Hanuman Chalisa Meaning in Hindi

Hanuman Chalisa Meaning

Hanuman Chalisa is considered to be very influential in the Sadhna of Hanuman ji. With daily recitation it is also very important to understand the Hanuman Chalisa Meaning in Hindi to get the better results.

Hanuman Chalisa with Hindi Meaning

 दोहा

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि |

बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ||

 “श्री गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।”

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन-कुमार |

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ||

 “हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।”

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥

 “श्री हनुमान जी!आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों, स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।”

राम दूत अतुलित बलधामा,

अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥

 “हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नहीं है।”

महावीर विक्रम बजरंगी,

कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥

 “हे महावीर बजरंग बली!आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।”

कंचन बरन बिराज सुबेसा,

कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥

 “आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।”

हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे,

काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥

 “आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।”

शंकर सुवन केसरी नंदन,

तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥

 “हे शंकर के अवतार!हे केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।”

विद्यावान गुणी अति चातुर,

राम काज करिबे को आतुर॥7॥

 “आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।”

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,

राम लखन सीता मन बसिया॥8॥

 “आप श्री राम चरित सुनने में आनन्द रस लेते है।श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय में बसे रहते है।”

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा,

बिकट रूप धरि लंक जरावा॥9॥

 “आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।”

भीम रूप धरि असुर संहारे,

रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥

 “आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्देश्यों को सफल कराया।”

लाय सजीवन लखन जियाये,

श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥

“आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।”

रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई,

तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥

 “श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।”

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं,

अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥

 “श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।”

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,

नारद, सारद सहित अहीसा॥14॥

 “श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।”

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥

 “यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।”

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,

राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥

 “आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया , जिसके कारण वे राजा बने।”

तुम्हरो मंत्र विभीषण माना,

लंकेस्वर भए सब जग जाना॥17॥

 “आपके उपदेश का विभीषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।”

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,

लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥

 “जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे।दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।”

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥

 “आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।”

दुर्गम काज जगत के जेते,

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥

 “संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।”

राम दुआरे तुम रखवारे,

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥21॥

 “श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले है, जिसमें आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।”

सब सुख लहै तुम्हारी सरना,

तुम रक्षक काहू को डरना ॥22॥

 “जो भी आपकी शरण में आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।”

आपन तेज सम्हारो आपै,

तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥

 “आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।”

भूत पिशाच निकट नहिं आवै,

महावीर जब नाम सुनावै॥24॥

 “जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते।”

नासै रोग हरै सब पीरा,

जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥25॥

 “वीर हनुमान जी!आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है, और सब पीड़ा मिट जाती है।”

संकट तें हनुमान छुड़ावै,

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥

 “हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।”

सब पर राम तपस्वी राजा,

तिनके काज सकल तुम साजा॥27॥

 “तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।”

और मनोरथ जो कोइ लावै,

सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥

 “जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।”

चारों जुग परताप तुम्हारा,

है परसिद्ध जगत उजियारा॥ 29॥

“चारों युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।”

साधु सन्त के तुम रखवारे,

असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥

 “हे श्री राम के दुलारे ! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।”

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,

अस बर दीन जानकी माता॥31॥

 “आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।”

राम रसायन तुम्हरे पासा,

सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥

 “आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।”

तुम्हरे भजन राम को पावै,

जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥

 “आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।”

अन्त काल रघुबर पुर जाई,

जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥ 34॥

 “अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।”

और देवता चित न धरई,

हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥

 “हे हनुमान जी!आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।”

संकट कटै मिटै सब पीरा,

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥

 “हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।”

जय जय जय हनुमान गोसाईं,

कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥

 “हे स्वामी हनुमान जी!आपकी जय हो, जय हो, जय हो!आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।”

जो सत बार पाठ कर कोई,

छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥

 “जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।”

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,

होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ 39॥

 “भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।”

तुलसीदास सदा हरि चेरा,

कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥

 “हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।”

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभुप॥

 “हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरूप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।”

Daily recitate Hanuman Chalisa meaning in Hindi to please lord Haumanji.

