Om Gam Ganapataye Namaha

||Om Gam Ganapataye Namaha Mantra ||

Om Gam Ganapataye Namaha is one of the most powerful Lord Ganesh Mantra.

Om Gam Ganapataye Namaha in Hindi Lyrics

|| ॐ गम गणपतये नमः ||

Om Gam Ganapataye Namaha Hindi Meaning

ॐ गम गणपतये नमः का हिंदी अर्थ

ओम भगवान् गणेश को सादर नमन और साष्टांग प्रणाम

How to chant Om Gam Ganapataye Namaha

To get the best result you should chant Om Gam Ganapataye Namaha Mantra early morning after taking bath and in front of God Ganesh Idol.

Benefits of Om Gam Ganapataye Namaha

Chanting of om gan ganapataye namah Mantra gives you peace of mind and makes you life healthy, wealthy and prosperous.

Om Gam Ganapataye Namaha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Anant Chaturdashi Vrat Katha 2020 | अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा

Anant Chaturdashi Vrat Katha

अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा

एक बार महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया और यज्ञ मंडप का निर्माण बहुत ही सुंदर व अद्भुत रुप से किया गया. उस मंडप में जल की जगह स्थल तो स्थल की जगह जल की भ्रांति पैदा होती थी. इससे दुर्योधन एक स्थल को देखकर जल कुण्ड में जा गिरे. द्रौपदी ने यह देखकर उनका उपहास किया और कहा कि अंधे की संतान भी अंधी होती है. इस कटु वचन से दुर्योधन बहुत आहत हुए और इस अपमान का बदला लेने के लिए उसने युधिष्ठिर को द्युत अर्थात जुआ खेलने के लिए बुलाया और छल से जीतकर पांडवों को बारह वर्ष का वनवास दे दिया.

वन में रहते उन्हें अनेकों कष्टों को सहना पड़ा. एक दिन वन में भगवान कृष्ण युधिष्ठिर से मिलने आए. युधिष्ठिर ने उन्हें सब हाल बताया और इस विपदा से बाहर निकलने का मार्ग भी पूछा. इस पर भगवान कृष्ण ने उन्हें अनन्त चतुर्दशी का व्रत करने को कहा और कहा कि इसे करने से खोया हुआ राज्य भी मिल जाएगा. इस वार्तालाप के बाद श्रीकृष्ण जी युधिष्ठिर को एक कथा सुनाते है.

प्राचीन काल में एक ब्राह्मण था उसकी एक कन्या थी जिसका नाम सुशीला था. जब कन्या बड़ी हुई तो ब्राह्मण ने उसका विवाह कौण्डिनय ऋषि से कर दिया. विवाह पश्चात कौण्डिनय ऋषि अपने आश्रम की ओर चल दिए. रास्ते में रात हो गई जिससे वह नदी के किनारे संध्या करने लगे. सुशीला के पूछने पर उन्होंने अनन्त व्रत का महत्व बता दिया. सुशीला ने वहीं व्रत का अनुष्ठान कर 14 गाँठों वाला डोरा अपने हाथ में बाँध लिया. फिर वह पति के पास आ गई. कौण्डिनय ऋषि ने सुशीला के हाथ में बँधे डोरे के बारे में पूछा तो सुशीला ने सारी बात बता दी. कौण्डिनय ऋषि सुशीला की बात से अप्रसन्न हो गए. उसके हाथ में बंधे डोरे को भी आग में डाल दिया. इससे अनन्त भगवान का अपमान हुआ जिससे परिणामस्वरुप कौण्डिनय ऋषि की सारी सम्पत्ति नष्ट हो गई. सुशीला ने इसका कारण डोर का आग में जलाना बताया.

पश्चाताप की अग्नि में जलते हुए ऋषि अनन्त भगवान की खोज में वन की ओर चले गए. वे भटकते-भटकते निराश होकर गिर पड़े और बेहोश हो गए. भगवान अनन्त ने उन्हें दर्शन देते हुए कहा कि मेरे अपमान के कारण ही तुम्हारी यह दशा हुई और विपत्तियाँ आई. लेकिन तुम्हारे पश्चाताप से मैं तुमसे अब प्रसन्न हूँ. अपने आश्रम में जाओ और 14 वर्षों तक विधि विधान से मेरा यह व्रत करो. इससे तुम्हारे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे. कौण्डिनय ऋषि ने वैसा ही किया और उनके सभी कष्ट दूर हो गए और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति भी हुई.

