संकल्प मंत्र | Sankalp Mantra in Hindi Lyrics PDF
संकल्प मंत्र
संकल्प मंत्र हिंदू पूजा, व्रत, जप, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का एक महत्वपूर्ण भाग है। किसी भी पूजा की शुरुआत में भक्त अपने मन, वाणी और कर्म को एक दिशा देने के लिए संकल्प लेता है। संकल्प का अर्थ है दृढ़ निश्चय, पवित्र इच्छा या वह शुभ उद्देश्य जिसके लिए पूजा की जा रही है।
सरल शब्दों में, संकल्प मंत्र पूजा को व्यक्तिगत और उद्देश्यपूर्ण बनाता है। इसमें भक्त अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि, देवता और पूजा का उद्देश्य बोलकर ईश्वर के सामने अपनी भावना प्रकट करता है। संकल्प को पूजा, यज्ञ और साधना का आधार माना जाता है, क्योंकि इससे मन पूजा के उद्देश्य से जुड़ता है और भक्त की एकाग्रता बढ़ती है।
संकल्प मंत्र क्या है?
संकल्प मंत्र वह वैदिक या पूजात्मक मंत्र है, जिसे पूजा शुरू करने से पहले बोला जाता है। इसके माध्यम से भक्त यह घोषणा करता है कि वह किस उद्देश्य से पूजा, व्रत, जप, पाठ, दान या हवन कर रहा है।
संकल्प मंत्र में सामान्य रूप से ये बातें शामिल होती हैं:
भक्त का नाम
गोत्र, यदि ज्ञात हो
स्थान
तिथि, वार और समय
पूजा या व्रत का नाम
देवता का नाम
मनोकामना या पूजा का उद्देश्य
संकल्प मंत्र केवल औपचारिक घोषणा नहीं है। यह भक्त के मन को पूजा के लक्ष्य से जोड़ने का माध्यम है।
संकल्प का मंत्र
दाहिने हाथ में जल, पुष्प, सिक्का तथा अक्षत लेकर संकल्प मंत्र का उच्चारण करे:
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : 2071, तमेऽब्दे प्लवंग नाम संवत्सरे दक्षिणायने ……. ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे ……. मासे …… पक्षे …….. तिथौ ……. वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री ……….. (जिस देवी.देवता की पूजा कर रहे हैं उनका नाम ले)पूजनं च अहं करिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन निर्विघ्नतापूर्वक कार्य सिद्धयर्थं यथामिलितोपचारे गणपति पूजनं करिष्ये।
संकल्प मंत्र बोलने के बाद हाथ की सारी सामग्री निचे छोड़ दे
अमुक स्थाने – कार्य का स्थान
अमुक संवत्सरे – संवत्सर का नाम
अमुक अयने – उत्तरायन/दक्षिणायन
अमुक ऋतौ – वसंत आदि छह ऋतु हैं
अमुक मासे – चैत्र आदि 12 मास हैं
अमुक पक्षे – पक्ष का नाम (शुक्ल या कृष्ण पक्ष)
अमुक तिथौ – तिथि का नाम
अमुक वासरे – दिन का नाम
अमुक समये – दिन में कौन सा समय
संकल्प मंत्र बोलने की सरल विधि
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और देवता के सामने बैठें। दाहिने हाथ में जल, अक्षत और फूल लें। मन को शांत करें और अपने इष्ट देव का ध्यान करें। फिर अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि और पूजा का उद्देश्य बोलकर संकल्प करें। संकल्प के बाद हाथ में लिया हुआ जल किसी पात्र या जमीन पर छोड़ दें।
यदि पूरा संस्कृत संकल्प मंत्र याद न हो, तो सरल हिंदी में भी संकल्प लिया जा सकता है। भगवान भावना देखते हैं, इसलिए उच्चारण से अधिक श्रद्धा, स्पष्ट उद्देश्य और मन की पवित्रता महत्वपूर्ण है।
सरल संकल्प मंत्र
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
मम उपात्त समस्त दुरितक्षयद्वारा श्री परमेश्वर प्रीत्यर्थं,
अहं [अपना नाम] [अपना गोत्र]
[पूजा/व्रत/जप का नाम] करिष्ये।
सरल हिंदी संकल्प
हे भगवान, मैं [अपना नाम], शुद्ध मन और श्रद्धा से यह [पूजा/व्रत/जप] कर रहा/रही हूं। कृपया मेरी पूजा स्वीकार करें और मुझे शुभ बुद्धि, शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और सही मार्ग का आशीर्वाद दें।
संकल्प मंत्र के लाभ
संकल्प मंत्र का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पूजा को स्पष्ट उद्देश्य, श्रद्धा और एकाग्रता से जोड़ता है। जब भक्त पूजा से पहले संकल्प लेता है, तो उसका मन भटकने के बजाय पूजा के भाव में स्थिर होता है। इससे पूजा केवल बाहरी क्रिया नहीं रहती, बल्कि एक जागरूक आध्यात्मिक अभ्यास बन जाती है।
संकल्प लेने से व्यक्ति के भीतर अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और ईश्वर पर भरोसा बढ़ता है। यह मन को याद दिलाता है कि पूजा किसी डर या दबाव से नहीं, बल्कि भक्ति और शुभ संकल्प से की जा रही है। आध्यात्मिक दृष्टि से संकल्प मंत्र भक्त को अपने कर्म, उद्देश्य और प्रार्थना के प्रति अधिक सजग बनाता है। इसका उद्देश्य केवल मनोकामना बोलना नहीं है, बल्कि मन, वाणी और कर्म को धर्म, भक्ति और शुभ विचारों से जोड़ना है।
FAQs in English
1. What is Sankalp Mantra?
Sankalp Mantra is a sacred declaration made before starting a puja, vrat, japa, havan or religious ritual. It states the devotee’s name, intention, purpose and the worship being performed.
2. What is the meaning of Sankalp Mantra?
The meaning of Sankalp Mantra is to make a sincere spiritual resolve before God. It represents devotion, clarity, discipline and the intention behind the puja or ritual.
3. When should Sankalp Mantra be recited?
Sankalp Mantra is recited at the beginning of a puja, vrat, havan, mantra japa, katha, abhishek, daan or any spiritual ceremony.
4. How should Sankalp Mantra be recited?
Sit in a clean place before the deity, hold water, rice and flowers in your right hand, state your name, gotra, place, date and purpose of the puja, then release the water after completing the sankalp.
5. What are the benefits of Sankalp Mantra?
Sankalp Mantra helps bring focus, clarity, discipline, devotion and positive intention to the ritual. It makes the puja more personal, meaningful and spiritually directed.