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Runa Vimochana Ganesha Stotram

Runa Vimochana Ganesha Stotram

Runa Vimochana Ganesha Stotram English Lyrics

Dhyanam

Sindhoora Varnam, Dwibhujam Ganesam,
Lambodharam Padma Dale Nivishtam,

Brahamadhi Devai Pari Sevyamanam,
Sidhairaryutham Tham Pranamami Devam

Stotram

Srushtyadhou Brahmana Samyak Poojitha Phala Sidhaye ,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Tripurasya Vadhaath Poorvam Shambunaa Samyak Architha,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Hiranya Kasypaadheenaam Vadharthe Vishunaarchitha,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Mahishasya Vadhe Devyaa Gana Nadha Prapoojitha,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Tharakasya Vadhaath Poorvam, Kumarena Prapoojitha,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Bhaskarena Ganeso Hi Poojitha Schavi Sidhaye,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Sasinaa Kanthi Vrudhyartham Poojitho Gana Nayaka,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Palanaya Cha Thapasaam Viswamithra Poojitha,
Sadaiva Parvathi Puthra Runa Nasam Karothumay

Idham Thw Runa Haram Stotram , Theevra Daridrya Nasanam,
Yeka Varam Paden Nithyam Varshamekam Samahitha,
Daridryam Darunam Thyakthwa, Kubhera Samatham Vrajeth

Benefits of Runa Vimochana Ganesha Stotram

If you have lot of  debt and there is no way to get rid of debt, then on Wednesday start reading  regular 11 lessons of Ganapati Stotra for 45 days. You will certainly get rid of all kinds of debt and financial constraints.

How To Read Runa Vimochana Ganesha Stotram

According to the Hindu Dharam Shastras, after reading the prayer of God Shri Ganesh Ganesh idol in front of the statue or in front of the statue, recite Ganesh Stotram. By laying red clothes on the chowk, establishing the statue of Shri Ganesh, offering the chola of vermilion and jasmine oil to Shri Ganapati and set the lamps of desi ghee on the left hand and the oil lamp on the right hand.

First of all, invite Lord Ganesha, then devote water to wash feet, offer devotion, dedicate water for bath, make tilak, show sweets, prasad (good gram and gram flour) and offer durva, offer water for peace, salute. Then read Ganesh Stotram from Debt Relief.

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गुरु गोरखनाथ मंत्र | Guru Gorakhnath Mantra

Guru Gorakhnath Mantra in Hindi

गुरु गोरखनाथ मंत्र

।।सोहं गोरक्ष गुरुर्वै नमः ।।

  ह्रीं श्रीं गों गोरक्ष हुं फट स्वाहा ||1||

ॐ ह्रीं श्रीं गों गोरक्ष हुं हुं निरंजनात्मने हुं फट स्वाहा ||2||

ॐ  श्रीं गों लीं हं हां गोरक्षनाथाय निरंजनात्मने हं सं फट हंस: ||3||

ॐ वज्र में कोठा, वज्र में ताला, वज्र में बंध्या दस्ते द्वारा, तहां वज्र का लग्या किवाड़ा, वज्र में चौखट, वज्र में कील, जहां से आय, तहां ही जावे, जाने भेजा, जांकू खाए, हमको फेर न सूरत दिखाए, हाथ कूँ, नाक कूँ, सिर कूँ, पीठ कूँ, कमर कूँ, छाती कूँ जो जोखो पहुंचाए, तो गुरु गोरखनाथ की आज्ञा फुरे, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र इश्वरोवाचा.||4||

गुरु गोरखनाथ मंत्र के लाभ

गुरु गोरखनाथ मंत्र का प्रयोग करके कोई भी व्यक्ति अपनी ज़िन्दगी में सफलता प्राप्त कर सकता है. गुरु गोरखनाथ मंत्र साधना से वशीकरण करके किसी भी व्यक्ति से अपने अनुरूप काम करवाया जा सकता है.

