बगलामुखी कवच | Baglamukhi Kavach in Hindi Lyrics
बगलामुखी कवच
Baglamukhi kavach in Hindi
ॐ शिरो मे बगला पातु हृदयैकाक्षरी परा ।
ॐ ह्ली ॐ मे ललाटे च बगला वैरिनाशिनी ॥१॥
गदाहस्ता सदा पातु मुखं मे मोक्षदायिनी ।
वैरिजिह्वाधरा पातु कण्ठं मे वगलामुखी ॥२॥
उदरं नाभिदेशं च पातु नित्य परात्परा ।
परात्परतरा पातु मम गुह्यं सुरेश्वरी ॥३॥
हस्तौ चैव तथा पादौ पार्वती परिपातु मे ।
विवादे विषमे घोरे संग्रामे रिपुसङ्कटे ॥४॥
पीताम्बरधरा पातु सर्वाङ्गी शिवनर्तकी ।
श्रीविद्या समय पातु मातङ्गी पूरिता शिवा ॥५॥
पातु पुत्रं सुतांश्चैव कलत्रं कालिका मम ।
पातु नित्य भ्रातरं में पितरं शूलिनी सदा ॥६॥
रंध्र हि बगलादेव्या: कवचं मन्मुखोदितम् ।
न वै देयममुख्याय सर्वसिद्धिप्रदायकम् ॥ ७॥
पाठनाद्धारणादस्य पूजनाद्वाञ्छतं लभेत् ।
इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेद् बगलामुखीम् ॥८॥
पिवन्ति शोणितं तस्य योगिन्य: प्राप्य सादरा: ।
वश्ये चाकर्षणो चैव मारणे मोहने तथा ॥९॥
महाभये विपत्तौ च पठेद्वा पाठयेत्तु य: ।
तस्य सर्वार्थसिद्धि: स्याद् भक्तियुक्तस्य पार्वति ॥१०॥
इति श्रीरुद्रयामले बगलामुखी कवचं सम्पूर्णम्
बगलामुखी कवच का हिंदी अर्थ
श्लोक 1 का अर्थ
माँ बगलामुखी मेरे सिर की रक्षा करें और एकाक्षरी परमशक्ति मेरे हृदय की रक्षा करें। “ॐ ह्लीं ॐ” स्वरूपिणी तथा शत्रुतापूर्ण और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली माँ बगलामुखी मेरे ललाट की रक्षा करें।
श्लोक 2 का अर्थ
हाथ में गदा धारण करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी सदैव मेरे मुख की रक्षा करें। शत्रु की जिह्वा को पकड़कर उसकी अनुचित वाणी को रोकने वाली माँ बगलामुखी मेरे कंठ और वाणी की रक्षा करें।
श्लोक 3 का अर्थ
सभी शक्तियों से श्रेष्ठ परम देवी मेरे पेट और नाभि क्षेत्र की सदैव रक्षा करें। देवताओं की अधीश्वरी तथा परम से भी परे स्थित आदिशक्ति मेरे शरीर के गुप्त और संवेदनशील अंगों की रक्षा करें।
श्लोक 4 का अर्थ
माता पार्वती मेरे दोनों हाथों और दोनों पैरों की पूर्ण रूप से रक्षा करें। वाद-विवाद, कठिन परिस्थिति, भयंकर संकट, युद्ध जैसी स्थिति अथवा शत्रुओं से उत्पन्न परेशानी में देवी मुझे सुरक्षित रखें।
श्लोक 5 का अर्थ
पीले वस्त्र धारण करने वाली माँ बगलामुखी मेरे संपूर्ण शरीर की रक्षा करें। भगवान शिव की दिव्य शक्ति, श्रीविद्या स्वरूपिणी तथा मातंगी रूप में पूजित कल्याणमयी देवी हर समय मेरी रक्षा करें।
श्लोक 6 का अर्थ
माँ कालिका मेरे पुत्र, संतान और जीवनसाथी की रक्षा करें। शूल धारण करने वाली देवी मेरे भाइयों और पिता की भी सदैव रक्षा करें। इस प्रकार देवी भक्त के पूरे परिवार पर अपनी कृपा और सुरक्षा बनाए रखें।
श्लोक 7 का अर्थ
भगवान शिव कहते हैं—हे पार्वती! मैंने अपने मुख से माँ बगलामुखी का यह अत्यंत गोपनीय और पवित्र कवच बताया है। यह समस्त सिद्धियां प्रदान करने वाला है, इसलिए इसे श्रद्धाहीन, अनुचित उद्देश्य रखने वाले अथवा अयोग्य व्यक्ति को नहीं देना चाहिए।
