Krishna Aarti in Hindi & English Lyrics | श्री कृष्ण आरती | आरती कुंज बिहारी की
Krishna Aarti: श्री कृष्ण आरती का अर्थ, विधि, लोकप्रिय आरतियां और लाभ
1. Introduction – Krishna Aarti का परिचय
Krishna Aarti भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम और समर्पण से जुड़ी एक सुंदर पूजा परंपरा है। आरती में भक्त दीपक, कपूर, धूप, फूल, घंटी, शंख और भजन के माध्यम से भगवान का स्वागत और सम्मान करता है। भगवान कृष्ण को बाल गोपाल, मुरलीधर, गोविंद, गिरिधर, कन्हैया, बांके बिहारी और राधा वल्लभ जैसे अनेक प्रेमपूर्ण नामों से पूजा जाता है।
हिंदू धर्म में आरती केवल पूजा का अंतिम चरण नहीं है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच भावनात्मक जुड़ाव का क्षण है। जब भक्त श्रीकृष्ण की आरती गाता है, तो वह उनके रूप, गुण, लीलाओं, करुणा, प्रेम और दिव्यता का स्मरण करता है। आरती के समय दीपक की लौ भगवान के सामने घुमाई जाती है, जो अंधकार से प्रकाश, भ्रम से ज्ञान और चिंता से शांति की ओर जाने का प्रतीक है।
श्रीकृष्ण की आरती घरों, मंदिरों, जन्माष्टमी, एकादशी, संध्या पूजा, बाल गोपाल सेवा, राधा-कृष्ण पूजा और विशेष वैष्णव उत्सवों में श्रद्धा से गाई जाती है। यह आरती वातावरण को भक्तिमय बनाती है और मन को प्रेम, आनंद और शांति से भर देती है।
Popular Krishna Aarti in Hindi and English with Meaning
नीचे कुछ प्रसिद्ध कृष्ण आरतियों के नाम, English transliteration और सरल अर्थ दिए गए हैं। ये आरतियां अलग-अलग स्थानों, मंदिरों और परंपराओं में श्रद्धा से गाई जाती हैं।
1. आरती कुंज बिहारी की
आरती कुंजबिहारी की हिंदी लिरिक्स
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला । श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं । गगन सों सुमन रासि बरसै । बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग, अतुल रति गोप कुमारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा । स्मरन ते होत मोह भंगा बसी शिव सीस,
जटा के बीच, हरै अघ कीच, चरन छवि श्रीबनवारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू । चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद, कटत भव फंद, टेर सुन दीन दुखारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
॥ आरती कुंजबिहारी की…॥आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics In English Lyrics
Aarti Kunj Bihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
Aarti Kunj Bihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
Gale Mein Baijanti Mala, Bajave Murali Madhur Bala । Shravan Mein Kundal Jhalakala,
Nand Ke Anand Nandlala । Gagan Sam Ang Kanti Kali, Radhika Chamak Rahi Aali ।
Latan Mein Thadhe Banamali Bhramar Si Alak, Kasturi Tilak, Chandra Si Jhalak,
Lalit Chavi Shyama Pyari Ki, Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
॥ Aarti Kunj Bihari Ki…॥
Kanakmay Mor Mukut Bilse, Devata Darsan Ko Tarse । Gagan So Suman Raasi Barse
Baje Murchang, Madhur Mridang, Gwaalin Sang Atual Rati Gop Kumari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
॥ Aarti Kunj Bihari Ki…॥
Jahaan Te Pragat Bhayi Ganga, Sakal Man Haarini Shri Ganga । Smaran Te Hot Moh Bhanga
Basi Shiv Shish, Jataa Ke Beech, Harei Agh Keech, Charan Chhavi Shri Banvaari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
॥ Aarti Kunj Bihari Ki…॥
Chamakati Ujjawal Tat Renu, Baj Rahi Vrindavan Benu। Chahu Disi Gopi Gwaal Dhenu
Hansat Mridu Mand, Chandani Chandra, Katat Bhav Phand, Ter Sun Deen Dukhari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