गुरु गोरखनाथ मंत्र का जाप कैसे करे

गुरु गोरखनाथ मंत्र सिद्धि तीव्र असर करने वाली मंत्र विद्या के अंतर्गत आती है. गुरु गोरखनाथ मंत्र साधना का प्रयोग करने वाले को सावधानियां बरतनी चाहिए. गुरु गोरखनाथ मंत्र की साधना के लिए लाल या सफ़ेद रंग का आसन उपयुक्त होता है. गोरखनाथ मंत्र का जाप करते हुए गुरु गोरखनाथ के प्रति मन में पूर्ण श्रद्धा होनी चाहिए.गुरु गोरखनाथ मंत्र की साधना के लिए रात का समय शुभ होता है. इस मंत्र का जाप 31 बार माला की मदद से किया जाना चाहिए.

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गोरख नाथ चालीसा




दत्तात्रेय मंत्र साधना

भगवान दत्तात्रेय

यदि सच्चे मन, कर्म और वाणी से भगवान् दत्तात्रेय की मंत्र साधना की जावे तो साधकों को भगवान् दत्त शीघ्र ही सब मनोकामना पूर्ण करते है l दत्तात्रेय में भगवन और गुरु दोनों रूप समाहित हैं और इसलिए उन्हें ‘ परब्रह्ममूर्ति सदगुरु ‘ और ‘ श्री गुरुदेव दत्त ‘ भी कहते है। उन्हें गुरु वंश का प्रथम गुरु, साधक, योगी और वैज्ञानिक माना जाता है। वे श्री हरि विष्णु, शिवजी और ब्रह्मा जी के त्रय अवतार हैं। दत्त मंत्र

Dattatreya Mantra Sadhna

Some special mantras and hymns have been given for the Lord Dattatreya Mantra Saadhna . Lord Dattatreya Gayatri and Tatratok Mantra are the main, whose routine chanting has been given according to the entire legislation. In  Dattatreya Mantra Saadhna we should chant the rosemary of every day, which leads to mental development, intellectualization comes, enemy fear goes away, strength gets strengthened, the ability to overcome problems and reach the desired goal Is received.

दत्तात्रेय मंत्र साधना

भगवान दत्तात्रेय मंत्र साधना  के लिए कुछ विशेष मंत्र बताये गए हैं। भगवान दत्तात्रेय  के गायत्री और तांत्रोत्क मंत्र का नियमित जाप पूरे विधि-विधान से करने से मानसिक विकास होता है, बुद्धि बढ़ती है, मन का भय दूर होता है, आत्मबल मिलता है, समस्याएं दूर होती है और मनोवांछित लक्ष्य तक पहुंचने की शक्ति हासिल होती है। दत्तात्रेय मंत्र  संकटनाशक और कामनापूर्तिकारक हैं।

गुरुवार और पूर्णिमा की शाम दत्तात्रेय मंत्र साधनाके लिए बहुत ही शुभ मानी गयी है। इसलिये इस दिन स्फटिक माला से जितने ज्यादा मंत्र जाप कर सकते है करना चाहिये। मंत्र जाप से पूर्व शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए

