नारायण कवच | Narayan Kavach In Hindi & English Lyrics PDF
नारायण कवच: अर्थ, पाठ विधि, महत्व और लाभ
Introduction
नारायण कवच भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। हिंदू धर्म में “कवच” का अर्थ होता है रक्षा करने वाला आध्यात्मिक आवरण। जिस प्रकार बाहरी कवच शरीर की रक्षा करता है, उसी प्रकार नारायण कवच को भक्त के मन, शरीर, बुद्धि और जीवन की रक्षा के लिए पढ़ा जाने वाला दिव्य पाठ माना जाता है।
नारायण कवच का वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण के षष्ठ स्कंध में मिलता है। कथा के अनुसार, यह दिव्य कवच देवताओं की रक्षा और विजय से जुड़ा हुआ माना गया है। इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न नाम, स्वरूप और दिव्य शक्तियों का स्मरण करके सभी दिशाओं, शरीर के अंगों और जीवन की परिस्थितियों में रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
यह पाठ विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो भय, बाधा, नकारात्मक ऊर्जा, मानसिक अशांति, रोग, शत्रु चिंता या जीवन की अनिश्चित परिस्थितियों में भगवान नारायण की शरण लेना चाहते हैं।
नारायण कवच क्या है?
नारायण कवच भगवान विष्णु की एक रक्षा-प्रार्थना है, जिसमें भक्त अपने ऊपर भगवान नारायण की कृपा और संरक्षण का आवरण स्थापित करने की प्रार्थना करता है। इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, नामों और दिव्य आयुधों का स्मरण किया जाता है।
यह केवल एक सामान्य स्तोत्र नहीं है, बल्कि वैष्णव परंपरा में इसे अत्यंत श्रद्धा से पढ़ा जाने वाला रक्षा कवच माना गया है। इसमें भगवान से जल, स्थल, आकाश, यात्रा, युद्ध, भय, रोग, अंधकार, शत्रु और अदृश्य बाधाओं से रक्षा की कामना की जाती है।
नारायण कवच भक्त को यह भाव देता है कि जब मनुष्य ईश्वर की शरण में जाता है, तो उसका भय कम होता है, मन स्थिर होता है और वह कठिन परिस्थितियों का सामना अधिक धैर्य और विश्वास के साथ कर पाता है।
नारायण कवच न्यास विधि
पहले हाँथ-पैर धोकर आचमन करे, फिर हाथ में कुश की पवित्री धारण करके उत्तर मुख करके बैठ जाय इसके बाद कवच धारण पर्यंत और कुछ न बोलने का निश्चय करके पवित्रता से “ॐ नमो नारायणाय” और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इन मंत्रों के द्वारा हृदयादि अङ्गन्यास तथा अङ्गुष्ठादि करन्यास करे पहले “ॐ नमो नारायणाय” इस अष्टाक्षर मन्त्र के ॐ आदि आठ अक्षरों का क्रमशः पैरों, घुटनों, जाँघों, पेट, हृदय, वक्षःस्थल, मुख और सिर में न्यास करे अथवा पूर्वोक्त मन्त्र के यकार से लेकर ॐ कार तक आठ अक्षरों का सिर से आरम्भ कर उन्हीं आठ अङ्गों में विपरित क्रम से न्यास करे.
तदनन्तर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” इस द्वादशाक्षर -मन्त्र के ॐ आदि बारह अक्षरों का दायीं तर्जनी से बाँयीं तर्जनी तक दोनों हाँथ की आठ अँगुलियों और दोनों अँगुठों की दो-दो गाठों में न्यास करे.
फिर “ॐ विष्णवे नमः” इस मन्त्र के पहले के पहले अक्षर ‘ॐ’ का हृदय में, ‘वि’ का ब्रह्मरन्ध्र , में ‘ष’ का भौहों के बीच में, ‘ण’ का चोटी में, ‘वे’ का दोनों नेत्रों और ‘न’ का शरीर की सब गाँठों में न्यास करे तदनन्तर ‘ॐ मः अस्त्राय फट्’ कहकर दिग्बन्ध करे इस प्रकर न्यास करने से इस विधि को जानने वाला पुरूष मन्त्रमय हो जाता है.
इसके बाद समग्र ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी, ज्ञान और वैराग्य से परिपूर्ण इष्टदेव भगवान् का ध्यान करे और अपने को भी तद् रूप ही चिन्तन करे तत्पश्चात् विद्या, तेज, और तपः स्वरूप नारायण कवच का पाठ करे.
