फिटकरी के टोटके

Fitkari ke Totke/Upay in Hindi if wisely use can change your life and will make you healthy, wealthy & Prosperous.

फिटकरी एक प्रकार का खनिज है जिसका रासायनिक नाम पोटेशियम एल्युमिनियम सल्फेट है । फिटकरी प्राकृतिक रूप में पत्थर (एल्युनाइट) के रूप मैं मिलती है।फिटकरी के औषधीय और तांत्रिक दोनों उपयोग होते हैं। वास्तु शास्त्र मैं भी फिटकरी बहुत उपयोगी वस्तु हैं और कई प्रकार के वास्तुदोष फिटकरी के उपयोग से दूर होते हैं। फिटकरी किसी भी किराने की दुकान पर आसानी से मिल जाती हैं।

फिटकरी के चमत्कारिक टोटके  आपकी शारीरिक और आर्थिक समस्यायों को ख़तम करके आपको धनवान बना सकते हैं. तंत्र विद्या के अनुसार फिटकरी के टोटको/उपाय की मदद से वास्तुदोष दूर होते हैं, धन प्राप्ति और बेहतर स्वास्थ की प्राप्ति होती हैं।

फिटकरी के टोटके/उपाय

अगर किसी को नजर लग जाये तो फिटकरी का १ टुकड़ा लेकर उसके ऊपर से ७ बार उसारे और तवे पर जला दे।

अगर रात मैं सोते समय बुरे सपने आते हैं तो १ फिटकरी का टुकड़ा काले कपडे मैं बांधकर गद्दे के निचे रख दे, बुरे सपने और नींद मैं चमकना बंद हो जायेगा

फिटकरी से वास्तुदोष निवारण

बाथरूम (शौचालय) के वास्तुदोष निवारण के लिए यहां फिटकरी १ कांच के प्याले मैं रखें और हर महीने इस प्याले मैं फिटकरी को बदलते रहें।

घर या ऑफिस के चारो कोनो मैं १ चौकोर फिटकरी की बत्ती काले कपडे मैं बांधकर रख दे सारे वस्तु दोष दूर हो जायेंगे और नकरात्मक ऊर्जा भी भर चली जाएगी

धन प्राप्ति के लिए फिटकरी का अचूक उपाय

३ बुधवार लगातार शाम को 1 पान के पत्ते मैं थोड़ी सी फिटकरी और सिंदूर बांधकर पीपल के पेड़ के नीचे 1 बड़े पत्थर से दबा दें। धन लाभ होगा।

व्यापार बढ़ाने के लिए फिटकरी का अचूक उपाय

१ फिटकरी का टुकड़ा काले कपडे मैं बांधकर दुकान या ऑफिस के मुख्या द्वार पर लटका दे, व्यापार मैं बहुत जल्द धन लाभ होगा

जब भी फिटकरी के टोटके/उपाय  करे तो यह सावधानी जरूर रखे.

फिटकरी के टोटको/उपाय मै सच्चे मन से विश्वास करे तभी वो सफल होगा.

Hope you find these Fitkari ke Totke/Upay in Hindi  useful and solve your all problems.

साप्ताहिक टोटके/उपाय

सोमवार के टोटके

मंगलवार के टोटके

बुधवार के टोटके

गुरुवार के टोटके

शुक्रवार के टोटके

शनिवार के टोटके

रविवार के टोटके

अमावस्या के टोटके

पूर्णिमा के टोटके

लौंग के टोटके

नमक के टोटके

नींबू के चमत्कारिक टोटके

कपूर के टोटके

काली मिर्च के टोटके




काली मिर्च से धन प्राप्ति के अचूक उपाय

वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में काली मिर्च के कई फायदे  हैं। आज हम आपको बता रहे है काली मिर्च से धन प्राप्ति के अचूक उपाय  जो आपको मालामाल कर सकते है।

काली मिर्च से धन प्राप्ति के अचूक उपाय

जब आप किसी भी धन से सम्भदित कार्य के लिए जा रहे हैं तो अपने घर के मुख्य द्वार पर काली मिर्च रखें और उसी काली मिर्च पर अपना सीधा पैर रखकर घर से बाहर निकले। अब वो कार्य ख़तम करके ही घर वापस आये तो ही ये कालीमिर्च का टोटका काम करता है, अगर बिच मैं घर वापस आये तो टोटके का असर ख़तम हो जाता हैं। इस काली मिर्च के अचूक उपाय से आप आप मालामाल हो सकते हैं

काली मिर्च का दूसरा उपाय बहुत ही अचूक उपाय हैं अचानक धन प्राप्ति का, काली मिर्च के 5 पुष्ट दाने लें और किसी चौराहे या किसी सुनसान स्थान पर खड़े होकर उन्हें अपने सिर पर से 7 बार वार लें। इसके बाद चारों दिशाओं में 4 दाने फेंक दें। बचा हुआ पांचवां दाना ऊपर आसमान की ओर फेंक दें। यह कालीमिर्च का बहुत ही चमत्कारिक उपाय हैं जो आप पर धन की बारिश कर सकता हैं

काली मिर्च से धन प्राप्ति के अचूक उपाय मै सच्चे मन से विश्वास करे तभी वो सफल होगा.