इस श्लोक में आया “रंध्र” शब्द संभवतः पाठभेद या मुद्रण-दोष है; प्रसंग के अनुसार इसका अभिप्राय “रहस्य” अर्थात गोपनीय कवच माना जाता है।
श्लोक 8 का अर्थ
इस कवच का श्रद्धापूर्वक पाठ करने, इसे धारण करने अथवा इसकी विधिपूर्वक पूजा करने से साधक अपनी उचित और धर्मसम्मत कामनाओं की पूर्ति प्राप्त कर सकता है। जो व्यक्ति इस कवच के महत्त्व और विधि को समझे बिना माँ बगलामुखी के मंत्र की साधना करता है, उसकी साधना अपूर्ण या प्रतिकूल हो सकती है।
श्लोक 9 का अर्थ
ग्रंथ की तांत्रिक और प्रतीकात्मक भाषा में कहा गया है कि बिना उचित ज्ञान, मर्यादा और गुरु-मार्गदर्शन के साधना करने वाले व्यक्ति की जीवन-शक्ति को योगिनियां ग्रहण कर सकती हैं। वशीकरण, आकर्षण, मारण और मोहन जैसे विशेष तांत्रिक कर्मों में भी इस कवच का उल्लेख किया गया है।
इस श्लोक को किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाने की अनुमति के रूप में नहीं समझना चाहिए। आध्यात्मिक दृष्टि से इसका सात्त्विक अर्थ अपनी इंद्रियों, क्रोध, भय, भ्रम और अनुचित इच्छाओं पर नियंत्रण प्राप्त करना है। ऐसे विशेष तांत्रिक प्रयोग गुरु के मार्गदर्शन के बिना नहीं करने चाहिए।
श्लोक 10 का अर्थ
जो भक्त अत्यधिक भय, विपत्ति या कठिन परिस्थिति में श्रद्धा और भक्ति के साथ स्वयं इस कवच का पाठ करता है अथवा किसी योग्य व्यक्ति से इसका पाठ करवाता है, उसकी धर्मसम्मत इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उसे अपने कार्यों में सफलता, साहस तथा देवी की कृपा प्राप्त होती है।
संपूर्ण कवच का भावार्थ
बगलामुखी कवच में साधक माँ बगलामुखी से अपने सिर, हृदय, ललाट, मुख, कंठ, उदर, हाथ, पैर और संपूर्ण शरीर की रक्षा करने की प्रार्थना करता है। वह देवी से वाद-विवाद, भय, विपत्ति, विरोध और कठिन परिस्थितियों में धैर्य तथा आत्मबल प्रदान करने का निवेदन करता है। कवच का गहरा आध्यात्मिक संदेश केवल बाहरी शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपनी कटु वाणी, क्रोध, अहंकार, भय, भ्रम और आवेश पर नियंत्रण स्थापित करना है। श्रद्धा, सात्त्विक भावना और सदाचार के साथ इसका पाठ साधक में आत्मविश्वास, संयम, एकाग्रता और मानसिक स्थिरता विकसित करने की प्रेरणा देता है।
बगलामुखी कवच
बगलामुखी कवच माँ बगलामुखी को समर्पित एक पवित्र रक्षात्मक स्तुति है, जिसमें साधक देवी की शक्ति का आह्वान करके अपने मन, बुद्धि, वाणी, शरीर, कर्म और जीवन की विभिन्न दिशाओं की आध्यात्मिक रक्षा की प्रार्थना करता है। माँ बगलामुखी दशमहाविद्याओं में पूजित पीताम्बरा देवी हैं, जिनका तेजस्वी पीला स्वरूप जागृत चेतना, विवेक, धैर्य और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है; उनके एक हाथ में गदा और दूसरे हाथ में असुर की जिह्वा को थामे हुए स्वरूप का गहरा आध्यात्मिक