श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनन्त भगवान का व्रत किया जिससे पाण्डवों को महाभारत के युद्ध में जीत मिली.

अनन्त चतुर्दशी व्रत कथा का पाठ

भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्दशी को अनन्त भगवान (कभी ना अन्त होने वाले सृष्टि के कर्त्ता विष्णु जी) का व्रत रखकर इसे अनन्त चतुर्दशी के रुप में मनाया जाता है.

Anant Chaturdashi Vrat Katha Date 2020

1st
September 2020
(Tuesday)

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – अगस्त 31, 2020 को 08:48 AM
चतुर्दशी तिथि समाप्त – सितम्बर 01, 2020 को 09:38 AM

Benefits of Anant Chaturdashi Vrat 

अनन्त चतुर्दशी व्रत के लाभ |

अनन्त चतुर्दशी के दिन हल्दी से पीले करे हुए डोरे मैं 14 गाँठे लगाकर दाईं भुजा में बांधने से अनन्त फल प्राप्त होता है क्योंकि इन 14 गाँठों में चौदह लोक समाहित है जिनमें भगवान विष्णु बसते हैं.

Anant Chaturdashi Puja Mantra

अनन्त चतुर्दशी पूजा मंत्र

अनन्त सर्व नागानामधिप: सर्वकामद:।

सदा भूयात प्रसन्नोमे यक्तानामभयंकर:।।

Anant Chaturdashi Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Ganesh Vandana | श्री गणेश वंदना

|| Ganesh Vandana ||

|| श्री गणेश वंदना ||

Ganesh Vandana in Hindi/Sanskrit Lyrics

॥ गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलसार भक्षितम् ॥

॥ उमासुतं शोक विनाशकारणं, नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम् ॥

Ganesh Vandana in English Lyrics

॥ Gajananam Bhuta Ganathi Sevitam, Kapittha Jambu Phalasara Bhakshitam ॥

॥ Uma Sutam Shoka Vinasha Karanam, Namami Vigneshwara Pada Pankajam ॥

Ganesh Vandana Hindi Meaning

श्री गणेश वंदना का हिंदी अर्थ

मैं गजानन (जिनका हाथी के समान मुख है) को नमन करता हूं, जिनकी भुत आदि गण सेवा करते है
जो कप्पीथ और जम्बू फल के सार को खाते हैं ,
देवी उमा (पार्वती) पुत्र है और जो जीवन से सभी दुखो का विनाश करते हैं,
मैं उन विघ्नेश्वर (परमेश्वर जो जीवन के सभी विध्नों को ख़तम करते है) के कमल के सामान चरणों को नमस्कार करता हु ।

Ganesh Vandana English Meaning

I bow to Gajanan ( Who is having an Elephant Face ), Who is Served by the Bhuta Gana (Celestial Attendants or Followers) and Others,
Who Eats the Core of Kapittha and Jambu Fruits,
Who is the Son of Devi Uma ( Parvati) and who  Destruct’s all Sorrows from life,
I Prostrate at the Lotus-Feet of Vigneshwara ( The God Who Removes all obstacles of life).

Benefits of Ganesh Vandana

श्री गणेश वंदना के लाभ

Doing Ganesh Vandana  daily in the morning infront of lord Ganesha Idol will remove all the sorrows and obstacles from your life and will makes your life healthy, wealthy and prosperous.