॥ Aarti Kunj Bihari Ki…॥
Aarti Kunj Bihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
Aarti Kunj Bihari Ki,
Shri Girdhar Krishna Murari Ki ॥
Meaning: यह आरती भगवान श्रीकृष्ण के वृंदावन बिहारी, गिरिराज धारण करने वाले और मुरलीधर स्वरूप की स्तुति करती है। इसमें श्रीकृष्ण के सौंदर्य, वैजयंती माला, बांसुरी और राधा-कृष्ण की दिव्य छवि का वर्णन मिलता है।
2. श्री बांके बिहारी जी की आरती
श्री बांके बिहारी जी की आरती हिंदी लिरिक्स
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।
आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
मोर मुकुट प्यारे शीश पे सोहे,
प्यारी बंसी मेरो मन मोहे ।
देख छवि बलिहारी मैं जाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
चरणों से निकली गंगा प्यारी,
जिसने सारी दुनिया तारी ।
मैं उन चरणों के दर्शन पाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
दास अनाथ के नाथ आप हो,
दुःख सुख जीवन प्यारे साथ आप हो ।
हरी चरणों में शीश झुकाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
श्री हरीदास के प्यारे तुम हो ।
मेरे मोहन जीवन धन हो।
देख युगल छवि बलि बलि जाऊं ।
॥ श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं..॥
श्री बांके बिहारी तेरी आरती गाऊं,
हे गिरिधर तेरी आरती गाऊं ।
आरती गाऊं प्यारे आपको रिझाऊं,
श्याम सुन्दर तेरी आरती गाऊं ।
॥ Shri Banke Bihari Ki Aarti in English Lyrics ॥
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau।
Kunj Bihari Teri Aarti Gau।
Shri Shyamsundar Teri Aarti Gau।
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau॥
Mor Mukut Prabhu Shish Pe Sohe।
Pyari Banshi Mero Man Mohe।
Dekhi Chhavi Balihari Jau।
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau॥
Charano Se Nikali Ganga Pyari।
Jisane Saari Dunia Taari।
Mai Un Charano Ke Darshan Pau।
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau॥
Daas Anath Ke Nath Aap Ho।
Dukh Sukh Jeevan Pyare Saath Ho।
Hari Charano Me Shish Navau।
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau॥
Shri Hari Daas Ke Pyare Tum Ho।
Mere Mohan Jeevan Dhan Ho।
Dekhi Yugal Chhavi Bali-Bali Jau।
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau॥
Aarti Gau Pyare Tumako Rijhau।
He Giridhar Teri Aarti Gau।
Shri Shyamsundar Teri Aarti Gau।
Shri Banke Bihari Teri Aarti Gau॥
Meaning: यह आरती वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को समर्पित है। इसमें भगवान कृष्ण के त्रिभंगी रूप, मनमोहक छवि और भक्तों को आकर्षित करने वाली दिव्य कृपा का भाव है।
4. यशोदा मैया की आरती / बाल कृष्ण आरती
Hindi: आरती बाल कृष्ण की, यशोदा के लाल की।
English: Aarti Bal Krishna Ki, Yashoda Ke Lal Ki.
Meaning: यह आरती बाल गोपाल के वात्सल्य रूप को समर्पित है। इसमें माता यशोदा के लाल, माखन चोर और नंदलाला कृष्ण की प्रेमपूर्ण पूजा की जाती है।
5. राधा कृष्ण आरती
Hindi: आरती राधा कृष्ण की, जय राधा माधव की।
English: Aarti Radha Krishna Ki, Jai Radha Madhav Ki.
Meaning: यह आरती राधा रानी और भगवान कृष्ण के दिव्य प्रेम, भक्ति, माधुर्य और वृंदावन लीला का स्मरण कराती है।
6. गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो
Hindi: गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो।
English: Govind Bolo Hari Gopal Bolo.
Meaning: यह भजन और आरती शैली का लोकप्रिय नाम-स्मरण है। इसमें भक्त भगवान कृष्ण के गोविंद, गोपाल और हरि नामों का प्रेमपूर्वक कीर्तन करता है।
7. ओम जय जगदीश हरे
Hindi: ओम जय जगदीश हरे।
English: Om Jai Jagdish Hare.