नारायण कवच संस्कृत/हिंदी में
Narayan Kavach In Hindi Lyrics
ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां न्यस्ताङ्घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे।
दरारिचर्मासिगदेषुचापाशान् दधानोsष्टगुणोsष्टबाहुः ।।
भगवान् श्रीहरि गरूड़जी के पीठ पर अपने चरणकमल रखे हुए हैं, अणिमा आदि आठों सिद्धियाँ उनकी सेवा कर रही हैं आठ हाँथों में शंख, चक्र, ढाल, तलवार, गदा, बाण, धनुष, और पाश (फंदा) धारण किए हुए हैं वे ही ओंकार स्वरूप प्रभु सब प्रकार से सब ओर से मेरी रक्षा करें।।
जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर्यादोगणेभ्यो वरूणस्य पाशात्।
स्थलेषु मायावटुवामनोsव्यात् त्रिविक्रमः खेऽवतु विश्वरूपः ।।
मत्स्यमूर्ति भगवान् जल के भीतर जलजंतुओं से और वरूण के पाश से मेरी रक्षा करें माया से ब्रह्मचारी रूप धारण करने वाले वामन भगवान् स्थल पर और विश्वरूप श्री त्रिविक्रमभगवान् आकाश में मेरी रक्षा करें
दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः।
विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः ।।
जिनके घोर अट्टहास करने पर सब दिशाएँ गूँज उठी थीं और गर्भवती दैत्यपत्नियों के गर्भ गिर गये थे, वे दैत्ययुथपतियों के शत्रु भगवान् नृसिंह किले, जंगल, रणभूमि आदि विकट स्थानों में मेरी रक्षा करें ।।
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोन्नीतधरो वराहः।
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सलक्ष्मणोsव्याद् भरताग्रजोsस्मान् ।।
अपनी दाढ़ों पर पृथ्वी को उठा लेने वाले यज्ञमूर्ति वराह भगवान् मार्ग में, परशुराम जी पर्वतों के शिखरों और लक्ष्मणजी के सहित भरत के बड़े भाई भगावन् रामचंद्र प्रवास के समय मेरी रक्षा करें ।।
मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्च हासात्।
दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात् ।।
भगवान् नारायण मारण – मोहन आदि भयंकर अभिचारों और सब प्रकार के प्रमादों से मेरी रक्षा करें ऋषिश्रेष्ठ नर गर्व से, योगेश्वर भगवान् दत्तात्रेय योग के विघ्नों से और त्रिगुणाधिपति भगवान् कपिल कर्मबन्धन से मेरी रक्षा करें ।।
सनत्कुमारो वतु कामदेवाद्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात्।
देवर्षिवर्यः पुरूषार्चनान्तरात् कूर्मो हरिर्मां निरयादशेषात् ।।
परमर्षि सनत्कुमार कामदेव से, हयग्रीव भगवान् मार्ग में चलते समय देवमूर्तियों को नमस्कार आदि न करने के अपराध से, देवर्षि नारद सेवापराधों से और भगवान् कच्छप सब प्रकार के नरकों से मेरी रक्षा करें ।।
धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद् द्वन्द्वाद् भयादृषभो निर्जितात्मा।
यज्ञश्च लोकादवताज्जनान्ताद् बलो गणात् क्रोधवशादहीन्द्रः ।।
भगवान् धन्वन्तरि कुपथ्य से, जितेन्द्र भगवान् ऋषभदेव सुख-दुःख आदि भयदायक द्वन्द्वों से, यज्ञ भगवान् लोकापवाद से, बलरामजी मनुष्यकृत कष्टों से और श्रीशेषजी क्रोधवशनामक सर्पों के गणों से मेरी रक्षा करें ।।
द्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात् प्रमादात्।
कल्किः कले कालमलात् प्रपातु धर्मावनायोरूकृतावतारः ।।
भगवान् श्रीकृष्णद्वेपायन व्यासजी अज्ञान से तथा बुद्धदेव पाखण्डियों से और प्रमाद से मेरी रक्षा करें धर्म-रक्षा करने वाले महान अवतार धारण करने वाले भगवान् कल्कि पाप-बहुल कलिकाल के दोषों से मेरी रक्षा करें ।।
मां केशवो गदया प्रातरव्याद् गोविन्द आसङ्गवमात्तवेणुः।
