॐ सुजयायै नमः ॥50॥
ॐ जयायै नमः
ॐ भूमिष्ठायै नमः
ॐ जाह्नव्यै नमः
ॐ जनपूजितायै नमः
ॐ शास्त्रायै नमः
ॐ शास्त्रमयायै नमः
ॐ नित्यायै नमः
ॐ शुभायै नमः
ॐ चन्द्रार्धमस्तकायै नमः
ॐ भारत्यै नमः ॥60॥
ॐ भ्रामर्यै नमः
ॐ कल्पायै नमः
ॐ कराल्यै नमः
ॐ कृष्ण पिङ्गलायै नमः
ॐ ब्राह्म्यै नमः
ॐ नारायण्यै नमः
ॐ रौद्र्यै नमः
ॐ चन्द्रामृत परिवृतायै नमः
ॐ ज्येष्ठायै नमः
ॐ इन्दिरायै नमः ॥70॥
ॐ महामायायै नमः
ॐ जगत्सृष्ट्याधिकारिण्यै नमः
ॐ ब्रह्माण्ड कोटि संस्थानायै नमः
ॐ कामिन्यै नमः
ॐ कमलालयायै नमः
ॐ कात्यायन्यै नमः
ॐ कलातीतायै नमः
ॐ कालसंहारकारिण्यै नमः
ॐ योगानिष्ठायै नमः
ॐ योगिगम्यायै नमः ॥80॥
ॐ योगध्येयायै नमः
ॐ तपस्विन्यै नमः
ॐ ज्ञानरूपायै नमः
ॐ निराकारायै नमः
ॐ भक्ताभीष्ट फलप्रदायै नमः
ॐ भूतात्मिकायै नमः
ॐ भूतमात्रे नमः
ॐ भूतेश्यै नमः
ॐ भूतधारिण्यै नमः
ॐ स्वधानारी मध्यगतायै नमः ॥90॥
ॐ षडाधाराधि वर्धिन्यै नमः
ॐ मोहितायै नमः
ॐ अंशुभवायै नमः
ॐ शुभ्रायै नमः
ॐ सूक्ष्मायै नमः
ॐ मात्रायै नमः
ॐ निरालसायै नमः
ॐ निमग्नायै नमः
ॐ नीलसङ्काशायै नमः
ॐ नित्यानन्दिन्यै नमः ॥100॥
ॐ हरायै नमः
ॐ परायै नमः
ॐ सर्वज्ञानप्रदायै नमः
ॐ अनन्तायै नमः
ॐ सत्यायै नमः
ॐ दुर्लभ रूपिण्यै नमः
ॐ सरस्वत्यै नमः
ॐ सर्वगतायै नमः
ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिन्यै नमः ॥ 108 ॥

According to Hindu Mythology chanting of Durga Ashtottara Sata Namavali regularly is the most powerful way to please Goddess Durga and get her blessing.

How to chant Durga Ashtottara Sata Namavali

To get the best result you should do recitation of Durga Ashtottara Sata Namavali early morning after taking bath in front of Goddess Durga Idol or picture. You should first understand the Durga Ashtottara Sata Namavali meaning in hindi to maximize its effect.

Benefits of Durga Ashtottara Sata Namavali

Regular recitation of Durga Ashtottara Sata Namavali gives peace of mind and keeps away all the evil from your life and makes you healthy, wealthy and prosperous.

Durga Ashtottara Sata Namavali in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Download Durga Ashtottara Sata Namavali

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Navratri Pujan Vidhi | Durga Pooja Vidhi

Navaratri is very important hinuds Festival.It is very important for all to know the pooja vidhi of navratri pujan.Here you get all the details of puja vidhi .

Goddess Durga is Worshipped under nine different names in Navratri.Goddess Durga is workshipped in nine days as respectively :

  1. Shailputri
  2. Brahmacharini
  3. Chandraghanta
  4. Kuchmanda
  5. Skand Mata
  6. Katyayani
  7. Kalratri
  8. Maha Gauri
  9. Siddhidatri

Navratri Pujan Vidhi/ Navaratri Pooja Vidhi

  • Clean the place where Navratri/Navdurga puja will be perform
  • Seat on a clean Aasan.
  • Arrange all puja samagri in a puja thali.
  • On a raised platform spread a new cloth.
  • Sprinkle this holi water (Ganga jal) on all puja samagri to purify them.
  • Place a handful of Akshata/Chawal (Rice) in the centre and place a kalash.
  • Fill three-fourth of the kalashwith Ganga Jal (holy water) and place a Supari (betel nut), a flower (Phool) and some Chawal (rice) in it.
  • Arrange mango leaves (Aam ke Patte) in the kalash (finial).
  • Put the idol of Durga on the cloth.
  • Light a deepak (Lamp) with Ghee and the Agarbatti (Incense sticks).
  • Lit Dhoop batti.
  • Begin the Durga pujaby offering haldi (Turmeric), kumkum, and flowers to the Durga.
  • Offer a garland to the Durga.
  • Offer Chandan (sandal) to Durga.
  • Offer Sindoor (vermilion) to Durga.
  • Offer Attar (Scent) to Durga .
  • Offer mithayi (sweets), Nariyal (coconut) and fruits.
  • Offer Mewa (Dry fruits) to Durga.
  • Finally, perform Durga aarti with Karpoor (Camphor) and deepak.
  • At the end distribute the prasad to all present members.



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