Ganesh Kavach in Hindi & English PDF | गणेश कवचं
गणेश कवचं: अर्थ, पाठ विधि, समय और लाभ
गणेश कवचं भगवान श्री गणेश की कृपा, सुरक्षा और विघ्न-निवारण के लिए पढ़ा जाने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। “कवच” का अर्थ होता है सुरक्षा कवच या protection shield। जिस प्रकार शरीर की रक्षा के लिए कवच होता है, उसी प्रकार आध्यात्मिक साधना में कवच पाठ को मन, बुद्धि, परिवार, कार्य और जीवन की नकारात्मक बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना माना जाता है।
भगवान गणेश हिंदू परंपरा में शुभारंभ, बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजे जाते हैं। उन्हें किसी भी बड़े कार्य या नए आरंभ से पहले स्मरण करने की परंपरा है।
गणेश कवचं का पाठ भक्त को यह भाव देता है कि भगवान गणेश की कृपा से मन में साहस, विचारों में स्पष्टता और जीवन में शुभ दिशा बनी रहे। यह पाठ विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो बार-बार रुकावट, भय, चिंता, निर्णय की उलझन या नकारात्मकता का अनुभव करते हैं।
गणेश कवचं क्या है?
गणेश कवचं भगवान गणेश को समर्पित एक रक्षा-प्रार्थना स्तोत्र है। इसमें भक्त भगवान गणेश से शरीर, मन, बुद्धि, कर्म, परिवार, यात्रा, कार्य और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों की रक्षा की प्रार्थना करता है।
“गणेश” का अर्थ है गणों के स्वामी और “कवचं” का अर्थ है रक्षा करने वाला आध्यात्मिक आवरण। इसलिए गणेश कवचं का सरल अर्थ है, भगवान गणेश की कृपा से प्राप्त दिव्य सुरक्षा।
गणेश कवचं केवल भय से बचने का पाठ नहीं है। यह भक्त को अपनी बुद्धि को सही दिशा में लगाने, नकारात्मक आदतों से बचने, कार्यों में सावधानी रखने और भगवान गणेश की कृपा से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, शुभारंभ के देवता और आध्यात्मिक यात्रा में बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
Ganesh Kavach In SansKrit/Hindi Lyrics
(गणेश कवचं)
एषोति चपलो दैत्यान् बाल्येपि नाशयत्यहो ।
अग्रे किं कर्म कर्तेति न जाने मुनिसत्तम ॥ १ ॥
दैत्या नानाविधा दुष्टास्साधु देवद्रुमः खलाः ।
अतोस्य कंठे किंचित्त्यं रक्षां संबद्धुमर्हसि ॥ २ ॥
ध्यायेत् सिंहगतं विनायकममुं दिग्बाहु माद्ये युगे
त्रेतायां तु मयूर वाहनममुं षड्बाहुकं सिद्धिदम् । ई
द्वापरेतु गजाननं युगभुजं रक्तांगरागं विभुम् तुर्ये
तु द्विभुजं सितांगरुचिरं सर्वार्थदं सर्वदा ॥ ३ ॥
विनायक श्शिखांपातु परमात्मा परात्परः ।
अतिसुंदर कायस्तु मस्तकं सुमहोत्कटः ॥ ४ ॥
ललाटं कश्यपः पातु भ्रूयुगं तु महोदरः ।
नयने बालचंद्रस्तु गजास्यस्त्योष्ठ पल्लवौ ॥ ५ ॥
जिह्वां पातु गजक्रीडश्चुबुकं गिरिजासुतः ।
वाचं विनायकः पातु दंतान् रक्षतु दुर्मुखः ॥ ६ ॥
श्रवणौ पाशपाणिस्तु नासिकां चिंतितार्थदः ।
गणेशस्तु मुखं पातु कंठं पातु गणाधिपः ॥ ७ ॥
स्कंधौ पातु गजस्कंधः स्तने विघ्नविनाशनः ।
हृदयं गणनाथस्तु हेरंबो जठरं महान् ॥ ८ ॥