नारायण प्राह्ण उदात्तशक्तिर्मध्यन्दिने विष्णुररीन्द्रपाणिः ।।
प्रातःकाल भगवान् केशव अपनी गदा लेकर, कुछ दिन चढ़ जाने पर भगवान् गोविन्द अपनी बांसुरी लेकर, दोपहर के पहले भगवान् नारायण अपनी तीक्ष्ण शक्ति लेकर और दोपहर को भगवान् विष्णु चक्रराज सुदर्शन लेकर मेरी रक्षा करें ।।
देवोsपराह्णे मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतु माधवो माम्।
दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोsवतु पद्मनाभः ।।
तीसरे पहर में भगवान् मधुसूदन अपना प्रचण्ड धनुष लेकर मेरी रक्षा करें सांयकाल में ब्रह्मा आदि त्रिमूर्तिधारी माधव, सूर्यास्त के बाद हृषिकेश, अर्धरात्रि के पूर्व तथा अर्ध रात्रि के समय अकेले भगवान् पद्मनाभ मेरी रक्षा करें ।।
श्रीवत्सधामापररात्र ईशः प्रत्यूष ईशोऽसिधरो जनार्दनः।
दामोदरोऽव्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान् कालमूर्तिः ।।
रात्रि के पिछले प्रहर में श्रीवत्सलाञ्छन श्रीहरि, उषाकाल में खड्गधारी भगवान् जनार्दन, सूर्योदय से पूर्व श्रीदामोदर और सम्पूर्ण सन्ध्याओं में कालमूर्ति भगवान् विश्वेश्वर मेरी रक्षा करें ।।
चक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम्।
दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षं यथा वातसखो हुताशः ।।
सुदर्शन ! आपका आकार चक्र ( रथ के पहिये ) की तरह है आपके किनारे का भाग प्रलयकालीन अग्नि के समान अत्यन्त तीव्र है। आप भगवान् की प्रेरणा से सब ओर घूमते रहते हैं जैसे आग वायु की सहायता से सूखे घास-फूस को जला डालती है, वैसे ही आप हमारी शत्रुसेना को शीघ्र से शीघ्र जला दीजिये, जला दीजिये ।।
गदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गे निष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि।
कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन् ।।
कौमुद की गदा ! आपसे छूटने वाली चिनगारियों का स्पर्श वज्र के समान असह्य है आप भगवान् अजित की प्रिया हैं और मैं उनका सेवक हूँ इसलिए आप कूष्माण्ड, विनायक, यक्ष, राक्षस, भूत और प्रेतादि ग्रहों को अभी कुचल डालिये, कुचल डालिये तथा मेरे शत्रुओं को चूर – चूर कर दिजिये ।।
त्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृपिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्।
दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन् ।।
शङ्खश्रेष्ठ ! आप भगवान् श्रीकृष्ण के फूँकने से भयंकर शब्द करके मेरे शत्रुओं का दिल दहला दीजिये एवं यातुधान, प्रमथ, प्रेत, मातृका, पिशाच तथा ब्रह्मराक्षस आदि भयावने प्राणियों को यहाँ से तुरन्त भगा दीजिये ।।
त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्यमीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि।
चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्
भगवान् की श्रेष्ठ तलवार ! आपकी धार बहुत तीक्ष्ण है आप भगवान् की प्रेरणा से मेरे शत्रुओं को छिन्न-भिन्न कर दिजिये। भगवान् की प्यारी ढाल ! आपमें सैकड़ों चन्द्राकार मण्डल हैं आप पापदृष्टि पापात्मा शत्रुओं की आँखे बन्द कर दिजिये और उन्हें सदा के लिये अन्धा बना दीजिये ।।
यन्नो भयं ग्रहेभ्यो भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च।
सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंऽहोभ्य एव वा ।।
सर्वाण्येतानि भगन्नामरूपास्त्रकीर्तनात्।
प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये नः श्रेयः प्रतीपकाः ।।