Meaning: यह विष्णु भगवान की प्रसिद्ध आरती है, जिसे कई भक्त श्रीकृष्ण की पूजा में भी गाते हैं क्योंकि श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। इसका भाव भगवान की शरण, कृपा और दुख हरने की प्रार्थना है।
2. What is Krishna Aarti?
Krishna Aarti भगवान श्रीकृष्ण की पूजा में किया जाने वाला दीप अर्पण और स्तुति गायन है। इसमें भक्त भगवान के सामने दीपक या कपूर जलाकर आरती करता है और कृष्ण जी की महिमा, रूप, लीला और कृपा का गान करता है।
आरती का उद्देश्य केवल गीत गाना नहीं है। यह भगवान के प्रति सम्मान, प्रेम और समर्पण व्यक्त करने का तरीका है। जैसे किसी प्रिय अतिथि का स्वागत आदर से किया जाता है, वैसे ही आरती में भगवान का स्वागत और पूजन किया जाता है।
Krishna Aarti घर और मंदिर दोनों जगह की जा सकती है। मंदिरों में यह अधिक विधिपूर्वक होती है, जबकि घर में सरल भाव से की जा सकती है। आरती के समय घंटी बजाना, शंख ध्वनि करना, दीप दिखाना, फूल चढ़ाना और प्रसाद अर्पित करना आम पूजा परंपरा का हिस्सा है।
श्रीकृष्ण की आरती अलग-अलग रूपों में होती है। कुछ भक्त बाल गोपाल की आरती करते हैं, कुछ राधा-कृष्ण की, कुछ बांके बिहारी जी की, और कुछ भगवान वासुदेव या गोविंद के रूप में कृष्ण की आराधना करते हैं।
सरल भाषा में Krishna Aarti वह भक्तिमय पूजा है जिसमें भक्त दीप, ध्वनि, सुगंध, फूल और भजन के माध्यम से भगवान कृष्ण को प्रेमपूर्वक नमन करता है।
3. Krishna Aarti का अर्थ
Krishna Aarti का अर्थ है भगवान श्रीकृष्ण की ज्योति, भक्ति और स्तुति के माध्यम से पूजा करना। आरती में जलाया गया दीपक ज्ञान, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। जब दीपक भगवान के सामने घुमाया जाता है, तो भक्त यह भाव रखता है कि मेरे जीवन का अंधकार दूर हो और श्रीकृष्ण की कृपा से मन में प्रकाश आए।
“आरती कुंज बिहारी की” जैसी प्रसिद्ध आरती में श्रीकृष्ण को कुंज बिहारी, गिरिधर, मुरारी, नंदलाला और बनमाली के रूप में स्मरण किया जाता है। “कुंज बिहारी” का अर्थ है वृंदावन के कुंजों में विहार करने वाले भगवान। “गिरिधर” का अर्थ है गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले। “मुरारी” का अर्थ है दुष्टता का नाश करने वाले भगवान।
Krishna Aarti का भाव यह है कि भक्त भगवान कृष्ण के सौंदर्य, बांसुरी, वैजयंती माला, राधा जी के साथ उनकी दिव्य छवि, वृंदावन की पवित्रता और भक्तों पर उनकी कृपा का स्मरण करता है।
आरती का गहरा अर्थ केवल पूजा विधि नहीं है, बल्कि यह अपने मन को भगवान की ओर मोड़ने की साधना है। इसमें भक्त अपने अहंकार, दुख, भय और चिंता को भगवान के चरणों में रखकर उनसे प्रेम, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करता है।
4. Krishna Aarti कब और कैसे करें?
Krishna Aarti किसी भी दिन श्रद्धा से की जा सकती है। फिर भी सुबह की पूजा, शाम की संध्या आरती, जन्माष्टमी, एकादशी, पूर्णिमा, गुरुवार, बुधवार, गीता जयंती, राधाष्टमी और रोहिणी नक्षत्र में Krishna Aarti विशेष शुभ मानी जाती है।
घर में कृष्ण आरती करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करें। भगवान श्रीकृष्ण, बाल गोपाल, राधा-कृष्ण या बांके बिहारी जी की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर रखें। यदि लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं, तो उन्हें स्नान, वस्त्र, तिलक और भोग अर्पण के बाद आरती करें।
आरती से पहले दीपक जलाएं। भगवान कृष्ण को तुलसी पत्र, माखन, मिश्री, दूध, फल, पंचामृत, पीले फूल या सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। तुलसी भगवान कृष्ण को अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए कृष्ण पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है।
आरती करते समय दीपक को भगवान के चरणों, नाभि, मुख और संपूर्ण स्वरूप के सामने प्रेमपूर्वक घुमाएं। घंटी बजाएं और परिवार के साथ आरती गाएं। यदि पूरी आरती याद न हो, तो “आरती कुंज बिहारी की” या “जय कन्हैया लाल की” जैसी सरल आरती से शुरुआत कर सकते हैं।
वास्तु दृष्टि से पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान शांत, स्वच्छ और सुगंधित हो तो मन जल्दी एकाग्र होता है। आरती के बाद भगवान को प्रणाम करें, प्रसाद बांटें और कुछ क्षण शांत बैठकर कृष्ण नाम का स्मरण करें।
