Brihaspati Aarti in Hindi & English Lyrics PDF | बृहस्पति आरती
बृहस्पति आरती: गुरु ग्रह की कृपा, ज्योतिषीय महत्व और पूजा लाभ
बृहस्पति आरती का महत्व
बृहस्पति आरती देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए की जाने वाली एक सरल और भक्तिपूर्ण पूजा है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को गुरु, ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह, धन, भाग्य और शुभ मार्गदर्शन का कारक माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन बृहस्पति आरती करना बहुत शुभ माना जाता है।
बृहस्पति को देवताओं का गुरु कहा जाता है। गुरु का अर्थ होता है वह जो अज्ञान के अंधकार को दूर करके ज्ञान का प्रकाश देता है। जब व्यक्ति श्रद्धा से बृहस्पति आरती करता है, तो वह अपने जीवन में सद्बुद्धि, धैर्य, सही निर्णय और गुरु कृपा की प्रार्थना करता है।
Brihaspati Vrat Aarti In Hindi Lyrics
बृहस्पति आरती
ॐ जय वृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा
छिन छिन भोग लगाऊ फल मेवा
तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी
जगत्पिता जगदीश्वर तुम सबके स्वामी
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता
तन मन धन अर्पणकर जो जन शरण पड़े
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े
दीं दयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी
पाप दोष सब हर्ता, भावः बंधन हार
सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो
विषय विकार मिटाओ संतान सुखकारी
जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे
जेस्तानंद बंद सो सो निश्चय पावे
सब बोलो विष्णु भगवान की जय
सब बोलो बृहस्पति भगवान की जये
Brihaspati Vrat Aarti In English Lyrics
Jai Brihaspati Deva, Jai Brihaspati Deva।
Chhin-Chhin Bhog Lagaun, Kadali Phal Meva॥
Tum Purna Paramatma, Tum Antaryami।
Jagat Pita Jagdishwar, Tum Sabke Swami॥
Charanamrit Nij Nirmal, Sab Patak Harta।
Sakal Manorath Dayak, Kripa Karo Bharta॥
Tan, Man, Dhan Arpan Kar, Jo Jan Sharan Pade।
Prabhu Prakat Tab Hokar, Aakar Dwar Khade॥
Deendayal Dayanidhi, Bhaktan Hitkari।
Paap Dosh Sab Har Lo, Jai Jai Giridhari॥
Sakal Manorath Dayak, Sab Sanshay Haro।
Brihaspati Dev Dayalu, Hum Par Kripa Karo॥
बृहस्पति ग्रह का ज्योतिषीय परिचय
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह शुभ और सात्विक ग्रहों में गिना जाता है। यह व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, शिक्षा, संस्कार, धार्मिक विचार, विवाह, संतान सुख, धन, सम्मान और भाग्य से जुड़ा होता है। कुंडली में बृहस्पति मजबूत हो तो व्यक्ति को जीवन में सही सलाह, अच्छे अवसर, सम्मान और परिवार का सहयोग मिलता है।
बृहस्पति धनु और मीन राशि का स्वामी माना जाता है। कर्क राशि में यह उच्च का और मकर राशि में नीच का माना जाता है। यदि कुंडली में बृहस्पति कमजोर या पीड़ित हो, तो व्यक्ति को पढ़ाई, विवाह, संतान, धन, निर्णय क्षमता और मानसिक स्थिरता से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं।
ऐसी स्थिति में बृहस्पति मंत्र, बृहस्पति आरती, गुरुवार व्रत, पीली वस्तुओं का दान और भगवान विष्णु की पूजा शुभ मानी जाती है।
बृहस्पति आरती कब करनी चाहिए?
बृहस्पति आरती के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें। संभव हो तो पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान विष्णु, देवगुरु बृहस्पति या अपने आराध्य देव का ध्यान करें।
आरती सुबह पूजा के समय या शाम को दीपक जलाकर की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति गुरुवार का व्रत करता है, तो व्रत कथा पढ़ने या सुनने के बाद बृहस्पति आरती करना शुभ माना जाता है।
बृहस्पति आरती कैसे करें?