सूर्य आदि ग्रह, धूमकेतु (पुच्छल तारे ) आदि केतु, दुष्ट मनुष्य, सर्पादि रेंगने वाले जन्तु, दाढ़ोंवाले हिंसक पशु, भूत-प्रेत आदि तथा पापी प्राणियों से हमें जो-जो भय हो और जो हमारे मङ्गल के विरोधी हों – वे सभी भगावान् के नाम, रूप तथा आयुधों का कीर्तन करने से तत्काल नष्ट हो जायें ।।
गरूड़ो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छन्दोमयः प्रभुः।
रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेनः स्वनामभिः ।।
बृहद्, रथन्तर आदि सामवेदीय स्तोत्रों से जिनकी स्तुति की जाती है, वे वेदमूर्ति भगवान् गरूड़ और विष्वक्सेनजी अपने नामोच्चारण के प्रभाव से हमें सब प्रकार की विपत्तियों से बचायें।।
सर्वापद्भ्यो हरेर्नामरूपयानायुधानि नः।
बुद्धिन्द्रियमनः प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणाः ।।
श्रीहरि के नाम, रूप, वाहन, आयुध और श्रेष्ठ पार्षद हमारी बुद्धि , इन्द्रिय , मन और प्राणों को सब प्रकार की आपत्तियों से बचायें ।।
यथा हि भगवानेव वस्तुतः सद्सच्च यत्।
सत्यनानेन नः सर्वे यान्तु नाशमुपाद्रवाः ।।
जितना भी कार्य अथवा कारण रूप जगत है, वह वास्तव में भगवान् ही है इस सत्य के प्रभाव से हमारे सारे उपद्रव नष्ट हो जायें ।।
यथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्।
भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया ।।
तेनैव सत्यमानेन सर्वज्ञो भगवान् हरिः।
पातु सर्वैः स्वरूपैर्नः सदा सर्वत्र सर्वगः ।।
जो लोग ब्रह्म और आत्मा की एकता का अनुभव कर चुके हैं, उनकी दृष्टि में भगवान् का स्वरूप समस्त विकल्पों से रहित है-भेदों से रहित हैं फिर भी वे अपनी माया शक्ति के द्वारा भूषण, आयुध और रूप नामक शक्तियों को धारण करते हैं यह बात निश्चित रूप से सत्य है इस कारण सर्वज्ञ, सर्वव्यापक भगवान् श्रीहरि सदा -सर्वत्र सब स्वरूपों से हमारी रक्षा करें ।।
विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्तादन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंहः।
प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन ग्रस्तसमस्ततेजाः ।।
जो अपने भयंकर अट्टहास से सब लोगों के भय को भगा देते हैं और अपने तेज से सबका तेज ग्रस लेते हैं, वे भगवान् नृसिंह दिशा -विदिशा में, नीचे -ऊपर, बाहर-भीतर – सब ओर से हमारी रक्षा करें ।।
।।इति श्रीनारायणकवचं सम्पूर्णम्।।
( श्रीमद्भागवत स्कन्ध 6 , अध्याय 8 )
नारायण कवच का अर्थ
नारायण कवच का सरल अर्थ है भगवान नारायण की कृपा से प्राप्त आध्यात्मिक सुरक्षा। इसमें भक्त भगवान विष्णु से प्रार्थना करता है कि वे मेरे शरीर, मन, बुद्धि, प्राण, परिवार, दिशा, यात्रा और जीवन के हर मार्ग की रक्षा करें।
इस कवच में भगवान के अनेक नामों का स्मरण किया जाता है, जैसे नारायण, वासुदेव, मधुसूदन, त्रिविक्रम, हृषीकेश, जनार्दन और श्रीहरि। प्रत्येक नाम भगवान की एक विशेष शक्ति, गुण और करुणा को दर्शाता है।
नारायण कवच का भाव यह भी है कि मनुष्य केवल बाहरी सुरक्षा पर निर्भर न रहे, बल्कि भीतर से भी मजबूत बने। जब व्यक्ति भगवान के नाम का स्मरण करता है, तो उसका मन भय से भक्ति की ओर, चिंता से विश्वास की ओर और अस्थिरता से शांति की ओर बढ़ता है।
सरल शब्दों में, नारायण कवच का अर्थ है भगवान विष्णु की शरण लेकर जीवन में रक्षा, शांति, साहस, विवेक और दिव्य मार्गदर्शन की प्रार्थना करना।
नारायण कवच कब और कैसे करें?
