Brihaspati Kavacham in Hindi & English Lyrics PDF | बृहस्पति कवच
बृहस्पति कवच: अर्थ, पाठ विधि, समय और लाभ
Introduction
बृहस्पति कवच भगवान बृहस्पति, जिन्हें देवगुरु और गुरु ग्रह के रूप में जाना जाता है, की कृपा प्राप्त करने के लिए पढ़ा जाने वाला एक पवित्र स्तोत्र है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, सद्बुद्धि, गुरु-कृपा, संतान सुख, विवाह, धन, मान-सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में गुरु कमजोर, पीड़ित या अशुभ प्रभाव में हो, वे श्रद्धा और शुद्ध भावना से बृहस्पति कवच का पाठ करते हैं।
“कवच” का अर्थ होता है सुरक्षा देने वाला आध्यात्मिक आवरण। जैसे शरीर की रक्षा के लिए कवच होता है, वैसे ही मंत्र और स्तोत्र का कवच मन, बुद्धि, विचार और कर्मों को सकारात्मक दिशा देने में सहायक माना जाता है। बृहस्पति कवच का पाठ व्यक्ति के अंदर धैर्य, विवेक, सही निर्णय लेने की क्षमता और धार्मिक भाव को मजबूत करने वाला माना गया है।
बृहस्पति कवच क्या है?
बृहस्पति कवच एक देवगुरु बृहस्पति को समर्पित रक्षा स्तोत्र है, जिसमें भगवान बृहस्पति से शरीर, मन, बुद्धि, वाणी और जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों की रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह कवच विशेष रूप से गुरु ग्रह की शांति, गुरु कृपा, ज्ञान वृद्धि और जीवन में शुभता बढ़ाने के लिए पढ़ा जाता है।
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति शुभ ग्रहों में प्रमुख माने जाते हैं। वे व्यक्ति के ज्ञान, धर्म, शिक्षा, गुरु, संतान, विवाह, भाग्य, धन और सदाचार से जुड़े होते हैं। जब जीवन में बार-बार निर्णय गलत हो रहे हों, शिक्षा में बाधा आ रही हो, विवाह में देरी हो, सम्मान की कमी महसूस हो या मन में अस्थिरता हो, तब बृहस्पति कवच का नियमित पाठ आध्यात्मिक रूप से उपयोगी माना जाता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि बृहस्पति कवच कोई तांत्रिक या डर आधारित उपाय नहीं है। यह श्रद्धा, अनुशासन, सात्विकता और गुरु तत्व को मजबूत करने का आध्यात्मिक अभ्यास है।
Brihaspati Kavacham in Hindi Lyrics
बृहस्पति कवच
अस्य श्रीबृहस्पति कवचमहा मन्त्रस्य, ईश्वर ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, बृहस्पतिर्देवता,
गं बीजं, श्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकम्,
बृहस्पति प्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥
ध्यानम्
अभीष्टफलदं वन्दे सर्वज्ञं सुरपूजितम् ।
अक्षमालाधरं शान्तं प्रणमामि बृहस्पतिम् ॥
अथ बृहस्पति कवचम्
बृहस्पतिः शिरः पातु ललाटं पातु मे गुरुः ।
कर्णौ सुरगुरुः पातु नेत्रे मेभीष्टदायकः ॥ 1 ॥
जिह्वां पातु सुराचार्यः नासं मे वेदपारगः ।
मुखं मे पातु सर्वज्ञः कण्ठं मे देवतागुरुः ॥ 2 ॥
भुजा वङ्गीरसः पातु करौ पातु शुभप्रदः ।
स्तनौ मे पातु वागीशः कुक्षिं मे शुभलक्षणः ॥ 3 ॥
नाभिं देवगुरुः पातु मध्यं पातु सुखप्रदः ।
कटिं पातु जगद्वन्द्यः ऊरू मे पातु वाक्पतिः ॥ 4 ॥
जानुजङ्घे सुराचार्यः पादौ विश्वात्मकः सदा ।
अन्यानि यानि चाङ्गानि रक्षेन्मे सर्वतो गुरुः ॥ 5 ॥
फलशृतिः
इत्येतत्कवचं दिव्यं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः ।
सर्वान् कामानवाप्नोति सर्वत्र विजयी भवेत् ॥
॥ इति श्री बृहस्पति कवचम् ॥
बृहस्पति कवच का हिंदी अर्थ
Shlok 1
Hindi Meaning:
भगवान बृहस्पति मेरे सिर की रक्षा करें और गुरु मेरे ललाट की रक्षा करें। देवताओं के गुरु मेरे कानों की रक्षा करें और मनोकामना पूर्ण करने वाले बृहस्पति मेरी आंखों की रक्षा करें।
Shlok 2
