Brihaspati Chalisa In Hindi & English Lyrics PDF | श्री बृहस्पति चालीसा
श्री बृहस्पति चालीसा: अर्थ, पाठ विधि, समय और लाभ
1. Introduction
श्री बृहस्पति चालीसा भगवान बृहस्पति, जिन्हें देवगुरु, गुरु ग्रह और ज्ञान के स्वामी के रूप में जाना जाता है, की स्तुति में पढ़ी जाने वाली एक पवित्र भक्तिपूर्ण रचना है। वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को शिक्षा, ज्ञान, धर्म, विवाह, संतान सुख, धन, भाग्य, सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। इसलिए बृहस्पति चालीसा का पाठ गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त करने और जीवन में शुभता बढ़ाने के लिए किया जाता है।
“चालीसा” का अर्थ होता है चालीस चौपाइयों या पदों से बनी स्तुति। जैसे हनुमान चालीसा में भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन होता है, वैसे ही बृहस्पति चालीसा में देवगुरु बृहस्पति की महिमा, कृपा, ज्ञान और भक्तों पर उनके आशीर्वाद का वर्णन मिलता है।
यह चालीसा केवल ग्रह शांति का पाठ नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर गुरु तत्व को मजबूत करने की साधना भी है। गुरु तत्व का अर्थ है — सही ज्ञान, सही मार्गदर्शन, धैर्य, धर्म, सद्बुद्धि और शुभ निर्णय क्षमता।
2. श्री बृहस्पति चालीसा क्या है?
श्री बृहस्पति चालीसा देवगुरु बृहस्पति को समर्पित एक सरल और प्रभावशाली स्तुति है। इसमें भक्त भगवान बृहस्पति से ज्ञान, धन, सुख, विवाह, संतान, सम्मान, भाग्य और जीवन में सही दिशा की प्रार्थना करता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से बृहस्पति को नवग्रहों में अत्यंत शुभ ग्रह माना जाता है। यह व्यक्ति के जीवन में गुरु, शिक्षा, धार्मिक सोच, उच्च ज्ञान, शास्त्र, सलाह, न्याय, संतान और विवाह से संबंधित फल देता है। जब जन्म कुंडली में बृहस्पति शुभ स्थिति में होता है, तो व्यक्ति को जीवन में योग्य गुरु, अच्छी शिक्षा, परिवार का सहयोग, सामाजिक सम्मान और सही निर्णय क्षमता मिलती है।
लेकिन जब गुरु ग्रह कमजोर, नीच, अस्त या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो व्यक्ति को शिक्षा में बाधा, विवाह में देरी, संतान संबंधी चिंता, धन रुकावट, गलत सलाह, निर्णयहीनता या आत्मविश्वास की कमी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में श्रद्धा से श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करना एक सात्विक और सरल उपाय माना जाता है।
Brihaspati Chalisa In Hindi Lyrics
श्री बृहस्पति चालीसा
दोहा
प्रन्वाऊ प्रथम गुरु चरण, बुद्धि ज्ञान गुन खान।
श्री गणेश शारद सहित, बसों ह्रदय में आन॥
अज्ञानी मति मंद मैं, हैं गुरुस्वामी सुजान।
दोषों से मैं भरा हुआ हूँ तुम हो कृपा निधान॥
चौपाई
जय नारायण जय निखिलेशवर। विश्व प्रसिद्ध अखिल तंत्रेश्वर॥
यंत्र-मंत्र विज्ञानं के ज्ञाता।भारत भू के प्रेम प्रेनता॥
जब जब हुई धरम की हानि। सिद्धाश्रम ने पठए ज्ञानी॥
सच्चिदानंद गुरु के प्यारे। सिद्धाश्रम से आप पधारे॥
उच्चकोटि के ऋषि-मुनि स्वेच्छा। ओय करन धरम की रक्षा॥
अबकी बार आपकी बारी। त्राहि त्राहि है धरा पुकारी॥