नारायण कवच का पाठ सुबह के समय स्नान के बाद करना श्रेष्ठ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त, सूर्योदय के समय या संध्या काल में इसका पाठ शांत मन से किया जा सकता है। गुरुवार, एकादशी, पूर्णिमा, विष्णु पूजा के दिन, कठिन यात्रा से पहले, नए कार्य की शुरुआत से पहले या किसी विशेष चिंता के समय इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।
पाठ करने से पहले पूजा स्थान को साफ करें। भगवान विष्णु, लक्ष्मी नारायण या श्रीकृष्ण के चित्र या विग्रह के सामने बैठें। दीपक जलाएं, तुलसी दल, पीले पुष्प, चंदन और सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद मन में भगवान विष्णु का ध्यान करें और विनम्र भाव से नारायण कवच का पाठ शुरू करें।
यदि संस्कृत पाठ कठिन लगे, तो पहले धीरे-धीरे शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़ें। अर्थ समझकर पाठ करने से इसका भाव अधिक गहरा होता है। पाठ करते समय मन में किसी के प्रति द्वेष, अहंकार या हानि की भावना नहीं रखनी चाहिए। यह पाठ रक्षा और शांति के लिए है, इसलिए इसे भक्ति, श्रद्धा और सात्विक भाव से करना उचित माना जाता है।
पाठ के अंत में भगवान नारायण से अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और समस्त जीवों के कल्याण की प्रार्थना करें। यदि संभव हो तो “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
नारायण कवच के लाभ
नारायण कवच का नियमित पाठ भक्त के भीतर सुरक्षा, शांति और आत्मविश्वास का भाव मजबूत करता है। यह विशेष रूप से भय, चिंता, नकारात्मक विचार, अनिश्चितता, रोग संबंधी मानसिक तनाव, यात्रा की चिंता, शत्रु भय और अदृश्य बाधाओं से बचाव की भावना के लिए पढ़ा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में संतुलन, धैर्य और शुभ ऊर्जा बढ़ती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से नारायण कवच मन को भगवान के नामों से जोड़ता है। जब व्यक्ति बार-बार नारायण के विभिन्न स्वरूपों का स्मरण करता है, तो उसका मन सांसारिक भय से हटकर ईश्वर विश्वास में स्थिर होता है। यह पाठ मन को अनुशासित करता है, विचारों को पवित्र बनाता है और व्यक्ति को धर्म, संयम और सत्कर्म की ओर प्रेरित करता है।
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में विष्णु पूजा, नारायण मंत्र और नारायण कवच का पाठ शांत, सात्विक और सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माना जाता है। जिन घरों में अनावश्यक तनाव, भय, अस्थिरता या मानसिक अशांति महसूस होती है, वहां नियमित रूप से भगवान विष्णु का स्मरण और नारायण कवच का पाठ आध्यात्मिक शांति दे सकता है।
ज्योतिषीय परंपरा में भगवान विष्णु की उपासना को गुरु कृपा, धर्म, सद्बुद्धि, संरक्षण और जीवन में स्थिरता से जोड़ा जाता है। हालांकि नारायण कवच को किसी त्वरित चमत्कार की तरह नहीं, बल्कि श्रद्धा, नियमितता, सात्विक आचरण और ईश्वर विश्वास के साथ की जाने वाली आध्यात्मिक साधना के रूप में अपनाना चाहिए।
Narayan Kavach in English Lyrics
Om harir vidhadhyan mama sarva raksham.