सुबह रोज भगवान गणेश के सामने गणेश वंदना करने से आपके जीवन से सभी दुःख और बाधाएं दूर हो जाएंगी और आपका जीवन स्वस्थ, धनी और समृद्ध होगा।

Ganesh Vandana in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Ganesh Stuti | श्री गणेश स्तुति

|| Ganesh Stuti ||

|| श्री गणेश स्तुति ||

Ganesh Stuti in Hindi/Sanskrit Lyrics

स्तुति

गाइये गणपति जगवंदन |
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥

सिद्धी सदन गजवदन विनायक |
कृपा सिंधु सुंदर सब लायक़ ॥

मोदक प्रिय मृद मंगल दाता |
विद्या बारिधि बुद्धि विधाता ॥

मांगत तुलसीदास कर ज़ोरे |
बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥

Ganesh Stuti in English Lyrics

Gaiye Ganpati Jagvandan
Shankar suvan Bhavani Ke Nandan
Gaiye Ganpati Jagvandan
Shiddhi Sadan Gaj Vadan Vinayak
Kripa sindhu sundar sab layak
Gaiye Ganpati Jagvandan
Modak priya mrud mangal data
Vidya vardhi buddhi vidhata
Gaiye Ganpati Jagvandan
Mangat tulsi das kar zore
Bashin raaam siya manas more
Gaiye Ganpati Jagvandan

Ganesh Stuti English Meaning

Sing the praises of Ganpati (Lord Ganesha), who is praiseworthy by the entire world. He is Son of Goddess Paravati and God Shiva. He is the residence of triumph (siddhi) with a beautiful elephant face, the destroyer of obstacles, and the repository of kindness. His kindness is helpful for everyone. He loves Modak (a kind of sweet), he gives joy and auspiciousness, He is the creator of intelligence, and an ocean of skill and knowledge. Tulsidas requests with hands held together for “Lord Rama and Sita Mta” to reside in his mind for ever.

Ganesh Stuti Hindi Meaning

श्री गणेश स्तुति का हिंदी अर्थ

गणपति (भगवान गणेश) की प्रशंसा गाओ, जो पूरे विश्व के प्रशंसनीय है। वह देवी पारवती और शिवजी के पुत्र है। सिद्धि जिनके यहाँ निवास करती है , जिनका एक सुंदर हाथी का चेहरा हैं, जो बाधाओं का नाश करने वाले और दयालुता का भंडार है। जिनकी दयालुता सभी के लिए है , जिनको मोदक प्रिय है, जो बुद्धि के दाता है और कौशल और ज्ञान का एक महासागर है। तुलसीदास दोनों हाथ जोड़कर उनसे विनती करता है की उनकी कृपा से श्री राम भगवान और सीता माता सदैव उसके मस्तिष्क मैं वास करे ।

Benefits of Ganesh Stuti

श्री गणेश स्तुति के लाभ

Chanting of Ganesh Shloka before start of any work and keeps away all the hurdles and makes you life healthy, wealthy and prosperous.

Ganesh Stuti in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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गणेश पूजन विधि

गणेश जी की आरती

गणपति अथर्वशीर्ष

गणेश मंत्र




Pujan Samagri | Pooja Item List

In hindu religion lots of different things/items (samagri) are required to perform a pooja or pujan. This things required to perform a Puja are known as Puja SamagriPuja samagri are different for different puja to different god or goddess.



Each puja has its own importance and requires different puja samagri though some pooja items are common in each and every puja. At VOIDCAN.ORG we provide complete details of Puja Samagri required for specific Pooja for Specific God or Goddess.

List of Pujan Samagri (Pooja Items List)

Dhanteras Puja Samagri

Diwali Puja Samagri

Durga Pooja Samagri

Ganesh Poojan Samagri

Govardhan Puja Samagri

Hanuman Puja Samagri

Krishna Pooja Samagri

Kaal Bhairava Puja Samagri

Kaalashtami Puja Samagri

Kali Chaudas Puja Samagri

Kartik Poornima Puja Samagri

Kuber Puja Samagri

Lakshmi Puja Samagri

Mahashivratri Poojan Samagri

Makar Sankaranti  Puja Samagri

Navratri Pooja Samagri

Ratha Saptami Puja Samagri

Sai Baba Puja Samagri

Shiva Pujan Samagri

Tulsi Vivah Puja Samagri

Vasant Panchami Puja Samagri

Vishnu Pujan Samagri

Bhaidooj Puja Samagri

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Pradosh Vrat Katha | प्रदोष व्रत कथा

