चामुण्डा चालीसा | Chamunda Chalisa in Hindi Lyrics PDF
श्री चामुंडा चालीसा: अर्थ, पाठ विधि, समय और लाभ
1. Introduction
श्री चामुंडा चालीसा मां चामुंडा देवी की कृपा, शक्ति और रक्षा का भाव जगाने वाली भक्तिपूर्ण रचना है। मां चामुंडा को देवी दुर्गा, चंडी और महाशक्ति के उग्र तथा रक्षक स्वरूपों में माना जाता है। चामुंडा नाम का संबंध चंड और मुंड नामक असुरों के विनाश से जोड़ा जाता है, इसलिए मां चामुंडा को अधर्म, भय, नकारात्मकता और बाधाओं का नाश करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
मां चामुंडा का स्वरूप बाहर से उग्र दिखाई देता है, लेकिन भक्तों के लिए वह करुणामयी माता हैं। उनकी साधना व्यक्ति को डर से ऊपर उठने, कठिन समय में साहस रखने और अपने जीवन में शक्ति, अनुशासन और भक्ति बनाए रखने की प्रेरणा देती है। देवी चामुंडा को सप्तमातृकाओं में भी स्थान दिया गया है, जिससे शाक्त परंपरा में उनका विशेष महत्व दिखाई देता है।
2. श्री चामुंडा चालीसा क्या है?
श्री चामुंडा चालीसा मां चामुंडा देवी की स्तुति में लिखा गया चालीस चौपाइयों का भक्तिपूर्ण पाठ है। “चालीसा” का अर्थ होता है चालीस पदों या चौपाइयों वाली स्तुति। इसमें देवी के रूप, शक्ति, कृपा, रक्षक स्वभाव और भक्तों पर होने वाली मातृ-कृपा का वर्णन किया जाता है।
इस चालीसा का पाठ भक्त मां चामुंडा से रक्षा, साहस, शत्रु बाधा से मुक्ति, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव, आत्मबल और परिवार की मंगलकामना के लिए करते हैं। गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और भारत के कई हिस्सों में चामुंडा माता की पूजा कुलदेवी, ग्रामदेवी और शक्ति स्वरूपा माता के रूप में भी की जाती है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में श्री आदि हिमानी चामुंडा मंदिर को देवी चामुंडा से जुड़ा एक प्राचीन और पूजनीय शक्तिस्थल माना जाता है।
Chamunda Chalisa in Hindi Lyrics
श्री चामुंडा चालीसा
दोहा
नीलवरण मा कालिका रहती सदा प्रचंड ।
दस हाथो मई ससत्रा धार देती दुस्त को दांड्ड़ ।।
मधु केटभ संहार कर करी धर्म की जीत ।
मेरी भी बढ़ा हरो हो जो कर्म पुनीत ।।
चौपाई
नमस्कार चामुंडा माता । तीनो लोक मई मई विख्याता ।।
हिमाल्या मई पवितरा धाम है । महाशक्ति तुमको प्रडम है ।।1।।
मार्कंडिए ऋषि ने धीयया । कैसे प्रगती भेद बताया ।।
सूभ निसुभ दो डेतिए बलसाली । तीनो लोक जो कर दिए खाली ।।2।।
वायु अग्नि याँ कुबेर संग । सूर्या चंद्रा वरुण हुए तंग ।।
अपमानित चर्नो मई आए । गिरिराज हिमआलये को लाए ।।3।।
भद्रा-रॉंद्र्रा निट्टया धीयया । चेतन शक्ति करके बुलाया ।।
क्रोधित होकर काली आई । जिसने अपनी लीला दिखाई ।।4।।
चंदड़ मूंदड़ ओर सुंभ पतए । कामुक वेरी लड़ने आए ।।
पहले सुग्गृीव दूत को मारा । भगा चंदड़ भी मारा मारा ।।5।।
अरबो सैनिक लेकर आया । द्रहूँ लॉकंगन क्रोध दिखाया ।।
जैसे ही दुस्त ललकारा । हा उ सबद्ड गुंजा के मारा ।।6।।
सेना ने मचाई भगदड़ । फादा सिंग ने आया जो बाद ।।
हत्टिया करने चंदड़-मूंदड़ आए । मदिरा पीकेर के घुर्रई ।।7।।
चतुरंगी सेना संग लाए । उचे उचे सीविएर गिराई ।।
तुमने क्रोधित रूप निकाला । प्रगती डाल गले मूंद माला ।।8।।
चर्म की सॅडी चीते वाली । हड्डी ढ़ाचा था बलसाली ।।
विकराल मुखी आँखे दिखलाई । जिसे देख सृिस्टी घबराई ।।9।।
चंदड़ मूंदड़ ने चकरा चलाया । ले तलवार हू साबद गूंजाया ।।
पपियो का कर दिया निस्तरा । चंदड़ मूंदड़ दोनो को मारा ।।10।।
हाथ मई मस्तक ले मुस्काई । पापी सेना फिर घबराई ।।
सरस्वती मा तुम्हे पुकारा । पड़ा चामुंडा नाम तिहरा ।।11।।
चंदड़ मूंदड़ की मिरतट्यु सुनकर । कालक मौर्या आए रात पर ।।
अरब खराब युध के पाठ पर । झोक दिए सब चामुंडा पर ।।12।।
उगर्र चंडिका प्रगती आकर । गीडदीयो की वाडी भरकर ।।
काली ख़टवांग घुसो से मारा । ब्रह्माड्ड ने फेकि जल धारा ।।13।।
माहेश्वरी ने त्रिशूल चलाया । मा वेश्दवी कक्करा घुमाया ।।
कार्तिके के शक्ति आई । नार्सिंघई दित्तियो पे छाई ।।14।।
चुन चुन सिंग सभी को खाया । हर दानव घायल घबराया ।।
रक्टतबीज माया फेलाई । शक्ति उसने नई दिखाई ।।15।।
रक्त्त गिरा जब धरती उपर । नया डेतिए प्रगता था वही पर ।।
चाँदी मा अब शूल घुमाया । मारा उसको लहू चूसाया ।।16।।
सूभ निसुभ अब डोडे आए । सततर सेना भरकर लाए ।।
