Shri Khatu Shyam Dev Stotra | श्री खाटू श्याम स्तोत्र
Shri Khatu Shyam Dev Stotra
श्री खाटू श्याम स्तोत्र
श्री खाटू श्याम देव स्तोत्र का हिंदी अर्थ
जय जय चतुरशीतिकोटिपरिवार सूर्यवर्चाभिधान यक्षराज।
हे चौरासी करोड़ यक्षों के परिवार से सुशोभित सूर्यवर्चा नामक यक्षराज! आपकी बार-बार जय हो।
जय भूभारहरणप्रवृत्त लघुशापप्राप्तनैर्ऋतियोनिसम्भव।
हे पृथ्वी के भार को कम करने के महान उद्देश्य से कार्य करने वाले प्रभु! एक शाप के कारण राक्षस कुल में जन्म धारण करने वाले देव, आपकी जय हो।
जय कामकटंकटाकुक्षिराजहंस।
हे माता कामकटंकटा, जिन्हें मोरवी के नाम से भी स्मरण किया जाता है, उनकी पवित्र कोख को राजहंस के समान सुशोभित करने वाले वीर! आपकी जय हो।
जय घटोत्कचानन्दवर्धन बर्बरीकाभिधान।
हे घटोत्कच के हृदय का आनंद बढ़ाने वाले और संसार में बर्बरीक के नाम से प्रसिद्ध महावीर! आपकी जय हो।
जय कृष्णोपदिष्ट श्रीगुप्तक्षेत्रदेवीसमाराधनप्राप्तातुलवीर्य।
हे श्रीकृष्ण की आज्ञा और मार्गदर्शन के अनुसार गुप्त क्षेत्र की देवियों की आराधना करके अतुलनीय शक्ति तथा पराक्रम प्राप्त करने वाले वीर! आपकी जय हो।
जय विजयसिद्धिदायक।
हे विजय नामक ब्राह्मण को उसकी साधना में सिद्धि प्रदान करने वाले कृपालु देव! आपकी जय हो।
जय पिंगलारेपलेन्द्रदुहद्रुहा नवकोटीश्वर पलाशनदावानल।
हे पिंगला, रेपलेन्द्र और दुहद्रुहा सहित नौ करोड़ पलाशी राक्षसों के विशाल समूहरूपी वन को दावानल के समान नष्ट करने वाले परम पराक्रमी वीर! आपकी जय हो।
जय भूपातालान्तराले नागकन्यापरिहारक।
हे पृथ्वी और पाताल के मध्य नागकन्याओं द्वारा दिए गए विवाह-प्रस्ताव को स्वीकार न करके अपने व्रत तथा धर्म की रक्षा करने वाले महात्मा! आपकी जय हो।
जय भीममानमर्दन।
हे अपने अद्भुत पराक्रम से महाबली भीम के अभिमान को दूर करने वाले वीर! आपकी जय हो।
जय सकलकौरवसेनावधमुहूर्तप्रवृत्त।
हे संपूर्ण कौरव सेना को एक मुहूर्त में समाप्त करने का सामर्थ्य और उत्साह रखने वाले महायोद्धा! आपकी जय हो।
जय श्रीकृष्णवरलब्धसर्ववरप्रदानसामर्थ्य।
हे भगवान श्रीकृष्ण के वरदान से भक्तों को इच्छित वर प्रदान करने का सामर्थ्य प्राप्त करने वाले बाबा श्याम! आपकी जय हो।
जय जय कलिकालवन्दित।
हे कलियुग में असंख्य भक्तों द्वारा पूजे और वंदित किए जाने वाले देव! आपकी बार-बार जय हो।
नमो नमस्ते, पाहि पाहि इति।
हे श्याम देव! आपको बार-बार प्रणाम है। हमारी रक्षा कीजिए, हमारा मार्गदर्शन कीजिए और हमें अपनी शरण में बनाए रखिए।
स्तोत्र की फलश्रुति का हिंदी अर्थ
अनेन यः सुहृदयं श्रावणेऽभ्यर्च्य दर्शके।
वैशाखे च त्रयोदश्यां कृष्णपक्षे द्विजोत्तमाः।
शतदीपैः पूरिकाभिः संस्तवेत्तस्य तुष्यति॥
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! जो भक्त पवित्र और श्रद्धापूर्ण हृदय से श्रावण मास की अमावस्या अथवा वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को बाबा श्याम की विधिपूर्वक पूजा करता है, सौ दीपक जलाता है, पूरियों का भोग अर्पित करता है और इस स्तोत्र से उनकी स्तुति करता है, उस भक्त पर श्याम देव प्रसन्न होते हैं।
संपूर्ण स्तोत्र का सरल भावार्थ
श्री श्याम देव स्तोत्र में बाबा श्याम के पूर्व स्वरूप सूर्यवर्चा यक्षराज, बर्बरीक के रूप में उनके जन्म, देवी की आराधना से प्राप्त अद्भुत शक्ति, असुरों पर विजय, महाबली भीम के अभिमान को शांत करने वाले पराक्रम और भगवान श्रीकृष्ण से मिले दिव्य वरदान का गुणगान किया गया है। स्तोत्र भक्त को बताता है कि वास्तविक महानता केवल शक्ति में नहीं, बल्कि संयम, धर्मपालन, समर्पण और अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों की रक्षा के लिए करने में है। इसके अंत में भक्त बाबा श्याम को प्रणाम करते हुए उनसे रक्षा, कृपा और सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना करता है।
श्री खाटू श्याम स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व
श्री खाटू श्याम स्तोत्र बाबा खाटू श्याम के दिव्य गुणों, त्याग, करुणा, वीरता और भक्तवत्सल स्वरूप का श्रद्धापूर्ण गुणगान है। लोक-परंपरा के अनुसार बाबा श्याम का संबंध महाभारतकालीन वीर बर्बरीक से माना जाता है, जो घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र थे तथा अपने अद्भुत पराक्रम, तीन अमोघ बाणों और निर्बल पक्ष का साथ देने की प्रतिज्ञा के कारण प्रसिद्ध हुए। प्रचलित धार्मिक कथा में बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा के लिए बर्बरीक से उनके शीश का दान मांगा और उन्होंने बिना किसी मोह के अपना शीश अर्पित कर दिया। इस महान समर्पण के कारण भक्त उन्हें “शीश के दानी”, “तीन बाणधारी” और “हारे के सहारे” के नाम से स्मरण करते हैं। माना जाता है कि श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना श्याम नाम देकर कलियुग में भक्तों के कष्ट सुनने और उनका आध्यात्मिक सहारा बनने का आशीर्वाद प्रदान किया।