धराधरः पातु पार्श्वौ पृष्ठं विघ्नहरश्शुभः ।
लिंगं गुह्यं सदा पातु वक्रतुंडो महाबलः ॥ ९ ॥
गजक्रीडो जानु जंघो ऊरू मंगलकीर्तिमान् ।
एकदंतो महाबुद्धिः पादौ गुल्फौ सदावतु ॥ १० ॥
क्षिप्र प्रसादनो बाहु पाणी आशाप्रपूरकः ।
अंगुलीश्च नखान् पातु पद्महस्तो रिनाशनः ॥ ११ ॥
सर्वांगानि मयूरेशो विश्वव्यापी सदावतु ।
अनुक्तमपि यत् स्थानं धूमकेतुः सदावतु ॥ १२ ॥
आमोदस्त्वग्रतः पातु प्रमोदः पृष्ठतोवतु ।
प्राच्यां रक्षतु बुद्धीश आग्नेय्यां सिद्धिदायकः ॥ १३ ॥
दक्षिणस्यामुमापुत्रो नैऋत्यां तु गणेश्वरः ।
प्रतीच्यां विघ्नहर्ता व्याद्वायव्यां गजकर्णकः ॥ १४ ॥
कौबेर्यां निधिपः पायादीशान्याविशनंदनः ।
दिवाव्यादेकदंत स्तु रात्रौ संध्यासु यःविघ्नहृत् ॥ १५ ॥
राक्षसासुर बेताल ग्रह भूत पिशाचतः ।
पाशांकुशधरः पातु रजस्सत्त्वतमस्स्मृतीः ॥ १६ ॥
ज्ञानं धर्मं च लक्ष्मी च लज्जां कीर्तिं तथा कुलम् । ई
वपुर्धनं च धान्यं च गृहं दारास्सुतान्सखीन् ॥ १७ ॥
सर्वायुध धरः पौत्रान् मयूरेशो वतात् सदा ।
कपिलो जानुकं पातु गजाश्वान् विकटोवतु ॥ १८ ॥
भूर्जपत्रे लिखित्वेदं यः कंठे धारयेत् सुधीः ।
न भयं जायते तस्य यक्ष रक्षः पिशाचतः ॥ १९ ॥
त्रिसंध्यं जपते यस्तु वज्रसार तनुर्भवेत् ।
यात्राकाले पठेद्यस्तु निर्विघ्नेन फलं लभेत् ॥ २० ॥
युद्धकाले पठेद्यस्तु विजयं चाप्नुयाद्ध्रुवम् ।
मारणोच्चाटनाकर्ष स्तंभ मोहन कर्मणि ॥ २१ ॥
सप्तवारं जपेदेतद्दनानामेकविंशतिः ।
तत्तत्फलमवाप्नोति साधको नात्र संशयः ॥ २२ ॥
एकविंशतिवारं च पठेत्तावद्दिनानि यः ।
कारागृहगतं सद्यो राज्ञावध्यं च मोचयोत् ॥ २३ ॥
राजदर्शन वेलायां पठेदेतत् त्रिवारतः ।
स राजानं वशं नीत्वा प्रकृतीश्च सभां जयेत् ॥ २४ ॥
इदं गणेशकवचं कश्यपेन सविरितम् ।
मुद्गलाय च ते नाथ मांडव्याय महर्षये ॥ २५ ॥
मह्यं स प्राह कृपया कवचं सर्व सिद्धिदम् ।
न देयं भक्तिहीनाय देयं श्रद्धावते शुभम् ॥ २६ ॥
अनेनास्य कृता रक्षा न बाधास्य भवेत् व्याचित् ।
राक्षसासुर बेताल दैत्य दानव संभवाः ॥ २७ ॥
॥ इति श्री गणेशपुराणे श्री गणेश कवचं संपूर्णम् ॥
गणेश कवचं का अर्थ
गणेश कवचं का मुख्य अर्थ है भगवान गणेश से सुरक्षा, बुद्धि, धैर्य और शुभ फल की प्रार्थना करना। इस कवच में भक्त यह भाव रखता है कि गणपति जी उसके जीवन के हर दिशा, हर कार्य और हर निर्णय में रक्षा करें।
इसका गहरा संदेश यह है कि मनुष्य को केवल बाहरी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा की भी आवश्यकता होती है। कई बार सबसे बड़ी बाधा बाहर नहीं, बल्कि मन के भीतर होती है, जैसे डर, भ्रम, आलस्य, क्रोध, अस्थिरता और गलत निर्णय। गणेश कवचं भक्त को इन आंतरिक बाधाओं से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है।
सरल भाषा में कहें तो गणेश कवचं का अर्थ है, भगवान गणेश से यह प्रार्थना करना कि वे हमारी बुद्धि को सही रखें, मन को शांत रखें, कर्म को शुभ रखें और जीवन में आने वाली बाधाओं से हमारी रक्षा करें।
गणेश कवचं कब और कैसे पढ़ें?
