Kamakhya Chalisa in Hindi & English Lyrics PDF | कामाख्या चालीसा
कामाख्या चालीसा
कामाख्या चालीसा का परिचय
कामाख्या चालीसा माँ कामाख्या को समर्पित एक पवित्र भक्तिपूर्ण स्तुति है। माँ कामाख्या को आदिशक्ति, जगत जननी और तांत्रिक परंपरा की प्रमुख देवी माना जाता है। उनकी उपासना विशेष रूप से शक्ति साधना, आध्यात्मिक उन्नति और देवी कृपा प्राप्त करने के लिए की जाती है। कामाख्या चालीसा का पाठ भक्तों को देवी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है।
कामाख्या चालीसा क्या है?
कामाख्या चालीसा चालीस चौपाइयों और दोहों से युक्त एक भक्तिमय स्तुति है जिसमें माँ कामाख्या की महिमा, शक्ति, करुणा और कृपा का वर्णन किया जाता है। यह चालीसा देवी के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण कर उनके आशीर्वाद और संरक्षण की प्रार्थना करने का माध्यम है।
Kamakhya Chalisa Hindi Lyrics
कामाख्या चालीसा
॥ दोहा ॥
सुमिरन कामाख्या करुँ, सकल सिद्धि की खानि ।
होइ प्रसन्न सत करहु माँ, जो मैं कहौं बखानि ॥
जै जै कामाख्या महारानी । दात्री सब सुख सिद्धि भवानी ॥
कामरुप है वास तुम्हारो । जहँ ते मन नहिं टरत है टारो ॥
ऊँचे गिरि पर करहुँ निवासा । पुरवहु सदा भगत मन आसा ।
ऋद्धि सिद्धि तुरतै मिलि जाई । जो जन ध्यान धरै मनलाई ॥
जो देवी का दर्शन चाहे । हदय बीच याही अवगाहे ॥
प्रेम सहित पंडित बुलवावे । शुभ मुहूर्त निश्चित विचारवे ॥
अपने गुरु से आज्ञा लेकर । यात्रा विधान करे निश्चय धर ।
पूजन गौरि गणेश करावे । नान्दीमुख भी श्राद्ध जिमावे ॥
शुक्र को बाँयें व पाछे कर । गुरु अरु शुक्र उचित रहने पर ॥
जब सब ग्रह होवें अनुकूला । गुरु पितु मातु आदि सब हूला ॥
नौ ब्राह्मण बुलवाय जिमावे । आशीर्वाद जब उनसे पावे ॥
सबहिं प्रकार शकुन शुभ होई । यात्रा तबहिं करे सुख होई ॥
जो चह सिद्धि करन कछु भाई । मंत्र लेइ देवी कहँ जाई ॥
आदर पूर्वक गुरु बुलावे । मन्त्र लेन हित दिन ठहरावे ॥
शुभ मुहूर्त में दीक्षा लेवे । प्रसन्न होई दक्षिणा देवै ॥
ॐ का नमः करे उच्चारण । मातृका न्यास करे सिर धारण ॥
षडङ्ग न्यास करे सो भाई । माँ कामाक्षा धर उर लाई ॥
देवी मन्त्र करे मन सुमिरन । सन्मुख मुद्रा करे प्रदर्शन ॥
जिससे होई प्रसन्न भवानी । मन चाहत वर देवे आनी ॥
जबहिं भगत दीक्षित होइ जाई । दान देय ऋत्विज कहँ जाई ॥
विप्रबंधु भोजन करवावे । विप्र नारि कन्या जिमवावे ॥
दीन अनाथ दरिद्र बुलावे । धन की कृपणता नहीं दिखावे ॥
एहि विधि समझ कृतारथ होवे । गुरु मन्त्र नित जप कर सोवे ॥
देवी चरण का बने पुजारी । एहि ते धरम न है कोई भारी ॥
सकल ऋद्धि – सिद्धि मिल जावे । जो देवी का ध्यान लगावे ॥
तू ही दुर्गा तू ही काली । माँग में सोहे मातु के लाली ॥
वाक् सरस्वती विद्या गौरी । मातु के सोहैं सिर पर मौरी ॥
क्षुधा, दुरत्यया, निद्रा तृष्णा । तन का रंग है मातु का कृष्णा ।
कामधेनु सुभगा और सुन्दरी । मातु अँगुलिया में है मुंदरी ॥
कालरात्रि वेदगर्भा धीश्वरि । कंठमाल माता ने ले धरि ॥
तृषा सती एक वीरा अक्षरा । देह तजी जानु रही नश्वरा ॥
स्वरा महा श्री चण्डी । मातु न जाना जो रहे पाखण्डी ॥
महामारी भारती आर्या । शिवजी की ओ रहीं भार्या ॥
पद्मा, कमला, लक्ष्मी, शिवा । तेज मातु तन जैसे दिवा ॥
उमा, जयी, ब्राह्मी भाषा । पुर हिं भगतन की अभिलाषा ॥
रजस्वला जब रुप दिखावे । देवता सकल पर्वतहिं जावें ॥
रुप गौरि धरि करहिं निवासा । जब लग होइ न तेज प्रकाशा ॥
एहि ते सिद्ध पीठ कहलाई । जउन चहै जन सो होई जाई ॥
जो जन यह चालीसा गावे । सब सुख भोग देवि पद पावे ॥
होहिं प्रसन्न महेश भवानी । कृपा करहु निज – जन असवानी ॥
॥ दोहा ॥
कर्हे गोपाल सुमिर मन, कामाख्या सुख खानि ।
जग हित माँ प्रगटत भई, सके न कोऊ खानि ॥
Kamakhya Chalisa in English Lyrics
॥ Doha ॥
Sumiran Kamakhya Karun, Sakal Siddhi Ki Khaani.
