शिव पूजन सामग्री

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार शिव पूजा  का बहुत अधिक महत्त्व है। शिव पूजा विधि पूर्वक और पूरी शिव पूजन सामग्री  के साथ करने से शिव जी सारी मनोकामनाएं पूरी करते है।

Shiv Pujan Samagri In Hindi

शिव पूजन सामग्री

लोटा
दूध
चावल
अष्टगंध
दीपक
तेल
रुई
धूपबत्ती
चंदन
धतूरा
आकड़े के फूल
बिल्वपत्र
शमी वृक्ष के पत्ते
भांग
घी
गन्ने का रस
गंगा जल
जनेऊ
फल
मिठाई
नारियल
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद व शक्कर)
सूखे मेवे
तिल
जो
पान
दक्षिणा

शिव पूजन सामग्री  किसी भी किराने की दुकान या पूजन सामग्री की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं

Click Below For:

शिव पूजा विधि

108 Names of Lord Shiva
महामृत्युंजय मंत्र
शिवताण्डवस्तोत्रम्
शिव अष्टोत्तर शतनाम
Shiva Chalisa | शिव चालीसा
शिव जी की आरती
शिव मंत्र
शिव पूजा विधि
अर्धनारीश्वर अष्टकम
बिल्वाष्टकम स्तोत्रम
द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्
काशीविश्वनाथष्टकम्
रुद्राष्टकम
शिव गायत्री मंत्र
शिव कवच
शिव महिम्न स्तोत्
शिव पञ्चाक्षरिस्तोत्रम्
Shiva Rudrashtakam Stotra
शिवाष्टकम्
निर्वाण षटकम्
लिङ्गाष्टकम्




हनुमान जी की पूजन विधि

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार हनुमान पूजन का कलयुग मैं बहुत महत्त्व है। मंगलवार के दिन हनुमान पूजा विधि पूर्वक करने से हनुमान जी सारे कष्ट दूर करके जीवन सुख समृद्धि से भर देंगे।

According to Hindu mythology, in Kalyug Hanuman Puja is very important. On Tuesday after doing Hanuman puja according to proper vidhi, Hanuman Ji will take away all the miseries from your life and will fill it with prosperity.

Hanuman Pujan Samagri In Hindi

हनुमान पूजन सामग्री

  • लाल कपडा/लंगोट
  • जल कलश
  • पंचामृत
  • कंकु
  • जनेऊ
  • गंगाजल
  • सिन्दूर
  • चांदी/सोने का वर्क
  • लाल फूल और माला
  • इत्र
  • भुने चंने
  • गुड़
  • बनारसी पान का बीड़ा
  • नारियल
  • केले
  • सरसो का तेल
  • चमेली का तेल
  • घी
  • तुलसी पत्र
  • दीपक
  • धूप , अगरबत्ती
  • कपूर

हनुमान पूजन सामग्री  किसी भी किराने की दुकान या पूजन सामग्री की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं

Hanuman Pujan (Puja) Vidhi In Hindi

हनुमान जी की पूजन (पूजा) विधि

  • हनुमान जी की मूर्ति ओर मुंह करके लाल आसन पर बैठें.
  • १ घी का और १ सरसो के तेल का दीपक जलाये
  • अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाये
  • हाथ में चावल व फूल लेकर हनुमानजी का ध्यान और आवाहन करे
  • अब सिंदूर मैं चमेली का तेल मिलाकर मूर्ति पर लेप करे पाँव से शुरू करकर सर तक
  • चांदी या सोने का वर्क मूर्ति पर लगाए
  • अब हनुमान जी को लाल लंगोट पहनाये
  • इत्र छिड़के
  • हनुमानजी के सर पर कंकु का टिका लगाए
  • लाल गुलाब और माला हनुमान जी को चढ़ाये .
  • भुने चंने और गुड़ का नैवेद्य लगाए
  • नैवेद्य पर तुलसी पत्र रखे
  • केले चढ़ाये
  • हनुमान जी को बनारसी पान का बीड़ा अर्पित करे
  • ११ बार हनुमान चालीसा का पाठ करे
  • अंत मैं हनुमान जी की आरती करे