Pradosh Vrat Katha

प्रदोष व्रत कथा

स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा लेने जाती और संध्या को लौटती थी। एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी तो उसे नदी किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया जो विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था। शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर उसका राज्य हड़प लिया था। उसकी माता की मृत्यु भी अकाल हुई थी। ब्राह्मणी ने उस बालक को अपना लिया और उसका पालन-पोषण किया।

कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों के साथ देवयोग से देव मंदिर गई। वहां उनकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को बताया कि जो बालक उन्हें मिला है वह विदर्भदेश के राजा का पुत्र है जो युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता को ग्राह ने अपना भोजन बना लिया था। ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। ऋषि आज्ञा से दोनों बालकों ने भी प्रदोष व्रत करना शुरू किया।

एक दिन दोनों बालक वन में घूम रहे थे तभी उन्हें कुछ गंधर्व कन्याएं नजर आई। ब्राह्मण बालक तो घर लौट आया किंतु राजकुमार धर्मगुप्त “अंशुमती” नाम की गंधर्व कन्या से बात करने लगे। गंधर्व कन्या और राजकुमार एक दूसरे पर मोहित हो गए, कन्या ने विवाह हेतु राजकुमार को अपने पिता से मिलवाने के लिए बुलाया। दूसरे दिन जब वह पुन: गंधर्व कन्या से मिलने आया तो गंधर्व कन्या के पिता ने बताया कि वह विदर्भ देश का राजकुमार है। भगवान शिव की आज्ञा से गंधर्वराज ने अपनी पुत्री का विवाह राजकुमार धर्मगुप्त से कराया।
इसके बाद राजकुमार धर्मगुप्त ने गंधर्व सेना की सहायता से विदर्भ देश पर पुनः आधिपत्य प्राप्त किया। यह सब ब्राह्मणी और राजकुमार धर्मगुप्त के प्रदोष व्रत करने का फल था। स्कंदपुराण के अनुसार जो भक्त प्रदोषव्रत के दिन शिवपूजा के बाद एक्राग होकर प्रदोष व्रत कथा सुनता या पढ़ता है उसे सौ जन्मों तक कभी दरिद्रता नहीं होती।

How to do Pradosh Vrat Katha

प्रदोष व्रत कथा का पाठ

To get the best result you should do Pradosh Vrat Katha ( प्रदोष व्रत कथा ) in evening after taking bath and in front of Lord Shiva Idol or picture on Pradosh Tithi (प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन ).

Benefits of Pradosh Vrat Katha

प्रदोष व्रत कथा के लाभ

According to Hindu Mythology doing Pradosh Vrat Katha on Pradosh Tithi (प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी के दिन ) is the most powerful way to please Lord Shiva and get his blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार प्रदोष को प्रदोष व्रत कथा करने से शिवजी बहुत प्रसन्न होते है और सभी मनोकामनाएं पूरी करते है।

Pradosh Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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श्री हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा  १ बहुत ही चमत्कारी कृति है. धर्म शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है. हनुमान चालीसा पड़ने के बहुत लाभ है.

हनुमान चालीसा के लाभ

हनुमान जी की साधना में हनुमान चालीसा को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार हनुमान चालीसा का पाठ करने से मनुष्य के सभी भय दूर होते हैं। नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले को मंगल और शनि ग्रह की पीड़ा से शांति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी स्नान करके भगवन हनुमान की तस्वीर या मूर्ति के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करे. सर्व प्रथम भगवान् हनुमान का आवाहन करें और भगवान् हनुमान को सर्व प्रथम आसन अर्पित करें, तत्पश्चात पैर धोने के लिए जल समर्पित करें  आचमन अर्पित करें ,स्नान हेतु जल समर्पित करें ,तिलक करें , धुप -दीप दिखाएं  ,प्रसाद अर्पित करें, आचमन हेतु जल अर्पित करें, तत्पश्चात नमस्कार करें। तत्पश्चात हनुमान चालीसा का पाठ करे 

श्री हनुमान चालीसा हिंदी में अनुवाद सहित

 दोहा

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि |

बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ||

 “श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।”

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार |

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ||

 “हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।”

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥

 “श्री हनुमान जी!आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।”

राम दूत अतुलित बलधामा,

अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥

 “हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नहीं है।”