Nyashngir padma padgendra prushte,
Dharari charmasi gadheshu chapa,
Pasan dadhano ashtaguno ashta bahu.,
Jaleshu maam rakshathu mathsya moorthir,
Yadho ganebhyo varunasya pasad,
Sthaleshu maya vatu vamano avyal,
Trivikrama khevadu viswaroopa.,
Durgesh atavyaji mukhadhishu Prabhu,
Payanrusimho asura yoodha pari,
Vimunchatho yasya mahattahasam,
Dhiso vinedhur anya pathangascha Garbha.,
Rakshathwasou maadhwani Yajna Kalpa,
Swadamshtrayoth patha dharo varaha,
Ramo aadhrikooteshwadha vipravase,
Sa lakshmanovyadh bharathagrajo maam.,
Mamugra dharmad akhilath pramadath,
Narayana pathu narascha hasath,
Dathaswa yogad adha Yoga natha,
Payadh Gunesa kapila Karma bandath.,
Sanath kumaro aavathu Kama devath,
Hayanano maam padhi deva helanath,
Devarshi varya purusharcha nantharath,
Koormo harir maam nirayadh aseshath.,
Dhanwandarir bhagawan pathway padhyath,
Dwandwadh bhayad rushabho nirjithama,
Yajnascha loka devathaa janandath,
Balo ganath krodha vasadh aheendra.,
Dwaipayano bhagwan aprabhodhad,
Budhasthu pashanda ganath pramadhath,,
Kalki kale kala malath prapath,
Dharma vanayoru kruthavathara.,
Maam kesavo gadhaya pratharavyad,
Govinda aasangava aartha venu,
Narayana prahana udatha shakthir,
Madhyandhine vishnurareendra pani.,
Devo aparahne Madhu hogra dhanwa,
Sayam thridhamavathu Madhwao maam,
Doshe Hrishi kesa, uthardha rather,
Niseedha yekovathu Padmanabha.,
Srivathsa dhamaapara rathra eesa,
Prathyoosha eesosidharo janardhana,
Dhamodharo avyad anusandhyam prabathe,
Visweswaro bhagwan kala moorthi.,
Chakram yugantha analathigma nemi,
Bhramath samanthad Bhagvath prayuktham,
Dandhagdhi dangdhyari sainya masu,
Kaksham yadha vatha sakho huthasa.,
Gadhe asani sparsana visphulinge,
Nishpindi nishpindyajitha priyasi,
Koosmanda vainayaka yaksha raksho,
Bhootha graham choornaya choornyarin.,
Thwam yathu dhana pramadha pretha mathru,
Pisacha vipra graham gora drushteen,
Dharendra vidhravaya Krishna pooritho,
Bhima swano arer hrudhayani kambhayan.,
Thwam thigma dharasi varari sainyam,
Eesa prayuktha mama chindhi, chindhi,
Chakshoomshi charman satha chandra chadhaya,
Dwishamaghonaam hara papa chakshusham.,
Yanna bhayam grahebhyobhooth kethubhyo nrubhya eva cha,
Saree srupebhyo dhamshtribhyo bhoothabyohebhya yeva cha.
Sarvanyethani bhagavan nama roopasthra keerthanath,
Prayanthu samkshayam sadhyo ye na sreya pratheepika.,
Garudo Bhagawan sthothra sthobha chandho maya Prabhu,
Rakshathwa sesha kruchsrebhyo vishwaksena swa namabhi.
Savapadbhyo harer nama roopayanaayudhani na.
Budheendriya mana praanan paanthu parshadha bhooshana.
Yadhahi bhagwan eva vasthutha sad sachayath,
Sathye nanena na sarve yanthu nasamupadrawa.
Yadaikathmanu bhavanam vikalpa rahitha swayam,
Bhooshanuyudha lingakhya dathe shakthi swa mayaya.
Thenaiva sathya manen sarvajno Bhagwan Hari,
Pathu sarvai swaroopairna sada sarvathra sarvaga.
Vidikshu dikshoordhwamadha Samantha,
Anthar bahir bhagwan narasimha,
Praha bhayam loka bhayam swanena,
Swathejasa grastha samastha theja.
FAQs in English
1. What is Narayan Kavach?
Narayan Kavach is a sacred protective hymn dedicated to Lord Vishnu or Lord Narayana. It is mentioned in the Srimad Bhagavatam and is recited by devotees for divine protection, peace, courage, and spiritual strength.
2. What is the meaning of Narayan Kavach?
The meaning of Narayan Kavach is “the protective shield of Lord Narayana.” It is a prayer that invokes different names, forms, and powers of Lord Vishnu for protection of the body, mind, directions, travel, and life situations.
3. When should Narayan Kavach be recited?
Narayan Kavach can be recited in the morning after bathing, especially on Thursday, Ekadashi, Purnima, before travel, before starting important work, or during times of fear, stress, illness, or uncertainty.
4. How to recite Narayan Kavach properly?
Sit in a clean and peaceful place, light a diya, remember Lord Vishnu, offer tulsi, flowers, or simple sattvic bhog, and recite Narayan Kavach with devotion. Understanding the meaning and keeping a pure intention makes the recitation more meaningful.
5. What are the benefits of Narayan Kavach?
Narayan Kavach is believed to bring protection, mental peace, courage, stability, and positive energy. Devotees recite it for relief from fear, negativity, obstacles, travel-related worries, and inner restlessness.
नारायण कवच हिंदी PDF डाउनलोड
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