हनुमान पूजा  के बाद अज्ञानतावश पूजा में कुछ कमी रह जाने या गलतियों के लिए भगवान् हनुमान के सामने हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्र का जप करते हुए क्षमा याचना करे

  • मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरं l यत पूजितं मया देव, परिपूर्ण तदस्त्वैमेव l
    आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनं l पूजा चैव न जानामि, क्षमस्व परमेश्वरं l
बजरंग बाण
श्री हनुमान आरती
श्री हनुमान चालीसा
Hanuman Gayatri Mantra
Sundar Kaand
Hanuman Kavach
Hanuman Stotra
Maruti Stotra
Salasar Hanumanji Aarti
Sankat Mochan Hanuman Ashtak



गणेश चतुर्थी की कहानी

Ganesh Chaturthi Katha in Hindi

शिवपुराण के अनुसार यह वर्णन है कि एक बार माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपाल बना दिया। शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणों ने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। अन्ततोगत्वा भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे भगवती पारवती क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षि नारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णुजी उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यक्ष घोषित करके अग्रपूज्य होने का वरदान दिया। भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा। गणेश्वर!तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी। कृष्णपक्ष की चतुर्थी की रात्रि में चंद्रोदय के समय गणेश तुम्हारी पूजा करने के पश्चात् व्रती चंद्रमा को अ‌र्घ्यदेकर ब्राह्मण को मिष्ठान खिलाए। तदोपरांत स्वयं भी मीठा भोजन करे। वर्षपर्यन्त श्री गणेश चतुर्थी का व्रत करने वाले की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा

कथा के अनुसार एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती नर्मदा नदी के निकट बैठे थें. वहां देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से समय व्यतीत करने के लिये चौपड खेलने को कहा. भगवान शंकर चौपड खेलने के लिये तो तैयार हो गये. परन्तु इस खेल मे हार-जीत का फैसला कौन करेगा?

इसका प्रश्न उठा, इसके जवाब में भगवान भोलेनाथ ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका पुतला बना, उस पुतले की प्राण प्रतिष्ठा कर दी. और पुतले से कहा कि बेटा हम चौपड खेलना चाहते है. परन्तु हमारी हार-जीत का फैसला करने वाला कोई नहीं है. इसलिये तुम बताना की हम मे से कौन हारा और कौन जीता.

यह कहने के बाद चौपड का खेल शुरु हो गया. खेल तीन बार खेला गया, और संयोग से तीनों बार पार्वती जी जीत गई. खेल के समाप्त होने पर बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिये कहा गया, तो बालक ने महादेव को विजयी बताया. यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गई. और उन्होंने क्रोध में आकर बालक को लंगडा होने व किचड में पडे रहने का श्राप दे दिया. बालक ने माता से माफी मांगी और कहा की मुझसे अज्ञानता वश ऎसा हुआ, मैनें किसी द्वेष में ऎसा नहीं किया. बालक के क्षमा मांगने पर माता ने कहा की, यहां गणेश पूजन के लिये नाग कन्याएं आयेंगी, उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो, ऎसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगें, यह कहकर माता, भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चली गई.

ठिक एक वर्ष बाद उस स्थान पर नाग कन्याएं आईं. नाग कन्याओं से श्री गणेश के व्रत की विधि मालुम करने पर उस बालक ने 21 दिन लगातार गणेश जी का व्रत किया. उसकी श्रद्वा देखकर गणेश जी प्रसन्न हो गए. और श्री गणेश ने बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिये कहा. बालक ने कहा की है विनायक मुझमें इतनी शक्ति दीजिए, कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं और वो यह देख प्रसन्न हों.

बालक को यह वरदान दे, श्री गणेश अन्तर्धान हो गए. बालक इसके बाद कैलाश पर्वत पर पहुंच गया. और अपने कैलाश पर्वत पर पहुंचने की कथा उसने भगवान महादेव को सुनाई. उस दिन से पार्वती जी शिवजी से विमुख हो गई. देवी के रुष्ठ होने पर भगवान शंकर ने भी बालक के बताये अनुसार श्री गणेश का व्रत 21 दिनों तक किया. इसके प्रभाव से माता के मन से भगवान भोलेनाथ के लिये जो नाराजगी थी. वह समाप्त होई.