Hoi Prasann Sat Karahu Maa, Jo Main Kahau Bakhani.
Jai Jai Kamakhya Maharani.
Datri Sab Sukh Siddhi Bhavani.
Kamarup Hai Vaas Tumharo.
Jahan Te Man Nahin Tarat Hai Taro.
Oonche Giri Par Karahun Nivasa.
Puravahu Sada Bhagat Man Aasa.
Riddhi Siddhi Turatai Mili Jaai.
Jo Jan Dhyan Dharai Manlaai.
Jo Devi Ka Darshan Chaahe.
Haday Beech Yaahi Avagaahe.
Prem Sahit Pandit Bulvaave.
Shubh Muhurt Nishchit Vicharave.
Apne Guru Se Aagya Lekar.
Yatra Vidhan Kare Nishchay Dhar.
Poojan Gauri Ganesh Karave.
Nandimukh Bhi Shraddh Jimave.
Shukra Ko Baayen Va Paachhe Kar.
Guru Aru Shukra Uchit Rahne Par.
Jab Sab Grah Hoven Anukoola.
Guru Pitu Maatu Aadi Sab Hoola.
Nau Brahman Bulvaay Jimave.
Aashirvaad Jab Unse Paave.
Sabahin Prakar Shakun Shubh Hoi.
Yatra Tabahin Kare Sukh Hoi.
Jo Chah Siddhi Karan Kachhu Bhai.
Mantra Lei Devi Kahan Jaai.
Aadar Poorvak Guru Bulave.
Mantra Len Hit Din Thaharave.
Shubh Muhurt Mein Deeksha Leve.
Prasann Hoi Dakshina Devai.
Om Ka Namah Kare Uchcharan.
Matrika Nyas Kare Sir Dharan.
Shadang Nyas Kare So Bhai.
Maa Kamaksha Dhar Ur Laai.
Devi Mantra Kare Man Sumiran.
Sanmukh Mudra Kare Pradarshan.
Jisse Hoi Prasann Bhavani.
Man Chahat Var Deve Aani.
Jabahin Bhagat Deekshit Hoi Jaai.
Daan Dey Ritvij Kahan Jaai.
Viprabandhu Bhojan Karvave.
Vipra Naari Kanya Jimvave.
Deen Anaath Daridra Bulave.
Dhan Ki Kripanta Nahin Dikhave.
Ehi Vidhi Samajh Kritaarath Hove.
Guru Mantra Nit Jap Kar Sove.
Devi Charan Ka Bane Pujari.
Ehi Te Dharam Na Hai Koi Bhaari.
Sakal Riddhi-Siddhi Mil Jaave.
Jo Devi Ka Dhyan Lagave.
Tu Hi Durga Tu Hi Kali.
Maang Mein Sohe Matu Ke Laali.
Vaak Saraswati Vidya Gauri.
Matu Ke Sohain Sir Par Mauri.
Kshudha, Duratyaya, Nidra Trishna.
Tan Ka Rang Hai Matu Ka Krishna.
Kamadhenu Subhaga Aur Sundari.
Matu Anguliya Mein Hai Mundari.
Kalratri Vedgarbha Dheeshwari.
Kanthmaal Mata Ne Le Dhari.
Trisha Sati Ek Veera Akshara.
Deh Taji Jaanu Rahi Nashwara.
Swara Maha Shri Chandi.
Matu Na Jaana Jo Rahe Pakhandi.
Mahamari Bharati Arya.
