Surya Aarti in Hindi & English Lyrics PDF | सूर्य आरती
सूर्य आरती: ज्योतिषीय महत्व, पूजा विधि और लाभ
Introduction
सूर्य आरती भगवान सूर्य देव की भक्ति और कृतज्ञता का सरल लेकिन बहुत पवित्र रूप है। सूर्य देव को हिंदू धर्म में प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है, क्योंकि उनका प्रकाश हर दिन हमें जीवन, ऊर्जा, समय और दिशा देता है। जब भक्त सूर्य देव की आरती करता है, तो वह केवल दीपक नहीं घुमाता, बल्कि अपने जीवन में प्रकाश, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का स्वागत करता है।
वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रह को आत्मा, पिता, नेतृत्व, सरकारी कार्य, प्रतिष्ठा, अधिकार, स्वास्थ्य, आंखों, हृदय और जीवन शक्ति का कारक माना जाता है। कुंडली में मजबूत सूर्य व्यक्ति को आत्मविश्वास, सम्मान, निर्णय क्षमता और प्रभावशाली व्यक्तित्व देता है। वहीं कमजोर सूर्य होने पर आत्मबल की कमी, आलस्य, पिता से दूरी, सरकारी कामों में बाधा, सम्मान की कमी या लक्ष्य को लेकर भ्रम जैसी स्थिति बन सकती है।
ऐसी स्थिति में श्रद्धा से सूर्य देव की आरती करना एक सरल आध्यात्मिक उपाय माना जाता है। यह मन को शांत करता है, दिन की शुरुआत को सकारात्मक बनाता है और साधक को अपने कर्म के प्रति जागरूक करता है।
सूर्य आरती क्या है?
सूर्य आरती भगवान सूर्य देव की पूजा के अंत में की जाने वाली स्तुति है। इसमें दीपक, धूप, फूल और भक्ति के साथ सूर्य देव का स्मरण किया जाता है। आरती का भाव यह है कि जैसे सूर्य संसार को प्रकाश देता है, वैसे ही हमारे जीवन में ज्ञान, साहस, स्वास्थ्य और सुख का प्रकाश बना रहे।
सूर्य आरती को विशेष रूप से रविवार के दिन करना शुभ माना जाता है, क्योंकि रविवार सूर्य देव का दिन माना जाता है। सुबह सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य देकर आरती करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है। यह आरती उन लोगों के लिए भी उपयोगी मानी जाती है जो सूर्य ग्रह को मजबूत करना चाहते हैं या जीवन में आत्मविश्वास, सम्मान और स्थिरता चाहते हैं।
Surya Aarti in Hindi Lyrics
सूर्य आरती
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सुर-मुनि-भूसुर-वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सकल-सुकर्म-प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
Surya Dev Aarti in English Lyrics
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Tribhuvan-Timir-Nikandan, Bhakt-Hriday-Chandan.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Sapt-Ashva Rath Rajit, Ek Chakradhari.
Dukhahari, Sukhkari, Manas-Mal-Hari.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Sur-Muni-Bhusur-Vandit, Vimal Vibhavshali.
Agh-Dal-Dalan Divakar, Divya Kiran Mali.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Sakal-Sukarm-Prasavita, Savita Shubhkari.
Vishwa-Vilochan Mochan, Bhav-Bandhan Bhari.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Kamal-Samuh Vikasak, Nashak Tray Tapa.
Sevat Sahaj Harat Ati Manasij-Santapa.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Netra-Vyadhi Har Survar, Bhu-Peeda-Hari.
Vrishti Vimochan Santat, Parhit Vratdhari.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
Suryadev Karunakar, Ab Karuna Kijai.
Har Agyan-Moh Sab, Tattvagyan Dijai.
Jai Kashyap-Nandan, Om Jai Aditi Nandan.