यह व्रत विधि भगवन शंकर ने माता पार्वती को बताई. यह सुन माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई. माता ने भी 21 दिन तक श्री गणेश व्रत किया और दुर्वा, पुष्प और लड्डूओं से श्री गणेश जी का पूजन किया. व्रत के 21 वें दिन कार्तिकेय स्वयं पार्वती जी से आ मिलें. उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का व्रत मनोकामना पूरी करने वाला व्रत माना जाता है.

गणेश पूजन सामग्री

गणेश पूजन विधि

गणेश जी की आरती

गणपति अथर्वशीर्ष

गणेश मंत्र

How to do Ganesh Chaturthi Katha

गणेश चतुर्थी की कहानी का पाठ

To get the best result you should do Ganesh Chaturthi Katha ( गणेश चतुर्थी की कहानी ) early morning after taking bath and in front of Lord Ganesha Idol or picture on Ganesh Chaturthi.

Benefits of Ganesh Chaturthi Katha

गणेश चतुर्थी की कहानी के लाभ

According to Hindu Mythology doing Ganesh Chaturthi Katha on Ganesh Chaturthi is the most powerful way to please Lord Ganesha and get his blessing.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार गणेश चतुर्थी की कथा करने से गणेशजी बहुत प्रसन्न होते है और सारे संकट दूर करके जीवन खुशियों से भर देते है ।

Ganesh Chaturthi Katha in Tamil/Telgu/Gujrati/Marathi/English

Use Google Translator to get Ganesh Chaturthi Katha in language of your choice.
[wp-google-language-translator]

Download Ganesh Chaturthi Katha in Hindi PDF/MP3

गणेश चतुर्थी की कहानी हिंदी PDF डाउनलोड

निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर गणेश चतुर्थी की कहानी हिंदी PDF डाउनलोड  करे.

By clicking below you can Free Download Ganesh Chaturthi Katha in PDF/MP3 format or also can Print it.

 




केतु ग्रह के उपाय

केतु ग्रह के अशुभ फल में सुधार हेतु उपाय करने हेतु शनिवार एवं मंगलवार का दिन और रात का समय  सबसे उपयुक्त होता है। जिनका केतु कुंडली मैं शुभ स्तिथि मैं नहीं है उन्हें शनिवार एवं मंगलवार के दिन व्रत करना चाहिए और गरीब व्यक्ति को भर पेट भोजन कराना चाहिए।

केतु ग्रह के उपाय

  • गणेश जी की सेवा और पूजा करे
  • गणेश द्वादश नाम स्तोत्र का पाठ करें।
  • केतु के मूल मंत्र का रात्रि में 40 दिन में 18,000 बार जप करें।
  • कपिला गाय, लोहा, तिल, तेल, सप्तधान्य शस्त्र, बकरा, नारियल, उड़द आदि का दान करने से केतु ग्रह की शांति होती है।
  • केतु से सम्बन्धित रत्न का दान (लहसुनिया)भी उत्तम होता है।
  • मंदिर में काले और सफेद रंग का कम्बल  दान करना चाहिए।
  • कुत्ते को मीठी रोटी दें एवं ब्राह्मणों को भात खिलायें इससे भी केतु की दशा शांत होगी।
  • किसी को अपने मन की बात नहीं बताएं
  • बड़े बुजुर्गों की सेवा करने से भी केतु की दशा में राहत प्रदान होती है।

केतु ग्रह के उपाय शनिवार एवं मंगलवार के दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए तो केतु ग्रह के अशुभ फल से मुक्ति मिलती हैं

Ketu Mantra | केतु मंत्र

Ketu Kavach | केतु कवच

श्री गणेश द्वादश नाम स्तोत्र




मंगल ग्रह के उपाय

मंगल ग्रह के अशुभ फल में सुधार हेतु उपाय करने हेतु मंगलवार का दिन और दोपहर का समय  सबसे उपयुक्त होता है। जिनका मंगल कुंडली मैं शुभ स्तिथि मैं नहीं है उन्हें मंगलवार के दिन व्रत करना चाहिए और गरीब व्यक्ति को भर पेट भोजन कराना चाहिए।