गणेश कवचं का पाठ प्रतिदिन किया जा सकता है। सुबह स्नान के बाद शांत मन से इसका पाठ करना अच्छा माना जाता है। बुधवार, मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी, गणेश चतुर्थी और किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले गणेश कवचं का पाठ विशेष शुभ माना जाता है। गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख पर्व है, जिसमें उन्हें विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है।
गणेश कवचं पढ़ने की सरल विधि
सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें। दीपक जलाएं, धूप या अगरबत्ती लगाएं और गणेश जी को दूर्वा, लाल या पीले फूल, मोदक, लड्डू या फल अर्पित करें।
इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें। फिर शांत मन से गणेश कवचं का पाठ करें। यदि संस्कृत उच्चारण कठिन लगे, तो धीरे-धीरे पढ़ें और अर्थ समझकर पाठ करें।
पाठ के अंत में भगवान गणेश से प्रार्थना करें कि वे आपके मन, बुद्धि, परिवार, कार्य, स्वास्थ्य, यात्रा और जीवन के शुभ संकल्पों की रक्षा करें। पाठ करते समय डर या जल्दबाजी से बचें। श्रद्धा, एकाग्रता और सकारात्मक भाव सबसे महत्वपूर्ण हैं।
गणेश कवचं के लाभ
गणेश कवचं का नियमित पाठ मानसिक सुरक्षा, आत्मविश्वास, बुद्धि की स्पष्टता और बाधा-निवारण के लिए लाभकारी माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभारंभ के देवता माना जाता है, इसलिए भक्त इस कवच का पाठ नए कार्य, परीक्षा, व्यापार, यात्रा, गृह प्रवेश, विवाह, पारिवारिक मंगल और कठिन निर्णयों से पहले करते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से गणेश कवचं व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है। यह पाठ भय, भ्रम, नकारात्मक सोच और अस्थिरता से मन को हटाकर श्रद्धा, धैर्य और सही विचारों की ओर ले जाता है। इसका उद्देश्य केवल बाहरी संकटों से बचाव नहीं है, बल्कि अपने भीतर ऐसी बुद्धि और स्थिरता जगाना है, जिससे व्यक्ति जीवन की बाधाओं का सामना शांत मन और सही निर्णय के साथ कर सके।
गणेश कवचं भक्त को यह अनुभव कराता है कि जब मन, वाणी और कर्म भगवान गणेश की कृपा से जुड़े हों, तो जीवन की शुरुआतें अधिक शुभ, व्यवस्थित और आत्मविश्वासपूर्ण बन सकती हैं।
Ganesh Kavacham Lyrics in English
Eshoti chapalo daityaan balyepi naashayat yaho
Agre kim karma karteti na jaane munisattama ॥ 1 ॥
Daityaa naanavidhaa dushtaah saadhu deva drumah khalaah
Atosya kanthe kinchittyam rakshaam sambaddhum arhasi ॥ 2 ॥
Dhyaayet simhagatam vinaayakam amum digbaahu maadye yuge
Tretaayaam tu mayoora vaahanam amum shadbaahukam siddhidam
Dwaapare tu gajaananam yugabhujam raktaangaraagam vibhum
Turye tu dvibhujam sitaangaruchiram sarvaarthadam sarvada ॥ 3 ॥
Vinaayakah shikhaam paatu paramaatmaa paraatparah
Ati sundara kaayastu mastakam sumahotkatah ॥ 4 ॥
Lalaatam kashyapah paatu bhrooyugam tu mahodarah
Nayane baalachandrastu gajaasyas tyaushtha pallavau ॥ 5 ॥
Jihvaam paatu gajakreedash chubukam girijaasutah
Vaacham vinaayakah paatu dantaan rakshatu durmukhah ॥ 6 ॥
Shravanau paashapaanis tu naasikaam chintitaarthadah
Ganeshas tu mukham paatu kantham paatu ganaadhipah ॥ 7 ॥
Skandhau paatu gajaskandhah stane vighna vinaashanah
Hridayam gananaathas tu herambo jatharam mahaan ॥ 8 ॥
Dharaadharah paatu paarshvau prishtham vighnaharah shubhah
Lingam guhyam sadaa paatu vakratundo mahaabalah ॥ 9 ॥
Gajakreedo jaanu jangho ooru mangalakeertimaan
Ekadanto mahaabuddhih paadau gulphau sadaavatu ॥ 10 ॥
Kshipra prasaadano baahu paanee aashaaprapoorakah