 




कपूर के टोटके

वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र में कर्पूर के कई फायदे  हैं। आज हम आपको बता रहे है कपूर  के कुछ चमत्कारी टोटके/उपाय जो आपके सारे कष्टों को दूर कर आपको मालामाल कर सकते है।

कपूर के फायदे | कपूर जलाने के लाभ

हिन्दू धरम शाश्त्रो मैं कपूर को एक बहुत पवित्र वास्तु माना गया हैं और हवन और पूजा मै इसका उपयोग किया जाता है। कपूर जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। कपूर का इस्तेमाल टोटकों के लिए भी किया जाता है।

कपूर के टोटके/उपाय

कपूर के १० चमत्कारी टोटके/उपाय जो आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर सकते हैं

  • धन प्राप्ति के लिए रोज रात को १ चांदी की कटोरी मै १ कपूर की डली १ लौंग के साथ जलाये।
  • अगर कोई काम पूरा नहीं हो रहा है तो शनिवार के दिन पानी मै कपूर का तेल मिलाकर नहाये, सारे बिगड़े काम बन जायेंगे।
  • घर के अंदर सकारात्मक उर्जा और शांति के लिए कपूर घी मैं भिगो कर जलाये।
  • बुधवार के दिन कर्पूर व मिश्री का दान करने से धन लाभ होता है।
  • सूर्यास्त के समय कर्पूर का दीप जलाकर उसे पुरे घर में घुमाएं और अंत में घर के मंदिर में स्थापित कर दें। इससे देवी लक्ष्मी का घर मैं वास रहता है।
  • घर के हर शयनकक्ष में कपूर जलाने से रोग-दोष नष्ट होते हैं।
  • बुरी अला बला घर मैं ना प्रवेश कर सके इसके लिए गंगाजल मैं थोड़ा सा पिसा कपूर मिलाकर प्रवेश द्वार पर छिड़क दे।
  • पितृ दोष से शांति के लिए थोड़ा देसी कपूर १ कांच की कटोरी मै बाथरूम मै रख दे।
  • शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्रापत करने के लिए प्रतिदिन सुबह और शाम घर में पूजा के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं।
  • कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कर्पूर जलाएं।

कपूर के टोटके/उपाय मै सच्चे मन से विश्वास करे तभी वो सफल होगा.

 
साप्ताहिक टोटके/उपाय
सोमवार के टोटके

मंगलवार के टोटके

बुधवार के टोटके

गुरुवार के टोटके

शुक्रवार के टोटके

शनिवार के टोटके

रविवार के टोटके

अमावस्या के टोटके

पूर्णिमा के टोटके

लौंग के टोटके

नमक के टोटके

नींबू के चमत्कारिक टोटके




How to Please Lord Ganesh

How to Please Lord Ganesh?

Devotees can please Shree Lord Ganesha by offering 21 blades of Durva Grass.
Devotees can please Lord Ganapati by offering Modak/Motichoor ke ladoo during Ganesh puja.
Worship Bhagwan Ganesh on Wednesday to please him.

What are benefits of Ganesh puja?

Lord Ganesha worship reduces physical and mental stress.
Your intellect powers get sharpens.
The raja-tama in the worshiper is smashed.
Your vital energy increases.
Your Adnya-chakra is activated.
The subtle body of the worshiper is purified.
The worshiper’s all monetary difficulties go off.

When should we do Ganesh Puja?

Wednesday is the best day for worshipping lord Ganesha.
Ganesh Chaturthi is the auspicious day for Ganesh pujan.
Worship Ganesha before starting any new business/new work /before starting any auspicious puja or marriage.

Why we should do Ganesh Puja?

According to astrology, Wednesday is considered the day of planet Mercury, which is believed to be the planet of success, lord Ganesha is also the lord of success. If Mercury is weak in your horoscope then you must worship lord Ganesha on Wednesdays. It will also bring good luck and fortune in your life.

5 essential things for Ganesh Puja
1. Modak
2. Dhruva Grass
3. Marigold/Genda
4. Conch Shell/Shankh
5. Fruits(Banana/Sugarcane)
Where to Place Ganesha Idol At Home?

The back of Ganesh idol should always be facing wall not any door or window of the room.
Never place Lord Ganesha Idol in Southern direction of house.
Best direction to place Ganpati Idol is east or west.
Northeast corner of your home is best location to worship Lord Ganesha.
Never place the Ganesha idol across a wall that is attached to the bathroom.
Always put pure metal Lord Ganesha Idol in Home.
Never place Lord Ganesha Idol under staircase of your home.

Ganesha Wallpaper/Images:-

गणेश पूजन सामग्री

गणेश पूजन विधि

गणेश जी की आरती

गणपति अथर्वशीर्ष

गणेश मंत्र

गणेश पूजन सामग्री

गणेश पूजन विधि

गणेश जी की आरती

गणपति अथर्वशीर्ष

गणेश मंत्र

गणेश कवचं

श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र

श्री गणेश चालीसा




Shiva Poojan Samagri

Voidcan Provides You List of Shiva Poojan Samagri list to make your Shiva Pooja very easy and successful. We provides you the list of all essential Products needed in Shiva Puja.