मंगल ग्रह के उपाय

  • हनुमान जी के पूजा और सेवा करे
  • मंगलवार के दिन शाम को हनुमान चालीसा का ११ बार पाठ करे
  • मंगलवार के दिन शाम को हनुमान जी के सामने सरसो के तेल का दिया जलाये
  • लाल रंग का बैल दान करना चाहिए।
  • लाल रंग का वस्त्र, सोना, तांबा, मसूर दाल, बताशा, मीठी रोटी का दान देना चाहिए।
  • मंगल से सम्बन्धित रत्न दान देने से भी पीड़ित मंगल के दुष्प्रभाव में कमी आती है।
  • लाल कपड़े में सौंफ बाँधकर अपने शयनकक्ष में रखनी चाहिए।
  • लाल वस्त्र मैं दो मुठ्ठी मसूर की दाल बाँधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए।
  • मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर ले कर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए।
  • बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए।
  • अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
  • मंगल ग्रह के उपायके लिए मंगलवार का दिन, मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।
  • मंगल पीड़ित को कभी क्रोध नहीं करना चाहिए।
  • मंगल पीड़ित को काम मैं जल्दबाजी नहीं करना चाहिए

मंगल ग्रह के उपाय मंगलवार के दिन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए तो मगल गृह के अशुभ फल से मुक्ति मिलती हैं

मंगलवार के टोटके

मंगल  कवच 

ऋणमोचन मंगल स्तोत्र

मंगल गायत्री मंत्र

मंगल मंत्र




भगवान श्री कृष्ण के 108 नाम

श्री कृष्ण के 108 नाम हिंदी में अनुवाद सहित

1 अचला : भगवान।
2 अच्युत : अचूक प्रभु, या जिसने कभी भूल ना की हो।
3 अद्भुतह : अद्भुत प्रभु।
4 आदिदेव : देवताओं के स्वामी।
5 अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।
6 अजंमा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।
7 अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता।
8 अक्षरा : अविनाशी प्रभु।
9 अम्रुत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।
10 अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो।
11 आनंद सागर : कृपा करने वाले
12 अनंता : अंतहीन देव
13 अनंतजित : हमेशा विजयी होने वाले।
14 अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।
15 अनिरुध्दा : जिनका अवरोध न किया जा सके।
16 अपराजीत : जिन्हें हराया न जा सके।
17 अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।
18 बालगोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।
19 बलि : सर्व शक्तिमान।
20 चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।
21 दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।
22 दयालु : करुणा के भंडार।
23 दयानिधि : सब पर दया करने वाले।
24 देवाधिदेव : देवों के देव
25 देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।
26 देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर
27 धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी
28 द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।
29 गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।
30 गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय
31 गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।
32 ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान
33 हरि : प्रकृति के देवता।
34 हिरंयगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति।
35 ऋषिकेश : सभी इंद्रियों के दाता।
36 जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु
37 जगदिशा : सभी के रक्षक
38 जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर।
39 जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले।
40 जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।
41 ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है।
42 कमलनाथ : देवी लक्ष्मी की प्रभु
43 कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
44 कामसांतक : कंस का वध करने वाले।
45 कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
46 केशव :
47 कृष्ण : सांवले रंग वाले।
48 लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी की प्रभु।
49 लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी।
50 मदन : प्रेम के प्रतीक।
51 माधव : ज्ञान के भंडार।
52 मधुसूदन : मधु- दानवों का वध करने वाले।
53 महेंद्र : इन्द्र के स्वामी।
54 मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।
55 मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप रंग वाले प्रभु।
56 मयूर : मुकुट पर मोर- पंख धारण करने वाले भगवान।
57 मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।
58 मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।
59 मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।
60 मुरलीमनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले।
61 नंद्गोपाल : नंद बाबा के पुत्र।
62 नारायन : सबको शरण में लेने वाले।
63 निरंजन : सर्वोत्तम।
64 निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं।
65 पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं।
66 पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।
67 परब्रह्मन : परम सत्य।
68 परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु।
69 परमपुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।
70 पार्थसार्थी : अर्जुन के सारथी।
71 प्रजापती : सभी प्राणियों के नाथ।
72 पुंण्य : निर्मल व्यक्तित्व।
73 पुर्शोत्तम : उत्तम पुरुष।
74 रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।
75 सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु।
76 सहस्रजित : हजारों को जीतने वाले।
77 सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।
78 साक्षी : समस्त देवों के गवाह।
79 सनातन : जिनका कभी अंत न हो।
80 सर्वजन : सब- कुछ जानने वाले।
81 सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।
82 सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।
83 सत्यवचन : सत्य कहने वाले।
84 सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।
85 शंतह : शांत भाव वाले।
86 श्रेष्ट : महान।
87 श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।
88 श्याम : जिनका रंग सांवला हो।
89 श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले।
90 सुदर्शन : रूपवान।
91 सुमेध : सर्वज्ञानी।
92 सुरेशम : सभी जीव- जंतुओं के देव।
93 स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।
94 त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता
95 उपेंद्र : इन्द्र के भाई।
96 वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले।
97 वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो।
98 वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले।
99 विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।
100 विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।
101 विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता
102 विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप।
103 विश्वरुपा : ब्रह्मांड- हित के लिए रूप धारण करने वाले।
104 विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।
105 वृषपर्व : धर्म के भगवान।
106 यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।
107 योगि : प्रमुख गुरु।
108 योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।