Hindi Meaning:
देवताओं के आचार्य मेरी जिह्वा की रक्षा करें और वेदों के ज्ञाता मेरी नाक की रक्षा करें। सर्वज्ञ भगवान बृहस्पति मेरे मुख की रक्षा करें और देवताओं के गुरु मेरे कंठ की रक्षा करें।
Shlok 3
Hindi Meaning:
अंगिरस ऋषि के पुत्र बृहस्पति मेरी भुजाओं की रक्षा करें और शुभ फल देने वाले मेरे हाथों की रक्षा करें। वाणी के स्वामी मेरे वक्षस्थल की रक्षा करें और शुभ लक्षणों वाले बृहस्पति मेरे उदर की रक्षा करें।
Shlok 4
Hindi Meaning:
देवगुरु बृहस्पति मेरी नाभि की रक्षा करें और सुख प्रदान करने वाले मेरे मध्य भाग की रक्षा करें। जगत में वंदनीय बृहस्पति मेरी कमर की रक्षा करें और वाणी के स्वामी मेरी जांघों की रक्षा करें।
Shlok 5
Hindi Meaning:
देवताओं के आचार्य मेरे घुटनों और पिंडलियों की रक्षा करें। विश्वात्मक बृहस्पति सदा मेरे पैरों की रक्षा करें। मेरे शरीर के अन्य सभी अंगों की भी गुरु हर दिशा से रक्षा करें।
बृहस्पति कवच कब और कैसे पढ़ें?
बृहस्पति कवच पढ़ने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि गुरुवार भगवान बृहस्पति और गुरु ग्रह से जुड़ा दिन है। इसे सुबह स्नान के बाद स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनकर पढ़ना अच्छा माना जाता है। पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु, देवगुरु बृहस्पति या अपने आराध्य गुरु का स्मरण करें।
पाठ शुरू करने से पहले दीपक जलाएं, पीले फूल, चने की दाल, हल्दी, गुड़ या पीले फल अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद मन को शांत करके “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करें और फिर बृहस्पति कवच का पाठ करें। यदि पूरा कवच रोज पढ़ना संभव न हो, तो हर गुरुवार श्रद्धा से इसका पाठ किया जा सकता है।
जिन लोगों की कुंडली में गुरु दोष, गुरु चांडाल योग, विवाह में देरी, संतान संबंधी चिंता या शिक्षा में बाधा जैसी स्थिति हो, वे किसी योग्य ज्योतिषी या गुरुजन की सलाह से नियमित पाठ कर सकते हैं। पाठ करते समय उच्चारण शुद्ध रखने का प्रयास करें, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा, साफ मन और सात्विक आचरण।
बृहस्पति कवच का पाठ करते समय मांसाहार, नशा, झूठ, अपमानजनक वाणी और गलत आचरण से बचना चाहिए। गुरु ग्रह ज्ञान और धर्म का प्रतीक है, इसलिए इसके उपाय तभी अधिक प्रभावी माने जाते हैं जब व्यक्ति अपने व्यवहार में भी ईमानदारी, विनम्रता और सेवा भाव लाता है।
बृहस्पति कवच के लाभ
बृहस्पति कवच का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यह व्यक्ति के जीवन में गुरु तत्व को मजबूत करता है। गुरु तत्व का अर्थ है ज्ञान, सही मार्गदर्शन, धैर्य, नैतिकता और शुभ निर्णय क्षमता। नियमित पाठ से मन में सकारात्मकता, विचारों में स्पष्टता और जीवन के प्रति विश्वास बढ़ सकता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बृहस्पति कवच गुरु ग्रह की अशुभता को शांत करने, शिक्षा में एकाग्रता बढ़ाने, विवाह संबंधी बाधाओं को कम करने, संतान सुख की कामना, धन और सम्मान में वृद्धि तथा पारिवारिक सौहार्द के लिए उपयोगी माना जाता है। यह कवच उन लोगों के लिए भी शुभ माना जाता है जो पढ़ाई, अध्यापन, धार्मिक कार्य, सलाहकार कार्य, न्याय, प्रशासन, लेखन या ज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं।
बृहस्पति कवच मानसिक स्तर पर भी सहायक माना जाता है, क्योंकि इसका पाठ व्यक्ति को संयमित, धैर्यवान और आशावादी बनाता है। जब मन में भ्रम, डर या निर्णयहीनता हो, तब गुरु की आराधना व्यक्ति को स्थिरता और सही दिशा देने में मदद कर सकती है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह कवच साधक को गुरु कृपा, धर्म पालन, सद्बुद्धि और ईश्वर भक्ति से जोड़ता है।