Aasan/Mat; Specially ,Made from Wool
Aankade Ka Phool/Arka Flower/Calotropis Gigantea
Agarbatti/Incense Sticks
Akshata (Chawal)/ Rice/Oryza Sativa
Ashtagandha/Scented Orange Powder
Attar/Scent; Speically Aloe fragrance to be used
Bel Patra/Bael Leafs/Aegle Marmelos
Bhang/Cannabis/ Cannabis Sativa
Chandan/Sandal Paste/Santalum Album
Dahi/Yogurt/Lactobacillus
Deepak/Lamps
Dhatura Flower/Mooflowers/Datura Stramonium
Dhoop
Diye Ki Batti/Cotton Wicks/Gossypium
Doodh/Milk; Specially Cow Milk Without Boiling
Fal/Fruits; specially Ber/Jujube and Bananas
Ganga Jal/Holy Water
Ghanta/Bell
Ghee
Kalash/Finial
Karpoor/Camphor/Cinnamomum Camphora
Loung/Cloves
Maachis/Match Box
Shivalingam/Idol of Shiva Ling
Mewa/Dryfruits
Mithyi/Sweets
Nariyal/Coconut/Cocos Nucifera
Nariyal Pani/Tender Coconut water
Panchamrit (Mixture of Milk, Sugar, Ghee, Honey Curd)
Phool/Flowers; Specially Pink or White Lotus/Kamal Ka Phool
Phool Mala/Garland
Saaf Kapda safed/White Cloth
Shahad/Honey
Sindoor/Sindoor/Cinnabar
Shugar/ Shakar (Chini)
Supari/Betel Buts/ Areca Catechu
Tambulam/ Betel Leaf/ Piper Betle
Thaali/Plate
Vibhuti/Holy Ash

Aasan/Mat; Specially ,Made from Wool
Aankade Ka Phool/Arka Flower/Calotropis Gigantea
Agarbatti/Incense Sticks
Akshata (Chawal)/ Rice/Oryza Sativa
Ashtagandha/Scented Orange Powder
Attar/Scent; Speically Aloe fragrance to be used
Bel Patra/Bael Leafs/Aegle Marmelos
Bhang/Cannabis/ Cannabis Sativa
Chandan/Sandal Paste/Santalum Album
Dahi/Yogurt/Lactobacillus
Deepak/Lamps
Dhatura Flower/Mooflowers/Datura Stramonium
Dhoop
Diye Ki Batti/Cotton Wicks/Gossypium
Doodh/Milk; Specially Cow Milk Without Boiling
Fal/Fruits; specially Ber/Jujube and Bananas
Ganga Jal/Holy Water
Ghanta/Bell
Ghee
Kalash/Finial
Karpoor/Camphor/Cinnamomum Camphora
Loung/Cloves
Maachis/Match Box
Shivalingam/Idol of Shiva Ling
Mewa/Dryfruits
Mithyi/Sweets
Nariyal/Coconut/Cocos Nucifera
Nariyal Pani/Tender Coconut water
Panchamrit (Mixture of Milk, Sugar, Ghee, Honey Curd)
Phool/Flowers; Specially Pink or White Lotus/Kamal Ka Phool
Phool Mala/Garland
Saaf Kapda safed/White Cloth
Shahad/Honey
Sindoor/Sindoor/Cinnabar
Shugar/ Shakar (Chini)
Supari/Betel Buts/ Areca Catechu
Tambulam/ Betel Leaf/ Piper Betle
Thaali/Plate
Vibhuti/Holy Ash

Shiva Poojan Samagri Wallpaper/Images:-
https://youtu.be/QaJ6HtrpnYU




How to Please Lord Shiva

Month of  Saawan is very dear to the n Shiva, it is very easy to please Lord Shiva by worshiping him in Shraavan month and Shiva will fulfills all your wishes.  Worshiping Lord Shiva in the Sawan Month has much significance. As, Monday is the day dedicated to Lord Shiva so the Monday within the Saawan Month is most important to do Shiva Puja. To complete the Shiva Pooja keep fast on each Monday.

Starting from July 10, it will end on August 7. After a long time, a coincidence is made when the saawan is being started from the Monday. 10 July (Monday) Shrawan Monday fast

17 July (Monday) Shrawan Monday fast

24 July (Monday) Shrawan Monday fast

31 July (Monday) Shrawan Monday fast

07 August (Monday) Shrawan Monday fast

In the month of Saavan, In Shiva Purana it have been told some simple and good remedy for getting Lord Shiva’s blessings,. By doing these measures you can please Shivji.