श्री कृष्ण के 108 नाम के लाभ

 भगवान् श्री कृष्णा की साधना में श्री कृष्ण के 108 नाम का पाठ को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण के 108 नाम का पाठ करने से मनुष्य की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। 

श्री कृष्ण के 108 नाम का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी स्नान करके भगवान् श्री कृष्णा की तस्वीर या मूर्ति के सामने श्री कृष्ण के 108 नाम का पाठ करे. सर्व प्रथम भगवान् श्री कृष्णा का आवाहन करें और भगवान् श्री कृष्णा को सर्व प्रथम आसन अर्पित करें, तत्पश्चात पैर धोने के लिए जल समर्पित करें  आचमन अर्पित करें ,स्नान हेतु जल समर्पित करें ,तिलक करें , धुप -दीप दिखाएं  ,प्रसाद अर्पित करें, आचमन हेतु जल अर्पित करें, तत्पश्चात नमस्कार करें। तत्पश्चात श्री कृष्ण के 108 नाम  का पाठ करे 

श्री कृष्ण के 108 नाम हिंदी  PDF डाउनलोड

निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर श्री कृष्ण के 108 नाम हिंदी PDF डाउनलोड करे.

श्री कृष्ण के 108 नाम हिंदी  MP3 डाउनलोड

निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर श्री कृष्ण के 108 नाम हिंदी MP3 डाउनलोड करे.

संतान गोपाल मंत्र

श्री गोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

Krishna Ashtakam

कृष्ण गायत्री मंत्र

Krishna Chalisa

Krishna Aarti

Krishna Mantra

भगवान् श्री कृष्ण पूजा विधि




श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2020 | Janmashtami

Janmashtami in Hindi

भगवान कृष्ण की जयंती को जन्माष्टमी कहा जाता है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादपद्र माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र की आधी रात के दौरान हुआ था।

हिंदू धर्म के अनुयायी भगवान कृष्ण की जन्मतिथि को जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। जन्माष्टमी भक्तों पर भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए उपवास रखते हैं और भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं । जन्माष्टमी के उपवास करने वाले भक्त लोग, जन्माष्टमी को एक समय ही फलाहार लेते हैं।

2020 में जन्माष्टमी

11वाँ
अगस्त 2020
Tuesday / मंगलवार
12:05 ए एम से 12:48 ए एम, अगस्त 12
अवधि – 00 घण्टे 43 मिनट्स
जन्माष्टमी को रात मैं भगवान् कृष्ण की पूजा की जाती हैं जिसकी सरल विधि हम आपको बता रहे हैं.