Anguleeshcha nakhaan paatu padmahasto rinaashanah ॥ 11 ॥
Sarvaangaani mayooresho vishvavyaapi sadaavatu
Anuktamapi yat sthaanam dhoomaketuh sadaavatu ॥ 12 ॥
Aamodas tvagratah paatu pramodah prishthato vatu
Praachyaam rakshatu buddheesha aagneyyaam siddhidaayakah ॥ 13 ॥
Dakshinasyaam umaaputro nairityaam tu ganeshvarah
Prateechyaam vighnahartaa vyaad vaayavyaam gajakarnakah ॥ 14 ॥
Kauberyaam nidhipah paayaad eeshaanyaavishanandanah
Divaavyaad ekadantas tu raatrau sandhyaasu yah vighnahrit ॥ 15 ॥
Raakshasaasura betaala graha bhoota pishaachatah
Paashaankushadharah paatu rajas sattva tamah smriteeh ॥ 16 ॥
Jnaanam dharmam cha lakshmeem cha lajjaam keertim tathaa kulam
Vapur dhanam cha dhaanyam cha griham daaraah sutaan sakheen ॥ 17 ॥
Sarvaayudha dharah pautraan mayooresho vataat sadaa
Kapilo jaanukam paatu gajaashvaan vikatovatu ॥ 18 ॥
Bhoorjapatre likhitvedam yah kanthe dhaarayet sudheeh
Na bhayam jaayate tasya yaksha rakshah pishaachatah ॥ 19 ॥
Trisandhyam japate yastu vajrasaara tanur bhavet
Yaatraakaale pathed yastu nirvighnena phalam labhet ॥ 20 ॥
Yuddhakaale pathed yastu vijayam chaapnuyaad dhruvam
Maaranocchaatanaakarsha stambha mohana karmani ॥ 21 ॥
Saptavaaram japed etad dinaanaam ekavimshatih
Tattat phalam avaapnoti saadhako naatra samshayah ॥ 22 ॥
Ekavimshati vaaram cha pathet taavad dinaani yah
Kaaraagriha gatam sadyo raajnaavadhyam cha mochayet ॥ 23 ॥
Raajadarshana velaayaam pathed etat trivaaratah
Sa raajaanam vasham neetvaa prakriteeshcha sabhaam jayet ॥ 24 ॥
Idam Ganesha Kavacham Kashyapena saveeritam
Mudgalaaya cha te naatha Maandavyaaya maharshaye ॥ 25 ॥
Mahyam sa praaha kripayaa kavacham sarva siddhidam
Na deyam bhaktiheenaaya deyam shraddhaavate shubham ॥ 26 ॥
Anenaasya kritaa rakshaa na baadhaasya bhavet kvachit
Raakshasaasura betaala daitya daanava sambhavaah ॥ 27 ॥
॥ Iti Shri Ganesh Puraane Shri Ganesh Kavacham Sampurnam ॥
FAQs in English
1. What is Ganesh Kavach?
Ganesh Kavach is a devotional protection hymn dedicated to Lord Ganesha. It is recited to seek his blessings for protection, wisdom, obstacle removal and positive beginnings.
2. What is the meaning of Ganesh Kavach?
The meaning of Ganesh Kavach is a spiritual shield of Lord Ganesha’s grace. It represents protection of the mind, body, intellect, actions, family and important life activities.
3. When should Ganesh Kavach be recited?
Ganesh Kavach can be recited daily, especially in the morning. Wednesdays, Tuesdays, Sankashti Chaturthi, Vinayak Chaturthi, Ganesh Chaturthi and the beginning of any important work are considered auspicious.
4. How should Ganesh Kavach be recited?
Sit in a clean place after bathing, light a diya, offer durva, flowers and modak to Lord Ganesha, chant “Om Gan Ganapataye Namah” and then recite Ganesh Kavach with devotion and focus.
5. What are the benefits of Ganesh Kavach?
Ganesh Kavach is believed to bring protection, courage, mental clarity, confidence, obstacle removal, positive energy and blessings of Lord Ganesha for safe and auspicious actions.
गणपति अथर्वशीर्ष
श्री गणेश चालीसा
गणेश पूजन सामग्री
गणेश पूजन विधि
गणेश जी की आरती
गणेश मंत्र
गणेश कवचं
श्री गणेश पंचरत्न स्तोत्र
ऋण मुक्ति गणेश स्तोत्रम
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