गणेश जी की आरती | Ganeshji Ki Aarti in Hindi & English Lyrics PDF
गणेश जी की आरती: अर्थ, आरती विधि, समय और लाभ
गणेश जी की आरती भगवान श्री गणेश की भक्ति, कृतज्ञता और मंगलकामना से जुड़ा एक पवित्र गीत है। हिंदू परंपरा में भगवान गणेश को शुभारंभ, बुद्धि, विवेक और विघ्न-निवारण के देवता माना जाता है। किसी भी पूजा, नए कार्य, गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार, परीक्षा या यात्रा से पहले गणेश जी का स्मरण शुभ माना जाता है। गणेश जी को बड़े कार्यों की शुरुआत से पहले पूजने की परंपरा है और वे बुद्धि, लेखन तथा शुभारंभ से जुड़े देवता माने जाते हैं।
गणेश जी की आरती पूजा के अंत में की जाती है। आरती का उद्देश्य भगवान को प्रकाश, भक्ति और सम्मान अर्पित करना है। जब भक्त दीपक, कपूर, घंटी और भजन के साथ आरती करता है, तो वातावरण में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का भाव बढ़ता है।
गणेश जी की आरती क्या है?
गणेश जी की आरती भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाने वाला भक्तिपूर्ण आरती गीत है। सबसे प्रसिद्ध गणेश आरती “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” के नाम से जानी जाती है। इसमें भगवान गणेश को माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र, विघ्नहर्ता, सुखकर्ता और भक्तों को शुभ फल देने वाले देवता के रूप में प्रणाम किया जाता है।
आरती में दीपक या कपूर को भगवान के सामने घुमाया जाता है। यह प्रकाश अर्पण करने की परंपरा है। इसका भाव यह है कि जैसे दीपक अंधकार को दूर करता है, वैसे ही भगवान गणेश भक्त के जीवन से भ्रम, भय, नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करें।
गणेश जी की आरती हिंदी में
Ganeshji Ki Aarti in Hindi Lyrics
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय…अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय…दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय…
‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय…
गणेश जी की आरती कब और कैसे करें?
गणेश जी की आरती प्रतिदिन सुबह या शाम की पूजा में की जा सकती है। बुधवार, मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी, विनायक चतुर्थी और गणेश चतुर्थी के दिन इसका विशेष महत्व माना जाता है। भगवान गणेश को नए कार्य, बौद्धिक यात्रा या व्यवसाय शुरू करने से पहले पूजने की परंपरा भी प्रचलित है।
गणेश जी की आरती करने की सरल विधि इस प्रकार है:
सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने बैठें। दीपक जलाएं, धूप या अगरबत्ती लगाएं और गणेश जी को दूर्वा, फूल, अक्षत, कुमकुम, मोदक या लड्डू अर्पित करें। इसके बाद “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
फिर आरती की थाली में दीपक या कपूर रखें। घंटी बजाते हुए श्रद्धा से गणेश जी की आरती गाएं। आरती के बाद भगवान गणेश को प्रणाम करें और सभी लोगों को आरती दें। अंत में प्रसाद बांटें और बुद्धि, शांति, शुभ शुरुआत और विघ्नों से रक्षा की प्रार्थना करें।
यदि घर में दैनिक पूजा कर रहे हैं, तो छोटी आरती भी कर सकते हैं। पूजा का मुख्य भाव साफ मन, श्रद्धा और सकारात्मक संकल्प होना चाहिए।
गणेश जी की आरती के लाभ
गणेश जी की आरती नियमित रूप से करने से घर के वातावरण में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभारंभ के देवता माना जाता है, इसलिए भक्त उनकी आरती पढ़ाई, व्यापार, नौकरी, नए काम, परिवार की मंगलकामना और मानसिक स्पष्टता के लिए करते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से गणेश आरती मन को केंद्रित करती है, पूजा को पूर्णता देती है और भक्त के भीतर कृतज्ञता का भाव जगाती है। दीपक का प्रकाश अज्ञान, भ्रम और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है। आरती गाने से मन शांत होता है, श्रद्धा बढ़ती है और व्यक्ति अपने कार्यों की शुरुआत अधिक आत्मविश्वास और शुभ भावना के साथ कर सकता है। इसका उद्देश्य केवल मनोकामना मांगना नहीं है, बल्कि जीवन में विनम्रता, अनुशासन, सही निर्णय और ईश्वर-स्मरण को मजबूत करना है।
Ganesh Ji Ki Aarti in English Lyrics
Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesg Deva ।
Mata Jaki Parwati, Pita Maha Deva ॥
Ek Dant Daya Want, Char Bhuuja Dhari ।
Mathe Sindor Shoye, Muse Ki Sawari ॥
Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesg Deva ।
Mata Jaki Parwati, Pita Maha Deva ॥
Pan Chadhe Phool Chadhe, Aur Chadhe Mewa ।
Laduan Ko Bhog Lage, Sant Kare Sewa ॥
Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesg Deva ।
Mata Jaki Parwati, Pita Maha Deva ॥
Andhan Ko Aankh Det, Kodhin Ko Kaya ।
Bajhan Ko Purta Det, Nirdhan Ko Maya॥
Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesg Deva ।
Mata Jaki Parwati, Pita Maha Deva ॥
‘sur’ Shaam Sharan Aaye, Safal Ki Jiye Sewa ।
Mata Jaki Parwati, Pita Maha Deva ॥
Jai Ganesh Jai Ganesh, Jai Ganesg Deva ।
Mata Jaki Parwati, Pita Maha Deva ॥
1. What is Ganesh Ji Ki Aarti?
Ganesh Ji Ki Aarti is a devotional hymn sung in praise of Lord Ganesha, usually at the end of puja. It expresses devotion, gratitude and prayer for wisdom, peace and removal of obstacles.
2. What is the meaning of Ganesh Aarti?
The meaning of Ganesh Aarti is to offer light, devotion and respect to Lord Ganesha. It symbolizes the removal of darkness, confusion, negativity and obstacles from life.
3. When should Ganesh Aarti be performed?
Ganesh Aarti can be performed daily in the morning or evening. Wednesdays, Tuesdays, Sankashti Chaturthi, Vinayak Chaturthi, Ganesh Chaturthi and the beginning of any new work are considered especially auspicious.
4. How should Ganesh Aarti be done at home?
Place Lord Ganesha’s idol or picture in a clean puja space, light a diya, offer flowers, durva, modak or laddoo, chant “Om Gan Ganapataye Namah” and then sing the aarti while moving the diya or camphor flame in front of the deity.
5. What are the benefits of Ganesh Aarti?
Ganesh Aarti is believed to bring peace, positive energy, wisdom, confidence, devotion, removal of obstacles and blessings for auspicious beginnings.
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