श्री श्याम देव स्तोत्र का पाठ भक्त को बाबा श्याम के इसी त्यागमय और कृपालु स्वरूप का ध्यान करने में सहायता करता है। यह स्तोत्र मनुष्य को सिखाता है कि वास्तविक भक्ति केवल इच्छाओं की पूर्ति मांगने तक सीमित नहीं होती, बल्कि अहंकार छोड़कर सत्य, सेवा, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलना भी भक्ति का महत्वपूर्ण भाग है। इसका नियमित पाठ कठिन परिस्थितियों में मन को स्थिर रखने, निराशा के स्थान पर आशा जगाने और अपने प्रयासों के साथ ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दे सकता है। पाठ के लिए किसी जटिल अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है; प्रातः या संध्या के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें, शांत स्थान पर बाबा श्याम का चित्र स्थापित करें और दीपक या धूप जलाकर हाथ जोड़ें। इसके बाद “ॐ श्री श्याम देवाय नमः” का स्मरण करते हुए स्तोत्र को स्पष्ट उच्चारण, शांत गति और एकाग्र मन से पढ़ें। पाठ पूरा होने पर अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगें, प्राप्त सुखों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करें और जीवन में किसी जरूरतमंद की सहायता करने का संकल्प लें। स्तोत्र का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, जबकि एकादशी, शुक्ल पक्ष, फाल्गुन मास, जन्मदिन, नए कार्य के आरंभ या मानसिक परेशानी के समय भक्त इसे विशेष श्रद्धा से पढ़ते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से इसका सबसे बड़ा लाभ भक्त के भीतर समर्पण, विनम्रता और आंतरिक साहस का विकास होना है। यह पाठ समस्याओं से भागने के बजाय धैर्य, विवेक, सत्कर्म और प्रार्थना के साथ उनका सामना करने की शक्ति जगाता है। बाबा श्याम की उपासना करते समय चमत्कार की अपेक्षा करने के स्थान पर सच्ची श्रद्धा, नैतिक आचरण और निरंतर पुरुषार्थ को महत्व देना चाहिए, क्योंकि आध्यात्मिक साधना का वास्तविक उद्देश्य मन को पवित्र करना और जीवन को सेवा, प्रेम तथा सदाचार की दिशा में ले जाना है।
Frequently Asked Questions
1. What is Shri Khatu Shyam Dev Stotra?
Shri Shyam Dev Stotra is a devotional hymn dedicated to Baba Khatu Shyam. It praises his sacrifice, courage, compassion and loving concern for devotees. The recitation is used as a form of prayer, remembrance and spiritual meditation.
2. What is the meaning of Shri Khatu Shyam Dev Stotra?
The stotra expresses surrender to Baba Shyam and remembers his selfless sacrifice. Its deeper message is that faith should inspire humility, courage, service and righteous conduct. It teaches devotees to remain hopeful without abandoning personal effort and responsibility.
3. When should Shri Khatu Shyam Dev Stotra be recited?
The stotra may be recited on any day, preferably during the peaceful hours of the morning or evening. Devotees may also recite it on Ekadashi, during the Phalguna month, before beginning an important task or whenever they feel worried, discouraged or spiritually disconnected.
4. How should Shri Khatu Shyam Dev Stotra be recited?
Take a bath, wear clean clothes and sit in a quiet prayer space facing an image of Baba Shyam. Light a lamp or incense, calm the mind and recite the stotra slowly with sincere attention. Complete the prayer with gratitude and a resolution to practise kindness, truth and service.
5. What are the benefits of reciting Shri Khatu Shyam Dev Stotra?
Regular recitation may encourage mental calmness, devotional discipline, emotional strength and a hopeful outlook. It can help devotees surrender fear, reduce negative thinking and develop patience during difficult situations. Spiritual benefits depend on sincere faith, reflection, ethical conduct and positive action; they should not be treated as guaranteed material results.
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