वाज्ररपात संग सूल चलाया । सभी देवता कुछ घबराई ।।17।।
ललकारा फिर घुसा मारा । ले त्रिसूल किया निस्तरा ।।
सूभ निसुभ धरती पर सोए । डेतिए सभी देखकर रोए ।।18।।
कहमुंडा मा ध्ृम बचाया । अपना सूभ मंदिर बनवाया ।।
सभी देवता आके मानते । हनुमत भेराव चवर दुलते ।।19।।
आसवीं चेट नवराततरे अओ । धवजा नारियल भेट चाड़ौ ।।
वांडर नदी सनन करऔ । चामुंडा मा तुमको पियौ ।।20।।
दोहा
सरणागत को शक्ति दो हे जाग की आधार ।
‘ओम’ ये नेया दोलती कर दो भाव से पार ।।
3. श्री चामुंडा चालीसा का अर्थ
श्री चामुंडा चालीसा का मूल अर्थ है मां चामुंडा की शक्ति, करुणा और रक्षा का स्मरण करना। यह चालीसा भक्त को बताती है कि देवी का उग्र रूप डराने के लिए नहीं, बल्कि अधर्म, अन्याय, अहंकार और नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए है।
मां चामुंडा की उपासना का गहरा संदेश यह है कि जीवन में जब भय, भ्रम, बाधा या मानसिक कमजोरी आए, तब व्यक्ति को भीतर की शक्ति जगानी चाहिए। देवी चामुंडा केवल बाहरी शत्रुओं से रक्षा का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वह भीतर के डर, क्रोध, आलस्य, असुरक्षा और नकारात्मक विचारों को दूर करने की प्रेरणा भी देती हैं।
सरल भाषा में कहें तो श्री चामुंडा चालीसा भक्त को यह अनुभव कराती है कि मां की कृपा से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी साहसी, स्थिर और आध्यात्मिक रूप से मजबूत रह सकता है।
4. श्री चामुंडा चालीसा कब और कैसे पढ़ें?
श्री चामुंडा चालीसा का पाठ प्रतिदिन श्रद्धा से किया जा सकता है। मंगलवार, शुक्रवार, अष्टमी, नवमी, नवरात्रि और किसी विशेष संकल्प के दिन इसका पाठ अधिक शुभ माना जाता है। नवरात्रि का समय देवी उपासना के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, इसलिए इस अवधि में मां चामुंडा की चालीसा, मंत्र या स्तुति का पाठ भक्तिभाव से किया जाता है।
पाठ करने की सरल विधि इस प्रकार है:
सुबह या शाम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और मां चामुंडा, मां दुर्गा या देवी शक्ति के चित्र के सामने बैठें। दीपक जलाएं, लाल फूल, कुमकुम, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। फिर मन को शांत करके “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद श्री चामुंडा चालीसा का पाठ श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण के साथ करें।
यदि पूरा पाठ याद न हो, तो पुस्तक, मोबाइल या वेबसाइट से पढ़ सकते हैं। पाठ करते समय डर, क्रोध या जल्दबाजी के भाव से बचें। मां चामुंडा की पूजा में श्रद्धा, पवित्रता, संयम और सकारात्मक भाव सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पाठ के अंत में परिवार की रक्षा, मन की शांति, सही मार्गदर्शन और नकारात्मकता से मुक्ति की प्रार्थना करें।
5. श्री चामुंडा चालीसा के लाभ
श्री चामुंडा चालीसा का नियमित पाठ भय, असुरक्षा, मानसिक तनाव और नकारात्मक विचारों से परेशान लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। भक्ति परंपरा में मां चामुंडा को रक्षा, साहस और शक्ति की देवी माना गया है, इसलिए भक्त इस चालीसा का पाठ आत्मबल, बाधा निवारण, शत्रु भय से मुक्ति, परिवार की सुरक्षा और आध्यात्मिक संरक्षण के लिए करते हैं।
इस चालीसा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह व्यक्ति के भीतर साहस और विश्वास पैदा करती है। जब भक्त मां चामुंडा का स्मरण करता है, तो उसे यह भाव मिलता है कि कठिन समय में वह अकेला नहीं है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह पाठ मन को केंद्रित करता है, नकारात्मकता को कम करता है और जीवन में अनुशासन, शक्ति तथा देवी कृपा का अनुभव कराता है। इसका उद्देश्य केवल चमत्कार की अपेक्षा करना नहीं है, बल्कि अपने भीतर छिपी शक्ति को जागृत करना और मां की शरण में स्थिर रहना है।
શ્રી ચામુંડા ચાલીસા | Shri Chamunda Chalisa In Gujrati Lyrics PDF
Download Chamunda Chalisa in Hindi Lyrics PDF/MP3
चामुण्डा चालीसा हिंदी PDF डाउनलोड
निचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर श्री चामुण्डा चालीसा हिंदी PDF डाउनलोड करे.
By clicking below you can Free Download Chamunda Devi Chalisa in PDF format or also can Print it.
