Kaal Bhairava Ashtakam | श्री काल भैरव अष्टकम्: अर्थ, पाठ विधि, समय और लाभ
1. Introduction
श्री काल भैरव अष्टकम् भगवान काल भैरव की अत्यंत प्रभावशाली और पूजनीय स्तुति है। काल भैरव भगवान शिव के उग्र, रक्षक और समय के स्वामी स्वरूप माने जाते हैं। भैरव उपासना में उन्हें भय, बाधा, नकारात्मक ऊर्जा, अन्याय और अधर्म का नाश करने वाला देवता माना गया है। परंपरा के अनुसार, काल भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है, यानी काशी नगरी के दिव्य रक्षक।
श्री काल भैरव अष्टकम् को आदि शंकराचार्य से जुड़ी प्रमुख रचनाओं में माना जाता है। यह स्तोत्र काल भैरव के स्वरूप, शक्ति, वैराग्य, न्याय और कृपा का वर्णन करता है। इसमें भगवान काल भैरव को ऐसे देवता के रूप में प्रणाम किया गया है, जो भक्तों के भय को दूर करते हैं और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
2. श्री काल भैरव अष्टकम् क्या है?
श्री काल भैरव अष्टकम् एक संस्कृत स्तोत्र है, जिसमें आठ मुख्य श्लोकों के माध्यम से भगवान काल भैरव की स्तुति की जाती है। “अष्टकम्” का अर्थ होता है आठ श्लोकों वाला स्तोत्र। इस स्तोत्र में भगवान काल भैरव के तेजस्वी रूप, उनके आभूषण, वाहन, त्रिशूल, डमरू, दंड, न्यायकारी स्वभाव और भक्तों की रक्षा करने वाली शक्ति का वर्णन मिलता है।
भगवान काल भैरव को शिव का एक शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। “काल” का अर्थ समय भी है और मृत्यु भी। “भैरव” का अर्थ है वह दिव्य शक्ति जो भय का नाश करती है या भय से परे है। इसलिए काल भैरव की उपासना केवल भयावह रूप की पूजा नहीं है, बल्कि समय, अनुशासन, सुरक्षा और आत्मबल की साधना भी है।
Kaal Bhairava Ashtakam in Hindi Lyrics
श्री काल भैरव अष्टकम्
देवराज सेव्यमान पावनाङ्घ्रि पङ्कजं
व्यालयज्ञ सूत्रमिन्दु शेखरं कृपाकरम् ।
नारदादि योगिबृन्द वन्दितं दिगम्बरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 1 ॥
भानुकोटि भास्वरं भवब्धितारकं परं
नीलकण्ठ मीप्सितार्ध दायकं त्रिलोचनम् ।
कालकाल मम्बुजाक्ष मस्तशून्य मक्षरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 2 ॥
शूलटङ्क पाशदण्ड पाणिमादि कारणं
श्यामकाय मादिदेव मक्षरं निरामयम् ।
भीमविक्रमं प्रभुं विचित्र ताण्डव प्रियं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 3 ॥
भुक्ति मुक्ति दायकं प्रशस्तचारु विग्रहं
भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोक विग्रहम् ।
निक्वणन्-मनोज्ञ हेम किङ्किणी लसत्कटिं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 4 ॥
धर्मसेतु पालकं त्वधर्ममार्ग नाशकं
कर्मपाश मोचकं सुशर्म दायकं विभुम् ।
स्वर्णवर्ण केशपाश शोभिताङ्ग निर्मलं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 5 ॥
रत्न पादुका प्रभाभिराम पादयुग्मकं
नित्य मद्वितीय मिष्ट दैवतं निरञ्जनम् ।
मृत्युदर्प नाशनं करालदंष्ट्र भूषणं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 6 ॥
अट्टहास भिन्न पद्मजाण्डकोश सन्ततिं
दृष्टिपात नष्टपाप जालमुग्र शासनम् ।
अष्टसिद्धि दायकं कपालमालिका धरं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 7 ॥
भूतसङ्घ नायकं विशालकीर्ति दायकं
काशिवासि लोक पुण्यपाप शोधकं विभुम् ।
नीतिमार्ग कोविदं पुरातनं जगत्पतिं
काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 8 ॥
कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं
ज्ञानमुक्ति साधकं विचित्र पुण्य वर्धनम् ।
शोकमोह लोभदैन्य कोपताप नाशनं
ते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रि सन्निधिं ध्रुवम् ॥
3. श्री काल भैरव अष्टकम् का अर्थ
श्री काल भैरव अष्टकम् का मुख्य भाव यह है कि भगवान काल भैरव समय, न्याय, रक्षा और आध्यात्मिक जागरण के देवता हैं। इस स्तोत्र में उन्हें काशी के अधिपति, भक्तों के रक्षक और पाप, अहंकार तथा भय को दूर करने वाले देवता के रूप में प्रणाम किया गया है।
इस स्तोत्र का गहरा अर्थ यह है कि जीवन में अनुशासन, सत्य, धर्म और समय का सम्मान बहुत आवश्यक है। काल भैरव हमें याद दिलाते हैं कि समय से बड़ा कोई नहीं है। जो व्यक्ति समय का सही उपयोग करता है, नकारात्मक आदतों से दूर रहता है और सत्य के मार्ग पर चलता है, उसके जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
सरल भाषा में कहें तो श्री काल भैरव अष्टकम् भक्त को भय से मुक्त होकर सही निर्णय लेने, अन्याय के सामने खड़े होने और अपने जीवन को अनुशासन के साथ जीने की प्रेरणा देता है।
4. श्री काल भैरव अष्टकम् कब और कैसे पढ़ें?
