Krishna Chalisa in Hindi & English Lyrics PDF | श्री कृष्ण चालीसा
Krishna Chalisa: श्री कृष्ण चालीसा का अर्थ, पाठ विधि और लाभ
1. Introduction – Krishna Chalisa का परिचय
Krishna Chalisa भगवान श्रीकृष्ण की महिमा, लीलाओं, करुणा और भक्तवत्सल स्वरूप का सुंदर भक्तिमय पाठ है। “चालीसा” शब्द का संबंध सामान्य रूप से चालीस चौपाइयों या चालीस पदों वाली स्तुति से माना जाता है। श्री कृष्ण चालीसा में भक्त भगवान कृष्ण के बाल रूप, मुरलीधर स्वरूप, गोवर्धनधारी रूप, कंस-विनाशक रूप और भक्तों के रक्षक रूप का स्मरण करता है।
भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म में प्रेम, ज्ञान, नीति, धर्म, आनंद और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। वे एक ओर बाल गोपाल हैं, जो माखन चुराकर भक्तों के मन को मोह लेते हैं, और दूसरी ओर गीता उपदेशक हैं, जो जीवन के सबसे गहरे प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इसलिए Krishna Chalisa का पाठ केवल धार्मिक स्तुति नहीं है, बल्कि यह जीवन में प्रेम, साहस, विवेक और ईश्वर विश्वास को बढ़ाने वाली साधना भी है।
श्री कृष्ण चालीसा का पाठ घरों, मंदिरों, जन्माष्टमी, एकादशी, संध्या पूजा, गुरुवार, बुधवार और व्यक्तिगत भक्ति साधना में श्रद्धा से किया जाता है। जो भक्त नियमित रूप से कृष्ण चालीसा पढ़ते हैं, वे इसे मन की शांति, परिवार की सुख-शांति, बाधाओं से राहत और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त करने का सरल मार्ग मानते हैं।
2. What is Krishna Chalisa?
Krishna Chalisa भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक भक्तिमय स्तुति है, जिसमें उनके नाम, रूप, गुण और दिव्य लीलाओं का वर्णन किया जाता है। यह पाठ भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम और समर्पण व्यक्त करने का आसान माध्यम है।
इस चालीसा में भगवान कृष्ण को कई रूपों में याद किया जाता है, जैसे नंदलाला, यशोदा के लाल, मुरलीधर, गोविंद, गोपाल, गिरिधर, माधव, वासुदेव और मुरारी। हर नाम श्रीकृष्ण के किसी विशेष गुण या लीला से जुड़ा है। उदाहरण के लिए “गिरिधर” नाम गोवर्धन पर्वत उठाने वाली लीला को दर्शाता है, जबकि “मुरलीधर” नाम भगवान कृष्ण के मधुर बांसुरी वादन और प्रेममय स्वरूप को प्रकट करता है।
Krishna Chalisa को भक्त आमतौर पर पूजा के समय पढ़ते हैं। इसे अकेले भी पढ़ा जा सकता है और परिवार के साथ भी। यदि किसी को पूरा पाठ याद नहीं है, तो वह पुस्तक, मोबाइल या प्रिंटेड पाठ देखकर भी श्रद्धा से पढ़ सकता है।
सरल भाषा में कहा जाए तो Krishna Chalisa भगवान श्रीकृष्ण की कृपा, प्रेम, सुरक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए किया जाने वाला भक्तिपूर्ण पाठ है। यह भक्त को भगवान के नाम और लीलाओं से जोड़ता है और मन में भक्ति का भाव जगाता है।
Krishna Chalisa in Hindi Lyrics
श्री कृष्ण चालीसा
॥ दोहा ॥
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम ।
अरुण अधर जनु बिम्बा फल, नयन कमल अभिराम ॥
पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पिताम्बर शुभ साज ।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज ॥
॥ चौपाई ॥
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन । जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे । जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥
जय नट-नागर नाग नथैया । कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो । आओ दीनन कष्ट निवारो ॥
वंशी मधुर अधर धरी तेरी । होवे पूर्ण मनोरथ मेरो ॥
आओ हरि पुनि माखन चाखो । आज लाज भारत की राखो ॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे । मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥
रंजित राजिव नयन विशाला । मोर मुकुट वैजयंती माला ॥
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे l कटि किंकणी काछन काछे ॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे । छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले । आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥
करि पय पान, पुतनहि तारयो । अका बका कागासुर मारयो ॥
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला । भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला ॥
सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई । मसूर धार वारि वर्षाई ॥
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो । गोवर्धन नखधारि बचायो ॥
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई । मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो । कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें । चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥
करि गोपिन संग रास विलासा । सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥
केतिक महा असुर संहारयो । कंसहि केस पकड़ि दै मारयो ॥
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई । उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥
महि से मृतक छहों सुत लायो । मातु देवकी शोक मिटायो ॥
भौमासुर मुर दैत्य संहारी । लाये षट दश सहसकुमारी ॥
दै भिन्हीं तृण चीर सहारा । जरासिंधु राक्षस कहं मारा ॥
असुर बकासुर आदिक मारयो । भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥
दीन सुदामा के दुःख टारयो । तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे । दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥
लखि प्रेम की महिमा भारी । ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥
भारत के पारथ रथ हांके । लिए चक्र कर नहिं बल ताके ॥
निज गीता के ज्ञान सुनाये । भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥
मीरा थी ऐसी मतवाली । विष पी गई बजाकर ताली ॥
राना भेजा सांप पिटारी । शालिग्राम बने बनवारी ॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो । उर ते संशय सकल मिटायो ॥
तब शत निन्दा करी तत्काला । जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई । दीनानाथ लाज अब जाई ॥
तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला । बढ़े चीर भै अरि मुँह काला ॥
अस नाथ के नाथ कन्हैया । डूबत भंवर बचावत नैया ॥
सुन्दरदास आस उर धारी । दयादृष्टि कीजै बनवारी ॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो । क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥
खोलो पट अब दर्शन दीजै । बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥
॥ दोहा ॥
यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि ।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि ॥
3. Krishna Chalisa का अर्थ
Krishna Chalisa का मूल अर्थ है भगवान श्रीकृष्ण की चालीस पदों में की गई स्तुति। इसमें भक्त भगवान कृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं, वृंदावन की मधुरता, राधा-कृष्ण प्रेम, गोवर्धन लीला, दुष्टों के नाश और भक्तों की रक्षा का स्मरण करता है।
इस पाठ का भाव यह है कि भगवान कृष्ण केवल एक देवता नहीं, बल्कि भक्तों के मित्र, रक्षक, मार्गदर्शक और जीवन के सारथी हैं। वे अर्जुन को गीता का ज्ञान देते हैं, गोकुलवासियों की रक्षा करते हैं, अधर्म का नाश करते हैं और भक्तों को प्रेम व धर्म का मार्ग दिखाते हैं।
Krishna Chalisa में श्रीकृष्ण का रूप बहुत सुंदर और भावपूर्ण तरीके से याद किया जाता है — सिर पर मोर मुकुट, हाथ में बांसुरी, गले में वैजयंती माला, मुख पर मधुर मुस्कान और हृदय में करुणा। यह वर्णन भक्त के मन में भगवान की छवि को स्थिर करता है और ध्यान को सरल बनाता है।
इसका गहरा अर्थ यह भी है कि जब जीवन में भ्रम, भय, दुख या कठिनाई हो, तब भक्त भगवान कृष्ण की शरण लेकर आंतरिक शक्ति प्राप्त कर सकता है। चालीसा का पाठ मन को यह विश्वास देता है कि भगवान धर्म, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने वाले भक्तों का साथ देते हैं।