  • In the month of Saavan, you can get wealth by offering rice to Lord Shiva.
  • By offering oatmeal to Lord Shiva in the month of Saavan, happiness increases.
  • Offering wheat to shiva in saavan month solve the child birth problem
  • Sprikal Gomutra and Guugle Dhoop to solve all your problems in home
  • Offering 21 BilvPatra on Shivling will fulfill all your wishes
  • Feeding green fodder to a bull in Saavan month will bring happiness and prosperity in life.
  • By donating food to the poor in Saawan, the soul of your ancestors will get peace.
  • By offering black sesame and water to shivling will give peace to the mind.
  • By adding milk and black sesame in water and offering to shivling will get you rid of all type of disease
  • Offer mustard oil to shivling to get rid of enemies
  • Offer Lotus to Shivling to get wealth
  • Offer Shami Leaves to Shivling to get rid of all your sins.

https://youtu.be/QaJ6HtrpnYU

In addition to the above measures,  Lord Shiva is very happy with the reading of the following stotra’s, chalisa, or kavach :

108 Names of Lord Shiva
महामृत्युंजय मंत्र
शिवताण्डवस्तोत्रम्
शिव अष्टोत्तर शतनाम
Shiva Chalisa | शिव चालीसा
शिव जी की आरती
शिव मंत्र
शिव पूजा विधि
अर्धनारीश्वर अष्टकम
बिल्वाष्टकम स्तोत्रम
द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्
काशीविश्वनाथष्टकम्
रुद्राष्टकम
शिव गायत्री मंत्र
शिव कवच
शिव महिम्न स्तोत्
शिव पञ्चाक्षरिस्तोत्रम्
Shiva Rudrashtakam Stotra
शिवाष्टकम्
निर्वाण षटकम्
लिङ्गाष्टकम्




सावन में शिवजी को प्रसन्न करने के उपाय

सावन का महीना शिवजी को बहुत प्रिय है, श्रावण मास मै शिवजी की पूजा करके उन्हे प्रसन्न करना बहुत आसान होता है और शिवजी आपकी सारी मनोकामना पूरी करते है. श्रावण (सावन) के सोमवार को भगवान शिव की आराधना को विशेष माना गया है।

श्रावण मास (सावन का महीना) 2020

जुलाई 6 2020 से चालू होकर अगस्त 3, 2020 को ख़तम होगा.

जुलाई 6, 2020, सोमवार
प्रथम श्रावण सोमवार व्रत

जुलाई 13, 2020, सोमवार
द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत

जुलाई 20, 2020, सोमवार
तृतीय श्रावण सोमवार व्रत

जुलाई 27, 2020, सोमवार
चतुर्थ श्रावण सोमवार व्रत

अगस्त 3, 2020, सोमवार
पञ्चम श्रावण सोमवार व्रत
श्रावण समाप्त

सावन के महीने मैं भगवान शिवजी का आशीर्वाद पाने के लिए कुछ सरल और अचूक उपाय  शिवपुराण मैं बताये गए है। ये उपाय करके आप शिवजी को प्रसंन्न कर सकते है।

सावन के महीने मैं भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
सावन के महीने मैं भगवान शिव को सफ़ेद तिल्ली चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है।
सावन के महीने मैं भगवान शिव को जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है।
सावन के महीने मैं भगवान शिव को गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।
सावन के महीने मैं रोज 21 बिल्वपत्रों पर चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढाने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।
सावन के महीने में रोज सुबह घर में गोमूत्र का छिड़काव करें एंव गुग्गल का धूप दें,घर की सारी परेशानिया ख़तम हो जाएगी।
सावन में रोज बैल को हरा चारा खिलाने से जीवन में सुख-समृद्धि आएगी।
सावन में गरीबों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी।
सावन में रोज सुबह किसी शिव मंदिर में जल अभिषेक कर काले तिल अर्पण करने से मन को शांति मिलेगी।
सावन में रोज सुबह आटे की गोलियां मछलियों को खिलाने से धन प्राप्ति होती है।
सावन के महीने मैं पानी में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करने से बीमारियां दूर होती हैं.
सावन के महीने मैं घी से अभिषेक करने पर वंशवृद्धि होती है।
सावन के महीने मैं इत्र से अभिषेक करने पर भौतिक सुखों मैं वृद्धि होती है।
सावन के महीने मैं शहद से अभिषेक करने पर परिवार में बीमारियों नहीं रहती।
सावन के महीने मैं गन्ने के रस से अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि बढ़ती है।
सावन के महीने मैं सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का नाश होता।
सावन के महीने मैं कमल पुष्प चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है।
सावन के महीने मैं कुशा चढ़ाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सावन के महीने मैं दूर्वा चढ़ाने से आयु बढ़ती होती है।
सावन के महीने मैं धतूरा अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
सावन के महीने मैं कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह नहीं होती हैं।
सावन के महीने मैं शमी का पत्ता चढ़ाने से पापों का नाश होता

https://youtu.be/QaJ6HtrpnYU

उक्त उपायों के अलावा सावन माह मैं निचे दिए गए स्त्रोत , चालीसा, या कवच का नित्य पाठ करने से भी शिवजी बहुत प्रसन्न होते है-

108 Names of Lord Shiva
महामृत्युंजय मंत्र
शिवताण्डवस्तोत्रम्
शिव अष्टोत्तर शतनाम
Shiva Chalisa | शिव चालीसा
शिव जी की आरती
शिव मंत्र
शिव पूजा विधि
अर्धनारीश्वर अष्टकम
बिल्वाष्टकम स्तोत्रम
द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्
काशीविश्वनाथष्टकम्
रुद्राष्टकम
शिव गायत्री मंत्र
शिव कवच
शिव महिम्न स्तोत्
शिव पञ्चाक्षरिस्तोत्रम्
Shiva Rudrashtakam Stotra
शिवाष्टकम्
निर्वाण षटकम्
लिङ्गाष्टकम्




लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम्

लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् के लाभ

लिंगाष्टकम स्तोत्र  शिवलिंग की स्तुति कर शिवजी को प्रसन्न करने का उत्तम उपाय है, जो कोई व्यक्ति आस्था तथा श्रृद्धा सहित शिवजी के लिंगाष्टकम स्तोत्रम् का पाठ करेगा उसकी सभी मनोकामना तथा इच्छाओं की पूर्ति स्वयं शिव शंकर करते हैं।

लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी स्नान करके शिवलिंग के सामने लिङ्गाष्टकं का पाठ करे. सर्वप्रथम शिवलिंग का कच्चे दूध और जल से अभिषेक करे, तत्पश्चात धुप, दीप, पुष्प और नैवैद्य अर्पित करे , तत्पश्चात लिङ्गाष्टकं का पाठ करे |

लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् हिंदी में अनुवाद सहित

ब्रह्ममुरारिसुरार्चित लिगं निर्मलभाषितशोभित लिंग |
जन्मजदुःखविनाशक लिंग तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥१

मैं उन सदाशिव लिंग को प्रणाम करता हूँ जिनकी ब्रह्मा, विष्णु एवं देवताओं द्वारा अर्चना की जाति है, जो सदैव निर्मल भाषाओं द्वारा पुजित हैं तथा जो लिंग जन्म-मृत्यू के चक्र का विनाश करता है (मोक्ष प्रदान करता है)

देवमुनिप्रवरार्चित लिंगं, कामदहं करुणाकर लिंगं|
रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥२

देवताओं और मुनियों द्वारा पुजित लिंग, जो काम का दमन करता है तथा करूणामयं शिव का स्वरूप है, जिसने रावण के अभिमान का भी नाश किया, उन सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ।

सर्वसुगंन्धिसुलेपित लिंगं, बुद्धिविवर्धनकारण लिंगं|
सिद्धसुरासुरवन्दित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥३

सभी प्रकार के सुगंधित पदार्थों द्वारा सुलेपित लिंग, जो कि बुद्धि का विकास करने वाल है तथा, सिद्ध- सुर (देवताओं) एवं असुरों सबों के लिए वन्दित है, उन सदाशिव लिंक को प्रणाम।

कनकमहामणिभूषित लिंगं, फणिपतिवेष्टितशोभित लिंगं|
दक्षसुयज्ञविनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥४

स्वर्ण एवं महामणियों से विभूषित, एवं सर्पों के स्वामी से शोभित सदाशिव लिंग जो कि दक्ष के यज्ञ का विनाश करने वाल है ; आपको प्रणाम।

कुंकुमचंदनलेपित लिंगं, पंङ्कजहारसुशोभित लिंगं|
संञ्चितपापविनाशिन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥५

कुंकुम एवं चन्दन से शोभायमान, कमल हार से शोभायमान सदाशिव लिंग जो कि सारे संञ्चित पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है, उन सदाशिव लिंग को प्रणाम ।

देवगणार्चितसेवित लिंग, भवैर्भक्तिभिरेवच लिंगं|
दिनकरकोटिप्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥६

आप सदाशिव लिंग को प्रणाम जो कि सभी देवों एवं गणों द्वारा शुद्ध विचार एवं भावों द्वारा पुजित है तथा जो करोडों सूर्य सामान प्रकाशित हैं।

अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भवकारण लिंगं|
अष्टदरिद्रविनाशित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥७

आठों दलों में मान्य, एवं आठों प्रकार के दरिद्रता का नाश करने वाले सदाशिव लिंग सभी प्रकार के सृजन के परम कारण हैं – आप सदाशिव लिंग को प्रणाम।

सुरगुरूसुरवरपूजित लिंगं, सुरवनपुष्पसदार्चित लिंगं|
परात्परं परमात्मक लिंगं, ततप्रणमामि सदाशिव लिंगं||

देवताओं एवं देव गुरू द्वारा स्वर्ग के वाटिका के पुष्पों से पुजित परमात्मा स्वरूप जो कि सभी व्याख्याओं से परे है – उन सदाशिव लिंग को प्रणाम।

लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् हिंदी  PDF डाउनलोड

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लिङ्गाष्टकं स्तोत्रम् हिंदी  MP3 डाउनलोड

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श्री शनि देव चालीसा

शनि चालीसा | शनि देव की कृपा पाने का शक्तिशाली पाठ

शनि चालीसा क्या है?