हालांकि बृहस्पति कवच के लाभ श्रद्धा और परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं। इसे जीवन की समस्याओं का तुरंत समाधान मानने के बजाय नियमित साधना, अच्छे कर्म, सही सलाह और सकारात्मक जीवनशैली के साथ अपनाना चाहिए।
Brihaspati Kavacham in English Lyrics
Shlok 1
English Translation:
May Lord Brihaspati protect my head,
May Guru protect my forehead.
May the teacher of the gods protect my ears,
And may the giver of desired blessings protect my eyes.
Shlok 2
English Translation:
May the divine teacher protect my tongue,
May the knower of the Vedas protect my nose.
May the all-knowing one protect my face,
And may the guru of the gods protect my throat.
Shlok 3
English Translation:
May Angirasa protect my arms,
May the giver of auspiciousness protect my hands.
May the lord of speech protect my chest,
And may the one with auspicious qualities protect my abdomen.
Shlok 4
English Translation:
May the guru of the gods protect my navel,
May the giver of happiness protect my middle body.
May the one worshipped by the world protect my waist,
And may the lord of wisdom and speech protect my thighs.
Shlok 5
English Translation:
May the teacher of the gods protect my knees and legs,
May the universal divine presence always protect my feet.
And may Guru protect all my other body parts
From every direction and in every way.
FAQs
1. What is Brihaspati Kavach?
Brihaspati Kavach is a sacred protective hymn dedicated to Lord Brihaspati, also known as Guru or Jupiter in Vedic astrology. It is recited to seek wisdom, guidance, spiritual protection, good fortune and blessings of the Guru principle.
2. What is the meaning of Brihaspati Kavach?
The meaning of Brihaspati Kavach is a spiritual shield of Lord Brihaspati. Through this hymn, the devotee prays for protection of the body, mind, speech, thoughts and life path. It also represents the protection of wisdom, discipline, faith and righteous action.
3. When should Brihaspati Kavach be recited?
Brihaspati Kavach is best recited on Thursday morning after bath and prayer, as Thursday is traditionally associated with Guru or Brihaspati. It can also be recited daily by devotees who wish to strengthen Jupiter-related blessings with discipline and devotion.
4. How to recite Brihaspati Kavach properly?
To recite Brihaspati Kavach, sit in a clean place, wear clean or yellow clothes if possible, light a diya, offer yellow flowers or simple sattvic offerings, chant “Om Brim Brihaspataye Namah” and then read the Kavach with a calm and devotional mind.
5. What are the benefits of Brihaspati Kavach?
Brihaspati Kavach is believed to support wisdom, education, marriage harmony, child-related blessings, prosperity, respect, spiritual growth and clarity in decision-making. It is also considered helpful for reducing the negative effects of a weak or afflicted Jupiter in astrology.
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