महावीर विक्रम बजरंगी,

कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥

 “हे महावीर बजरंग बली!आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।”

कंचन बरन बिराज सुबेसा,

कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥

 “आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।”

हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे,

काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥

 “आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।”

शंकर सुवन केसरी नंदन,

तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥

 “हे शंकर के अवतार!हे केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।”

विद्यावान गुणी अति चातुर,

राम काज करिबे को आतुर॥7॥

 “आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।”

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,

राम लखन सीता मन बसिया॥8॥

 “आप श्री राम चरित सुनने में आनन्द रस लेते है।श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय में बसे रहते है।”

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा,

बिकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥

 “आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।”

भीम रूप धरि असुर संहारे,

रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥

 “आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्देश्यों को सफल कराया।”

लाय सजीवन लखन जियाये,

श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥

“आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।”

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई,

तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥

 “श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।”

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं,

अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥

 “श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।”

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,

नारद, सारद सहित अहीसा॥14॥

 “श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।”

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥

 “यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।”

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,

राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥

 “आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया , जिसके कारण वे राजा बने।”

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना,

लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥

 “आपके उपदेश का विभीषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।”

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,

लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥

 “जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे।दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।”

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥

 “आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।”

दुर्गम काज जगत के जेते,

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥

 “संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।”

राम दुआरे तुम रखवारे,

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥

 “श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले है, जिसमें आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।”

सब सुख लहै तुम्हारी सरना,

तुम रक्षक काहू को डरना ॥22॥

 “जो भी आपकी शरण में आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।”

आपन तेज सम्हारो आपै,

तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥

 “आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।”

भूत पिशाच निकट नहिं आवै,

महावीर जब नाम सुनावै॥24॥

 “जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते।”

नासै रोग हरै सब पीरा,

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥

 “वीर हनुमान जी!आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है, और सब पीड़ा मिट जाती है।”

संकट तें हनुमान छुड़ावै,

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥

 “हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।”

सब पर राम तपस्वी राजा,

तिनके काज सकल तुम साजा॥27॥

 “तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।”

और मनोरथ जो कोइ लावै,

सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

 “जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।”

चारों जुग परताप तुम्हारा,

है परसिद्ध जगत उजियारा॥ 29॥

“चारों युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।”

साधु सन्त के तुम रखवारे,

असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥

 “हे श्री राम के दुलारे ! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।”

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,

अस बर दीन जानकी माता॥31॥

 “आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।”

राम रसायन तुम्हरे पासा,

सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

 “आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।”

तुम्हरे भजन राम को पावै,

जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥

 “आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।”

अन्त काल रघुबर पुर जाई,

जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥ 34॥

 “अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।”

और देवता चित न धरई,

हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥

 “हे हनुमान जी!आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।”

संकट कटै मिटै सब पीरा,

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

 “हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।”

जय जय जय हनुमान गोसाईं,

कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥

 “हे स्वामी हनुमान जी!आपकी जय हो, जय हो, जय हो!आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।”

जो सत बार पाठ कर कोई,

छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥

 “जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।”

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ 39॥

 “भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।”

तुलसीदास सदा हरि चेरा,

कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥

 “हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।”

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभुप॥

 “हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरूप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।”

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Ravivar Vrat Katha | रविवार व्रत कथा