दत्तात्रेय मंत्र साधना विधि

  • १ चौकी पर लाल रंग का कपडा बिछाकर उस पर भगवान् दत्तात्रेय मूर्ति स्थापित करे।
  • एक मिट्टी के घड़े के ऊपर एक सूखे नारियल को लाल चुनरी मे लपेट कर चारो तरफ आम के पते लगाकर रख दे।
  • तुलसी दल, बिल्वपत्र और गेंदे के फुल भगवान को अर्पित करे ।
  • मेवे का भोग लगा दे।
  • 5 अखंड दीपक जलाये जो साधना शुरु होने से लेकर पूरी रात तक जलते रहेंगे।
  • दत्तात्रेय मंत्र साधना  के लिए आपका आसान पीला या लाल रंग का होना चाहिए।
  • अपने आसान के पास एक बर्तन मे पानी से भरा बर्तन रखे।
  • बाएं हाथ में फूल और चावल के कुछ दाने लेकर विनियोग की प्रक्रिया निम्नलिखित मंत्र के साथ करे :
    ऊँ अस्य श्री दत्तात्रेय स्तोत्र मंत्रस्य भगवान नारद ऋषिः अनुष्टुप छंदः,
    श्री दत्त परमात्मा देवताः, श्री दत्त प्रीत्यर्थे जपे विनोयोगः!
  • फूल और चावल सिर झुकाकर भगवान् दत्तात्रेय की मूर्ति को अर्पित कर दे।
  •  दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करे
  • अब दत्त मंत्र  का स्फटिक की माला से जाप करे

दत्तात्रेय मंत्र

दत्तात्रेय ध्यान मंत्र

जटाधाराम पाण्डुरंगं शूलहस्तं कृपानिधिम।
सर्व रोग हरं देव,दत्तात्रेयमहं भज॥

दत्तात्रेय गायत्री मंत्र

ll ॐ दिगंबराय विद्महे योगीश्रारय् धीमही तन्नो दत: प्रचोदयात ll

दत्त तांत्रोत्क मंत्र-

ll ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नम: ll

श्री दत्तात्रेय स्तोत्र

दत्तात्रेय जयंती व्रत कथा




श्री दत्तात्रेय स्तोत्र | Shri Dattatreya Stotram

भगवान दत्तात्रेय

भगवान दत्तात्रेय भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनो के अवतार है। वह अनसूया और महर्षि अत्री के पुत्र थे। दत्तात्रेय नाम दो शब्दों में विभाजित किया जा सकता है, दत्त (साधनकर्ता) और अत्री (ऋषि अत्री)। भगवान दत्तात्रेय को पर्यावरण शिक्षा के गुरु के रूप में माना जाता है .

Shri Dattatreya Stotram

श्री दत्तात्रेय स्तोत्रम् हिंदी में

जटाधरं पाण्डुरंगं शूलहस्तं दयानिधिम्।
सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥१॥

जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थितिसंहारहेतवे।
भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥२॥

जराजन्मविनाशाय देहशुद्धिकराय च।
दिगंबर दयामूर्ते दत्तात्रेय नमोस्तुते॥३॥

कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च।
वेदशास्स्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥४॥

ह्रस्वदीर्घकृशस्थूलनामगोत्रविवर्जित!
पञ्चभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥५॥

यज्ञभोक्त्रे च यज्ञेय यज्ञरूपधराय च।
यज्ञप्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥६॥

आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः।
मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥७॥

भोगालयाय भोगाय योगयोग्याय धारिणे।
जितेन्द्रिय जितज्ञाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥८॥

दिगंबराय दिव्याय दिव्यरूपधराय च।
सदोदितपरब्रह्म दत्तात्रेय नमोस्तुते॥९॥

जंबूद्वीप महाक्षेत्र मातापुरनिवासिने।
भजमान सतां देव दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१०॥

भिक्षाटनं गृहे ग्रामे पात्रं हेममयं करे।
नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोस्तुते॥११॥

ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे चाकाशभूतले।
प्रज्ञानघनबोधाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१२॥

अवधूत सदानन्द परब्रह्मस्वरूपिणे ।
विदेह देहरूपाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१३॥

सत्यरूप! सदाचार! सत्यधर्मपरायण!
सत्याश्रय परोक्षाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१४॥

शूलहस्त! गदापाणे! वनमाला सुकन्धर!।
यज्ञसूत्रधर ब्रह्मन् दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१५॥

क्षराक्षरस्वरूपाय परात्परतराय च।
दत्तमुक्तिपरस्तोत्र! दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१६॥