शनि चालीसा भगवान शनि देव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, जो मनुष्य के कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।

भक्त शनि चालीसा का पाठ शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और जीवन की बाधाओं से राहत पाने के लिए करते हैं।

श्री शनि देव चालीसा हिंदी अर्थ सहित

॥दोहा॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

हे माता पार्वती के पुत्र भगवान श्री गणेश, आपकी जय हो। आप कल्याणकारी है, सब पर कृपा करने वाले हैं, दीन लोगों के दुख दुर कर उन्हें खुशहाल करें भगवन। हे भगवान श्री शनिदेव जी आपकी जय हो, हे प्रभु, हमारी प्रार्थना सुनें, हे रविपुत्र हम पर कृपा करें व भक्तजनों की लाज रखें।

॥चौपाई॥

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिये माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

हे दयालु शनिदेव महाराज आपकी जय हो, आप सदा भक्तों के रक्षक हैं उनके पालनहार हैं। आप श्याम वर्णीय हैं व आपकी चार भुजाएं हैं। आपके मस्तक पर रतन जड़ित मुकुट आपकी शोभा को बढा रहा है। आपका बड़ा मस्तक आकर्षक है, आपकी दृष्टि टेढी रहती है ( शनिदेव को यह वरदान प्राप्त हुआ था कि जिस पर भी उनकी दृष्टि पड़ेगी उसका अनिष्ट होगा इसलिए आप हमेशा टेढी दृष्टि से देखते हैं ताकि आपकी सीधी दृष्टि से किसी का अहित न हो)। आपकी भृकुटी भी विकराल दिखाई देती है। आपके कानों में सोने के कुंडल चमचमा रहे हैं। आपकी छाती पर मोतियों व मणियों का हार आपकी आभा को और भी बढ़ा रहा है। आपके हाथों में गदा, त्रिशूल व कुठार हैं, जिनसे आप पल भर में शत्रुओं का संहार करते हैं।

पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुःख भंजन॥

सौरी, मन्द, शनि, दशनामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं। रंकहुं राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

पिंगल, कृष्ण, छाया नंदन, यम, कोणस्थ, रौद्र, दु:ख भंजन, सौरी, मंद, शनि ये आपके दस नाम हैं। हे सूर्यपुत्र आपको सब कार्यों की सफलता के लिए पूजा जाता है। क्योंकि जिस पर भी आप प्रसन्न होते हैं, कृपालु होते हैं वह क्षण भर में ही रंक से राजा बन जाता है। पहाड़ जैसी समस्या भी उसे घास के तिनके सी लगती है लेकिन जिस पर आप नाराज हो जांए तो छोटी सी समस्या भी पहाड़ बन जाती है।

राज मिलत वन रामहिं दीन्हो। कैकेइहुं की मति हरि लीन्हो॥

बनहूं में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चतुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलाखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महँ कीन्हों। तब प्रसन्न प्रभु हवै सुख दीन्हों॥

हे प्रभु आपकी दशा के चलते ही तो राज के बदले भगवान श्री राम को भी वनवास मिला था। आपके प्रभाव से ही केकैयी ने ऐसा बुद्धि हीन निर्णय लिया। आपकी दशा के चलते ही वन में मायावी मृग के कपट को माता सीता पहचान न सकी और उनका हरण हुआ। उनकी सूझबूझ भी काम नहीं आयी। आपकी दशा से ही लक्ष्मण के प्राणों पर संकट आन खड़ा हुआ जिससे पूरे दल में हाहाकार मच गया था। आपके प्रभाव से ही रावण ने भी ऐसा बुद्धिहीन कृत्य किया व प्रभु श्री राम से शत्रुता बढाई। आपकी दृष्टि के कारण बजरंग बलि हनुमान का डंका पूरे विश्व में बजा व लंका तहस-नहस हुई। आपकी नाराजगी के कारण राजा विक्रमादित्य को जंगलों में भटकना पड़ा। उनके सामने हार को मोर के चित्र ने निगल लिया व उन पर हार चुराने के आरोप लगे। इसी नौलखे हार की चोरी के आरोप में उनके हाथ पैर तुड़वा दिये गये। आपकी दशा के चलते ही विक्रमादित्य को तेली के घर कोल्हू चलाना पड़ा। लेकिन जब दीपक राग में उन्होंनें प्रार्थना की तो आप प्रसन्न हुए व फिर से उन्हें सुख समृद्धि से संपन्न कर दिया।

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहि गहयो जब जाई। पार्वती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रोपदी होति उधारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ई॥

आपकी दशा पड़ने पर राजा हरिश्चंद्र की स्त्री तक बिक गई, स्वयं को भी डोम के घर पर पानी भरना पड़ा। उसी प्रकार राजा नल व रानी दयमंती को भी कष्ट उठाने पड़े, आपकी दशा के चलते भूनी हुई मछली तक वापस जल में कूद गई और राजा नल को भूखों मरना पड़ा। भगवान शंकर पर आपकी दशा पड़ी तो माता पार्वती को हवन कुंड में कूदकर अपनी जान देनी पड़ी। आपके कोप के कारण ही भगवान गणेश का सिर धड़ से अलग होकर आकाश में उड़ गया। पांडवों पर जब आपकी दशा पड़ी तो द्रौपदी वस्त्रहीन होते होते बची। आपकी दशा से कौरवों की मति भी मारी गयी जिसके परिणाम में महाभारत का युद्ध हुआ। आपकी कुदृष्टि ने तो स्वयं अपने पिता सूर्यदेव को नहीं बख्शा व उन्हें अपने मुख में लेकर आप पाताल लोक में कूद गए। देवताओं की लाख विनती के बाद आपने सूर्यदेव को अपने मुख से आजाद किया।

