नाकोडा भैरव चालीसा | Nakoda Bhairav Chalisa in Hindi Lyrics PDF
नाकोडा भैरव चालीसा: अर्थ, पाठ विधि, महत्व और लाभ
Introduction
नाकोडा भैरव चालीसा श्री नाकोडा भैरव जी की स्तुति में किया जाने वाला एक श्रद्धापूर्ण पाठ है। जैन परंपरा में नाकोडा जी का स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहां श्री नाकोडा पार्श्वनाथ भगवान के साथ श्री नाकोडा भैरव जी की विशेष मान्यता है। भक्त उन्हें रक्षक, सहायक और संकट में मार्ग दिखाने वाले देव स्वरूप में पूजते हैं।
राजस्थान के नाकोडा तीर्थ से जुड़ी यह भक्ति परंपरा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, संयम, धर्म, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन दृष्टि से भी जुड़ी हुई है। नाकोडा भैरव चालीसा का पाठ भक्त को अपने भीतर विश्वास जगाने, कठिन समय में धैर्य रखने और जीवन की बाधाओं से निपटने की आध्यात्मिक शक्ति देता है।
नाकोडा भैरव चालीसा क्या है?
नाकोडा भैरव चालीसा श्री नाकोडा भैरव जी की महिमा, कृपा और रक्षक स्वरूप का वर्णन करने वाला भक्ति पाठ है। इसमें भक्त नाकोडा भैरव जी से जीवन में सुख, शांति, सुरक्षा, सफलता और सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है।
जैन समाज में नाकोडा भैरव जी को श्री नाकोडा पार्श्वनाथ भगवान के तीर्थ से जुड़े अधिष्ठायक देव के रूप में श्रद्धा से याद किया जाता है। भक्त मानते हैं कि सच्चे मन से स्मरण करने पर नाकोडा भैरव जी जीवन की बाधाओं को कम करने, मन को स्थिर करने और धार्मिक भाव को मजबूत करने में सहायता करते हैं।
यह चालीसा विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रिय मानी जाती है जो व्यापार, परिवार, मानसिक चिंता, यात्रा, निर्णय, धन-संबंधी अड़चन या नकारात्मक वातावरण जैसी स्थितियों में आध्यात्मिक सहारा चाहते हैं।
Nakoda Bhairav Chalisa in Hindi Lyrics
नाकोडा भैरव चालीसा
दोहा
पार्श्वनाथ भगवान की, मूरत चित् बसाए
भैरव चालीसा लिखू, गाता मन हरसाए
चौपाई
श्री नाकोडा भैरव सुखकारी, गूं गाती है दुनिया सारी
भैरव की महिमा अति भारी, भैरव का नाम जपे नर नारी
जिनवर के है आज्ञाकारी, श्रद्धा रखते संकित धारी
प्रात: उठे जो भेरू ध्याता, रिद्धि सिद्धि सब सम्पद पाता
भेरू नाम जपे जो कोई, उस घर मैं नित् मंगल होई
नाकोडा लाखो नर आवे, श्रद्धा से प्रसाद चडावे
भैरव भैरव आन पुकारे, भक्तो के सब कष्ठ निवारे
भैरव दर्शन शक्तिशाली, दर से कोई न जावे खाली
जो नर निथ उठ तुमको ध्यावे, भूत पास आने नहीं पावे
डाकन छु मंतर होजावे, दुष्ट देव आडे नहीं आवे
मारवाड की दिव्य मणि है, हम सब के तो आप धनि है
कल्पतरु है पर्तिख भेरू, इच्छित देता सब को भेरू