4. Krishna Chalisa कब और कैसे करें?
Krishna Chalisa का पाठ किसी भी दिन श्रद्धा से किया जा सकता है। फिर भी सुबह स्नान के बाद, शाम की संध्या पूजा, एकादशी, जन्माष्टमी, पूर्णिमा, गुरुवार, बुधवार, गीता जयंती और रोहिणी नक्षत्र में इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है। यदि कोई भक्त नियमित पाठ करना चाहता है, तो सुबह या शाम का एक निश्चित समय चुनना अच्छा रहता है।
पाठ शुरू करने से पहले पूजा स्थान को साफ करें। भगवान श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण, बाल गोपाल या लड्डू गोपाल की मूर्ति या चित्र के सामने आसन लगाकर बैठें। दीपक जलाएं और तुलसी पत्र, पीले फूल, सफेद फूल, मिश्री, माखन, दूध, फल या सात्त्विक भोग अर्पित करें। भगवान कृष्ण को तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है, इसलिए पूजा में तुलसी पत्र का विशेष महत्व है।
इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “हरे कृष्ण हरे कृष्ण” मंत्र का कुछ बार स्मरण करें। फिर Krishna Chalisa का पाठ शांत मन से करें। पाठ के दौरान शब्दों को केवल जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय भाव और अर्थ को समझने की कोशिश करें। यदि संस्कृत या अवधी/ब्रज भाषा के शब्द कठिन लगें, तो पहले उनका सरल अर्थ पढ़ना उपयोगी होता है।
वास्तु और पूजा दृष्टि से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। पाठ के बाद भगवान कृष्ण को प्रणाम करें, प्रसाद अर्पित करें और परिवार के साथ बांटें। यदि किसी विशेष इच्छा या समस्या के लिए पाठ कर रहे हैं, तो अंत में श्रीकृष्ण से सद्बुद्धि, धैर्य, सही मार्ग और मंगल परिणाम की प्रार्थना करें।
Krishna Chalisa का पाठ अकेले, परिवार के साथ या मंदिर में सामूहिक रूप से भी किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात है शुद्ध भावना, श्रद्धा और नियमितता।
5. Krishna Chalisa के लाभ
Krishna Chalisa का नियमित पाठ मन में भक्ति, शांति और सकारात्मकता बढ़ाने वाला माना जाता है। जब भक्त भगवान कृष्ण की लीलाओं, नामों और गुणों का स्मरण करता है, तो उसका ध्यान सांसारिक तनाव से हटकर ईश्वर प्रेम की ओर जाता है। इससे मन धीरे-धीरे शांत और स्थिर होता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार Krishna Chalisa के पाठ से जीवन की बाधाओं में आंतरिक साहस मिलता है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और भगवान कृष्ण की कृपा का अनुभव होता है। श्रीकृष्ण का स्वरूप धर्म, नीति, प्रेम और बुद्धि से जुड़ा है, इसलिए उनका स्मरण व्यक्ति को सही निर्णय लेने और कठिन समय में संतुलित रहने की प्रेरणा देता है।
परिवार में नियमित रूप से Krishna Chalisa का पाठ करने से घर का वातावरण भक्तिमय और सकारात्मक बनता है। बच्चों के सामने कृष्ण चालीसा, आरती या भजन का पाठ करने से उनमें भारतीय संस्कृति, भक्ति और अच्छे संस्कारों के प्रति सहज रुचि विकसित हो सकती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से Krishna Chalisa भक्त को नाम-स्मरण, लीला-चिंतन और शरणागति से जोड़ती है। इसमें भगवान कृष्ण को रक्षक, पालनकर्ता और मार्गदर्शक के रूप में याद किया जाता है, जिससे भक्त के भीतर विश्वास और समर्पण का भाव बढ़ता है।
Krishna Chalisa को मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, भक्ति, आत्मबल, नकारात्मकता से दूरी और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उपयोगी माना जाता है। यह पाठ जीवन की समस्याओं को तुरंत समाप्त करने का दावा नहीं करता, बल्कि भक्त को भीतर से मजबूत, शांत और ईश्वर से जुड़ा हुआ बनाता है।
Krishna Chalisa in EnglishLyrics
|| Doha ||
Banshi shobhit kar madhur, nil jalaj tanu shyam.
Arun adhar janu bimba phal, nayan kamal abhiram.
Puran Indu Arvind mukh, pitambar suchi saj.
Jai Man Mohan Madan chhavi,Krishiaachandra maharaj.
Jai jai Yadunandan jag vandan. Jai Vasudev Devki nandan.
Jai Yashoda sut Nandadulare. Jai prabhu bhaktan ke rakhvare.
Jai Natanagar Nag nathaiya. Krishna Kanhaiya dhenu charaiya.
Puni nakh par Prabhu Girivar dharo. Ao dinan-kasht nivaro.
Banshi madhur adhar-dhari tero. Hove puran manorath mero.
Ao Harli puni makhan chakho. Aaj laj bhaktan ki rakho.
Gol kapol chibuk arunare. Mridu muskan mohini dare.
Rajit Rajiv nayan vishala. Mor mukut vaijantimala.
Kundal shravan pit pat achhe. Kati kinkini kachhani kachhe.
Nil jalaj sundar tan sohai. Chhavi lakhi sur nar muni man mohai.