आरती में सबसे महत्वपूर्ण चीज विधि की जटिलता नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और साफ मन है। यदि भक्त सच्चे भाव से भगवान कृष्ण को याद करता है, तो सरल आरती भी अत्यंत पवित्र मानी जाती है।
5. Krishna Aarti के लाभ
Krishna Aarti का नियमित गायन मन में भक्ति, प्रेम और शांति का भाव बढ़ाता है। जब घर में श्रीकृष्ण की आरती होती है, तो वातावरण भक्तिमय, शांत और सकारात्मक बनता है। दीपक की लौ, घंटी की ध्वनि, तुलसी की सुगंध और कृष्ण नाम का उच्चारण मन को नकारात्मक विचारों से हटाकर दिव्यता की ओर ले जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार कृष्ण आरती से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है, जीवन की बाधाओं में आंतरिक बल मिलता है और परिवार में प्रेम व मधुरता बढ़ती है। श्रीकृष्ण का स्वरूप आनंद, करुणा और संबंधों की सुंदरता से जुड़ा है, इसलिए उनकी आरती परिवार को भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली साधना मानी जाती है।
Krishna Aarti बच्चों के लिए भी बहुत शुभ मानी जाती है, क्योंकि बाल गोपाल की पूजा से घर में वात्सल्य, संस्कार और प्रेम का भाव बढ़ता है। संध्या समय परिवार के साथ आरती करने से बच्चों में पूजा, भक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति सहज रुचि पैदा होती है।
मानसिक दृष्टि से आरती तनाव कम करने, मन को स्थिर करने और दिनभर की थकान के बाद शांति देने में सहायक हो सकती है। जब व्यक्ति भगवान कृष्ण के नाम, रूप और लीला का स्मरण करता है, तो उसके भीतर आशा, विश्वास और सकारात्मकता बढ़ती है।
आध्यात्मिक रूप से Krishna Aarti भक्त को नाम-स्मरण, सेवा, शरणागति और प्रेम भक्ति से जोड़ती है। यह साधना बताती है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए केवल बड़े अनुष्ठान जरूरी नहीं हैं; सच्चे मन से की गई छोटी आरती भी जीवन में प्रकाश, प्रेम और शांति ला सकती है।
FAQs in English
1. What is Krishna Aarti?
Krishna Aarti is a devotional worship ceremony dedicated to Lord Krishna. In this ritual, devotees offer a lighted lamp, incense, flowers, sound, and prayers while singing Krishna’s aarti. It is performed to honor Lord Krishna and express love, gratitude, and surrender.
2. What is the meaning of Krishna Aarti?
The meaning of Krishna Aarti is to worship Lord Krishna through light, devotion, and praise. The lamp represents divine light and wisdom. Popular aartis like “Aarti Kunj Bihari Ki” describe Krishna’s Vrindavan form, flute, beauty, Radha-Krishna love, and His Giridhar Krishna Murari swaroop.
3. When should Krishna Aarti be performed?
Krishna Aarti can be performed daily in the morning or evening. Auspicious occasions include Janmashtami, Ekadashi, Purnima, Gita Jayanti, Radhashtami, Thursday, Wednesday, and Rohini Nakshatra. Many devotees perform Krishna Aarti after completing daily puja or before offering prasad.
4. How to perform Krishna Aarti at home?
To perform Krishna Aarti at home, clean the puja place, place an idol or picture of Lord Krishna, Bal Gopal, Radha Krishna, or Banke Bihari, light a diya, offer tulsi leaves, flowers, butter, mishri, fruits, or milk, and sing a Krishna aarti while moving the lamp before the deity with devotion.
5. What are the benefits of Krishna Aarti?
The benefits of Krishna Aarti include mental peace, devotion, positive energy at home, family harmony, emotional balance, and a stronger connection with Lord Krishna. Devotees believe regular aarti brings divine grace, removes negativity, and creates a peaceful spiritual atmosphere.
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LORD KRISHNA | श्री कृष्ण
श्री गोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्
श्री कृष्ण चालीसा
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संतान गोपाल मंत्र
कृष्ण मंत्र
श्री कृष्ण आरती
श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2026