दत्तविद्याड्यलक्ष्मीश दत्तस्वात्मस्वरूपिणे।
गुणनिर्गुणरूपाय दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१७॥

शत्रुनाशकरं स्तोत्रं ज्ञानविज्ञानदायकम्।
आश्च सर्वपापं शमं याति दत्तात्रेय नमोस्तुते॥१८॥

इदं स्तोत्रं महद्दिव्यं दत्तप्रत्यक्षकारकम्।
दत्तात्रेयप्रसादाच्च नारदेन प्रकीर्तितम् ॥१९॥

इति श्रीनारदपुराणे नारदविरचितं
श्रीदत्तात्रेय स्तोत्रं संपुर्णमं।।

।। श्रीगुरुदेव दत्त ।।

दत्तात्रेय स्तोत्र के लाभ

Benefits of  Shri Dattatreya stotram

भगवान दत्तात्रेय की साधना में दत्तात्रेय स्तोत्र को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार श्री दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करने से मन को शांति और घबराहट से मुक्ति मिलती है।

According to Hindu Mythology recitation of Shri Dattatreya stotram gives peace of mind.

दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार  सुबह जल्दी स्नान करके भगवान दत्तात्रेय की तस्वीर या मूर्ति के सामने श्री दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करे. सर्व प्रथम भगवान् भगवान दत्तात्रेय का आवाहन करें और भगवान दत्तात्रेय को सर्व प्रथम आसन अर्पित करें, तत्पश्चात पैर धोने के लिए जल समर्पित करें  आचमन अर्पित करें ,स्नान हेतु जल समर्पित करें ,तिलक करें , धुप -दीप दिखाएं  ,प्रसाद अर्पित करें, आचमन हेतु जल अर्पित करें, तत्पश्चात नमस्कार करें। तत्पश्चात श्री दत्तात्रेय स्तोत्र का पाठ करे 

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दत्तात्रेय मंत्र साधना

दत्तात्रेय जयंती व्रत कथा




कुबेर पूजा विधि

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार धन प्राप्ति के लिए कुबेर पूजन करना चाहिए। कुबेर पूजा विधि पूर्वक और पूरी कुबेर पूजन सामग्री के साथ करने से कुबेर भगवान् आपको मालामाल कर सकते है।

Kuber Puja Vidhi In Hindi

कुबेर पूजन सामग्री

कुबेर जी को बिठाने के लिए चौकी
चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपडा
जल कलश
पंचामृत
रोली , मोली , लाल चन्दन
हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, दूर्वा
गंगाजल
सिन्दूर
लाल फूल और माला
इत्र
मिठाई
धानी
सुपारी
लौंग ,
इलायची
नारियल
फल
पंचमेवा
घी का दीपक
धूप , अगरबत्ती
कपूर

कुबेर पूजन सामग्री  किसी भी किराने की दुकान या पूजन सामग्री की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं

कुबेर पूजा का सकंल्प

कुबेर पूजन शुरू करने से पहले सकंल्प लें। संकल्प करने से पहले हाथों में जल, फूल व चावल लें। सकंल्प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस वर्ष, उस वार, तिथि उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें। अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें।