वाहन प्रभु के सात सुजाना। दिग्ज हय गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पत्ति उपजावै॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँजी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै॥

समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्वसुख मंगल कारी॥

हे प्रभु आपके सात वाहन हैं। हाथी, घोड़ा, गधा, हिरण, कुत्ता, सियार और शेर जिस वाहन पर बैठकर आप आते हैं उसी प्रकार ज्योतिष आपके फल की गणना करता है। यदि आप हाथी पर सवार होकर आते हैं घर में लक्ष्मी आती है। यदि घोड़े पर बैठकर आते हैं तो सुख संपत्ति मिलती है। यदि गधा आपकी सवारी हो तो कई प्रकार के कार्यों में अड़चन आती है, वहीं जिसके यहां आप शेर पर सवार होकर आते हैं तो आप समाज में उसका रुतबा बढाते हैं, उसे प्रसिद्धि दिलाते हैं। वहीं सियार आपकी सवारी हो तो आपकी दशा से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है व यदि हिरण पर आप आते हैं तो शारीरिक व्याधियां लेकर आते हैं जो जानलेवा होती हैं। हे प्रभु जब भी कुत्ते की सवारी करते हुए आते हैं तो यह किसी बड़ी चोरी की और ईशारा करती है। इसी प्रकार आपके चरण भी सोना, चांदी, तांबा व लोहा आदि चार प्रकार की धातुओं के हैं। यदि आप लौहे के चरण पर आते हैं तो यह धन, जन या संपत्ति की हानि का संकेतक है। वहीं चांदी व तांबे के चरण पर आते हैं तो यह सामान्यत शुभ होता है, लेकिन जिनके यहां भी आप सोने के चरणों में पधारते हैं, उनके लिये हर लिहाज से सुखदायक व कल्याणकारी होते है।

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अदभुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

जो भी इस शनि चरित्र को हर रोज गाएगा उसे आपके कोप का सामना नहीं करना पड़ेगा, आपकी दशा उसे नहीं सताएगी। उस पर भगवान शनिदेव महाराज अपनी अद्भुत लीला दिखाते हैं व उसके शत्रुओं को कमजोर कर देते हैं। जो कोई भी अच्छे सुयोग्य पंडित को बुलाकार विधि व नियम अनुसार शनि ग्रह को शांत करवाता है। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष को जल देता है व दिया जलाता है उसे बहुत सुख मिलता है। प्रभु शनिदेव का दास रामसुंदर भी कहता है कि भगवान शनि के सुमिरन सुख की प्राप्ति होती है व अज्ञानता का अंधेरा मिटकर ज्ञान का प्रकाश होने लगता है।

॥दोहा॥

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

भगवान शनिदेव के इस पाठ को ‘विमल’ ने तैयार किया है जो भी इस चालीसा का चालीस दिन तक पाठ करता है शनिदेव की कृपा से वह भवसागर से पार हो जाता है।

शनि देव का धार्मिक महत्व

शनि देव नवग्रहों में विशेष स्थान रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ फल देते हैं।

इसलिए शनि चालीसा का नियमित पाठ आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली की प्रेरणा देता है।

शनि चालीसा पढ़ने के लाभ

1. शनि दोष से राहत

भक्तों की मान्यता है कि नियमित पाठ से शनि संबंधित कष्ट कम हो सकते हैं।

2. मानसिक शांति प्राप्त होती है

शनि चालीसा मन को स्थिर और सकारात्मक रखने में सहायक मानी जाती है।

3. नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है

शनिवार को पाठ करने से भय और तनाव कम होने का विश्वास किया जाता है।

4. आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है

शनि देव अनुशासन और कर्म के प्रतीक माने जाते हैं।

5. जीवन की बाधाएँ कम होती हैं

कई भक्त कठिन समय में शनि चालीसा का पाठ करते हैं।

शनि चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

सबसे शुभ समय:

शनिवार सुबह
सूर्यास्त के बाद
शनि मंदिर में दीपक जलाकर
साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान
अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या
शनि चालीसा क्यों लोकप्रिय है?

शनि चालीसा और हनुमान जी का संबंध

धार्मिक मान्यता के अनुसार हनुमान जी की उपासना करने से भी शनि पीड़ा कम होती है। इसलिए कई भक्त शनिवार को शनि चालीसा के साथ हनुमान चालीसा का भी पाठ करते हैं।

Shani Chalisa PDF

कई श्रद्धालु मोबाइल या प्रिंट के लिए शनि चालीसा PDF डाउनलोड करना चाहते हैं ताकि वे ऑफलाइन भी पाठ कर सकें।

शनिवार को शनि पूजा कैसे करें?

सरल पूजा विधि
सुबह स्नान करें
काले तिल और तेल अर्पित करें
पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाएँ
शनि चालीसा का पाठ करें
जरूरतमंदों को दान दें

Frequently Asked Questions (FAQ)
1. शनि चालीसा पढ़ने से क्या लाभ होता है?