मरुन्धर प्रान्त खरंटिया ग्रामा। मुल्तानचंद पिता कर नामा॥
शेषशायी सपने में आये। माता को दर्शन दिखलाए॥
रुपादेवि मातु अति धार्मिक। जनम भयो शुभ इक्कीस तारीख॥
जन्म दिवस तिथि शुभ साधक की। पूजा करते आराधक की॥
जन्म वृतन्त सुनायए नवीना। मंत्र नारायण नाम करि दीना॥
नाम नारायण भव भय हारी। सिद्ध योगी मानव तन धारी॥
ऋषिवर ब्रह्म तत्व से ऊर्जित। आत्म स्वरुप गुरु गोरवान्वित॥
एक बार संग सखा भवन में। करि स्नान लगे चिन्तन में॥
चिन्तन करत समाधि लागी। सुध-बुध हीन भये अनुरागी॥
पूर्ण करि संसार की रीती। शंकर जैसे बने गृहस्थी॥
अदभुत संगम प्रभु माया का। अवलोकन है विधि छाया का॥
युग-युग से भव बंधन रीती। जंहा नारायण वाही भगवती॥
सांसारिक मन हुए अति ग्लानी। तब हिमगिरी गमन की ठानी॥
अठारह वर्ष हिमालय घूमे। सर्व सिद्धिया गुरु पग चूमें॥
त्याग अटल सिद्धाश्रम आसन। करम भूमि आए नारायण॥
धरा गगन ब्रह्मण में गूंजी। जय गुरुदेव साधना पूंजी॥
सर्व धर्महित शिविर पुरोधा। कर्मक्षेत्र के अतुलित योधा॥
ह्रदय विशाल शास्त्र भण्डारा। भारत का भौतिक उजियारा॥
एक सौ छप्पन ग्रन्थ रचयिता। सीधी साधक विश्व विजेता॥
प्रिय लेखक प्रिय गूढ़ प्रवक्ता। भूत-भविष्य के आप विधाता॥
आयुर्वेद ज्योतिष के सागर। षोडश कला युक्त परमेश्वर॥
रतन पारखी विघन हरंता। सन्यासी अनन्यतम संता॥
अदभुत चमत्कार दिखलाया। पारद का शिवलिंग बनाया॥
वेद पुराण शास्त्र सब गाते। पारेश्वर दुर्लभ कहलाते॥
पूजा कर नित ध्यान लगावे। वो नर सिद्धाश्रम में जावे॥
चारो वेद कंठ में धारे। पूजनीय जन-जन के प्यारे॥
चिन्तन करत मंत्र जब गाएं। विश्वामित्र वशिष्ठ बुलाएं॥
मंत्र नमो नारायण सांचा। ध्यानत भागत भूत-पिशाचा॥
प्रातः कल करहि निखिलायन। मन प्रसन्न नित तेजस्वी तन॥
निर्मल मन से जो भी ध्यावे। रिद्धि सिद्धि सुख-सम्पति पावे॥
पथ करही नित जो चालीसा। शांति प्रदान करहि योगिसा॥
अष्टोत्तर शत पाठ करत जो। सर्व सिद्धिया पावत जन सो॥
श्री गुरु चरण की धारा। सिद्धाश्रम साधक परिवारा॥
जय-जय-जय आनंद के स्वामी। बारम्बार नमामी नमामी॥
Brihaspati Chalisa In English Lyrics
Shri Brihaspati Chalisa
Doha
Pranvau Pratham Guru Charan, Buddhi Gyan Gun Khan।
Shri Ganesh Sharad Sahit, Bason Hriday Mein Aan॥
Agyani Mati Mand Main, Hain Guru Swami Sujan।
Doshon Se Main Bhara Hua Hoon, Tum Ho Kripa Nidhan॥
Chaupai
Jai Narayan Jai Nikhileshwar।
Vishwa Prasiddh Akhil Tantreshwar॥
Yantra-Mantra Vigyan Ke Gyata।
Bharat Bhu Ke Prem Prenata॥
Jab Jab Hui Dharam Ki Hani।
Siddhashram Ne Pathaye Gyani॥
Sachchidanand Guru Ke Pyare।
Siddhashram Se Aap Padhare॥
Uchch Koti Ke Rishi-Muni Svechchha।
Oy Karan Dharam Ki Raksha॥
Abki Baar Aapki Baari।
Trahi Trahi Hai Dhara Pukari॥
Marundhar Prant Kharantiya Grama।
Multanchand Pita Kar Nama॥
Sheshshayi Sapne Mein Aaye।
Mata Ko Darshan Dikhlaye॥
Rupadevi Matu Ati Dharmik।
Janam Bhayo Shubh Ikkis Tareekh॥
Janm Diwas Tithi Shubh Sadhak Ki।
Pooja Karte Aradhak Ki॥
Janm Vrittant Sunaye Naveena।
Mantra Narayan Naam Kari Deena॥