Ravivar Vrat Katha | Sunday

रविवार व्रत कथा | इतवार व्रत कथा

प्राचीन काल में किसी नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह प्रत्येक रविवार को सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर आंगन को गोबर से लीपकर स्वच्छ करती थी। उसके बाद सूर्य भगवान की पूजा करने के बाद भोजन तैयार कर भगवान को भोग लगाकर ही स्वयं भोजन करती थी। भगवान सूर्यदेव की कृपा से उसे किसी प्रकार की चिन्ता व कष्ट नहीं था। धीरे-धीरे उसका घर धन-धान्य से भर रहा था।उस बुढ़िया को सुखी होते देख उसकी पड़ोसन उससे बुरी तरह जलने लगी। बुढ़िया ने कोई गाय नहीं पाल रखी थी। अतः रविवार के दिन घर लीपने केलिए वह अपनी पड़ोसन के आंगन में बंधी गाय का गोबर लाती थी। पड़ोसन ने कुछ सोचकर अपनी गाय को घर के भीतर बांध दिया। रविवार को गोबर न मिलने से बुढ़िया अपना आंगन नहीं लीप सकी। आंगन न लीप पाने के कारण उस बुढ़िया ने सूर्य भगवान को भोग नहीं लगाया और उस दिन स्वयं भी भोजन नहीं किया। सूर्यास्त होने पर बुढ़िया भूखी-प्यासी सो गई। इस प्रकार उसने निराहर व्रत किया। रात्रि में सूर्य भगवान ने उसे स्वप्न में दर्शन दिए और व्रत न करने तथा उन्हें भोग न लगाने का कारण पूछा। बुढ़िया ने बहुत ही करुण स्वर में पड़ोसन के द्वारा घर के अन्दर गाय बांधने और गोबर न मिल पाने की बात कही। सूर्य भगवान ने अपनी भक्त की परेशानी का कारण जानकर उसके सब दुःख दूर करते हुए कहा- हे माता, हम तुमको एक ऐसी गाय देते हैं जो सभी इच्छाएं पूर्ण करती है। क्यूंकि तुम हमेशा रविवार को पूरा घर गाय के गोबर से लीपकर भोजन बनाकर मेरा भोग लगाकर ही स्वयं भोजन करती हो, इससे मैं बहुत प्रसन्न हूं। मेरा व्रत करने व कथा सुनने से निर्धन को धन और बांझ स्त्रियों को पुत्र की प्राप्ति होती है। स्वप्न में उस बुढ़िया को ऐसा वरदान देकर भगवान सूर्य अंतर्ध्यान हो गए।
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उस बुढ़िया की आंख खुली तो वह अपने घर के आंगन में सुन्दर गाय और बछड़े को देखकर हैरान हो गई। गाय को आंगन में बांधकर उसने जल्दी से उसे चारा लाकर खिलाया। पड़ोसन ने उस बुढ़िया के आंगन में बंधी सुन्दर गाय और बछड़े को देखा तो वह उससे और अधिक जलने लगी। तभी गाय ने सोने का गोबर किया। गोबर को देखते ही पड़ोसन की आंखें फट गईं। पड़ोसन ने उस बुढ़िया को आसपास न पाकर तुरन्त उस गोबर को उठाया और अपने घर ले गई तथा अपनी गाय का गोबर वहां रख आई। सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिनों में धनवान हो गई। गाय प्रति दिन सूर्योदय से पूर्व सोने का गोबर किया करती थी और बुढ़िया के उठने के पहले पड़ोसन उस गोबर को उठाकर ले जाती थी।

बहुत दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता ही नहीं चला। बुढ़िया पहले की तरह हर रविवार को भगवान सूर्यदेव का व्रत करती रही और कथा सुनती रही। लेकिन सूर्य भगवान को जब पड़ोसन की चालाकी का पता चला तो उन्होंने तेज आंधी चलाई। आंधी का प्रकोप देखकर बुढ़िया ने गाय को घर के भीतर बांध दिया। सुबह उठकर बुढ़िया ने सोने का गोबर देखा उसे बहुत आश्चर्य हुआ। उस दिन के बाद बुढ़िया गाय को घर के भीतर बांधने लगी। सोने के गोबर से बुढ़िया कुछ ही दिन में बहुत धनी हो गई। उस बुढ़िया के धनी होने से पड़ोसन बुरी तरह जल-भुनकर राख हो गई। जब उसे सोने का गोबर पाने का कोई रास्ता नहीं सूझा तो वह राजा के दरबार में पहुंची और राजा को सारी बात बताई। राजा को जब बुढ़िया के पास सोने के गोबर देने वाली गाय के बारे में पता चला तो उसने अपने सैनिक भेजकर बुढ़िया की गाय लाने का आदेश दिया। सैनिक उस बुढ़िया के घर पहुंचे। उस समय बुढ़िया सूर्य भगवान को भोग लगाकर स्वयं भोजन ग्रहण करने वाली थी। राजा के सैनिकों ने गाय खोला और अपने साथ महल की ओर ले चले। बुढ़िया ने सैनिकों से गाय को न ले जाने की प्रार्थना की, बहुत रोई-चिल्लाई लेकिन राजा के सैनिक नहीं माने। गाय के चले जाने से बुढ़िया को बहुत दुःख हुआ। उस दिन उसने कुछ नहीं खाया और सारी रात सूर्य भगवान से गाय को पुन: प्राप्त करने हेतु प्रार्थना करने लगी। दूसरी ओर राजा गाय को देखकर राजा बहुत खुश हुआ। लेकिन अगले दिन सुबह जैसे ही वह उठा सारा महल गोबर से भरा देखकर घबरा गया। उसी रात भगवान सूर्य उसके सपने में आए और बोले- हे राजन। यह गाय वृद्धा को लौटाने में ही तुम्हारा भला है। रविवार के व्रत से प्रसन्न होकर ही उसे यह गाय मैंने दी है।