अधि व्याधि सब दोष मिटावे, सुमिरत भेरू शांति पावे
बाहर पर्देसे जावे नर, नाम मंत्र भेरू का लेकर
चोगडिया दूषण मिट जावे, काल राहू सब नाठा जावे
परदेशो मैं नाम कमावे, मन वांछित धन सम्पद पावे
तन मैं साथा मन मैं साथा, जो भेरू को नित्य मनाता
डूंगर वासी काला भैरव, सुख कारक है गोरा भैरव
जो नर भक्ति से गुण गावें, दिव्य रत्न सुख मंगल पावे
श्रद्धा से जो शीश झुकावे, भेरू अमृत रस बरसावे
मिलजुल सब नर फेरे माला, पीते सब अमृत का प्याला
मेघ झरे जो झरते निर्झर, खुशाली चावे धरती पर
अन्न सम्पदा भर भर पावे, चारो और सुकाल बनावे
भेरू है सचा रखवाला, दुश्मन मित्र बनाने वाला
देश देश मैं भेरू गांजे , खूंट खूंट मैं डंका बाजे
है नहीं अपना जिनके कोई, भेरू सहायक उनके होई
नाभि केंद्रे से तुम्हे बुलावे, भेरू झट पट दौड़े आवे
भूके नर की भूक मिटावे, प्यासे नर को निर् पिलावे
इधर उधर अब नहीं भटकना, भेरू के नित पाँव पकड़ना
वंचित सम्पद आन मिलेगी, सुख की कालिया नित्य खिलेगी
भेरू गन खरतर के देवा, सेवा से पाते नर मेवा
किर्तिरत्न की आज्ञा पाते, हुक्म हाजिरी सदा बजाते
ओं ह्रीं भैरव बम बम भैरव, कष्ट निवारक भोला भैरव
नैन मुंध धुन रात लगावे, सपने मैं वो दर्शन पावे
प्रश्नो के उत्तर झट मिलते, रास्ते के कनकट सब मिटते
नाकोडा भेरू नित् ध्यावो, संकट मेटों मंगल पावो
भेरू जपंता मालन माला, बुझ जाती दुखो की ज्वाला
निथ उठ जो चालीसा गावे, धन सुत से घर स्वर्ग बनावे
दोहा
भेरू चालीसा पढ़े मन मैं श्रधा धार
कष्ट कटे महिमा बढे सम्पद होत अपार
जिन कांति सूरी गुरु राज के शिष्य मणिप्रभराय
भैरव के सानिध्य मैं यह चालीसा गाये
नाकोडा भैरव चालीसा का अर्थ
नाकोडा भैरव चालीसा का मूल अर्थ है श्री नाकोडा भैरव जी की कृपा, रक्षा और मंगलकारी शक्ति का स्मरण। इसमें भक्त अपने अहंकार को छोड़कर विनम्र भाव से प्रार्थना करता है कि हे नाकोडा भैरव जी, मेरे जीवन से बाधाएं दूर करें, मन में स्थिरता दें और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें।
इस चालीसा का भाव केवल सांसारिक लाभ तक सीमित नहीं है। यह भक्त को यह भी सिखाती है कि सच्ची प्रार्थना तभी फलदायी मानी जाती है जब मन में श्रद्धा, सदाचार, करुणा और संयम हो। जैन धर्म में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मशुद्धि को विशेष महत्व दिया गया है, इसलिए नाकोडा भैरव चालीसा का पाठ भी शांत, सात्विक और पवित्र भाव से करना श्रेष्ठ माना जाता है।
सरल शब्दों में, नाकोडा भैरव चालीसा का अर्थ है जीवन की कठिनाइयों में नाकोडा भैरव जी की शरण लेकर धैर्य, रक्षा, साहस और शुभ मार्गदर्शन प्राप्त करने की प्रार्थना।
नाकोडा भैरव चालीसा कब और कैसे करें?