Mastak tilak alak ghunghrale. Ao Shyam bansuriya vale.
Kari pai pan putanahin taryo. Aka-baka kagasur maryo.
Madhuvan jalat agin jab jvala. Bhe shital lakhatahin Nandaiala.
Jab surpati Brij chadhyo risai. Musar dhar bari barsai.
Lakhat lakhat Bnij chahat bahayo. Govardhan nakh dhari bachayo.
Lakhi Yashuda man bhram adhikai. Mukh mahan chaudah bhuvan dikhai.
Dusht Kansa ati udham machayo. Koti kamal kahan phul mangayo.
Nathi kaiiyahin ko tum linhyo. Charan chinh dai nirbhai kinhyo.
Kari gopin sang ras bilasa. Sab ki pur kari abhilasa.
Aganit maha asur sanharyo. Kansahi kesh pakadi dai maryo.
Matu pita ki bandi chhudayo. Ugrasen kahan raj dilayo.
Him se mritak chhahon sut layo. Matu Devakl shok mitayo.
Narkasur mur khal sanhari. Lae shatdash sahas kumari.
Dai Bhimahin tran chiri isara. Jarasindh rakshas kahan mara.
Asur vrikasur adik maryau. Nij bhaktan kar kasht nivaryau.
Din Sudama ke dukh taryo. Tandul tin muthi mukh daryo.
Duryodhan ke tyagyo meva. Kiyo Vidur ghar shak kaleva.
Lakhi prem tuhin mahima bhari. Naumi Shyam danan hitkari.
Bharat men parath-rath hanke. Liye chakra kar nahin bat thake.
Nij Gita ke gyan sunaye. Bhaktan hridai sudha sarsaye.
Mira aisi matvali. vish pi gayi bajakar tali.
Rana bheja saap pitari. Shaligram bane banvari.
Nij maya tum vidhihin dikhayo. Urte sanshai sakal mitayo.
Tav shatninda kari tatkala, jivan mukt bhayo shishupala.
Jabahin Draupadi ter lagai. Dinanath laj ab jai.
Turatahih basan bane Nandlala. Badhay chir bhe ari munh kala.
As anath ke nath Kanhaiya. Dubat bhanvar bachavahi naiya.
“Sundardas” Aas ur Dharri. Daya Drishti Keejay Banwari.
Nath sakai un kumati nivaro. chhamon vegi apradh hamaro.
Kholo pat ab darshan dijai. Bolo Krishna Kanhaiya ki jai.
|| Doha ||
Yeh chalisa Krishna ka, path krai ur dhari,
asht siddhi nay niddhi phal, lahai padarath chari
FAQs in English
1. What is Krishna Chalisa?
Krishna Chalisa is a devotional hymn dedicated to Lord Krishna. It usually praises Krishna’s names, divine form, childhood leelas, Govardhan leela, protection of devotees, and victory over evil. Devotees recite it to express love, surrender, and faith in Lord Krishna.
2. What is the meaning of Krishna Chalisa?
The meaning of Krishna Chalisa is the praise of Lord Krishna through devotional verses. It remembers Krishna as Bal Gopal, Murlidhar, Govind, Gopal, Giridhar, Madhav, Vasudev, and the divine guide of devotees. Its deeper meaning is to surrender worries and seek Krishna’s grace, wisdom, and protection.
3. When should Krishna Chalisa be recited?
Krishna Chalisa can be recited daily with devotion. Auspicious times include morning after bathing, evening prayer, Ekadashi, Janmashtami, Purnima, Thursday, Wednesday, Gita Jayanti, and Rohini Nakshatra. Regular recitation with a peaceful mind is considered more important than the exact timing.
4. How to recite Krishna Chalisa at home?
To recite Krishna Chalisa at home, clean the puja place, sit before an idol or picture of Lord Krishna, Radha Krishna, or Bal Gopal, light a diya, offer tulsi leaves, flowers, butter, mishri, fruits, or milk, chant a Krishna mantra, and then read Krishna Chalisa with devotion and focus.
5. What are the benefits of Krishna Chalisa?
The benefits of Krishna Chalisa include mental peace, devotion, positive energy, family harmony, spiritual growth, emotional strength, and a deeper connection with Lord Krishna. Devotees believe regular recitation helps reduce negativity, strengthens faith, and brings Krishna’s blessings.
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