कुबेर पूजन विधि

  • अपने बाएँ हाथ की हथेली में जल लें एवं दाहिने हाथ की अनामिका उँगली व आसपास की उँगलियों से निम्न मंत्र बोलते हुए स्वयं के ऊपर एवं पूजन सामग्रियों पर जल छिड़कें-
  • ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्था गतोsपि वा l या स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्रामायंतर: शुचि: ll
  • सर्वप्रथम चौकी पर लाल कपडा बिछा कर कुबेर जी की मूर्ति स्थापित करे (मूर्ति ना हो तो कुबेर यन्त्र या फिर तिजोरी की पूजा करे)
  • कंकु से स्वस्तिक का चिन्न बनाये
  • श्रद्धा भक्ति के साथ घी का दीपक लगाएं। दीपक रोली/कुंकु, अक्षत, पुष्प , से पूजन करें।
  • अगरबत्ती/धूपबत्ती जलाये
  • जल भरा हुआ कलश स्थापित करे और कलश का धूप ,दीप, रोली/कुंकु, अक्षत, पुष्प , से पूजन करें।
  • अब कुबेर का ध्यान और हाथ मैं अक्षत पुष्प लेकर निम्लिखित मंत्र बोलते हुए कुबेर का आवाहन करे
  • आवाहयामि देव त्वामिहायाहि कृपां कुरु।
    कोशं वद्र्धय नित्यं त्वं परिरक्ष सुरेश्वर।।
  • अक्षत और पुष्प कुबेर जी की मूर्ति को समर्पित कर दे
  • अब कुबेर जी की मूर्ति को जल, कच्चे दूध और पंचामृत से स्नान कराये (मिटटी की मूर्ति हो तो सुपारी को स्नान कराये )
  • कुबेर जी की मूर्ति को नवीन वस्त्र और आभूषण अर्पित करे
  • रोली/कुंकु, अक्षत, सिंदूर, इत्र ,दूर्वां , पुष्प और माला अर्पित करे
  • हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, दूर्वा अर्पित करे
  • धुप और दीप दिखाए
  • मिठाइयाँ, पंचमेवा , धानी , गुड़ एवं ऋतुफल जैसे- केला,  चीकू आदि का नैवेद्य अर्पित करे
  • निम्नलिखित कुबेर मंत्र का १ माला जाप करे
    ऊं श्रीं ऊं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।’
    ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय
    ऊँ कुबेराय नमः।’
  • अंत मैं कुबेर जी की आरती करे
  • आरती के बाद पुष्पांजलि दे
  • धन प्राप्ति की प्रार्थना करते हुए पूजा में प्रयोग की गई हल्दी, धनिया, कमलगट्टा, दूर्वा आदि को एक कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखना चाहिए।

कुबेर पूजा के बाद अज्ञानतावश पूजा में कुछ कमी रह जाने या गलतियों के लिए भगवान् कुबेर के सामने हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्र का जप करते हुए क्षमा याचना करे

मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरं l यत पूजितं मया देव, परिपूर्ण तदस्त्वैमेव l
आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनं l पूजा चैव न जानामि, क्षमस्व परमेश्वरं l

Kuber Mantra | कुबेर मंत्र

Kubera Dhana Prapti Mantra

Kubera Ashta-Lakshmi Mantra




राहु ग्रह की शान्ति के उपाय

ज्योतिष शास्त्र मै कई ऐसे चमत्कारी उपाय बताये गए है जो ग्रहो के अशुभ फलो को शुभ फल मै बदल देते है. आज हम आपको राहु ग्रह (Rahu Grah) की शान्ति के उपाय बता रहे है

राहु ग्रह (Rahu Grah)

राहु एक छाया ग्रह है. अगर आपकी कुंडली मैं राहु शुभ स्थिति मैं है तो आपको दौलत, शोहरत, मान सम्मान और सभी कामो मैं सफलता देता है. अगर राहु प्रतिकूल है तो ये बहुत ही नकारात्मक फल देता है. राहु की दशा/अन्तर्दशा में व्यक्ति की बुद्धि भ्रमित हो जाती हैं औरव्यक्ति कई ऐसे गलत निर्णय ले लेता है जिसके लिए उसे भविष्य में पछताना पड़ता है.