Shivji Ki O Rahin Bharya.
Padma, Kamala, Lakshmi, Shiva.
Tej Matu Tan Jaise Diva.
Uma, Jayi, Brahmi Bhasha.
Pur Hi Bhagatan Ki Abhilasha.
Rajaswala Jab Roop Dikhave.
Devta Sakal Parvatahi Jaaven.
Roop Gauri Dhari Karahin Nivasa.
Jab Lag Hoi Na Tej Prakasha.
Ehi Te Siddh Peeth Kahlai.
Jaun Chahai Jan So Hoi Jaai.
Jo Jan Yah Chalisa Gaave.
Sab Sukh Bhog Devi Pad Paave.
Hohin Prasann Mahesh Bhavani.
Kripa Karahu Nij-Jan Asavani.
॥ Doha ॥
Karhe Gopal Sumir Man, Kamakhya Sukh Khaani.
Jag Hit Maa Pragat Bhai, Sake Na Kou Khaani.
माँ कामाख्या के बारे में
माँ कामाख्या देवी शक्ति का अत्यंत पूजनीय स्वरूप हैं। उनका प्रसिद्ध शक्तिपीठ असम के गुवाहाटी स्थित नीलाचल पर्वत पर है। यह भारत के प्रमुख 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ माता सती का योनिभाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान शक्ति, सृजन और दिव्य स्त्री ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
माँ कामाख्या को तंत्र साधना, आध्यात्मिक जागरण, इच्छापूर्ति और शक्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है।
कामाख्या चालीसा का महत्व
कामाख्या चालीसा केवल एक स्तुति नहीं बल्कि देवी के प्रति समर्पण का माध्यम है। इसका पाठ साधक के मन में श्रद्धा, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। शक्ति उपासना करने वाले भक्तों के लिए यह विशेष महत्व रखती है।
देवी की कृपा से साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है।
कामाख्या चालीसा का पाठ कब करें?
प्रतिदिन प्रातःकाल या सायंकाल।
शुक्रवार और मंगलवार के दिन।
नवरात्रि के नौ दिनों में।
शक्ति साधना या देवी पूजन के समय।
किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले।
मानसिक तनाव या भय की स्थिति में।
कामाख्या चालीसा का पाठ कैसे करें?
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ रखें।
माँ कामाख्या की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
दीपक, धूप और पुष्प अर्पित करें।
श्रद्धा और एकाग्रता के साथ चालीसा का पाठ करें।
अंत में माँ से सुख, शांति और संरक्षण की प्रार्थना करें।
कामाख्या चालीसा के लाभ
जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ इस कवच का पाठ करता है, वह भय, चिंता और दुखों से मुक्त होकर सुख, सौभाग्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।
इस कवच का मुख्य संदेश यह है कि माँ कामाख्या की कृपा और संरक्षण से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
कामाख्या चालीसा का अर्थ
कामाख्या चालीसा में माँ कामाख्या की दिव्य शक्ति, करुणा और महिमा का वर्णन किया जाता है। इसमें भक्त देवी के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करते हुए उनसे जीवन में सुख, समृद्धि, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करता है।
चालीसा का मुख्य संदेश यह है कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ देवी की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
कामाख्या चालीसा माँ कामाख्या की भक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसका नियमित पाठ भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक संतुलन और देवी कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ साधक को सकारात्मकता और आत्मबल से भर देता है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
What is Kamakhya Chalisa?
Kamakhya Chalisa is a devotional hymn dedicated to Goddess Kamakhya that praises her divine power, grace, and blessings.
Who is Goddess Kamakhya?
Goddess Kamakhya is a revered form of Adi Shakti and is worshipped as the embodiment of divine feminine energy and spiritual power.
When should Kamakhya Chalisa be recited?
It can be recited daily, especially on Fridays, Tuesdays, during Navratri, and before important spiritual practices.
How do you recite Kamakhya Chalisa?
After bathing, sit in a clean place, light a lamp before Goddess Kamakhya, and recite the Chalisa with devotion and concentration.
What are the benefits of reciting Kamakhya Chalisa?
It is believed to bring inner peace, spiritual strength, confidence, positive energy, and divine blessings.
Why is Kamakhya Chalisa important?
The Chalisa helps devotees connect with Goddess Kamakhya and seek her protection, guidance, and spiritual grace.
Can beginners recite Kamakhya Chalisa?
Yes. Anyone can recite Kamakhya Chalisa with faith, devotion, and a sincere heart.
Is Kamakhya Chalisa related to Shakti worship?
Yes. Kamakhya Chalisa is closely associated with Shakti worship and the reverence of the Divine Mother.
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