सुबह होते ही राजा ने वृद्धा को महल में बुलाकर बहुत-से धन के साथ सम्मान सहित गाय लौटा दी और क्षमा मांगी। इसके बाद राजा ने पड़ोसन को दण्ड दिया। इतना करने के बाद राजा के महल से गंदगी दूर हो गई। उसी दिन राज्य में घोषणा कराई कि सभी स्त्री-पुरुष रविवार का व्रत किया करें। रविवार का व्रत करने से सभी लोगों के घर धन-धान्य से भर गए। चारों ओर खुशहाली छा गई। सभी लोगों के शारीरिक कष्ट दूर हो गए।

How to do Ravivar Vrat Katha

रविवार व्रत कथा का पाठ

To get the best result you should do Ravivar Vrat Katha ( रविवार व्रत कथा ) early morning after taking bath and in front of Surya Dev/Sun on Sunday.

Benefits of Ravivar Vrat Katha

रविवार व्रत कथा के लाभ

According to Hindu Mythology doing Ravivar Vrat Katha on Sunday is the most powerful way to please Lord Surya and get his blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार रविवार / इतवार  को रविवार व्रत कथा करने से सूर्य भगवन  बहुत प्रसन्न होते है और सभी मनोकामनाएं पूरी करते है।

Ravivar Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Mangalvar Vrat Katha | मंगलवार व्रत कथा

MANGALVAR VRAT KATHA

मंगलवार व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है किसी नगर में एक ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे उनके कोई संतान न होन कारण वह बेहद दुखी थे. हर मंगलवार ब्राह्मण वन में हनुमान जी की पूजा के करने जाता था. वह पूजा करके बजरंगबली से एक पुत्र की कामना करता था. उसकी पत्नी भी पुत्र की प्राप्ति के लिए मंगलवार का व्रत करती थी. वह मंगलवार के दिन व्रत के अंत में हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करती थी.

एक बार व्रत के दिन ब्राह्मणी ने भोजन नहीं बना पाया और न ही हनुमान जी को भोग लगा सकी. तब उसने प्रण किया कि वह अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करेगी. वह भूखी प्यासी छह दिन तक पड़ी रही. मंगलवार के दिन वह बेहोश हो गई. हनुमान जी उसकी श्रद्धा और भक्ति देखकर प्रसन्न हुए. उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप ब्राह्मणी को एक पुत्र दिया और कहा कि यह तुम्हारी बहुत सेवा करेगा.

बालक को पाकर ब्राह्मणी बहुत खुश हुई. उसने बालक का नाम मंगल रखा. कुछ समय उपरांत जब ब्राह्मण घर आया, तो बालक को देख पूछा कि वह कौन है? पत्नी बोली कि मंगलवार व्रत से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उसे यह बालक दिया है. यह सुनकर ब्राह्मण को अपनी पत्नी की बात पर विश्वास नहीं हुआ. एक दिन मौका पाकर ब्राह्मण ने बालक को कुएं में गिरा दिया.