संदेश यह है कि असत्य, अपशब्द, भय, क्रोध, आवेश और हानिकारक प्रवृत्तियों को समय रहते रोका जाए। संस्कृत में ‘कवच’ का सामान्य अर्थ सुरक्षा देने वाला आवरण होता है, इसलिए बगलामुखी कवच को केवल बाहरी संकटों से बचने की प्रार्थना नहीं समझना चाहिए; यह साधक को अपने भीतर ऐसी सजगता विकसित करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों, आलोचना, विरोध, विवाद और मानसिक दबाव के बीच भी अपनी वाणी तथा प्रतिक्रिया पर नियंत्रण बनाए रख सके।
कवच के श्लोकों में देवी के विभिन्न नामों और शक्तियों का स्मरण करते हुए शरीर के अंगों, आसपास की दिशाओं तथा जीवन के महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की रक्षा मांगी जाती है, जिसका भाव यह है कि भक्त हर स्तर पर देवी की उपस्थिति और मार्गदर्शन अनुभव करे।
इसका पाठ प्रातःकाल, संध्या, मंगलवार, गुरुवार, नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि या किसी चुनौतीपूर्ण कार्य से पहले शांत मन से किया जा सकता है; फिर भी नियमितता, शुद्ध भावना और अनुशासन किसी विशेष दिन से अधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। पाठ के लिए स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, पूजा स्थान को साफ रखें, माँ बगलामुखी का चित्र स्थापित करें, घी का दीपक जलाएं और श्रद्धानुसार हल्दी, पीले पुष्प, पीला चंदन या सात्त्विक प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद अपने और सबके कल्याण, सत्य की रक्षा, भय से मुक्ति तथा विवेकपूर्ण वाणी का संकल्प लेकर कवच को धीरे-धीरे और यथासंभव शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ें; संस्कृत कठिन लगे तो पहले उसका अर्थ समझना और किसी योग्य विद्वान से उच्चारण सीखना उपयोगी है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका भक्तिपूर्वक पाठ भय, असुरक्षा और नकारात्मक विचारों के प्रभाव को कम करने, मानसिक दृढ़ता बढ़ाने, एकाग्रता विकसित करने, जल्दबाजी में बोलने से बचने और आत्मविश्वास के साथ उचित निर्णय लेने की प्रेरणा दे सकता है। विरोध, झूठी निंदा, कार्यक्षेत्र के तनाव, कानूनी चिंता या पारिवारिक विवाद जैसी परिस्थितियों में भक्त देवी से धैर्य, सत्य और आत्मरक्षा की शक्ति मांगते हैं, परंतु इसका सबसे महत्त्वपूर्ण लाभ अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, भ्रम, कटु वाणी और प्रतिशोध की भावना पर विजय प्राप्त करना माना जाता है। सामान्य भक्त कवच का सात्त्विक पाठ कर सकते हैं, जबकि बीज मंत्र, न्यास, हवन, पुरश्चरण और विशेष तांत्रिक प्रयोग योग्य गुरु के निर्देशन में ही करने चाहिए। बगलामुखी कवच को किसी व्यक्ति को नियंत्रित या हानि पहुंचाने का साधन, निश्चित विजय की गारंटी अथवा कानूनी, चिकित्सकीय और अन्य व्यावहारिक सहायता का विकल्प न मानकर आत्मसंयम, आस्था और आध्यात्मिक सुरक्षा की साधना के रूप में ग्रहण करना उचित है।