नाकोडा भैरव चालीसा का पाठ किसी भी शुभ दिन किया जा सकता है, लेकिन कई भक्त इसे विशेष रूप से रविवार, मंगलवार, अष्टमी, पूर्णिमा या नाकोडा भैरव जी से जुड़े विशेष पर्वों पर करते हैं। नाकोडा तीर्थ की यात्रा के समय, किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले, व्यापारिक निर्णय के समय या मानसिक चिंता के दौरान भी इसका पाठ श्रद्धा से किया जाता है।
पाठ करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ रखें और शांत मन से श्री नाकोडा पार्श्वनाथ भगवान तथा श्री नाकोडा भैरव जी का स्मरण करें। दीपक जलाकर, यदि संभव हो तो धूप, अक्षत, पुष्प और सात्विक भोग अर्पित करें। जैन परंपरा का ध्यान रखते हुए पूजा में पवित्रता, संयम और अहिंसा भाव का पालन करना चाहिए।
पाठ करते समय मन में किसी को हानि पहुंचाने की भावना, क्रोध या लालच नहीं होना चाहिए। नाकोडा भैरव चालीसा को शांत स्वर, साफ उच्चारण और पूर्ण श्रद्धा के साथ पढ़ना चाहिए। यदि चालीसा याद न हो, तो पुस्तक, PDF या मोबाइल से पढ़कर भी पाठ किया जा सकता है। पाठ के अंत में अपने परिवार, समाज और सभी जीवों के कल्याण की भावना रखना शुभ माना जाता है।
नाकोडा भैरव चालीसा के लाभ
नाकोडा भैरव चालीसा का नियमित पाठ भक्त के भीतर आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। यह विशेष रूप से मानसिक चिंता, भय, कार्यों में रुकावट, व्यापारिक अस्थिरता, पारिवारिक तनाव और निर्णय लेने की उलझन में आध्यात्मिक सहारा देता है। भक्तों का विश्वास है कि नाकोडा भैरव जी की कृपा से व्यक्ति को सही दिशा, सुरक्षा का भाव और कठिन समय में हिम्मत मिलती है।
व्यापार और कार्यक्षेत्र से जुड़े लोग नाकोडा भैरव जी की पूजा को विशेष श्रद्धा से करते हैं, क्योंकि यह मन को केंद्रित करने, नकारात्मक विचारों को कम करने और कर्म के प्रति दृढ़ता बढ़ाने में मदद करती है। वास्तु और आध्यात्मिक दृष्टि से भी ऐसे पाठ घर और कार्यस्थल में शांत, अनुशासित और सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माने जाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं में जब व्यक्ति लगातार रुकावट, अनिश्चितता, भय या मानसिक दबाव महसूस करता है, तब भक्ति और नियमित पाठ से मनोबल मजबूत होता है। हालांकि, नाकोडा भैरव चालीसा को किसी चमत्कारी उपाय की तरह नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम, सदाचार और सत्कर्म के साथ जुड़ी आध्यात्मिक साधना के रूप में अपनाना चाहिए।
FAQs in English
1. What is Nakoda Bhairav Chalisa?
Nakoda Bhairav Chalisa is a devotional hymn dedicated to Shri Nakoda Bhairav Ji, a revered guardian deity associated with the famous Nakoda Jain Tirth in Rajasthan. Devotees recite it for protection, confidence, peace, and spiritual support.
2. What is the meaning of Nakoda Bhairav Chalisa?
The meaning of Nakoda Bhairav Chalisa is to remember the grace, protection, and guiding energy of Shri Nakoda Bhairav Ji. It expresses devotion, surrender, and a prayer for courage, stability, and removal of obstacles.
3. When should Nakoda Bhairav Chalisa be recited?
Nakoda Bhairav Chalisa can be recited on any day with devotion. Many devotees prefer Sunday, Tuesday, Ashtami, Purnima, special Jain occasions, or before starting important work, business decisions, or journeys.
4. How to recite Nakoda Bhairav Chalisa properly?
Sit in a clean and peaceful place after bathing, remember Shri Nakoda Parshwanath Bhagwan and Shri Nakoda Bhairav Ji, light a diya, and recite the Chalisa with a calm mind. It should be read with purity, faith, and without any harmful intention.
5. What are the benefits of Nakoda Bhairav Chalisa?
Nakoda Bhairav Chalisa is believed to bring mental peace, courage, protection, positive energy, and support during difficulties. Devotees also recite it for business stability, family peace, and relief from fear or obstacles.
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