भगवान् श्री कृष्ण पूजन सामग्री

  • भगवान के लिए चौकी (Chawki)
  • लाल वस्त्र चौकी पर बिछाने के लिये) (Red Cloth for Chawki)
  • लड्डू गोपाल की मूर्ति या चित्र (Idol or photo of Baby Krishna)
  • चांदी का सिंहासन (Asana)
  • पंचामृत (Panchamrit)
  • गंगाजल (Gangajal, Sacred Water of Holy River Ganga)
  • दीपक, घी, बत्ती (Lamp, Ghee, Wick)
  • धूपबत्ती (Dhoopstick)
  • अष्टगंध चन्दन या रोली (Ashgandha Chandan or Roli)
  • अक्षत (कच्चा साबुत चावल) (Raw Rice)
  • तुलसी (Holy Basil Leaves)
  • माखन मिश्री व मिठाई (Makhan Mishri and other sweets)
  • ५ प्रकार के फल (5 Type of Fruits)
  • कृष्ण जी के लिये वस्त्र और आभूषण (Clothes and Ornaments for Lord Krishna)
  • इत्र (Scent)
  • फूल माला (Flower Garland and Flowers)

भगवान् श्री कृष्ण पूजा विधि

  • सबसे पहले दीपक और धूपबत्ती जला लीजिये.
  • चौकी पर लाल कपड़ा बिछा कर भगवान् श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापित करिये और भगवान् श्री कृष्ण का आवाहन कीजिये
  • भगवान् कृष्ण से प्रार्थना करें कि, “हे भगवान् कृष्ण ! कृपया पधारिये और पूजा ग्रहण कीजिये
  • भगवान् कृष्ण की मूर्ति एक पात्र में रखिये श्री कृष्ण को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराइये.
  • अब श्री कृष्ण को वस्त्र पहनाइये और श्रृंगार कीजिये.
  • अब भगवान् कृष्ण को दीपक और धुप दिखाइये
  • अष्टगंध का तिलक लगाइये और साथ ही अक्षत लगाइये
  • इत्र और फूलमाला अर्पण कीजिये
  • माखन, मिश्री, मिठाई और फल भोग के रूप मैं अर्पण कीजिये, तुलसी का पत्ता विशेष रूप से भोग मैं अर्पण कीजिये. साथ ही पीने के लिये जल रखिये.
  • अब कृष्ण मंत्र का जप कीजिये
  • अंत मैं भगवान श्री कृष्ण की आरती कीजिये

यह कृष्ण पूजा जन्माष्टमी के दिन और रोज़ाना भी कर सकते हैं.

संतान गोपाल मंत्र

श्री गोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्

Krishna Ashtakam

कृष्ण गायत्री मंत्र

Krishna Chalisa

Krishna Aarti

Krishna Mantra




सोमवती अमावस्या के टोटके

ज्योतिष शास्त्र में सोमवती अमावस्या को विशेष तिथि माना गया है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या को किए गए  टोटके  विशेष फल प्रदान करते हैं। आप इनमें से किसी भी एक सोमवती अमावस्या के उपाय को कर अपने लिए सुख संपत्ति के द्वार खोल सकते हैं। सोमवती अमावस्या के दिन शिव पूजन का बहुत ज्यादा महत्व हैं

सोमवती अमावस्या के दिन करने वाले उपाय/टोटके

धन प्राप्ति के लिए सोमवती अमावस्या के उपाय/टोटके

  • सोमवती अमावस्या के दिन आप मछलियों को आटे की गोलियां जरूर खिलायें.
  • सोमवती अमावस्या के दिन काली चींटियों को शकर मिला हुआ आटा खिलाएं।
  • सोमवती अमावस्या के दिन किसी अच्छे पंडित से अपने घर में शिवपूजन एवं हवन करवाना चाहिए।

ग्रह दोष शांति के लिए सोमवती अमावस्या के उपाय/टोटके

  • सोमवती अमावस्या के दिन शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करे और शिव मदिर मैं सवा किलो चावल का दान करे

