कामाख्या स्तोत्र | Kamakhya Stotra in Hindi & English Lyrics PDF
कामाख्या स्तोत्र का परिचय
कामाख्या स्तोत्र माँ कामाख्या की महिमा, शक्ति और दिव्य स्वरूप का गुणगान करने वाला एक पवित्र स्तुति ग्रंथ है। यह स्तोत्र भक्तों को देवी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक जुड़ाव प्रदान करता है। माँ कामाख्या को आदिशक्ति, जगदम्बा और तंत्र परंपरा की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनके स्तोत्र का पाठ साधक के मन को शांति, आत्मबल और देवी कृपा से भर देता है।
कामाख्या स्तोत्र क्या है?
कामाख्या स्तोत्र एक भक्तिपूर्ण प्रार्थना है जिसमें माँ कामाख्या के विभिन्न स्वरूपों, शक्तियों और दिव्य गुणों का वर्णन किया जाता है। यह स्तोत्र देवी की आराधना, स्तुति और कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। प्राचीन शाक्त परंपरा में इसका विशेष महत्व माना जाता है।
Kamakhya Stotra Hindi Lyrics
कामाख्या स्तोत्र
जय कामेशि चामुण्डे जय भूतापहारिणि ।
जय सर्वगते देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
विश्वमूर्ते शुभे शुद्धे विरुपाक्षि त्रिलोचने ।
भीमरुपे शिवे विद्ये कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
मालाजये जये जम्भे भूताक्षि क्षुभितेऽक्षये ।
महामाये महेशानि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कालि कराल विक्रान्ते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कालि कराल विक्रान्ते कामेश्वरि हरप्रिये ।
सर्व्वशास्त्रसारभूते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कामरुप – प्रदीपे च नीलकूट – निवासिनि ।
निशुम्भ – शुम्भमथनि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
कामाख्ये कामरुपस्थे कामेश्वरि हरिप्रिये ।
कामनां देहि में नित्यं कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
वपानाढ्यवक्त्रे त्रिभुवनेश्वरि ।
महिषासुरवधे देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
छागतुष्टे महाभीमे कामख्ये सुरवन्दिते ।
जय कामप्रदे तुष्टे कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
भ्रष्टराज्यो यदा राजा नवम्यां नियतः शुचिः ।
अष्टम्याच्च चतुदर्दश्यामुपवासी नरोत्तमः ॥
संवत्सरेण लभते राज्यं निष्कण्टकं पुनः ।
य इदं श्रृणुवादभक्त्या तव देवि समुदभवम् ॥
सर्वपापविनिर्म्मुक्तः परं निर्वाणमृच्छति ।
श्रीकामरुपेश्वरि भास्करप्रभे, प्रकाशिताम्भोजनिभायतानने ।
सुरारि – रक्षः – स्तुतिपातनोत्सुके, त्रयीमये देवनुते नमामि ॥
सितसिते रक्तपिशङ्गविग्रहे, रुपाणि यस्याः प्रतिभान्ति तानि ।
विकाररुपा च विकल्पितानि, शुभाशुभानामपि तां नमामि ॥
कामरुपसमुदभूते कामपीठावतंसके ।
विश्वाधारे महामाये कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
अव्यक्त विग्रहे शान्ते सन्तते कामरुपिणि ।
कालगम्ये परे शान्ते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
या सुष्मुनान्तरालस्था चिन्त्यते ज्योतिरुपिणी ।
प्रणतोऽस्मि परां वीरां कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
दंष्ट्राकरालवदने मुण्डमालोपशोभिते ।
सर्व्वतः सर्वंव्गे देवि कामेश्वरि नमोस्तु ते ॥
चामुण्डे च महाकालि कालि कपाल – हारिणी ।
पाशहस्ते दण्डहस्ते कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
चामुण्डे कुलमालास्ये तीक्ष्णदंष्ट्र महाबले ।
शवयानस्थिते देवि कामेश्वरि नमोऽस्तु ते ॥
Kamakhya Stotra in English Lyrics
Jai Kameshi Chamunde Jai Bhootapaharini.
Jai Sarvagate Devi Kameshwari Namostu Te.
Vishwamurte Shubhe Shuddhe Virupakshi Trilochane.
Bhimarupe Shive Vidye Kameshwari Namostu Te.
Malajaye Jaye Jambhe Bhootakshi Kshubhite’kshaye.
Mahamaye Maheshani Kameshwari Namostu Te.