श्री काल भैरव अष्टकम् का पाठ सुबह या शाम किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन भैरव साधना के लिए रात्रि, प्रदोष काल, रविवार, मंगलवार और कालाष्टमी का समय विशेष शुभ माना जाता है। कालाष्टमी भगवान काल भैरव की पूजा से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। भैरव अष्टमी या काल भैरव जयंती पर भी इस स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
पाठ करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। किसी साफ स्थान पर भगवान काल भैरव या भगवान शिव के चित्र के सामने बैठें। दीपक जलाएं और मन को शांत करें। फिर “ॐ कालभैरवाय नमः” या “ॐ भैरवाय नमः” का जाप करके श्री काल भैरव अष्टकम् का पाठ शुरू करें।
यदि संस्कृत पाठ कठिन लगे, तो पहले धीरे-धीरे पढ़ें। उच्चारण में जल्दबाजी न करें। भैरव उपासना में भाव, श्रद्धा, अनुशासन और मन की स्थिरता अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। पाठ के बाद भगवान काल भैरव से भय, बाधा, भ्रम और नकारात्मकता से रक्षा की प्रार्थना करें।
5. श्री काल भैरव अष्टकम् के लाभ
श्री काल भैरव अष्टकम् का नियमित पाठ भय, मानसिक अस्थिरता, नकारात्मक विचारों और अनिश्चितता से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है। भक्ति परंपरा में भगवान काल भैरव को रक्षक देवता माना गया है, इसलिए भक्त इस स्तोत्र का पाठ सुरक्षा, साहस, आत्मबल और बाधा-निवारण के लिए करते हैं। यह स्तोत्र व्यक्ति को समय का महत्व समझाता है और जीवन में अनुशासन लाने की प्रेरणा देता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से श्री काल भैरव अष्टकम् मन को मजबूत बनाता है, डर को कम करता है और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में स्थिर रहने की शक्ति देता है। जिन लोगों को निर्णय लेने में डर लगता है, बार-बार नकारात्मकता महसूस होती है या जीवन में अवरोध आते हैं, वे श्रद्धा और नियमितता से इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। इसका उद्देश्य केवल चमत्कार की अपेक्षा करना नहीं है, बल्कि अपने भीतर साहस, नियंत्रण, धर्म और आत्मविश्वास को जागृत करना है।
FAQs in English
1. What is Shri Kaal Bhairav Ashtakam?
Shri Kaal Bhairav Ashtakam is a Sanskrit hymn dedicated to Lord Kaal Bhairav, a powerful form of Lord Shiva. It praises his protective, fierce and time-controlling divine form.
2. What is the meaning of Kaal Bhairav Ashtakam?
The meaning of Kaal Bhairav Ashtakam is the praise of Lord Kaal Bhairav as the lord of time, protector of devotees, remover of fear and guardian of righteousness.
3. When should Kaal Bhairav Ashtakam be recited?
Kaal Bhairav Ashtakam can be recited in the morning or evening. Sundays, Tuesdays, Pradosh Kaal, Kalashtami and Kaal Bhairav Jayanti are considered especially auspicious for its recitation.
4. How should Kaal Bhairav Ashtakam be recited?
It should be recited after bathing, in a clean and peaceful place, with devotion and focus. You can light a diya, chant “Om Kaal Bhairavaya Namah” and then recite the Ashtakam slowly.
5. What are the benefits of Kaal Bhairav Ashtakam?
Regular recitation of Kaal Bhairav Ashtakam is believed to bring courage, protection from negativity, mental strength, discipline, spiritual focus and relief from fear and obstacles.
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