घर पर लौटने पर ब्राह्मणी ने पूछा कि मंगल कहां है? तभी पीछे से मंगल मुस्कुरा कर आ गया. उसे वापस देखकर ब्राह्मण चौंक गया. उसी रात को बजरंगबली ने ब्राह्मण को सपने में दर्शन दिए और बताया कि यह पुत्र उन्होंने ही उसे दिया है. सच जानकर ब्राह्मण बहुत खुश हुआ. जिसके बाद से ब्राह्मण दंपत्ति नियमित रूप से मंगलवार व्रत रखने लगे. मंगलवार का व्रत रखने वाले मनुष्य पर हनुमान जी की अपार कृपा होती है.

How to do Mangalvar Vrat Katha | Tuesday

मंगलवार व्रत कथा का पाठ

To get the best result you should do Mangalvar Vrat Katha ( मंगलवार व्रत कथा ) early morning after taking bath and in front of Lord Hanuman Idol or picture on Tuesday.

Benefits of Mangalvar Vrat Katha

मंगलवार व्रत कथा के लाभ

According to Hindu Mythology doing Mangalvar Vrat Katha on Tuesday is the most powerful way to please Lord Hanuman and get his blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार मंगलवार  को मंगलवार व्रत कथा  करने से हनुमानजी  बहुत प्रसन्न होते है और सभी मनोकामनाएं पूरी करते है।

Mangalvar Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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Mahalakshmi Vrat Katha | महालक्ष्मी व्रत कथा

Mahalakshmi Vrat Katha

महालक्ष्मी व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है कि एक बार एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था. वह ब्राह्मण नियमित रुप से श्री विष्णु का पूजन किया करता था. उसकी पूजा-भक्ति से प्रसन्न होकर उसे भगवान श्री विष्णु ने दर्शन दिये़ और ब्राह्मण से अपनी मनोकामना मांगने के लिए कहा, ब्राह्मण ने लक्ष्मी जी का निवास अपने घर में होने की इच्छा जाहिर की. यह सुनकर श्री विष्णु जी ने लक्ष्मी जी की प्राप्ति का मार्ग ब्राह्मण को बता दिया. जिसमें श्री हरि ने बताया कि मंदिर के सामने एक स्त्री आती है जो यहां आकर उपले थापती है. तुम उसे अपने घर आने का आमंत्रण देना और वह स्त्री ही देवी लक्ष्मी है.

देवी लक्ष्मी जी के तुम्हारे घर आने के बाद तुम्हारा घर धन और धान्य से भर जाएगा. यह कहकर श्री विष्णु चले गए. अगले दिन वह सुबह चार बजे ही मंदिर के सामने बैठ गया. लक्ष्मी जी उपले थापने के लिए आईं तो ब्राह्मण ने उनसे अपने घर आने का निवेदन किया. ब्राह्मण की बात सुनकर लक्ष्मी जी समझ गई कि यह सब विष्णु जी के कहने से हुआ है.

लक्ष्मी जी ने ब्राह्मण से कहा की तुम महालक्ष्मी व्रत करो, 16 दिनों तक व्रत करने और सोलहवें दिन रात्रि को चन्द्रमा को अर्ध्य देने से तुम्हारा मनोरथ पूरा होगा. ब्राह्मण ने देवी के कहे अनुसार व्रत और पूजन किया और देवी को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पुकारा, लक्ष्मी जी ने अपना वचन पूरा किया. उस दिन से यह व्रत इस दिन विधि‍-विधान से करने व्यक्ति की मनोकामना पूरी होती है.

How to do Mahalakshmi Vrat Katha

महालक्ष्मी व्रत कथा का पाठ

To get the best result you should do Mahalakshmi Vrat Katha ( महालक्ष्मी व्रत कथा ) early morning after taking bath and in front of Goddess Laxmi Idol or picture on Friday.

Benefits of Mahalakshmi Vrat Katha

महालक्ष्मी व्रत कथा के लाभ

According to Hindu Mythology doing Mahalakshmi Vrat Katha on Friday is the most powerful way to please Goddess Mahalakshmi and get her blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार शुक्रवार के दिन  को महालक्ष्मी का व्रत और कथा करने से लक्ष्मी माता  बहुत प्रसन्न होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी करती है।

Mahalakshmi Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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