Naam Narayan Bhav Bhay Haari।
Siddh Yogi Manav Tan Dhaari॥
Rishivar Brahm Tatva Se Urjit।
Atma Swaroop Guru Goravanvit॥
Ek Baar Sang Sakha Bhavan Mein।
Kari Snan Lage Chintan Mein॥
Chintan Karat Samadhi Laagi।
Sudh-Budh Heen Bhaye Anuragi॥
Purn Kari Sansar Ki Reeti।
Shankar Jaise Bane Grihasthi॥
Adbhut Sangam Prabhu Maya Ka।
Avalokan Hai Vidhi Chhaya Ka॥
Yug-Yug Se Bhav Bandhan Reeti।
Jahan Narayan Vahi Bhagwati॥
Sansarik Man Hue Ati Glani।
Tab Himgiri Gaman Ki Thani॥
Atharah Varsh Himalaya Ghoome।
Sarv Siddhiya Guru Pag Choome॥
Tyag Atal Siddhashram Aasan।
Karam Bhoomi Aaye Narayan॥
Dhara Gagan Brahman Mein Goonji।
Jai Gurudev Sadhana Poonji॥
Sarv Dharam Hit Shivir Purodha।
Karmakshetra Ke Atulit Yodha॥
Hriday Vishal Shastra Bhandara।
Bharat Ka Bhautik Ujiyara॥
Ek Sau Chhappan Granth Rachayita।
Siddhi Sadhak Vishwa Vijeta॥
Priya Lekhak Priya Ghoodh Pravakta।
Bhoot-Bhavishya Ke Aap Vidhata॥
Ayurved Jyotish Ke Sagar।
Shodash Kala Yukt Parameshwar॥
Ratan Parakhi Vighan Haranta।
Sanyasi Ananyatam Santa॥
Adbhut Chamatkar Dikhlaya।
Parad Ka Shivling Banaya॥
Ved Puran Shastra Sab Gaate।
Pareshwar Durlabh Kahlate॥
Pooja Kar Nit Dhyan Lagave।
Vo Nar Siddhashram Mein Jave॥
Charo Ved Kanth Mein Dhaare।
Poojaniya Jan-Jan Ke Pyare॥
Chintan Karat Mantra Jab Gaayen।
Vishwamitra Vashishth Bulayen॥
Mantra Namo Narayan Sancha।
Dhyanat Bhagat Bhoot-Pishacha॥
Pratah Kal Karahi Nikhilayan।
Man Prasann Nit Tejasvi Tan॥
Nirmal Man Se Jo Bhi Dhyave।
Riddhi Siddhi Sukh-Sampatti Pave॥
Path Karahi Nit Jo Chalisa।
Shanti Pradan Karahi Yogisa॥
Ashtottar Shat Path Karat Jo।
Sarv Siddhiya Pavat Jan So॥
Shri Guru Charan Ki Dhara।
Siddhashram Sadhak Parivara॥
Jai-Jai-Jai Anand Ke Swami।
Barambar Namami Namami॥
3. श्री बृहस्पति चालीसा का अर्थ
श्री बृहस्पति चालीसा का सरल अर्थ है — देवगुरु बृहस्पति की महिमा का स्मरण करते हुए उनसे कृपा, ज्ञान और सुरक्षा की प्रार्थना करना। इसमें भक्त बृहस्पति देव को देवताओं के गुरु, ज्ञान के दाता, धर्म के रक्षक और शुभ फल देने वाले देवता के रूप में प्रणाम करता है।
इस चालीसा का गहरा भाव यह है कि मनुष्य को केवल धन या बाहरी सफलता नहीं, बल्कि सद्बुद्धि और सही मार्गदर्शन भी चाहिए। बृहस्पति चालीसा व्यक्ति को याद दिलाती है कि जीवन में गुरु का स्थान सबसे ऊंचा है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान को दूर करके ज्ञान का प्रकाश देता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से बृहस्पति चालीसा का पाठ मन को शांत करता है और विचारों को सकारात्मक दिशा देता है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह गुरु ग्रह की शुभ ऊर्जा को मजबूत करने, अशुभ प्रभाव को शांत करने और जीवन में धर्म, ज्ञान, परिवारिक सुख तथा भाग्य वृद्धि की कामना के लिए पढ़ी जाती है।
4. श्री बृहस्पति चालीसा कब और कैसे पढ़ें?