पितृ दोष शांति के लिए सोमवती अमावस्या के उपाय/टोटके

  • सोमवती अमावस्या को पीपल के वृक्ष की पूजा करें तथा पेड़ को जनेऊ व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें उसकी सात परिक्रमा करें।
  • अमावस्या के दिन  स्टील के लोटे में  दूध, पानी, काले और सफ़ेद तिल एवं जौ मिला ले, पीपल की जड़ में अर्पित कर दे।
  • सोमवती अमावस्या के दिनअपने पूर्वजों के नाम पर किसी गाय, ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद भिखारी को भोजन दान करें।
  • सोमवती अमावस्या को गाय को पांच फल खिलाने चाहिए
  • सोमवती अमावस्या के दिन भूल कर भी तुलसी के पत्ते या बिलव पत्र नहीं तोड़ने चाहिए

कालसर्प दोष शांति के लिए सोमवती अमावस्या के उपाय/टोटके

  • सोमवती अमावस्या के १ चांदी का नाग नागिन का जोड़ा सफ़ेद फूल के साथ नदी मैं प्रवाह करे कालसर्प दोष का निवारण होगा

सोमवती अमावस्या के उपाय/टोटके  पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करे तभी सफल होंगे

सोमवती अमावस्या व्रत कथा

अमावस्या कब है

अमावस्या के दिन करने वाले उपाय/टोटके 
https://youtu.be/WpRyeh7OS10




पितृ दोष निवारण मंत्र

पितृ दोष निवारण

ज्योतिष शास्त्र मैं कई पितृ दोष निवारण मंत्र बताये गए हैं पर सबसे उत्तम पितृ दोष निवारण मंत्र ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मन्त्र बताया गया हैं . रोज १ माला इस मंत्र का जप करने से पितृ दोष निवारण होता हैं

पितृ दोष निवारण मंत्र

  • ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः
  • ॐ प्रथम पितृ नारायणाय नमः
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः

उपरोक्त पितर दोष निवारण मंत्र का पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ कम से कम १ माला रोज जाप करे पितृ दोष निवारण  होगा

Pitru Paksha 2020 Date

पितृ दोष के लक्षण

पितृदोष से मुक्ति के उपाय

पितर आरती

पितर चालीसा

पितृ स्तोत्र

https://youtu.be/QtwpWB-5Nao




पितृ दोष के लक्षण

ज्योतिष विद्या के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली मैं सूर्य और मंगल ग्रह पाप भाव में होते हैं तो व्यक्ति को पितृदोष  हो जाता है। वैसे तो कोई भी अच्छा ज्योतिष आपकी पत्रिका देखकर बता सकता हैं की आपको पितृदोष हैं  की नहीं. पर अगर किसी कारण पत्रिका नहीं है तो पितृदोष के लक्षण  से पता लग जाता हैं की पितृदोष  हैं की नहीं.

आज हम आपको बता रहे हैं पितृदोष के लक्षण. अगर कोई वयक्ति निचे बताये गए लक्षणों का सामना कर रहा हैं तो यह निश्चित हैं उसकी कुंडली में पितृदोष  हैं.

पितृ दोष के लक्षण | पितर दोष के लक्षण

  • विवाह ना होना या विवाह होने मैं बहुत समस्या होना
  • वैवाहिक जीवन में कलह होना
  • परीक्षा में बार-बार फ़ैल होना
  • नौकरी का ना मिलना या बार २ नौकरी छूटना
  • गर्भपात या गर्भधारण मैं बहुत ज्यादा समस्या
  • बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना
  • मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना
  • अपने आप पर विश्वास ना होना या कोई निर्णय न ले पाना
  • बात बात पर क्रोध आना
  • बहुत मेह्नत के बावजूद व्यापर ना चलना

पितृ दोष  से पीड़ित व्यक्ति को जीवन मैं बहुत से कष्ट उठाने पड़ सकते हैं.

पित्र दोष के लक्षण  पता चलने पर पितृ दोष निवारण करने के लिए प्रयास करना चाइए

Pitru Paksha 2020 Date

पितृदोष से मुक्ति के उपाय

पितृ दोष निवारण मंत्र

पितर आरती

पितर चालीसा

पितृ स्तोत्र

https://youtu.be/WpRyeh7OS10