बृहस्पति आरती करने से पहले पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, गुड़, पीला फल या बेसन से बनी मिठाई अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें।
मंत्र जाप के बाद श्रद्धा से बृहस्पति आरती गाएं या पढ़ें। आरती के बाद भगवान से ज्ञान, सद्बुद्धि, परिवार की शांति, शिक्षा में सफलता, विवाह सुख, संतान सुख और जीवन में सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करें।
आरती करते समय मन शांत, वाणी साफ और भाव सच्चा होना चाहिए। पूजा में दिखावे से अधिक महत्व श्रद्धा और सात्विक आचरण का होता है।
बृहस्पति आरती के लाभ
बृहस्पति आरती करने से जीवन में सकारात्मकता, शांति और शुभ विचार बढ़ने की मान्यता है। यह आरती गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने, ज्ञान बढ़ाने, सही निर्णय लेने और मानसिक स्थिरता के लिए शुभ मानी जाती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से बृहस्पति आरती विवाह में आ रही बाधा, शिक्षा में रुकावट, संतान संबंधी चिंता, धन रुकावट, सम्मान की कमी और भाग्य की कमजोरी जैसी स्थितियों में सहायक मानी जाती है। यह आरती विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो पढ़ाई, अध्यापन, सलाह, आध्यात्मिक कार्य, न्याय, लेखन या ज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं।
बृहस्पति आरती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह व्यक्ति के भीतर गुरु तत्व को मजबूत करती है। गुरु तत्व का अर्थ है — ज्ञान, विवेक, धर्म, धैर्य, विनम्रता और सही मार्ग। जब व्यक्ति नियमित रूप से श्रद्धा से आरती करता है और अपने व्यवहार में भी सत्य, सेवा और सम्मान रखता है, तो जीवन में शुभता का अनुभव बढ़ सकता है।
बृहस्पति आरती में क्या अर्पित करें?
बृहस्पति देव को पीला रंग प्रिय माना जाता है। इसलिए पूजा में पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, गुड़, पीले फल, बेसन के लड्डू या पीली मिठाई अर्पित की जा सकती है। गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।
दान हमेशा जरूरतमंद व्यक्ति, विद्यार्थी, ब्राह्मण, गुरुजन या धार्मिक स्थान पर श्रद्धा से करना चाहिए। दान का उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि सेवा और विनम्रता होना चाहिए।
बृहस्पति आरती में किन बातों का ध्यान रखें?
बृहस्पति आरती करते समय मन में श्रद्धा और विश्वास रखें। गुरुवार के दिन झूठ बोलने, कटु वाणी, गुरु या बुजुर्गों का अपमान, नशा, गलत आचरण और अहंकार से बचना चाहिए।
बृहस्पति ग्रह धर्म और ज्ञान का प्रतीक है। इसलिए केवल आरती करने से अधिक जरूरी है कि व्यक्ति अपने जीवन में सदाचार, सत्य, सेवा और विनम्रता को अपनाए। यही वास्तविक गुरु कृपा का मार्ग माना जाता है।
निष्कर्ष
बृहस्पति आरती एक सरल, पवित्र और शुभ पूजा है, जो देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए की जाती है। गुरुवार के दिन श्रद्धा से बृहस्पति आरती करने से ज्ञान, सद्बुद्धि, विवाह सुख, संतान सुख, धन, सम्मान और भाग्य वृद्धि की कामना की जाती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से यह आरती गुरु ग्रह को शांत और मजबूत करने का सात्विक उपाय मानी जाती है। यदि इसे मंत्र जाप, दान, गुरु सम्मान और अच्छे कर्मों के साथ किया जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतुलन बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
FAQs
1. What is the astrological importance of Brihaspati Aarti?
Brihaspati Aarti is associated with Jupiter or Guru in Vedic astrology. It is performed to seek blessings for wisdom, education, marriage, children, prosperity, good fortune and spiritual guidance.
2. Which day is best for Brihaspati Aarti?
Thursday is considered the best day for Brihaspati Aarti because it is traditionally connected with Guru or Jupiter. The Aarti can be performed in the morning or evening after lighting a diya.
3. Can Brihaspati Aarti help strengthen Jupiter?
Brihaspati Aarti is traditionally believed to strengthen the positive influence of Jupiter when performed with devotion, discipline, charity and good conduct. For specific remedies, a complete horoscope analysis is recommended.
4. What should be offered during Brihaspati Aarti?
Yellow flowers, turmeric, chana dal, jaggery, yellow fruits, besan sweets and a ghee lamp are commonly offered during Brihaspati Aarti. Yellow donations on Thursday are also considered auspicious.
5. Who should perform Brihaspati Aarti?
People seeking wisdom, education success, marriage harmony, children’s blessings, financial stability, respect, spiritual growth or relief from weak Jupiter effects may perform Brihaspati Aarti with faith and purity.
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