राहु ग्रह की शान्ति के उपाय

Rahu Grah KI Shanti Ke Upay

  • राहु ग्रह भगवान भोलेनाथ के परम आराधक है अत: जब राहु ग्रह अशुभ फल दे रहा हो तो जातक को शिवजी की आराधना करनी चाहिए।

  • राहु मंत्र का प्रतिदिन एक माला जप करे।

  • सोमवार को व्रत करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं और राहु के अशुभ फल काम होते हैं

  • चिड़िया को प्रतिदिन बाजरा खिलाएं।

  • सात प्रकार के अनाज का दान समय-समय पर करते रहें।

  • शनिवार की शाम को काले कपडे मैं एक नारियल और ग्यारह साबुत बादाम बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें।

  • शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।

  • घर के नैऋत्य कोण में पीले रंग के फूल लगाएं।

  • नॉन वेज व शराब का सेवन बिल्कुल न करें।

  • शनिवार की शाम को काले-नीले फूल, गोमेद, नारियल, मूली, सरसों, नीलम, कोयले, खोटे सिक्के, नीला वस्त्र किसी कोढ़ी को दान में देना चाहिए।

  • अपने सिरहाने जौ रखकर सोयें और सुबह उनका दान कर दें

  • अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए।

  • अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।

  • सफाई कर्मी को तम्बाकू का दान करना चाहिए।

राहु ग्रह की शान्ति के उपाय (Rahu Graha KI Shanti Ke Upay) निश्चित रूप से कारगर हैं बस आप इन्हे श्रद्धा और आस्था के साथ करे।

Rahu Mantra | राहु मंत्र

Rahu Kavacham | राहु कवचं

Rahu Stotram | राहु स्तोत्रम्

Rahu Gayatri Mantra | राहु गायत्री मंत्र




शनि देव मंत्र

शनि देव मंत्र

ऊँ शं शनैश्चराय नम:।

शनि बीज मंत्र

ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥

शनि वैदिक मंत्र

ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शं योरभि स्रवन्तु नः॥

शनि मूल मंत्र

” नीलांजन समाभासं रवि पुत्रां यमाग्रजं। छाया मार्तण्डसंभूतं तं नामामि शनैश्चरम्॥ “

श्री शनि देव मंत्र के लाभ

शनि देव की साधना में श्री शनि देव मंत्र का पाठ बेहद प्रभावशाली माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार श्री शनि देव मंत्र का पाठ करने से मनुष्य के सभी पाप दूर होते हैं। नित्य श्री शनि देव मंत्र का पाठ करने वाले को  शनि ग्रह की पीड़ा से शांति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

श्री शनि देव मंत्र का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार शनिवार को शाम के समय स्नान करके शनिदेव के मंदिर मै शनि की मूर्ति के सामने श्री शनि देव मंत्र का पाठ करे. सर्व प्रथम शनि देव को , धुप -दीप दिखाएं  ,प्रसाद अर्पित करें, आचमन हेतु जल अर्पित करें, तत्पश्चात नमस्कार करें।फिर शनि देव की मूर्ति पर सरसो का तेल चढ़ाये, तत्पश्चात श्री शनि देव मंत्र का पाठ करे ।

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वरलक्ष्मी व्रत 2020 | VarLakshmi Vrat Katha Hindi PDF

वरलक्ष्मी व्रत २०20| VarLakshmi Vrat 2020

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण शुक्ल पक्ष के दौरान आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है और राखी और श्रवण पूर्णिमा के कुछ दिन पहले आता है।

Varalakshmi Vrat is celebrated on the last Friday of Shravan during the Shukla Paksha.
31वाँ
जुलाई 2020
Friday / शुक्रवार
वरलक्ष्मी व्रतम् शुक्रवार, जुलाई 31, 2020 को
सिंह लग्न पूजा मुहूर्त (प्रातः) – 06:59 AM से 09:17 AM
अवधि – 02 घण्टे 17 मिनट्स
वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त (अपराह्न) – 01:53 PM से 04:11 PM
अवधि – 02 घण्टे 19 मिनट्स
कुम्भ लग्न पूजा मुहूर्त (सन्ध्या) – 07:57 PM से 09:25 PM
अवधि – 01 घण्टा 27 मिनट्स
वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त (मध्यरात्रि) – 12:25 AM से 02:21 AM, अगस्त 01
अवधि – 01 घण्टा 56 मिनट्स