सूर्य आरती का अर्थ
सूर्य आरती का सरल अर्थ है — भगवान सूर्य देव के प्रकाश, ऊर्जा और कृपा को प्रणाम करना। आरती में जलता हुआ दीपक सूर्य के दिव्य तेज का प्रतीक होता है। जब भक्त दीपक से आरती करता है, तो वह मन ही मन प्रार्थना करता है कि उसके जीवन से अंधकार, भय, रोग, नकारात्मकता और भ्रम दूर हों।
ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य आरती व्यक्ति को अपने अंदर के आत्मबल से जोड़ती है। सूर्य आत्मा का कारक है, इसलिए सूर्य देव की आरती हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में सफलता के लिए आत्मविश्वास, अनुशासन, सत्य और सही कर्म बहुत आवश्यक हैं।
सूर्य आरती का भाव केवल मांगना नहीं है, बल्कि सूर्य देव को धन्यवाद देना भी है। यह जीवन में कृतज्ञता, सकारात्मक सोच और नियमित साधना की भावना को बढ़ाती है।
सूर्य आरती कब और कैसे करें?
सूर्य आरती करने का सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के बाद माना जाता है। रविवार को सूर्य आरती विशेष रूप से शुभ मानी जाती है, लेकिन श्रद्धा हो तो इसे प्रतिदिन भी किया जा सकता है।
सूर्य आरती की सरल विधि:
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूर्व दिशा की ओर मुख करें। तांबे के लोटे में स्वच्छ जल लें और उसमें लाल फूल, रोली, अक्षत या थोड़ा सा गुड़ डाल सकते हैं। सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
इसके बाद दीपक जलाएं। सूर्य देव का ध्यान करें और सूर्य आरती गाएं या पढ़ें। आरती के बाद हाथ जोड़कर सूर्य देव से अच्छे स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, परिवार की सुख-शांति, करियर में सफलता और सही मार्ग पर चलने की शक्ति मांगें।
यदि सुबह आरती संभव न हो, तो रविवार को सूर्य देव की तस्वीर या प्रतिमा के सामने भी श्रद्धा से आरती की जा सकती है। लेकिन सूर्य उपासना में सूर्योदय का समय सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
सूर्य आरती के लाभ
सूर्य आरती का नियमित पाठ और गायन मन, शरीर और आत्मबल पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सूर्य देव की कृपा से जीवन में ऊर्जा, आरोग्य, सम्मान, सफलता और सुख-समृद्धि आती है। ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य आरती कमजोर सूर्य के प्रभाव को संतुलित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने, नेतृत्व क्षमता सुधारने, पिता और वरिष्ठ लोगों से संबंध बेहतर करने, सरकारी कार्यों में सहायता और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने में सहायक मानी जाती है।
सूर्य आरती व्यक्ति को दिन की शुरुआत अनुशासन और सकारात्मकता के साथ करने की प्रेरणा देती है। नियमित आरती से मन में कृतज्ञता आती है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति अधिक स्पष्ट महसूस करता है। जिन लोगों को आलस्य, आत्मविश्वास की कमी, बार-बार असफलता, सम्मान की कमी या निर्णय लेने में परेशानी होती है, उनके लिए सूर्य आरती एक सरल और शुभ आध्यात्मिक अभ्यास माना जाता है।
यह जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। स्वास्थ्य, करियर, कानूनी या आर्थिक निर्णयों के लिए योग्य विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
FAQ
1. What is Surya Aarti in astrology?
Surya Aarti is a devotional prayer offered to Lord Surya, the Sun God. In astrology, Surya represents confidence, soul power, father, authority, leadership, health and recognition. Performing Surya Aarti is believed to strengthen positive solar energy in life.
2. Can Surya Aarti help strengthen a weak Sun?
According to traditional astrology, Surya Aarti may help balance the negative effects of a weak Sun when done with faith, discipline and regularity. It is often practiced along with offering water to the Sun, chanting Surya mantras and respecting father or elders.
3. Which day is best for Surya Aarti?
Sunday is considered the best day for Surya Aarti because it is associated with Lord Surya. However, devotees can also perform Surya Aarti daily in the morning, especially during sunrise, for positivity and spiritual discipline.
4. What are the astrological benefits of Surya Aarti?
Surya Aarti is believed to improve confidence, vitality, leadership, respect, clarity and career stability. It may also support father-related matters, government-related work and personal recognition when practiced with devotion.
5. How should Surya Aarti be performed for best results?
For best results, wake up early, take a bath, face the east direction, offer water to the rising Sun and then perform Surya Aarti with a lamp and sincere devotion. Regularity, clean intention and disciplined practice are considered very important.
Download Surya Aarti in Hindi & English Lyrics PDF
By clicking below you can Free Download Surya Aarti in PDF format or also can Print it.