श्री बृहस्पति चालीसा पढ़ने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है। गुरुवार को गुरु ग्रह और भगवान बृहस्पति से संबंधित दिन माना जाता है। सुबह स्नान करके स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ करें।
पूजा में भगवान विष्णु, देवगुरु बृहस्पति या अपने आराध्य गुरु का ध्यान करें। दीपक जलाएं और पीले फूल, हल्दी, चने की दाल, गुड़, पीला फल या बेसन से बनी मिठाई अर्पित करें। इसके बाद “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करके श्री बृहस्पति चालीसा का पाठ करें।
यदि कोई व्यक्ति गुरुवार का व्रत रखता है, तो व्रत कथा सुनने या पढ़ने के बाद बृहस्पति चालीसा पढ़ना शुभ माना जाता है। जिन लोगों को शिक्षा, विवाह, संतान, धन, गुरु दोष या निर्णय क्षमता से जुड़ी समस्या हो, वे लगातार 7, 11, 16 या 21 गुरुवार तक श्रद्धा से इसका पाठ कर सकते हैं।
पाठ करते समय मन शांत रखें, उच्चारण साफ रखने का प्रयास करें और भगवान बृहस्पति से ज्ञान, सद्बुद्धि और सही मार्गदर्शन की प्रार्थना करें। यदि संस्कृत या अवधी/ब्रज भाषा के शब्द कठिन लगें, तो भी भय न रखें। शुद्ध भाव और नियमितता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
5. श्री बृहस्पति चालीसा के लाभ
श्री बृहस्पति चालीसा के पाठ से व्यक्ति के जीवन में गुरु तत्व मजबूत होने की मान्यता है। यह पाठ ज्ञान, धैर्य, सद्बुद्धि, धार्मिक भाव, सही निर्णय क्षमता और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से बृहस्पति चालीसा का पाठ कमजोर या पीड़ित गुरु ग्रह की शांति के लिए शुभ माना जाता है। यह शिक्षा में सफलता, विवाह में आ रही बाधाओं को कम करने, संतान सुख की कामना, धन और सम्मान की वृद्धि, पारिवारिक शांति, गुरु कृपा और भाग्य वृद्धि के लिए पढ़ा जाता है।
जो लोग पढ़ाई, अध्यापन, सलाहकार कार्य, धार्मिक कार्य, लेखन, न्याय, प्रशासन या ज्ञान से जुड़े क्षेत्रों में आगे बढ़ना चाहते हैं, उनके लिए बृहस्पति चालीसा का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह व्यक्ति को अहंकार से दूर करके विनम्रता, सेवा भाव और सत्य मार्ग की ओर प्रेरित करता है।
बृहस्पति चालीसा का वास्तविक लाभ तभी माना जाता है जब व्यक्ति पाठ के साथ-साथ अपने आचरण में भी सुधार करे। गुरुजनों का सम्मान, बड़ों की सेवा, सत्य वाणी, दान, धार्मिक विचार और सात्विक जीवनशैली गुरु ग्रह की कृपा को स्थिर करने में सहायक माने जाते हैं।
श्री बृहस्पति चालीसा पाठ में ध्यान रखने योग्य बातें
बृहस्पति चालीसा का पाठ करते समय झूठ, कटु वाणी, गुरु या माता-पिता का अपमान, नशा, छल-कपट और अहंकार से बचना चाहिए। गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं का दान, विद्यार्थियों की सहायता, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।
बृहस्पति ज्ञान और धर्म का ग्रह है। इसलिए इस चालीसा का पाठ केवल मनोकामना पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने के लिए करना चाहिए। जब व्यक्ति श्रद्धा, संयम और अच्छे कर्मों के साथ पाठ करता है, तब इसका आध्यात्मिक प्रभाव अधिक गहरा माना जाता है।
निष्कर्ष
श्री बृहस्पति चालीसा देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने का एक सरल, सात्विक और भक्तिपूर्ण मार्ग है। यह चालीसा व्यक्ति को ज्ञान, सद्बुद्धि, धर्म, विनम्रता, परिवारिक सुख और शुभ निर्णय की ओर प्रेरित करती है।
गुरुवार के दिन श्रद्धा से बृहस्पति चालीसा का पाठ करने से गुरु ग्रह की शांति, शिक्षा में सफलता, विवाह सुख, संतान सुख, धन, सम्मान और भाग्य वृद्धि की कामना की जाती है। इसे नियमितता, साफ मन और अच्छे आचरण के साथ पढ़ना सबसे अधिक शुभ माना जाता है।
FAQs
1. What is Shri Brihaspati Chalisa?
Shri Brihaspati Chalisa is a devotional hymn dedicated to Lord Brihaspati, also known as Guru or Jupiter in Vedic astrology. It is recited to seek wisdom, guidance, prosperity, marriage harmony, children’s blessings and spiritual growth.
2. What is the meaning of Brihaspati Chalisa?
The meaning of Brihaspati Chalisa is to praise Lord Brihaspati and pray for his blessings. It represents devotion to the Guru principle, which brings knowledge, discipline, good judgment, dharma and positive direction in life.
3. When should Brihaspati Chalisa be recited?
Brihaspati Chalisa is best recited on Thursday morning after bath and prayer, as Thursday is associated with Guru or Jupiter. It can also be recited daily by devotees who want to strengthen Jupiter’s blessings.
4. How should I read Brihaspati Chalisa?
Sit in a clean place, light a diya, offer yellow flowers or sattvic items, chant “Om Brim Brihaspataye Namah” and then read Brihaspati Chalisa with devotion. Keeping the mind calm and the intention pure is very important.
5. What are the benefits of reading Brihaspati Chalisa?
Reading Brihaspati Chalisa is believed to support wisdom, education, marriage, children’s blessings, prosperity, respect, spiritual growth and relief from weak or afflicted Jupiter effects. It also helps develop patience, faith and positive thinking.
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