शनि चालीसा का पाठ मानसिक शांति, धैर्य और शनि दोष से राहत पाने के लिए किया जाता है।

2. शनि चालीसा कब पढ़नी चाहिए?

शनिवार को सुबह या शाम के समय पढ़ना शुभ माना जाता है।

3. क्या शनि चालीसा रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा से प्रतिदिन शनि चालीसा पढ़ी जा सकती है।

4. क्या शनि चालीसा साढ़ेसाती में लाभ देती है?

भक्तों का विश्वास है कि शनि चालीसा साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान मानसिक शक्ति देती है।

5. शनि देव को क्या अर्पित करना चाहिए?

काले तिल, सरसों का तेल और नीले या काले वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

6. क्या महिलाएँ शनि चालीसा पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ और पुरुष दोनों शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

7. शनि चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?

यह श्रद्धा पर निर्भर करता है। कई लोग शनिवार को 1, 7 या 11 बार पाठ करते हैं।

8. क्या शनि चालीसा से भय दूर होता है?

भक्तों के अनुसार नियमित पाठ मानसिक भय और नकारात्मकता को कम करने में सहायक होता है।

9. Shani Chalisa PDF कहाँ मिलेगी?

धार्मिक वेबसाइटों पर शनि चालीसा PDF उपलब्ध होती है।

10. क्या शनिवार को हनुमान चालीसा भी पढ़नी चाहिए?

हाँ, कई भक्त शनिवार को शनि चालीसा के साथ हनुमान चालीसा भी पढ़ते हैं।

11. शनि देव किसके पुत्र हैं?

धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं।

12. शनि चालीसा कितने मिनट में पढ़ी जा सकती है?

सामान्यतः 8 से 12 मिनट का समय लगता है।

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निर्वाण षटकम्

निर्वाण षटकम् के लाभ

आदि शंकर द्वारा रचित निर्वाण षट्कम  का मूल भाव वैराग्य है। इस निर्वाण षट्कम  को ब्रह्मचर्य मार्ग के सामान माना जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार निर्वाण षटकम् का पाठ करने से चित्त को शांति और सारे भ्रमो से मुक्ति मिलती है.

निर्वाण षटकम् का पाठ कैसे करे

हिन्दू धरम शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी स्नान करके भगवन शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने निर्वाण षटकम् का पाठ  करे. सर्वप्रथम शिवलिंग का कच्चे दूध और जल से अभिषेक करे, तत्पश्चात धुप, दीप, पुष्प और नैवैद्य अर्पित करे , तत्पश्चात निर्वाण षटकम् का पाठ  करे |

निर्वाण षटकम् हिंदी में अनुवाद सहित

मनोबुद्धयहंकारचित्तानि नाहम् श्रोत्र जिह्वे घ्राण नेत्रे

व्योम भूमिर्न तेजॊ वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् 1

मैं न तो मन हूं, न बुद्धि, न अहंकार, न ही चित्त हूं

मैं न तो कान हूं, न जीभ, न नासिका, न ही नेत्र हूं

मैं न तो आकाश हूं, न धरती, न अग्नि, न ही वायु हूं

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

प्राण संज्ञो वै पञ्चवायु:  वा सप्तधातुर्न वा पञ्चकोश:

वाक्पाणिपादौ   चोपस्थपायू चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् 2

मैं न प्राण हूं,  न ही पंच वायु हूं

मैं न सात धातु हूं,

और न ही पांच कोश हूं

मैं न वाणी हूं, न हाथ हूं, न पैर, न ही उत्‍सर्जन की इन्द्रियां हूं

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

मे द्वेष रागौ मे लोभ मोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव:

धर्मो चार्थो कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् 3

न मुझे घृणा है, न लगाव है, न मुझे लोभ है, और न मोह

न मुझे अभिमान है, न ईर्ष्या

मैं धर्म, धन, काम एवं मोक्ष से परे हूं

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

पुण्यं पापं सौख्यं दु:खम् मन्त्रो तीर्थं वेदार्  यज्ञा:

अहं भोजनं नैव भोज्यं भोक्ता चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् 4

मैं पुण्य, पाप, सुख और दुख से विलग हूं

मैं न मंत्र हूं, न तीर्थ, न ज्ञान, न ही यज्ञ

न मैं भोजन(भोगने की वस्‍तु) हूं, न ही भोग का अनुभव, और न ही भोक्ता हूं

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

न मे मृत्यु शंका मे जातिभेद:पिता नैव मे नैव माता जन्म:

बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् 5

न मुझे मृत्यु का डर है, न जाति का भेदभाव

मेरा न कोई पिता है, न माता, न ही मैं कभी जन्मा था

मेरा न कोई भाई है, न मित्र, न गुरू, न शिष्य,

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्

चासंगतं नैव मुक्तिर्न मेय: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् 6

मैं निर्विकल्प हूं, निराकार हूं

मैं चैतन्‍य के रूप में सब जगह व्‍याप्‍त हूं, सभी इन्द्रियों में हूं,

न मुझे किसी चीज में आसक्ति है, न ही मैं उससे मुक्त हूं,

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि‍, अनंत शिव हूं।

 

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