वरलक्ष्मी व्रत विधि | VaraLaxmi Vrat Vidhi

वरलक्ष्मी व्रत पूजा धन और समृद्धि की देवी की पूजा करने के लिए महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। वरलक्ष्मी, जो भगवान विष्णु की पत्नी हैं, देवी महालक्ष्मी के रूपों में से एक हैं। वरलक्ष्मी का दूधिया महासागर मैं जन्म हुआ था, जिसे किशीर सागर भी कहा जाता है।

यह माना जाता है कि देवी का वरलक्ष्मी रूप वरदान देता है और अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करता है। इसलिए देवी के इस रूप को वर+ लक्ष्मी’ के रूप में जाना जाता है। देवी लक्ष्मी का वो रूप जो वरदान देता है। वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि लष्मी पूजा के सामान ही होती हैं

वरलक्ष्मी व्रत की कथा | VarLaxmi Vrat Katha in Hindi

वरलक्ष्मी व्रत की कथा एक बार महादेव शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी । इस व्रत को करने से स्त्रियों को सौभाग्य तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है । आज के दिन वर को प्रदान करने वाली वरलक्ष्मी देवी की आराधना करी जाती है । यह व्रत श्रवण मास की पूर्णमासी से पहले आने वाले शुक्रवार के दिन रखा जाता है ।

एक बार मगध देश में कुण्डी नाम का नगर था । इस नगर का निर्माण स्वर्ण से हुआ था । इस नगर में एक स्त्री चारुमती रहती थी । जो कि अपने पति, सास ससुर की सेवा करके एक आदर्श स्त्री का जीवन व्यतीत करती थी । देवी लक्ष्मी चारुमती से बहुत ही प्रसन्न रहती थी । एक रात्रि को स्वप्न में देवी लक्ष्मी ने चारुमती को दर्शन दिए था उसे वरलक्ष्मी व्रत रखने के लिए कहा ।

चारुमती तथा उसके पड़ोस में रहने वाली सभी स्त्रियों ने श्रावण पूर्णमासी से पहले वाले शुक्रवार के दिन दिवि लक्ष्मी द्वारा बताई गयी विधि से वरलक्ष्मी व्रत को रखा । पूजन के पश्चात कलश की परिक्रमा करते ही उन सभी के शरीर विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सज गए । उनके घर भी स्वर्ण के बन गए तथा उनके घर पर गाय, घोड़े, हाथी आदि वाहन आ गए । उन सभी ने चारुमती की प्रशंसा करी क्यूंकि उसने सभी को व्रत रखने को कहा जिससे सभी को सुख समृद्धि की प्राप्ति हुई । कालान्तर में सभी नगर वासियों को इसी व्रत को रखने से सामान समृद्धि की प्राप्ति हो गयी ।

इस वरलक्ष्मी व्रत  को रखने से तथा अन्य लोगो को भी बताने से या मात्र इस व्रत की कथा सुनने से ही माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है ।

VarLakshmi Vrat Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

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दुर्गा पूजन सामग्री

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार नवरात्री मैं दुर्गा पूजा  का बहुत अधिक महत्त्व है। दुर्गा पूजा विधि पूर्वक और पूरी दुर्गा पूजन सामग्री  के साथ करने से दुर्गा जी सारी मनोकामनाएं पूरीकरती है।

Durga Pujan Samagri In Hindi

दुर्गा पूजन सामग्री

दुर्गा माँ के लिए वस्त्र और आभूषण
लाल कपडा और चौकी
कच्चा दूध
चावल
अष्टगंध
दीपक
तेल
रुई
धूपबत्ती
चंदन
कुमकुम
गुड़हल के फूल
घी
गन्ने का रस
गंगा जल
जनेऊ
फल
मिठाई
नारियल
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद व शक्कर)
सूखे मेवे
पान
दक्षिणा

दुर्गा पूजन सामग्री  किसी भी किराने की दुकान या पूजन सामग्री की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं

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दुर्गा पूजा विधि

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