Kali Karal Vikrante Kameshwari Namostu Te.
Kali Karal Vikrante Kameshwari Harapriye.
Sarvashastrasarabhute Kameshwari Namostu Te.
Kamarup-Pradipe Cha Neelakoot-Nivasini.
Nishumbh-Shumbhamathani Kameshwari Namostu Te.
Kamakhye Kamarupasthe Kameshwari Haripriye.
Kamanam Dehi Me Nityam Kameshwari Namostu Te.
Vapanadhyavaktre Tribhuvaneshwari.
Mahishasuravadhe Devi Kameshwari Namostu Te.
Chhagatuste Mahabhime Kamakhye Suravandite.
Jai Kamaprade Tushte Kameshwari Namostu Te.
Bhrashtarajyo Yada Raja Navamyam Niyatah Shuchih.
Ashtamyachcha Chaturdashyam Upavasi Narottamah.
Samvatsarena Labhate Rajyam Nishkantakam Punah.
Ya Idam Shrunuvad Bhaktya Tava Devi Samudbhavam.
Sarvapapavinirmuktah Param Nirvanamrichchhati.
Shri Kamarupeshwari Bhaskarprabhe, Prakashitambhojanibhayatanane.
Surari-Rakshah-Stutipatanotsuke, Trayimaye Devanute Namami.
Sitasite Raktapishangavigrahe, Rupani Yasyah Pratibhanti Tani.
Vikararupa Cha Vikalpitani, Shubhashubhanamapi Tam Namami.
Kamarupasamudbhute Kamapeethavatamsake.
Vishwadhare Mahamaye Kameshwari Namostu Te.
Avyakta Vigrahe Shante Santate Kamarupini.
Kalagamye Pare Shante Kameshwari Namostu Te.
Ya Sushumnantaralastha Chintyate Jyotirupini.
Pranato’smi Param Veeram Kameshwari Namostu Te.
Danshtrakaralavadane Mundamalopashobhite.
Sarvatah Sarvange Devi Kameshwari Namostu Te.
Chamunde Cha Mahakali Kali Kapal-Harini.
Pashahaste Dandahaste Kameshwari Namostu Te.
Chamunde Kulamalasye Teekshnadanshtra Mahabale.
Shavayanasthite Devi Kameshwari Namostu Te.
कामाख्या स्तोत्र का सरल हिंदी अर्थ
इस स्तोत्र में भक्त माँ कामाख्या की महिमा का गुणगान करते हुए उन्हें बार-बार प्रणाम करता है। वह माँ को चामुंडा, काली, महाशक्ति और समस्त संसार की रक्षिका के रूप में स्मरण करता है।
भक्त कहता है कि हे माँ कामेश्वरी! आप सभी जीवों के दुखों और भय को दूर करने वाली हैं। आप सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त हैं और सभी प्राणियों की रक्षा करती हैं। आपके तीन नेत्र हैं और आप समस्त सृष्टि की अधिष्ठात्री देवी हैं।
माँ को महामाया, महेशानी और समस्त विद्याओं का सार कहा गया है। वे अपने भक्तों को ज्ञान, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं। उनका स्वरूप कभी अत्यंत सौम्य तो कभी भयंकर दिखाई देता है, लेकिन दोनों ही रूप भक्तों के कल्याण के लिए हैं।
स्तोत्र में देवी को शुम्भ और निशुम्भ जैसे असुरों का संहार करने वाली बताया गया है। वे अधर्म और बुराई का नाश कर धर्म की रक्षा करती हैं। माँ कामाख्या कामरूप पीठ में विराजमान होकर अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।
भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे उसकी उचित इच्छाओं को पूर्ण करें, जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करें। माँ को महिषासुर का वध करने वाली और देवताओं द्वारा पूजित देवी के रूप में भी स्मरण किया गया है।
स्तोत्र में बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे जीवन में सफलता, सम्मान और शुभ फल प्राप्त होते हैं। उसके पाप नष्ट होते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
माँ कामाख्या को ब्रह्मांड की आधारशक्ति, महामाया और सृष्टि की मूल ऊर्जा कहा गया है। वे व्यक्त और अव्यक्त दोनों रूपों में विद्यमान हैं तथा समस्त जगत का संचालन करती हैं।
स्तोत्र में देवी के उग्र स्वरूपों का भी वर्णन है। मुण्डमाला धारण करने वाली, दुष्टों का विनाश करने वाली और महाकाली स्वरूप में वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं तथा उन्हें सभी प्रकार के भय और संकटों से मुक्त करती हैं।
अंत में भक्त माँ चामुंडा, महाकाली और कामेश्वरी को प्रणाम करते हुए उनसे जीवन में सदैव रक्षा, शक्ति, साहस, ज्ञान और कल्याण प्रदान करने की प्रार्थना करता है।
स्तोत्र का मुख्य संदेश
कामाख्या स्तोत्र हमें सिखाता है कि माँ शक्ति की सच्चे मन से भक्ति करने पर व्यक्ति को आत्मबल, मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है। माँ कामाख्या अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
माँ कामाख्या के बारे में
माँ कामाख्या देवी शक्ति का एक अत्यंत पूजनीय स्वरूप हैं। उनका प्रसिद्ध मंदिर असम के गुवाहाटी शहर में नीलाचल पर्वत पर स्थित है। यह स्थान भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ माता सती का योनिभाग गिरा था, इसलिए यह स्थल सृजन शक्ति, मातृत्व और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
माँ कामाख्या को इच्छाओं की पूर्ति करने वाली, शक्ति प्रदान करने वाली तथा साधकों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
कामाख्या स्तोत्र का महत्व
कामाख्या स्तोत्र देवी भक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है। इसका पाठ भक्त को माँ की कृपा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यह स्तोत्र साधक को देवी के प्रति समर्पण और आस्था की भावना से जोड़ता है।
शक्ति उपासना करने वाले भक्तों के लिए यह स्तोत्र विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें देवी के दिव्य स्वरूप और कृपा का विस्तृत वर्णन मिलता है।
कामाख्या स्तोत्र का पाठ कब करें?
प्रतिदिन प्रातःकाल या संध्या समय।
नवरात्रि के दौरान।
शुक्रवार और मंगलवार को।
शक्ति साधना एवं देवी पूजन के समय।
किसी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ से पहले।
मानसिक तनाव या भय की स्थिति में।
कामाख्या स्तोत्र का पाठ कैसे करें?
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ और शांत रखें।
माँ कामाख्या की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
दीपक, धूप और पुष्प अर्पित करें।
मन को एकाग्र कर देवी का ध्यान करें।
श्रद्धा और विश्वास के साथ स्तोत्र का पाठ करें।
अंत में माँ से सुख, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।
कामाख्या स्तोत्र के लाभ
मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
देवी भक्ति और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने में सहायक है।
आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति में वृद्धि करता है।
भय, चिंता और नकारात्मक विचारों को कम करने में मदद करता है।
साधना और ध्यान में एकाग्रता बढ़ाता है।
जीवन में शुभता और सकारात्मकता का संचार करता है।
देवी कृपा और आध्यात्मिक संरक्षण प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
निष्कर्ष
कामाख्या स्तोत्र माँ कामाख्या की भक्ति और आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसका नियमित पाठ साधक को मानसिक शांति, आध्यात्मिक बल और देवी कृपा प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया स्तोत्र पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
What is Kamakhya Stotra?
Kamakhya Stotra is a sacred hymn dedicated to Goddess Kamakhya that praises her divine qualities, power, and blessings.
Who is Goddess Kamakhya?
Goddess Kamakhya is a revered form of Adi Shakti and is worshipped as the embodiment of divine feminine energy and spiritual power.
When should Kamakhya Stotra be recited?
It can be recited daily, during Navratri, on Fridays, Tuesdays, or during personal spiritual practices.
How do you recite Kamakhya Stotra?
After bathing, sit in a peaceful place, offer prayers to Goddess Kamakhya, and recite the Stotra with devotion and concentration.
What are the benefits of reciting Kamakhya Stotra?
It is believed to bring mental peace, spiritual growth, confidence, positive energy, and divine blessings.
Why is Kamakhya Stotra important?
The Stotra helps devotees connect with Goddess Kamakhya and seek her grace, protection, and spiritual guidance.
Can beginners recite Kamakhya Stotra?
Yes. Anyone can recite Kamakhya Stotra with faith, sincerity, and devotion.
Is Kamakhya Stotra associated with Shakti worship?
Yes. Kamakhya Stotra is closely connected with Shakti worship and devotion to the Divine Mother.
MAA KAMAKHYA
Kamakhya Mantra | कामाख्या मंत्र
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कामाख्या स्तोत्र | Kamakhya Stotra
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